मिट्टी का काम (Earthwork)
मिट्टी का काम यानी मिट्टी खोदना, ढोना और आकार देना। कटाई (cut) का मतलब ऊँची ज़मीन खोदना। भराई (fill) का मतलब नीची ज़मीन पर मिट्टी डालना। अच्छी योजना में कटाई और भराई बराबर होती है ताकि मिट्टी बाहर ले जानी या लानी कम पड़े।
मशीनें: एक्सकेवेटर (खोदने), डंपर (ढोने), बुलडोज़र (धकेलने और समतल करने), रोलर (दबाने)। भराई पतली परतों में बिछाकर दबाई जाती है। सुरक्षा: गहरी खाई की दीवारें ढलान वाली या सहारे वाली होनी चाहिए ताकि ढह न जाएँ।
नींव का काम (Foundation work)
नींव संरचना का वज़न ज़मीन तक पहुँचाती है। ऊपर की मिट्टी कड़ी हो तो उथली नींव (फूटिंग, चौड़ी कंक्रीट की पट्टी) काफ़ी है। मिट्टी नरम हो या बोझ बहुत हो तो गहरी नींव लेते हैं: पाइल (कंक्रीट या इस्पात के लंबे खंभे) जो कड़ी परत तक ठोके या ड्रिल किए जाते हैं।
पाइल दो तरह से बोझ उठाते हैं: नोक का सहारा (सिरा कड़ी चट्टान पर टिकता है) और घर्षण (किनारे मिट्टी को पकड़ते हैं)। हर फूटिंग का वज़न इतने क्षेत्रफल में फैलना चाहिए कि मिट्टी पर दाब उसकी सहने की सीमा में रहे।
कंक्रीट का काम (Concrete work)
क्रम: 1. साँचा (formwork) बनाओ, 2. सरिया बाँधो, 3. कंक्रीट डालो, 4. वाइब्रेटर से दबाओ ताकि हवा के छेद निकल जाएँ, 5. पानी देकर तराई (curing) करो, 6. ताकत आने पर साँचा हटाओ।
सीमेंट पानी के साथ धीमी रासायनिक क्रिया से कड़ा होता है। लगभग 28 दिन में ज़्यादातर ताकत आ जाती है, इसलिए कम से कम 7 दिन तराई आम है। पानी ज़्यादा हुआ तो कंक्रीट कमज़ोर, जल्दी सूखा तो दरारें।
सड़क बिछाना (Paving work)
सड़क का फुटपाथ-ढाँचा (pavement) परतों का ढेर है। नीचे से: सबग्रेड (दबाई हुई प्राकृतिक मिट्टी), सब-बेस (मोटी गिट्टी), बेस (कुचला पत्थर) और ऊपरी सतह (डामर या कंक्रीट)। हर परत पहियों का बोझ ज़्यादा क्षेत्रफल में फैलाती है, इसलिए नीचे की कमज़ोर मिट्टी पर कम दाब पड़ता है।
दो मुख्य प्रकार: लचीली सड़क (ऊपर डामर, थोड़ी मुड़ती है) और कठोर सड़क (कंक्रीट की पट्टी)। पानी की निकासी बहुत ज़रूरी है; सड़क के नीचे पानी उसका सबसे बड़ा दुश्मन है।
सुरंग का काम (Tunnel work)
सुरंग ऊपर की सतह खोले बिना चट्टान या मिट्टी में खोदी जाती है। मोटे तौर पर दो तरीके: कड़ी चट्टान में ड्रिल और विस्फोट या मशीन से खुदाई, और टनल बोरिंग मशीन (TBM), एक विशाल घूमता कटर जो खोदता है और पीछे अस्तर भी लगाता जाता है।
चक्र: थोड़ी लंबाई खोदो, छत को सहारा दो (रॉक बोल्ट, इस्पात की पसलियाँ, स्प्रे कंक्रीट), कंक्रीट या खंडों का अस्तर लगाओ, और हवा व पानी की निकासी करो। चाप का आकार इसलिए लेते हैं कि ऊपर का बोझ घुमाव के साथ दबाव बनकर सँभल जाता है।
ICT आधारित निर्माण तकनीक (ICT-based construction technology)
ICT यानी सूचना और संचार तकनीक। निर्माण में इसमें आते हैं मशीनों के लिए GPS और टोटल स्टेशन गाइडेंस, एक्सकेवेटर में डाले गए 3D डिज़ाइन मॉडल, साइट का सर्वे करने वाले ड्रोन और रोलर के फेरे व कंक्रीट का तापमान दर्ज करने वाले सेंसर।
फायदे: दोबारा काम कम, गहराई और स्तर ज़्यादा सटीक, काम तेज़ और साइट ज़्यादा सुरक्षित क्योंकि मशीन के पास कम लोग रहते हैं। मशीन बकेट की स्थिति को डिज़ाइन मॉडल से मिलाती है और लक्ष्य पर पहुँचने पर चालक को बता देती है।
करके देखें: छोटी सड़क बनाइए
ट्रे में गीली मिट्टी को दबाकर समतल करें (सबग्रेड), उस पर छोटे पत्थरों की परत डालें (सब-बेस), फिर ऊपर बारीक रेत की पतली परत। खिलौना कार चलाइए। फिर वही केवल मिट्टी पर रेत डालकर करिए। किसमें कम गड्ढा बना? पहले अनुमान लगाइए, फिर जाँचिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मिट्टी के काम का आयतन = लंबाई × चौड़ाई × गहराई (m³)
- फूटिंग के नीचे मिट्टी पर दाब = बोझ ÷ क्षेत्रफल
- कंक्रीट 28 दिन में ज़्यादातर ताकत पा लेता है
- सड़क की परतें (नीचे से ऊपर): सबग्रेड, सब-बेस, बेस, सतह
हल किए गए उदाहरण
1. एक खाई 30 m लंबी, 1.2 m चौड़ी और 1.5 m गहरी है। कितनी मिट्टी निकलेगी?
आयतन = 30 × 1.2 × 1.5 = 54 m³।
2. एक डंपर एक फेरे में 6 m³ ले जाता है। ऊपर की खाई की मिट्टी हटाने में कितने फेरे लगेंगे?
54 ÷ 6 = 9 फेरे।
3. 2 m भुजा की वर्गाकार फूटिंग 400 kN का बोझ उठाती है। मिट्टी पर दाब निकालिए।
क्षेत्रफल = 2 × 2 = 4 m²। दाब = 400 ÷ 4 = 100 kPa।
4. एक स्लैब 5 m लंबा, 4 m चौड़ा और 0.15 m मोटा है। कितना कंक्रीट चाहिए?
आयतन = 5 × 4 × 0.15 = 3 m³।
5. सड़क की परतें 0.2 m, 0.15 m, 0.15 m और 0.05 m मोटी हैं। कुल मोटाई कितनी है?
0.2 + 0.15 + 0.15 + 0.05 = 0.55 m।
6. सुरंग रोज़ 3 m खुदती है। 450 m खोदने में कितने दिन लगेंगे?
450 ÷ 3 = 150 दिन।
आम गलतियाँ
- तराई छोड़ देना: तेज़ धूप में कंक्रीट सूखने देने से दरारें पड़ती हैं और ताकत घटती है।
- कंक्रीट डालकर उसे दबाना भूल जाना। हवा के छेद उसे कमज़ोर करते हैं।
- बिना जाँचे कि मिट्टी कितना बोझ सह सकती है, फूटिंग बना देना।
- सड़क में सबसे पतली परत नीचे लगाना। मोटी मज़बूत परतें बोझ उठाती हैं; पतला डामर ऊपर सिर्फ़ चिकनी सतह देता है।