दवा क्या है?
दवा एक रसायन है जो शरीर के काम को बदलता है। कुछ दवाएँ रोग ठीक करती हैं, कुछ दर्द रोकती हैं, कुछ रोग से बचाती हैं, और कुछ वह चीज़ देती हैं जो शरीर में कम है (जैसे इंसुलिन)।
दवाएँ पौधों से, फफूँद जैसे जीवों से या कारखाने में बनती हैं।
दवा की क्रिया
कोशिकाओं की सतह पर छोटे खाँचे होते हैं, जिन्हें रिसेप्टर कहते हैं। दवा का अणु इनमें चाबी की तरह बैठता है। बैठते ही कोशिका को कुछ करने या रुकने का संदेश मिलता है।
कुछ दवाएँ रिसेप्टर के बिना काम करती हैं। जैसे एंटैसिड पेट के ज़्यादा अम्ल को बेअसर करता है। एंटीबायोटिक कीटाणुओं पर काम करती है, हमारी कोशिकाओं पर नहीं।
दवा और शरीर की प्रतिक्रिया
शरीर की प्रतिक्रिया मात्रा (खुराक) पर निर्भर करती है। कम मात्रा: कम असर। सही मात्रा: चाहा हुआ असर। बहुत ज़्यादा: नुकसान।
एक ही दवा सब पर एक जैसा असर नहीं करती। उम्र, वज़न, दूसरी बीमारी, जिगर-गुर्दे की ताकत और दूसरी दवाएँ असर बदलती हैं। बच्चों और बुज़ुर्गों को अक्सर कम मात्रा चाहिए।
प्रतिक्रियाएँ ये हो सकती हैं: मुख्य प्रभाव (जो चाहिए), दुष्प्रभाव (अनचाहा अतिरिक्त असर), एलर्जी (दाने, सूजन, साँस की दिक्कत) और सहनशीलता (उतने असर के लिए ज़्यादा दवा चाहिए)।
दवा-चिकित्सा
दवा-चिकित्सा यानी दवा से इलाज। नर्स "पाँच सही" का पालन करती है: सही मरीज़, सही दवा, सही मात्रा, सही तरीका (मुँह, इंजेक्शन, त्वचा, इनहेलर) और सही समय।
खुराक के बाद खून में दवा का स्तर बढ़ता है, फिर जिगर और गुर्दे उसे निकालते हैं तो घटता है। इसलिए स्तर लाभ वाले हिस्से में रखने के लिए खुराक तय समय पर दोहराई जाती है।
नर्स खुराक के बाद देखती है: असर हुआ? दाने, उल्टी या नींद तो नहीं? समस्या तुरंत बताती है और रिकॉर्ड रखती है।
दवा से स्वास्थ्य को नुकसान
- दुष्प्रभाव और विषाक्तता: ज़्यादा मात्रा या ग़लत दवा से।
- एलर्जी: दवा से शरीर की रक्षा-प्रणाली ग़लत प्रतिक्रिया करती है, कभी गंभीर।
- प्रतिरोध: अधूरे एंटीबायोटिक कोर्स से कीटाणु बच जाते हैं और मज़बूत हो जाते हैं।
- निर्भरता (लत): शरीर या मन दवा के बिना नहीं रह पाता। जैसे कुछ दर्द-निवारक, नींद की गोलियाँ, शराब और तंबाकू।
- दुरुपयोग: बिना ज़रूरत दवा लेना या किसी और की दवा लेना।
सुरक्षित आदतें: दवा केवल पर्ची के अनुसार लें, किसी से बाँटें नहीं, बच्चों से दूर रखें, एक्सपायरी तारीख़ देखें।
करके देखिए
3D खोलिए। चरण 2 में मात्रा का स्लाइडर 0 से 10 तक चलाइए और बोलिए कि किन संख्याओं पर मीटर नीला, हरा और लाल है। घर पर: दवा की पट्टी उठाइए। उस पर मात्रा, कितनी बार लेनी है और एक्सपायरी तारीख़ ढूँढिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुख्य शब्द: दवा = शरीर का काम बदलने वाला रसायन; रिसेप्टर = कोशिका पर खाँचा; मात्रा = दी गई दवा की मात्रा
- पाँच सही: मरीज़, दवा, मात्रा, तरीका, समय
- कम मात्रा = असर नहीं; सही = लाभ; बहुत ज़्यादा = नुकसान
- दुष्प्रभाव = अनचाहा अतिरिक्त असर; एलर्जी = शरीर की रक्षा का दवा पर उलटा असर
हल किए गए उदाहरण
1. डॉक्टर कहते हैं "हर 8 घंटे में एक गोली"। एक दिन में कितनी गोलियाँ?
24 घंटे ÷ 8 घंटे = 3 खुराकें, यानी दिन में 3 गोलियाँ।
2. बच्चे को सुबह 8 बजे बुखार की दवा दी गई। अगली खुराक 6 घंटे बाद है। किस समय?
सुबह 8 + 6 घंटे = दोपहर 2 बजे।
3. बच्चा ठीक लगे तो भी एंटीबायोटिक का कोर्स पूरा क्यों करना चाहिए?
ठीक लगने का मतलब है ज़्यादातर कीटाणु मर गए। कुछ मज़बूत कीटाणु बचे हो सकते हैं। दवा रोकने पर वे बढ़ते हैं और प्रतिरोधी हो जाते हैं, तब अगला इलाज फ़ेल हो सकता है।
आम गलतियाँ
- दोगुनी मात्रा से दोगुनी जल्दी ठीक होने की सोच। इससे ख़तरा बढ़ता है, गति नहीं।
- बुखार उतरते ही एंटीबायोटिक बंद कर देना।
- पुरानी या दोस्त की दवा नई बीमारी में लेना।
- "प्राकृतिक" को हमेशा सुरक्षित मानना। कोई भी तेज़ दवा, प्राकृतिक हो या बनी हुई, नुकसान कर सकती है।