मिट्टी के गुण, जाँच और परीक्षण
मिट्टी में ठोस कण, पानी और हवा होते हैं। खाली जगह (पानी + हवा) रिक्तिकाएँ हैं।
- जल-मात्रा w = पानी का भार ÷ सूखी मिट्टी का भार × 100।
- रिक्तिका अनुपात e = रिक्तिकाओं का आयतन ÷ ठोस का आयतन।
- सरंध्रता n = रिक्तिकाओं का आयतन ÷ कुल आयतन × 100।
- संतृप्ति की मात्रा Sr = पानी का आयतन ÷ रिक्तिकाओं का आयतन। Sr = 100% यानी सारी रिक्तिकाओं में पानी।
- इकाई भार γ = भार ÷ आयतन (मिट्टी लगभग 16 से 20 kN/m³)।
जाँच: इंजीनियर गड्ढे खोदकर नमूने लेते हैं और परतें लिखते हैं। परीक्षण: जल-मात्रा के लिए ओवन में सुखाना, कण-आकार के लिए छलनी, पारगम्यता परीक्षण, संघनन परीक्षण और अपरूपण परीक्षण।
मिट्टी में पानी का बहाव
पानी ऊँचे स्तर से नीचे स्तर की ओर कणों के बीच की रिक्तिकाओं से बहता है। इसे रिसाव कहते हैं।
- द्रवचालित प्रवणता i = स्तर का अंतर Δh ÷ रास्ते की लंबाई L।
- डार्सी का नियम: v = k × i। यहाँ k पारगम्यता है (पानी कितनी आसानी से निकलता है)।
- प्रति सेकंड बहाव q = k × i × A।
- k लगभग 10⁻² m/s बजरी में, 10⁻⁴ रेत में और 10⁻⁹ m/s या कम चिकनी मिट्टी में होता है।
बाँध के नीचे तेज़ रिसाव मिट्टी के कण बहा ले जाकर बाँध को कमज़ोर कर सकता है, इसलिए इंजीनियर इसे जाँचते हैं।
मिट्टी में प्रतिबल और संघनन
प्रतिबल यानी प्रति क्षेत्रफल बल (kPa)। मिट्टी के भार से गहराई z पर कुल प्रतिबल σ = γ × z होता है।
- रिक्तिकाओं का पानी छिद्र-जल दबाव u = γw × (जल-स्तर से गहराई) से पीछे धकेलता है। γw ≈ 10 kN/m³।
- कण केवल प्रभावी प्रतिबल σ′ = σ − u झेलते हैं। ताकत और धँसाव प्रभावी प्रतिबल से तय होते हैं।
- ऊपर का भार फैलता है, इसलिए गहराई में बढ़ा हुआ प्रतिबल घटता है। सरल नियम 2:1 फैलाव: Δσ = Q ÷ ((B + z)(L + z))।
संघनन: चिकनी मिट्टी पर भार पड़ने से बहुत छोटे छिद्रों से पानी धीरे-धीरे निचुड़ता है। छिद्र-जल दबाव घटता है, प्रभावी प्रतिबल बढ़ता है और ज़मीन धँसती है। रेत में यह सेकंडों में होता है, चिकनी मिट्टी में सालों लग सकते हैं। निकासी का रास्ता लंबा हो तो प्रक्रिया और धीमी।
मिट्टी की ताकत
मिट्टी कुचलकर नहीं, किसी सतह पर फिसलकर टूटती है। फिसलने के विरोध को अपरूपण सामर्थ्य कहते हैं।
- कूलॉम समीकरण: τ = c + σ′ × tan φ।
- c = संसंजन (चिकनी मिट्टी के कणों का चिपकना; सूखी रेत में लगभग शून्य)।
- φ = आंतरिक घर्षण कोण (रेत में लगभग 30° से 40°)।
- ऊपर से ज़्यादा वज़न σ′ यानी ज़्यादा घर्षण और ज़्यादा ताकत।
सीधा अपरूपण परीक्षण में मिट्टी के डिब्बे का ऊपरी आधा हिस्सा तय वज़न के नीचे बगल में खिसकाते हैं और टूटते समय का बल नापते हैं। ढाल, नींव और दीवारें इस तरह बनाई जाती हैं कि प्रतिबल इस ताकत से कम रहें।
मिट्टी का दबाव
दीवार के पीछे की मिट्टी उसे बगल से धकेलती है। यह मिट्टी का दबाव है।
- सक्रिय दबाव (दीवार थोड़ी दूर हटती है): गुणांक Ka = (1 − sin φ) ÷ (1 + sin φ)। φ = 30° पर Ka = 1/3।
- निष्क्रिय दबाव (दीवार मिट्टी में धँसती है): Kp = 1 ÷ Ka। यह काफ़ी बड़ा है।
- विराम अवस्था (दीवार हिल नहीं सकती): K₀ ≈ 1 − sin φ।
- गहराई z पर दबाव = K × γ × z। ऊपर शून्य और नीचे सबसे ज़्यादा: त्रिभुज।
- प्रति मीटर दीवार कुल धक्का: P = ½ K γ H²। यह आधार से H/3 ऊपर लगता है।
H² के कारण ऊँचाई दुगनी करने पर धक्का चार गुना हो जाता है।
खुद करके देखिए
3D में: आख़िरी चरण में मिट्टी की ऊँचाई 2 m करके धक्का देखिए। फिर 4 m कीजिए। क्या धक्का 4 गुना हुआ?
घर पर: थाली में सूखी रेत का ढेर बनाइए। सबसे ज़्यादा ढाल जिस पर ढेर टिके वह विश्राम कोण है, जो φ के पास होता है। रेत को थोड़ा गीला करके देखिए, क्या अब ढाल ज़्यादा खड़ा टिकता है (संसंजन)?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- w = Ww ÷ Ws × 100; e = Vv ÷ Vs; n = Vv ÷ V × 100; Sr = Vw ÷ Vv
- डार्सी: v = k × i, i = Δh ÷ L, q = k × i × A
- σ = γ × z; u = γw × zw; σ′ = σ − u
- अपरूपण सामर्थ्य: τ = c + σ′ tan φ
- Ka = (1 − sin φ) ÷ (1 + sin φ); Kp = 1 ÷ Ka
- सक्रिय धक्का: P = ½ Ka γ H² (आधार से H/3 पर)
- मुख्य शब्द: रिक्तिका, पारगम्यता, प्रभावी प्रतिबल, संघनन, संसंजन, घर्षण कोण
हल किए गए उदाहरण
1. गीली मिट्टी का नमूना 200 g है। ओवन में सुखाने पर 160 g रह गया। जल-मात्रा निकालिए।
पानी = 40 g। w = 40 ÷ 160 × 100 = 25%।
2. मिट्टी में ठोस का आयतन 0.6 m³ और रिक्तिकाओं का 0.4 m³ है। रिक्तिका अनुपात और सरंध्रता निकालिए।
e = 0.4 ÷ 0.6 = 0.67। कुल आयतन = 1.0 m³, इसलिए n = 0.4 ÷ 1.0 × 100 = 40%।
3. रेत का k = 1 × 10⁻⁴ m/s है। 2 m रास्ते पर पानी के स्तर का अंतर 0.5 m है। रिसाव वेग v निकालिए।
i = 0.5 ÷ 2 = 0.25। v = k × i = 1 × 10⁻⁴ × 0.25 = 2.5 × 10⁻⁵ m/s।
4. मिट्टी का γ = 18 kN/m³ है। जल-स्तर ज़मीन की सतह पर है। 4 m गहराई पर प्रभावी प्रतिबल निकालिए।
σ = 18 × 4 = 72 kPa। u = 10 × 4 = 40 kPa। σ′ = 72 − 40 = 32 kPa।
5. चिकनी मिट्टी में c = 10 kPa और φ = 30° है। σ′ = 50 kPa पर उसकी अपरूपण सामर्थ्य निकालिए। (tan 30° = 0.577)
τ = 10 + 50 × 0.577 = 10 + 28.9 = 38.9 kPa।
6. 4 m ऊँची दीवार γ = 18 kN/m³ और φ = 30° वाली मिट्टी रोकती है। प्रति मीटर सक्रिय धक्का और उसका स्थान निकालिए।
Ka = 1/3। P = ½ × (1/3) × 18 × 4² = ½ × 6 × 16 = 48 kN/m। यह आधार से 4 ÷ 3 = 1.33 m ऊपर लगता है।
आम गलतियाँ
- ताकत के लिए कुल प्रतिबल लेना। ताकत प्रभावी प्रतिबल σ′ = σ − u पर निर्भर है।
- यह सोचना कि बहुत छिद्रों वाली चिकनी मिट्टी तेज़ बहाव देती है। उसके छिद्र बहुत छोटे हैं, इसलिए k बहुत कम है।
- भूल जाना कि मिट्टी का दबाव H² से बढ़ता है, H से नहीं। ऊँचाई दुगनी तो धक्का चौगुना।
- धक्के को बीच की ऊँचाई पर मान लेना। त्रिभुज वाले दबाव में यह आधार से H/3 पर लगता है।