हाइड्रोकार्बन क्या है?
हाइड्रोकार्बन ऐसा यौगिक है जिसमें केवल दो तत्व होते हैं: कार्बन और हाइड्रोजन। कार्बन दूसरे कार्बन से जुड़ सकता है, इसलिए अणु छोटे या बहुत लंबे हो सकते हैं।
- ऐल्केन: केवल एकल आबंध, CnH2n+2 (जैसे प्रोपेन C3H8)।
- ऐल्कीन: एक द्विआबंध C=C, CnH2n (जैसे प्रोपीन C3H6)।
- साइक्लोऐल्केन: एकल आबंध, पर छल्ले के रूप में, CnH2n।
हाइड्रोकार्बन कहाँ से मिलते हैं?
ज़्यादातर हाइड्रोकार्बन कच्चे तेल (पेट्रोलियम) और प्राकृतिक गैस से मिलते हैं। ये लाखों साल में समुद्र के छोटे पौधों और जीवों से बने। कच्चा तेल मिश्रण है, इसलिए इसे अलग करना पड़ता है।
प्रभाजी आसवन। कच्चे तेल को गर्म करके भाप बनाते हैं और ऐसे ऊँचे टावर में भेजते हैं जो नीचे गर्म और ऊपर ठंडा है। हर हाइड्रोकार्बन तब तक ऊपर उठता है जब तक इतना ठंडा न हो जाए कि फिर द्रव बन जाए। छोटे अणुओं का क्वथनांक कम होता है, इसलिए वे ऊपर पहुँचते हैं। बड़े अणुओं का क्वथनांक ज़्यादा होता है, इसलिए वे नीचे रुक जाते हैं। हर द्रव समूह को प्रभाज (fraction) कहते हैं।
| प्रभाज | कार्बन | मुख्य उपयोग |
|---|---|---|
| रिफ़ाइनरी गैस | C1–C4 | रसोई गैस (LPG) |
| पेट्रोल | C5–C10 | कार, स्कूटर का ईंधन |
| डीज़ल | C11–C20 | बस, ट्रक, रेल का ईंधन |
| बिटुमेन | C20 से ज़्यादा | सड़क, छत की परत |
क्रैकिंग। हमें लंबी शृंखलाएँ ज़रूरत से ज़्यादा और छोटी कम मिलती हैं। इसलिए लंबी शृंखला को बहुत गर्म करते हैं (उत्प्रेरक के साथ) और वह टूट जाती है। उदाहरण: C12H26 → C8H18 + C4H8। एक टुकड़ा काम का ऐल्केन (पेट्रोल) है, दूसरा ऐल्कीन है जिससे प्लास्टिक बनता है।
अन्य तरीके: ऐल्कीन में हाइड्रोजन जोड़कर ऐल्केन बनता है (C2H4 + H2 → C2H6), और ऐल्कोहॉल से पानी निकालकर ऐल्कीन।
उपयोग और पर्यावरण पर असर
उपयोग। ईंधन (रसोई गैस, पेट्रोल, डीज़ल, विमान ईंधन), प्लास्टिक, रेशे, रंग और दवाओं का कच्चा माल (एथीन, प्रोपीन जैसे ऐल्कीन), विलायक, और सड़क के लिए बिटुमेन।
जलना (दहन)। पर्याप्त हवा हो तो हाइड्रोकार्बन से कार्बन डाइऑक्साइड, पानी और खूब ऊष्मा मिलती है: C3H8 + 5 O2 → 3 CO2 + 4 H2O। हवा कम हो तो कार्बन मोनोऑक्साइड (ज़हरीली गैस) और काली कालिख बनती है।
समस्याएँ। CO2 हवा में गर्मी रोकती है और ग्लोबल वार्मिंग बढ़ाती है। वाहन का ईंधन जलने से धुंध (स्मॉग) बनती है। तेल रिसाव से समुद्री जीव मरते हैं। कच्चा तेल नवीकरणीय नहीं है। इसलिए ईंधन बचाओ, सार्वजनिक वाहन चुनो और प्लास्टिक का पुनःचक्रण करो।
साइक्लोऐल्केन: छल्ले वाले हाइड्रोकार्बन
कार्बन शृंखला के दोनों सिरे जुड़ जाएँ तो साइक्लोऐल्केन बनता है। इसका सामान्य सूत्र CnH2n है। हर कार्बन पर दो H होते हैं, इसलिए उतने ही कार्बन वाले ऐल्केन से इसमें 2 हाइड्रोजन कम होते हैं।
| नाम | कार्बन | सूत्र |
|---|---|---|
| साइक्लोप्रोपेन | 3 | C3H6 |
| साइक्लोब्यूटेन | 4 | C4H8 |
| साइक्लोपेंटेन | 5 | C5H10 |
| साइक्लोहेक्सेन | 6 | C6H12 |
नाम = "साइक्लो" + ऐल्केन का नाम। साइक्लोऐल्केन का सूत्र ऐल्कीन (CnH2n) जैसा ही होता है, इसलिए दोनों समावयवी हैं। साइक्लोहेक्सेन आम विलायक है। छोटे छल्ले (3 और 4) तनाव में रहते हैं और जल्दी अभिक्रिया करते हैं; 5 और 6 वाले स्थिर हैं। ऐल्केन की तरह साइक्लोऐल्केन जलते हैं और प्रतिस्थापन अभिक्रिया देते हैं; साइक्लोप्रोपेन खुलकर शृंखला भी बन सकता है।
आँकड़ों से सूत्र निकालना
1. आपेक्षिक घनत्व से। मोलर द्रव्यमान M = D × M(संदर्भ गैस)। हाइड्रोजन के लिए M = 2 × D(H2)। वायु के लिए M ≈ 29 × D(वायु)।
2. प्रतिशत से। हर प्रतिशत को परमाणु द्रव्यमान (C = 12, H = 1) से भाग दो और सबसे सरल अनुपात निकालो। यह मूलानुपाती सूत्र है। फिर असली मोलर द्रव्यमान को उसके द्रव्यमान से भाग देकर गुणक पाओ।
3. जलाने के आँकड़ों से। CO2 के मोल = कार्बन के मोल; H2O के मोल × 2 = हाइड्रोजन के मोल।
करके देखो: 3D में 4 कार्बन चुनो। शृंखला में H गिनो (10) और छल्ले में (8)। पहले 5 कार्बन का अनुमान लगाओ, फिर जाँचो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ऐल्केन: CnH2n+2; ऐल्कीन और साइक्लोऐल्केन: CnH2n
- M = D(H2) × 2; M = D(वायु) × 29
- पूर्ण दहन: CxHy + (x + y/4) O2 → x CO2 + (y/2) H2O
- मोल n = द्रव्यमान ÷ मोलर द्रव्यमान; STP पर 1 मोल गैस = 22.4 L
- क्रैकिंग: लंबा ऐल्केन → छोटा ऐल्केन + ऐल्कीन
हल किए गए उदाहरण
1. एक हाइड्रोकार्बन में द्रव्यमान से 85.7% कार्बन और 14.3% हाइड्रोजन है। मूलानुपाती सूत्र निकालो।
C: 85.7 ÷ 12 = 7.14। H: 14.3 ÷ 1 = 14.3। अनुपात C : H = 7.14 : 14.3 = 1 : 2। मूलानुपाती सूत्र = CH2।
2. वही गैस हाइड्रोजन से 21 गुना भारी है। उसका अणुसूत्र निकालो।
M = 2 × 21 = 42। CH2 का द्रव्यमान = 14। 42 ÷ 14 = 3, इसलिए सूत्र C3H6 (प्रोपीन या साइक्लोप्रोपेन)।
3. साइक्लोपेंटेन का सूत्र और मोलर द्रव्यमान क्या है?
n = 5, इसलिए C5H10। M = 5 × 12 + 10 × 1 = 70 g/mol।
4. 2 L प्रोपेन पूरा जलता है। उसी स्थिति में कितने आयतन CO2 बनेगी?
C3H8 + 5 O2 → 3 CO2 + 4 H2O। 1 आयतन प्रोपेन से 3 आयतन CO2, इसलिए 2 L से 6 L।
5. 0.1 मोल हाइड्रोकार्बन जलने पर 0.4 मोल CO2 और 0.4 मोल H2O देता है। सूत्र निकालो।
प्रति मोल: 4 मोल CO2 यानी 4 C। 4 मोल H2O यानी 8 H। सूत्र C4H8।
6. 16 g मेथेन के पूरे दहन से कितने द्रव्यमान की CO2 बनेगी?
CH4 + 2 O2 → CO2 + 2 H2O। 16 g CH4 = 1 मोल, तो 1 मोल CO2 = 44 g।
7. STP पर 2.24 L गैसीय हाइड्रोकार्बन का द्रव्यमान 2.8 g है। सूत्र निकालो।
n = 2.24 ÷ 22.4 = 0.1 मोल। M = 2.8 ÷ 0.1 = 28 g/mol। CH2 का द्रव्यमान 14, तो 28 ÷ 14 = 2: C2H4 (एथीन)।
आम गलतियाँ
- छल्ले के लिए CnH2n+2 लिख देना। छल्ला CnH2n होता है।
- सोचना कि क्रैकिंग में छोटे अणु जुड़ते हैं। इसमें लंबे अणु टूटकर छोटे बनते हैं।
- कहना कि बड़े अणु टावर के ऊपर पहुँचते हैं। ऊपर छोटे, हल्के अणु पहुँचते हैं।
- भूल जाना कि हवा कम हो तो CO2 नहीं, ज़हरीली CO और कालिख बनती है।