संरचनात्मक पदार्थ क्या हैं?
संरचनात्मक पदार्थ वह पदार्थ है जिसका मुख्य काम भार सँभालना और आकार बनाए रखना है। जैसे पुल का ढाँचा, कार की बॉडी या मशीन का पुर्ज़ा।
हम चार सवाल पूछते हैं: कितना मज़बूत है (टूटने से पहले कितना भार)? कितना कड़ा है (कितना कम झुकता है)? कितना भारी है? कितने का है? कोई पदार्थ सभी सवालों में जीतता नहीं, इसलिए इंजीनियर काम के हिसाब से चुनते हैं।
इस्पात (स्टील) और ढलवाँ लोहा
दोनों लोहे में कार्बन मिलाकर बनते हैं। कार्बन की मात्रा तय करती है कि क्या बनेगा।
- इस्पात: कार्बन लगभग 2% से कम। मज़बूत, टिकाऊ, मोड़ा और बेला जा सकता है। पुल, पटरी, इमारत और औज़ारों में।
- ढलवाँ लोहा: कार्बन लगभग 2% से ज़्यादा। आसानी से पिघलकर साँचे में भर जाता है, इसलिए इंजन ब्लॉक, पाइप और मैनहोल ढक्कन में। पर कठोर और भंगुर है, तेज़ चोट से चटक जाता है।
इस्पात में दूसरी धातुएँ मिलाओ तो मिश्र इस्पात मिलता है। क्रोमियम से स्टेनलेस स्टील बनता है, जिसमें जंग आसानी से नहीं लगता।
हल्की धातुएँ (लाइट-मेटल)
हल्की धातुओं का घनत्व (हर घन सेंटीमीटर का द्रव्यमान) कम होता है। मुख्य हैं एल्युमिनियम, मैग्नीशियम और टाइटेनियम।
- एल्युमिनियम: इस्पात का लगभग एक-तिहाई वज़न, जल्दी जंग नहीं लगता। जहाज़, डिब्बे, खिड़की के फ़्रेम और साइकिल में।
- मैग्नीशियम: और भी हल्का। लैपटॉप की बॉडी और कार के पहियों में।
- टाइटेनियम: हल्का, बहुत मज़बूत और संक्षारण-रोधी, पर महँगा। जेट इंजन और कूल्हे के इम्प्लांट में।
बराबर भार पर एल्युमिनियम इस्पात से ज़्यादा झुकता है, इसलिए पुर्ज़ा थोड़ा मोटा बनाते हैं। फिर भी कुल वज़न बहुत कम रहता है।
संरचनात्मक सेरामिक
सेरामिक धातुओं के ऑक्सीजन, नाइट्रोजन या कार्बन के यौगिक हैं, जैसे एल्युमिना (एल्युमिनियम ऑक्साइड) और सिलिकॉन कार्बाइड। इन्हें बहुत ऊँचे ताप पर पकाया जाता है।
ये बहुत कठोर होते हैं, घिसते नहीं, जंग नहीं लगता और लाल-गरम होकर भी मज़बूत रहते हैं। कमज़ोरी: ये भंगुर हैं। पहले झुकते नहीं, सीधे अचानक चटक जाते हैं। स्पार्क प्लग, कटिंग टूल, ब्रेक डिस्क और भट्ठी की परत में काम आते हैं।
इंजीनियरिंग प्लास्टिक
पॉलिथीन की थैली कमज़ोर होती है। इंजीनियरिंग प्लास्टिक खास प्लास्टिक हैं जो भार और गर्मी में भी मज़बूत रहते हैं और आकार नहीं खोते। उदाहरण: नायलॉन (गियर, रस्सी), पॉलीकार्बोनेट (हेलमेट, हेडलाइट कवर) और PTFE (नॉन-स्टिक परत)।
ये हल्के हैं, जंग नहीं खाते और जटिल आकार में सस्ते में ढल जाते हैं। पर धातु जितने कड़े नहीं होते और गर्मी में नरम पड़ जाते हैं।
संरचनात्मक कंपोज़िट पदार्थ
कंपोज़िट दो अलग पदार्थ जोड़कर बनता है ताकि एक की कमी दूसरा पूरी करे। मज़बूत, पतले रेशे (काँच या कार्बन के) प्लास्टिक के आधार (रेज़िन) में जमे होते हैं।
रेशे भार उठाते हैं, रेज़िन उन्हें जोड़े रखता और बचाता है। नतीजा: बहुत मज़बूत और बहुत हल्का। हवाई जहाज़ की बॉडी, रेसिंग कार, पवन-चक्की के पंखे, नाव और खेल का सामान। सरिया वाला कंक्रीट (आर.सी.सी.) भी कंपोज़िट है।
सही पदार्थ कैसे चुनें
काम के हिसाब से गुण मिलाओ। पुल को मज़बूती और कम दाम चाहिए, तो इस्पात। जहाज़ को मज़बूती और कम वज़न, तो एल्युमिनियम, टाइटेनियम या कंपोज़िट। कटिंग टूल को कठोरता, तो सेरामिक। चुपचाप चलने वाला गियर नायलॉन का हो सकता है।
जंग, गर्मी, दाम और पुर्ज़ा बनाने की आसानी भी देखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- प्रतिबल = बल ÷ क्षेत्रफल (σ = F / A), इकाई पास्कल (Pa) या MPa
- घनत्व = द्रव्यमान ÷ आयतन (ρ = m / V)
- इस्पात: कार्बन लगभग 2% से कम; ढलवाँ लोहा: कार्बन लगभग 2% से ज़्यादा
- ज़्यादा यंग गुणांक (E) वाला पदार्थ बराबर भार पर कम झुकता है
- भंगुर = बिना चेतावनी टूटे; तन्य = पहले मुड़े
हल किए गए उदाहरण
1. इस्पात की छड़ का अनुप्रस्थ काट 2 cm² (0.0002 m²) है और उस पर 10 000 N का खिंचाव है। प्रतिबल निकालो।
σ = F / A = 10 000 / 0.0002 = 50 000 000 Pa = 50 MPa।
2. एक पुर्ज़े का आयतन 0.002 m³ है। इस्पात (7800 kg/m³) और एल्युमिनियम (2700 kg/m³) से बनाने पर द्रव्यमान निकालो।
इस्पात: 7800 × 0.002 = 15.6 kg। एल्युमिनियम: 2700 × 0.002 = 5.4 kg। एल्युमिनियम से 10.2 kg बचा।
3. एक धातु में 3.5% कार्बन है। यह इस्पात है या ढलवाँ लोहा? इससे क्या फ़र्क पड़ता है?
2% से ज़्यादा कार्बन है, इसलिए ढलवाँ लोहा। यह साँचे में अच्छा ढलता है पर भंगुर है, इसलिए जहाँ ज़ोरदार चोट लगे वहाँ नहीं लगाना चाहिए।
4. सेरामिक का कप गिरने पर चटक जाता है, पर इस्पात का मग सिर्फ़ पिचकता है। क्यों?
इस्पात तन्य है: परमाणु खिसकते हैं और धातु मुड़ जाती है। सेरामिक भंगुर है: परमाणु खिसक नहीं पाते, इसलिए दरार एकदम पूरे में फैल जाती है।
5. हवाई जहाज़ के पंख को मज़बूत और हल्का पदार्थ चाहिए। इस्पात, एल्युमिनियम और कार्बन कंपोज़िट में से चुनो और कारण बताओ।
कार्बन कंपोज़िट (या एल्युमिनियम)। इस्पात मज़बूत है पर एल्युमिनियम से 3 गुना भारी है। कंपोज़िट और भी हल्का और कड़ा है, इसलिए हर किलो पर सबसे ज़्यादा मज़बूती देता है।
6. इस्पात और एल्युमिनियम की बराबर बीमों पर बराबर भार है। इस्पात E = 200, एल्युमिनियम E = 70। एल्युमिनियम कितना गुना ज़्यादा झुकेगा?
झुकाव 1/E के समानुपाती है। अनुपात = 200 / 70 ≈ 2.9। एल्युमिनियम लगभग 2.9 गुना ज़्यादा झुकेगा।
आम गलतियाँ
- "कठोर" को "मज़बूत" समझना। सेरामिक बहुत कठोर है पर आसानी से टूटता है; इस्पात नरम है पर कहीं ज़्यादा भार सहता है।
- इस्पात और ढलवाँ लोहे को मिला देना। इस्पात में कम कार्बन और टिकाऊ; ढलवाँ लोहे में ज़्यादा कार्बन और भंगुर।
- हल्की धातुओं को कमज़ोर मानना। टाइटेनियम और एल्युमिनियम मिश्रधातु अपने वज़न के हिसाब से बहुत मज़बूत हैं।
- कंपोज़िट को सिर्फ़ मिश्रण कहना। कंपोज़िट में दोनों भाग अलग रहते हैं और हर एक का अलग काम होता है।