यांत्रिक गुणों की जाँच
यांत्रिक गुण बताते हैं कि बल लगने पर पदार्थ कैसा व्यवहार करता है। इन्हें छोटे नमूनों (specimen) पर मानक परीक्षणों से नापा जाता है।
- तनन परीक्षण: छड़ को धीरे-धीरे टूटने तक खींचा जाता है। मशीन बल और बढ़ाव दर्ज करती है। ग्राफ़ से पराभव सामर्थ्य (जहाँ वापस आना बंद होता है), अंतिम तनन सामर्थ्य (UTS) (सबसे ऊँचा प्रतिबल) और दीर्घन (elongation) (टूटने तक कितनी खिंची, % में) पढ़ते हैं। जो छड़ बहुत खिंचती है वह तन्य है; जो कम खिंचकर टूट जाए वह भंगुर।
- कठोरता परीक्षण: कठोर गेंद (ब्रिनेल) या हीरा (विकर्स, रॉकवेल) सतह में दबाया जाता है। छोटा गड्ढा यानी ज़्यादा कठोर धातु।
- आघात परीक्षण: झूलता हथौड़ा खाँचेदार छड़ को तोड़ता है (चार्पी)। हथौड़े की खोई ऊर्जा से दृढ़ता (toughness) पता चलती है।
- श्रांति और मोड़ परीक्षण: बार-बार छोटा भार या नमूने को मोड़ने से पता चलता है कि पुर्ज़ा टिकेगा या फटेगा।
दीर्घन % = (अंतिम लंबाई − मूल लंबाई) ÷ मूल लंबाई × 100.
सूक्ष्मदर्शी से ऊतक (संरचना) की जाँच
धातु का "ऊतक" यानी उसकी अंदर की संरचना। इसे देखने के लिए समतल, चमकदार और साफ़ सतह बनानी पड़ती है।
- छोटा टुकड़ा काटो।
- पकड़ने में आसानी के लिए रेज़िन में जमाओ।
- महीन से महीन कागज़ से घिसो।
- आईने जैसा पॉलिश करो।
- हल्के अम्ल से एच करो। अम्ल कणों के किनारों और अलग-अलग भागों को अलग रफ़्तार से खाता है, इसलिए वे दिखने लगते हैं।
- धातुकीय सूक्ष्मदर्शी से देखो।
तुम कण, उनका आकार, अलग-अलग प्रावस्थाएँ (स्टील में नरम फ़ेराइट और परतदार पर्लाइट) और छेद या दरार जैसे दोष देख सकते हो। छोटे कण यानी ज़्यादा मज़बूत धातु। असली आकार = चित्र में आकार ÷ आवर्धन।
उपकरणों से जाँच
आकार नापना: फुट-रूलर काफ़ी नहीं। वर्नियर कैलिपर 0.02 mm और माइक्रोमीटर 0.01 mm तक पढ़ता है। डायल गेज आकार या समतलता का बहुत छोटा बदलाव दिखाता है।
छिपे दोष बिना बिगाड़े खोजना (अविनाशी परीक्षण, NDT):
- पराश्रव्य परीक्षण: प्रोब ध्वनि तरंगें अंदर भेजता है। वे दरार या पिछली दीवार से लौटती हैं। गहराई = चाल × समय ÷ 2।
- एक्स-रे: किरणें पार जाती हैं; दरार या छेद फ़िल्म पर काला दिखता है।
- रंजक भेदन (dye penetrant): लाल रंग सतह की दरारों में घुस जाता है और सफ़ाई के बाद दिखता है।
- चुंबकीय कण: लोहे और स्टील की दरार पर लौह-चूर्ण जमा हो जाता है।
- भँवर धारा (eddy current): कुंडली सतह की दरारें और परत जाँचती है।
अन्य उपकरण: कठोरता मीटर, ताप के लिए थर्मोकपल, बल के लिए लोड सेल। अच्छी जाँच में हर पाठ्यांक लिखा जाता है ताकि बाद में गड़बड़ी का पता लग सके।
करके देखो: चाय के कप और दरार वाले कप को ठकठकाओ। दरार से खनक की जगह धप्प की आवाज़ आती है। ध्वनि-परीक्षण का यही विचार है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- प्रतिबल σ = F ÷ A
- UTS = अधिकतम बल ÷ मूल क्षेत्रफल
- दीर्घन % = (L₁ − L₀) ÷ L₀ × 100
- पराश्रव्य गहराई d = v × t ÷ 2 (t आने-जाने का समय)
- असली आकार = चित्र में आकार ÷ आवर्धन
हल किए गए उदाहरण
1. 100 mm² क्षेत्रफल की जाँच-छड़ अधिकतम 30 kN बल पर टूटती है। UTS ज्ञात करो।
30 kN = 30 000 N. UTS = 30 000 ÷ 100 = 300 MPa.
2. 50 mm की मापक लंबाई टूटते समय 60 mm हो जाती है। दीर्घन % ज्ञात करो।
(60 − 50) ÷ 50 × 100 = 20%. छड़ तन्य है।
3. चार्पी हथौड़े में झूलने से पहले 300 J और छड़ तोड़ने के बाद 220 J ऊर्जा है। छड़ ने कितनी ऊर्जा सोखी?
300 − 220 = 80 J. यही नमूने की दृढ़ता है।
4. स्टील के ब्लॉक पर पराश्रव्य प्रोब को 5 µs बाद गूँज मिलती है। स्टील में ध्वनि की चाल 6000 m/s है। दरार की गहराई ज्ञात करो।
आना-जाना दोनों हैं, इसलिए d = v × t ÷ 2 = 6000 × 5×10⁻⁶ ÷ 2 = 0.015 m = 15 mm.
5. ×100 की फ़ोटो में एक कण 0.5 mm चौड़ा दिखता है। उसकी असली चौड़ाई क्या है?
0.5 ÷ 100 = 0.005 mm = 5 µm.
आम गलतियाँ
- बड़े गड्ढे को ज़्यादा कठोरता समझना। सच इसका उलटा है।
- पराश्रव्य के सवाल में समय को आधा करना भूल जाना। तरंग अंदर जाती है और लौटती भी है।
- पराभव सामर्थ्य और UTS को मिला देना। पराभव वह है जहाँ वापस आना बंद होता है; UTS ग्राफ़ का सबसे ऊँचा बिंदु है।
- पॉलिश और एच छोड़ देना। इनके बिना सूक्ष्मदर्शी में कण नहीं, केवल खरोंचें दिखती हैं।