पदार्थ की अवस्थाएँ और उसके अंदर क्या है
हर चीज़ छोटे-छोटे परमाणुओं से बनी है। वे कैसे बैठे हैं, इससे अवस्था तय होती है।
- ठोस: परमाणु अपनी जगह पर टिके रहते हैं और बस काँपते हैं। ठोस अपना आकार रखता है।
- द्रव: परमाणु छूते हैं पर फिसल सकते हैं। द्रव बर्तन का आकार ले लेता है।
- गैस: परमाणु दूर-दूर हैं और तेज़ चलते हैं। गैस पूरी जगह भर देती है।
ठोस के अंदर मुख्य दो नमूने होते हैं। क्रिस्टल (लोहा, तांबा, नमक) में परमाणु सजे हुए नमूने में दोहराते हैं जिसे जालक (lattice) कहते हैं। अक्रिस्टलीय ठोस (काँच, कई प्लास्टिक) में ऐसा सजा नमूना नहीं होता। प्लास्टिक अणुओं की लंबी शृंखलाओं से बनता है। धातु असल में छोटे-छोटे क्रिस्टलों की भीड़ है जिन्हें कण (grains) कहते हैं।
परमाणुओं को बंध पकड़े रखते हैं: धातुओं में धात्विक बंध (मुक्त इलेक्ट्रॉनों का समुद्र), सिरेमिक में आयनिक या सहसंयोजी बंध, और बहुलकों में सहसंयोजी शृंखलाएँ जिनके बीच कमज़ोर खिंचाव होता है। संमिश्र (composite) दो पदार्थों को जोड़ता है ताकि हर एक अपना काम करे।
विरूपण और बहाव
विरूपण (deformation) यानी धक्के या खिंचाव (भार) से आकार का बदलना।
- प्रत्यास्थ: छोड़ने पर आकार वापस आ जाता है, कमानी की तरह। परमाणुओं के बंध बस थोड़े खिंचते हैं।
- सुघट्य (plastic): आकार बदला रह जाता है। परमाणुओं की परतें खिसक चुकी होती हैं। जिस भार पर यह शुरू होता है उसे पराभव बिंदु (yield point) कहते हैं।
- भंगुर: पदार्थ बिना खिंचे लगभग सीधे टूट जाता है। काँच और सिरेमिक ऐसे हैं।
प्रतिबल (stress) यानी प्रति इकाई क्षेत्रफल पर भार: प्रतिबल = बल ÷ क्षेत्रफल। विकृति (strain) यानी खिंचाव और शुरुआती लंबाई का अनुपात: विकृति = बढ़ी लंबाई ÷ मूल लंबाई। प्रत्यास्थ क्षेत्र में प्रतिबल ÷ विकृति एक जैसा रहता है। इस संख्या को यंग गुणांक कहते हैं; यह कठोरता (stiffness) नापता है।
बहाव: द्रव इसलिए बहता है कि उसके परमाणु फिसलते हैं। गाढ़े द्रव (शहद) की श्यानता ज़्यादा है, पतले द्रव (पानी) की कम। गर्म करने से श्यानता घटती है। इसीलिए गर्म काँच, गर्म प्लास्टिक और पिघली धातु को ढाला या उँडेला जा सकता है। कुछ ठोस गर्म होने पर भार के नीचे बहुत धीरे बहते भी हैं। इसे विसर्पण (creep) कहते हैं।
संरचना से गुण कैसे तय होते हैं
गुण यानी पदार्थ का व्यवहार: मज़बूत, कठोर, लचीला, हल्का, ऊष्मा या बिजली का सुचालक या कुचालक।
- धातुएँ: परतें खिसक सकती हैं, इसलिए मुड़ती हैं (तन्य) और पीटी जा सकती हैं (आघातवर्ध्य)। मुक्त इलेक्ट्रॉन ऊष्मा और बिजली ले जाते हैं।
- सिरेमिक: पक्के बंध परमाणुओं को कसकर पकड़ते हैं, इसलिए कठोर और अधिक गर्मी सहने वाले हैं, पर परतें खिसक नहीं सकतीं, इसलिए भंगुर हैं।
- बहुलक (polymer): लंबी शृंखलाएँ, जिनके बीच कमज़ोर खिंचाव है। हल्के, लचीले, कुचालक। गर्मी से शृंखलाएँ फिसलती हैं (थर्मोप्लास्टिक पिघलते हैं)।
- संमिश्र: नरम आधार में मज़बूत रेशे, यानी कम वज़न में ज़्यादा मज़बूती।
संरचना बदलो तो गुण बदल जाते हैं। छोटे कण धातु को मज़बूत करते हैं। थोड़े दूसरे परमाणु मिलाने (मिश्रधातु) से परतों का खिसकना रुकता है और धातु कठोर होती है। स्टील को गर्म-ठंडा करने से उसके कण और कठोरता बदलती है।
करके देखो: पेपरक्लिप को थोड़ा मोड़ो (वापस आएगा), फिर ज़्यादा (मुड़ा रह जाएगा), फिर आगे-पीछे मोड़ते रहो जब तक टूट न जाए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- प्रतिबल σ = F ÷ A (मात्रक: पास्कल, Pa; 1 MPa = 1 N/mm²)
- विकृति ε = ΔL ÷ L₀ (कोई मात्रक नहीं)
- यंग गुणांक E = σ ÷ ε (केवल प्रत्यास्थ क्षेत्र में)
- स्टील E ≈ 200 GPa, एल्युमिनियम ≈ 70 GPa, नायलॉन ≈ 3 GPa
हल किए गए उदाहरण
1. 50 mm² अनुप्रस्थ काट की छड़ पर 5000 N का खिंचाव है। प्रतिबल ज्ञात करो।
σ = F ÷ A = 5000 ÷ 50 = 100 N/mm² = 100 MPa.
2. 200 mm लंबी छड़ 0.1 mm बढ़ती है। विकृति ज्ञात करो।
ε = ΔL ÷ L₀ = 0.1 ÷ 200 = 0.0005 (0.05%).
3. प्रतिबल 100 MPa और विकृति 0.0005 (प्रत्यास्थ) है। यंग गुणांक ज्ञात करो। यह कौन-सी धातु हो सकती है?
E = 100 ÷ 0.0005 = 200 000 MPa = 200 GPa. यह स्टील से मेल खाता है।
4. एक स्टील का पराभव प्रतिबल 250 MPa है। 20 mm² की छड़ किस बल पर पराभव शुरू करेगी?
F = σ × A = 250 × 20 = 5000 N. इससे ऊपर छड़ पूरी तरह वापस नहीं आएगी।
आम गलतियाँ
- प्रत्यास्थ का मतलब "रबर जैसा खिंचने वाला" समझना। इसका मतलब केवल आकार का वापस आना है। स्टील भी छोटे खिंचाव पर प्रत्यास्थ है।
- प्रतिबल और विकृति को मिला देना। प्रतिबल का मात्रक है (Pa); विकृति केवल अनुपात है।
- कठोर = मज़बूत मान लेना। काँच कठोर है पर भंगुर, आसानी से टूटता है।
- सोचना कि ठोस के परमाणु हिलते नहीं। वे हमेशा काँपते हैं; गर्मी से और ज़्यादा।