मशीनें क्यों?
फावड़े वाला आदमी एक करछे में लगभग 0.01 m³ मिट्टी हटाता है। एक्सकेवेटर की बाल्टी में लगभग 1 m³ आता है, यानी एक करछा लगभग 100 फावड़ों के बराबर। मशीनें ऐसे भार भी उठाती हैं जो आदमी नहीं उठा सकता। वे समय, मेहनत और लागत बचाती हैं और चोटें घटाती हैं, अगर सुरक्षित तरीक़े से चलाई जाएँ।
मिट्टी हटाने वाली मशीनें
- एक्सकेवेटर: घूमने वाले ढाँचे पर भुजा और बाल्टी। गड्ढे, खाइयाँ खोदता और ट्रक भरता है।
- बुलडोज़र: चेन-पट्टों पर आगे चौड़ा ब्लेड। मिट्टी धकेलता और ज़मीन समतल करता है।
- लोडर: पहियों वाली मशीन जिसके आगे बाल्टी होती है। ढीला सामान उठाकर लादता है।
- डंप ट्रक: मिट्टी, पत्थर और मलबा ढोकर उलट देता है।
- ग्रेडर: पहियों के बीच लंबा ब्लेड जो चिकनी, ढलानदार सतह बनाता है।
- रोलर (कॉम्पैक्टर): भारी ड्रम जो मिट्टी, गिट्टी या डामर को दबाकर घना और मज़बूत बनाता है।
उठाने वाली मशीनें
टावर क्रेन में ऊँचा खंभा और लंबी क्षैतिज भुजा (जिब) होती है। मोबाइल क्रेन साइट पर चलकर आती है। होइस्ट सामान या लोगों को इमारत पर उठाता है। भार जितना खंभे से दूर होता है क्रेन उतना कम उठा पाती है, क्योंकि भार गुणा उसकी दूरी (घुमाने वाला असर) एक सीमा से कम रहना चाहिए। इसलिए क्षमता = सीमा ÷ त्रिज्या। चालक लोड चार्ट, प्रशिक्षित इशारा देने वाले और नीचे ख़ाली जगह का इस्तेमाल करते हैं।
कंक्रीट की मशीनें
कंक्रीट मिक्सर ड्रम घुमाकर सीमेंट, रेत, पत्थर और पानी को एकसार मिलाता है। ट्रांज़िट मिक्सर ट्रक रास्ते में भी उसे घुमाता रहता है। कंक्रीट पंप पाइप से कंक्रीट को ऊँची या दूर जगह भेजता है। वाइब्रेटर (गीले कंक्रीट में डाली जाने वाली छड़) हवा के बुलबुले निकालकर कंक्रीट को घना और मज़बूत बनाता है। वाइब्रेटर छोड़ने पर छत्ते जैसे छेद रह जाते हैं।
हाथ के औज़ार, पावर टूल और मापने के औज़ार
- हाथ के औज़ार: करनी (गारा फैलाती है), हथौड़ा, फावड़ा, आरी, छेनी, रिंच।
- पावर टूल: ड्रिल, ग्राइंडर, गोल आरी, जैक-हैमर। इन्हें गार्ड और आँखों की सुरक्षा चाहिए।
- मापने और जाँचने के औज़ार: लंबाई के लिए फ़ीता, स्पिरिट लेवल (बुलबुला बीच में हो तो समतल), साहुल (plumb bob) (धागे में लटका वज़न जो ठीक खड़ा लटकता है), सेट स्क्वेयर (समकोण), बड़े नक्शे के लिए लेज़र लेवल और टोटल स्टेशन।
मशीनों का सुरक्षित उपयोग
कोई भी मशीन शुरू करने से पहले: प्रशिक्षित चालक, आसपास ख़ाली जगह, मशीन की जाँच (ब्रेक, नलियाँ, रस्सियाँ, गार्ड), और अगर चालक को दिखता न हो तो इशारा देने वाला। उठे हुए भार के नीचे कभी न खड़े हों। जिस मशीन पर लोगों के बैठने की व्यवस्था नहीं, उस पर उन्हें न बैठाएँ। मरम्मत से पहले बंद करके ताला लगाएँ।
करके देखिए
साहुल बनाइए: धागे में एक नट बाँधकर कील से लटकाइए। दरवाज़े की चौखट जाँचिए: धागा उसके समानांतर होना चाहिए। फिर मेज़ को फ़ोन के लेवल ऐप या पानी की बोतल से जाँचिए: बोतल झुकाइए और देखिए पानी की सतह कैसे समतल रहती है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- क्रेन की क्षमता ≈ सीमा ÷ त्रिज्या (इस पाठ में 120 t·m ÷ त्रिज्या)
- करछों की संख्या = आयतन ÷ बाल्टी का आयतन
- ट्रक के फेरे = आयतन ÷ ट्रक की क्षमता
- स्पिरिट लेवल: बुलबुला बीच में = समतल
हल किए गए उदाहरण
1. गड्ढे में 100 m³ मिट्टी है। एक्सकेवेटर की बाल्टी 1 m³ की है। कितने करछे?
100 ÷ 1 = 100 करछे।
2. मिट्टी 10 m³ वाले ट्रकों से ले जानी है। कितने फेरे?
100 ÷ 10 = 10 फेरे।
3. क्रेन की सीमा 120 t·m है। 6 m त्रिज्या पर वह कितना भार उठा सकती है?
120 ÷ 6 = 20 t।
4. क्या वही क्रेन 10 m त्रिज्या पर 20 t उठा सकती है?
10 m पर क्षमता 120 ÷ 10 = 12 t है। 20 t बहुत भारी है: भार पास लाइए या बड़ी क्रेन लीजिए।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि क्रेन हर त्रिज्या पर एक जैसा भार उठाती है। भार दूर जाने पर क्षमता घटती है।
- कंक्रीट "भरा दिखता है" कहकर वाइब्रेटर छोड़ देना। फँसी हवा उसे कमज़ोर करती है।
- एक्सकेवेटर और बुलडोज़र को मिलाना। एक्सकेवेटर बाल्टी से खोदता है; बुलडोज़र ब्लेड से धकेलता है।
- उठे हुए भार के नीचे खड़े होना या चलना।