दवा का लक्ष्य क्या है?
हमारा शरीर प्रोटीन नाम के अणुओं से चलता है। कई प्रोटीन में एक छोटा गड्ढा होता है। जब कोई अणु इस गड्ढे में बैठता है, तो प्रोटीन चालू या बंद हो जाता है।
दवा ऐसा अणु है जो जान-बूझकर ऐसे गड्ढे में बैठता है। इस गड्ढे को लक्ष्य (target) कहते हैं। यही ताला-चाबी का विचार है: दवा का आकार गड्ढे के आकार से मिलना चाहिए। मिले तो दवा असर करती है, नहीं तो कुछ नहीं होता।
प्राकृतिक दवाएँ: पौधों और प्रकृति से मदद
हज़ारों साल से लोग बीमारी में पौधे, मिट्टी और फफूँद आज़माते रहे। सीधे प्रकृति से ली गई दवा प्राकृतिक दवा है। उदाहरण: विलो की छाल (दर्द), सिनकोना की छाल से कुनैन (मलेरिया), और फफूँद से पेनिसिलिन (संक्रमण)।
प्राकृतिक दवाएँ अक्सर काम करती हैं, पर उनकी सीमाएँ हैं। पौधे में दवा की मात्रा हर पत्ते में अलग होती है। उनके दुष्प्रभाव हो सकते हैं। कुछ बहुत कम मिलती हैं।
कृत्रिम दवाएँ: प्रयोगशाला में सुधार
रसायनज्ञ पहले सक्रिय अणु खोजते हैं, यानी वह हिस्सा जो काम करता है। फिर वे उसे प्रयोगशाला में बना सकते हैं, या उसका छोटा हिस्सा बदल सकते हैं। इंसान की बनाई या बदली दवा कृत्रिम (संश्लेषित) दवा है।
बदलते क्यों हैं? ताकि गड्ढे में बेहतर बैठे, दुष्प्रभाव कम हों, दाम घटे, या शरीर में ज़्यादा देर टिके। एस्पिरिन एक पौधे के अणु का सुधरा रूप है। सबसे अच्छा अणु जान-बूझकर बनाना औषधि डिज़ाइन कहलाता है। आज कंप्यूटर असली रसायन से पहले हज़ारों आकार जाँच लेते हैं।
नैनो दवा: छोटे डिलीवरी ट्रक
नैनोमीटर एक मीटर का अरबवाँ हिस्सा है। नैनो दवा में लगभग 10 से 200 नैनोमीटर के कण होते हैं। इन छोटे कैप्सूलों में दवा भरी जा सकती है।
ये बीमार कोशिकाओं तक दवा पहुँचाते हैं और स्वस्थ कोशिकाओं को छोड़ देते हैं। इससे कम मात्रा लगती है और दुष्प्रभाव घटते हैं। कुछ mRNA टीके भी ऐसे ही छोटे चर्बी के बुलबुले इस्तेमाल करते हैं। नैनो दवा नई है, और वैज्ञानिक उसकी सुरक्षा ध्यान से जाँचते हैं।
करके देखिए
3D में: हर अणु का बटन दबाइए और गिनिए कितनी घुंडियाँ मिलती हैं। पहले अंदाज़ा लगाइए कि कौन सबसे अच्छा रहेगा, फिर जाँचिए।
घर पर: काग़ज़ की 3 चाबियाँ काटिए जिनमें अलग-अलग उभार हों। गत्ते से 3 खाँचों वाला ताला बनाइए। कौन-सी चाबी तीनों में बैठती है? रसायनज्ञ ऐसे ही सोचता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुख्य शब्द: लक्ष्य = वह गड्ढा जिसमें दवा बैठती है
- प्राकृतिक दवा = पौधों, फफूँद या जानवरों से
- कृत्रिम दवा = प्रयोगशाला में बनी या बदली
- नैनो दवा = 10 से 200 nm के कण में ले जाई गई दवा
- 1 nm = 10⁻⁹ m
हल किए गए उदाहरण
1. एक दवा की घुंडियाँ लाल, नीली, स्लेटी हैं। गड्ढे को लाल, नीली, पीली चाहिए। कितनी मिलीं? क्या दवा अच्छा काम करेगी?
लाल लाल से और नीली नीली से मिली, यानी 3 में से 2। स्लेटी पीली से नहीं मिली। वह कमज़ोर बैठती है, इसलिए असर कम होगा।
2. रसायनज्ञ ऊपर की दवा में स्लेटी को पीला कर देता है। अब मेल कितना है?
अब 3 में से 3 घुंडियाँ गड्ढे से मिलती हैं। सुधरी कृत्रिम दवा अच्छी बैठती है और बेहतर काम करती है।
3. एक नैनो कैप्सूल 100 nm चौड़ा है। यह कितने मीटर हुआ?
1 nm = 10⁻⁹ m। तो 100 nm = 100 × 10⁻⁹ m = 10⁻⁷ m।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि प्राकृतिक हमेशा सुरक्षित होता है। कई पौधों के ज़हर भी प्राकृतिक हैं।
- यह सोचना कि कृत्रिम हमेशा बुरा होता है। ज़्यादातर आधुनिक दवाएँ कृत्रिम हैं और ध्यान से जाँची जाती हैं।
- यह सोचना कि दवा शरीर में कहीं भी काम करती है। वह वहीं करती है जहाँ उसका लक्ष्य है।
- नैनो दवा को नई दवा समझ लेना। दवा पुरानी हो सकती है; नैनो हिस्सा तो वाहक है।