सिविल निर्माण सामग्री
सामग्री तय करती है कि काम कितना चलेगा। आम सामग्री:
- मिट्टी: बाँध और भराई के लिए। जड़ और कचरे से साफ़ होनी चाहिए।
- रेत और कंकड़ (मोरंग-गिट्टी): कंक्रीट और सड़क की परतों का पथरीला भराव।
- सीमेंट: भूरा चूर्ण। पानी से पत्थर जैसा सख़्त होकर रेत-कंकड़ को चिपकाता है।
- सरिया (स्टील की छड़): खिंचाव में मज़बूत। कंक्रीट के अंदर लगता है।
- पत्थर, ईंट, लकड़ी, पाइप: दीवार, नाली और अस्थायी सहारे के लिए।
उपयोग से पहले सामग्री जाँची जाती है (जैसे रेत छानना, देखना कि सीमेंट सूखा है और गाँठें नहीं हैं)।
मिट्टी का काम (भू-कार्य)
मिट्टी का काम मतलब मिट्टी खोदना, ले जाना और दबाना।
- कटाई: मिट्टी खोदकर हटाना, जैसे नहर की खाई।
- भराई: जहाँ ज़मीन ऊँची चाहिए वहाँ मिट्टी डालना, जैसे बाँध या सड़क।
- दबाई (संपीड़न): पतली परतों में रोलर से मिट्टी दबाना ताकि बाद में न धँसे।
अच्छी योजना में कटाई और भराई बराबर होती हैं, ताकि मिट्टी दूर न ढोनी पड़े। ढलान बहुत तेज़ न हो, वरना मिट्टी खिसकती है।
नींव का काम
नींव वह हिस्सा है जो ज़मीन को छूता है और ढाँचे का भार चौड़े क्षेत्र में फैलाता है। कमज़ोर मिट्टी ढाँचे को असमान धँसाती है और दरार डालती है।
चरण: ढीली मिट्टी हटाओ, देखो ज़मीन ठोस है, कंकड़ या पतले कंक्रीट की परत बिछाकर दबाओ, फिर उस पर बनाओ। नहर में यह परत खाई के तल पर होती है। भारी ढाँचों के लिए गहरी नींव या पाइल लगते हैं।
कंक्रीट का काम
कंक्रीट = सीमेंट + रेत + कंकड़ + पानी। आम मिश्रण 1 : 2 : 4 है (आयतन में 1 भाग सीमेंट, 2 भाग रेत, 4 भाग कंकड़), पानी बस इतना कि काम में आसान रहे।
चरण: मिलाओ, डालो, दबाओ (हवा के छेद न रहें), समतल करो और फिर तराई (क्योरिंग): लगभग 7 दिन गीला रखो ताकि मज़बूती आए। ज़्यादा पानी कंक्रीट कमज़ोर करता है। नहर की अस्तर रिसाव रोककर पानी बचाती है।
प्रबलित कंक्रीट का काम (RCC)
कंक्रीट दबने पर मज़बूत है पर खिंचने या मुड़ने पर कमज़ोर, इसलिए फट जाता है। अंदर लगे सरिए खिंचाव सँभालते हैं। यही प्रबलित कंक्रीट (RCC) है।
- सरिए जाल की तरह बाँधे जाते हैं और छोटे ब्लॉक से ज़मीन से ऊपर रखे जाते हैं।
- सरिए पर कंक्रीट की परत (कवर) ज़रूरी है ताकि जंग न लगे।
- सरिए वहाँ लगते हैं जहाँ खिंचाव आता है, जैसे पुल की स्लैब का निचला हिस्सा।
सड़क का काम
खेत की सड़क नीचे से ऊपर परतों में बनती है:
- दबाई हुई मिट्टी (सबग्रेड)।
- मोटे पत्थर (सब-बेस), जो भार फैलाते हैं।
- बारीक पत्थर (बेस)।
- ऊपरी सतह: कोलतार, कंक्रीट, या हल्की सड़क के लिए गिट्टी।
सड़क बीच से थोड़ी उभरी होती है और किनारे नालियाँ होती हैं ताकि बारिश बह जाए। सड़क का सबसे बड़ा दुश्मन पानी है।
पौधारोपण का काम
ढलान पर नंगी मिट्टी बारिश में बह जाती है। पौधारोपण में बाँध और ढलानों पर घास, झाड़ियाँ और पेड़ लगाते हैं। जड़ें मिट्टी थामती हैं, पत्ते बूँदों की चोट घटाते हैं और पेड़ छाया व हवा से बचाव देते हैं। बरसात की शुरुआत में लगाओ ताकि जल्दी बढ़ें।
अन्य निर्माण तकनीकें
- पहले से बने (प्रीकास्ट) हिस्से: कारखाने में बने कंक्रीट पाइप या नालियाँ, जो मौके पर रखकर समय बचाते हैं।
- पत्थर की चिनाई और गैबियन: पत्थर भरी तार की टोकरियाँ जो किनारा थामती हैं।
- पाइप बिछाना: भूमिगत नाली और सिंचाई के लिए।
- पानी निकालना (डीवॉटरिंग): खाई में बनाते समय पानी बाहर पंप करना।
- सुरक्षा: हेलमेट, खाई के सहारे और खुदाई के चारों ओर चेतावनी।
करके देखो: छोटी नहर बनाओ
घर पर ट्रे में नम रेत भरो। चम्मच से नाली काटो (कटाई)। एक किनारे रेत का ढेर लगाओ (भराई) और चपटे तख़्ते से दबाओ (दबाई)। पानी डालो। अब नाली के आधे हिस्से में गीली चिकनी मिट्टी या प्लास्टिक लगाओ और देखो कौन सा आधा रिसता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- कंक्रीट मिश्रण 1 : 2 : 4 = सीमेंट : रेत : कंकड़ (आयतन में)
- ब्लॉक का आयतन = लंबाई × चौड़ाई × ऊँचाई
- कटाई-भराई: खोदी मिट्टी (कटाई) और ज़रूरी मिट्टी (भराई) लगभग बराबर हो
- तराई: कंक्रीट को लगभग 7 दिन गीला रखो
- RCC = कंक्रीट (दबाव सहे) + सरिया (खिंचाव सहे)
हल किए गए उदाहरण
1. नहर की खाई 100 मी लंबी, 2 मी चौड़ी और 1 मी गहरी है। कितनी मिट्टी (m³) खुदेगी?
आयतन = 100 × 2 × 1 = 200 m³।
2. खोदी मिट्टी से 100 मी लंबा, 1 मी ऊँचा और 1.5 मी चौड़ा बाँध (ब्लॉक मानो) बनाना है। क्या मिट्टी काफ़ी है और कितनी बचेगी?
बाँध का आयतन = 100 × 1.5 × 1 = 150 m³। खुदी मिट्टी 200 m³ है, इसलिए 50 m³ बचती है। ढीली मिट्टी दबी मिट्टी से ज़्यादा जगह घेरती है, इसलिए असली बचत थोड़ी अलग होगी।
3. स्लैब के लिए 1 : 2 : 4 (सीमेंट : रेत : कंकड़) में कुल 7 भाग होते हैं। 3.5 m³ सूखे मिश्रण के लिए कितना सीमेंट चाहिए?
एक भाग = 3.5 / 7 = 0.5 m³। सीमेंट = 0.5 m³, रेत = 1 m³, कंकड़ = 2 m³।
4. नहर की अस्तर की स्लैब 20 मी लंबी, 3 मी चौड़ी और 0.1 मी मोटी है। कितना कंक्रीट चाहिए?
आयतन = 20 × 3 × 0.1 = 6 m³।
5. पुल की स्लैब में सरिया नीचे की ओर क्यों लगाते हैं?
भार पड़ने पर स्लैब मुड़ती है और निचला हिस्सा खिंचता है। कंक्रीट खिंचाव में कमज़ोर है, सरिया मज़बूत, इसलिए सरिया नीचे लगता है।
आम गलतियाँ
- कंक्रीट डालना आसान करने के लिए ज़्यादा पानी मिलाना। वह कमज़ोर होकर फटता है।
- तराई भूल जाना। कंक्रीट को कई दिन गीला रखना ज़रूरी है।
- सरिया सीधे ज़मीन पर या सतह पर बिना कंक्रीट कवर के रखना, जिससे जंग लगती है।
- मिट्टी की परतें दबाना छोड़ देना। बाँध या सड़क बाद में धँस जाती है।
- सड़क में नालियाँ न बनाना। पानी परतों में घुसकर उसे तोड़ देता है।