सूचना माध्यम क्या हैं
सूचना माध्यम वह रूप है जो संदेश को भेजने वाले से पाने वाले तक ले जाता है। चार मूल प्रकार: लिखावट (शब्द), चित्र (फ़ोटो, चित्र, चार्ट), आवाज़ (बोली, संगीत) और वीडियो (चलते चित्र, अक्सर आवाज़ के साथ)।
हर माध्यम किसी चीज़ में अच्छा है। लिखावट सटीक है और खोजने में आसान। चित्र आकार और रंग जल्दी दिखाते हैं। आवाज़ लहज़ा और भाव दिखाती है। वीडियो समय के साथ बदलाव दिखाता है। अख़बार, रेडियो, टीवी और वेबसाइट जैसे जनसंचार माध्यम बहुत लोगों तक पहुँचते हैं, फ़ोन कॉल एक तक।
आज लगभग सारे माध्यम डिजिटल रूप में रखे और भेजे जाते हैं। इसीलिए आगे डिजिटाइज़ेशन पढ़ते हैं।
डिजिटाइज़ेशन: माध्यम को संख्याओं में बदलना
असली दुनिया एनालॉग है: ध्वनि का दबाव और रोशनी चिकने ढंग से बदलते हैं। कंप्यूटर सिर्फ़ संख्याएँ रख सकता है, इसलिए डिजिटाइज़ करना पड़ता है।
सैंपलिंग: लहर को समान समय-अंतर पर नापो। हर नाप एक नमूना है। प्रति सेकंड नमूनों की संख्या सैंपलिंग दर है। क्वांटाइज़िंग: हर नमूने को पास की उस पूर्ण संख्या में गोल करना जो कंप्यूटर रख सके। प्रति नमूना बिट की संख्या बिट गहराई है।
चित्र को छोटे वर्गों में बाँटकर डिजिटाइज़ करते हैं जिन्हें पिक्सेल कहते हैं, और हर पिक्सेल का रंग-संख्या रखते हैं। वीडियो तेज़ी से चलते चित्रों (फ़्रेम) और आवाज़ की श्रृंखला है।
गुणवत्ता और आकार: ज़्यादा नमूने या ज़्यादा पिक्सेल असली की बेहतर नक़ल हैं पर ज़्यादा जगह माँगते हैं। फ़ाइल का आकार = नमूनों की संख्या × प्रति नमूना बिट। संपीड़न (compression) दोहराया या कम पता चलने वाला डेटा हटाकर फ़ाइल छोटी करता है।
प्रस्तुति की तकनीकें
प्रस्तुति का मतलब है संदेश को ऐसे ढालना कि पाने वाला उसे जल्दी समझे और वही महसूस करे जो आप चाहते हो। संदेश नहीं बदलता, सिर्फ़ दिखाने का ढंग बदलता है।
काम के औज़ार: आकार (मुख्य बात बड़ी, ब्योरा छोटा), रंग का अंतर (हल्के पर गहरा, या लाल पर सफ़ेद, फीके पर फीका कभी नहीं), चिह्न और चित्र (एक चिह्न कई शब्दों की जगह ले सकता है), लेआउट (जुड़ी चीज़ें साथ रखो, ख़ाली जगह छोड़ो) और हलचल या आवाज़ (कम इस्तेमाल करो, और संदेश पाने का अकेला रास्ता कभी न बनाओ)।
काम के हिसाब से माध्यम चुनो। नक़्शा चित्र में, नियम लिखावट में, धुन आवाज़ में, विज्ञान का प्रयोग वीडियो में बेहतर। हमेशा पाने वाले को सोचो: बच्चे के लिए साफ़ संदेश, दूर से दिखने वाला पोस्टर, या ऐसा व्यक्ति जो रंग नहीं पहचानता।
करके देखो: एक संदेश, दो तरीक़े
3D में आख़िरी चरण पर जाओ। बड़े अक्षर, फिर गहरा रंग, फिर चिह्न, एक-एक करके चालू करो और साफ़ी की संख्या देखो। कौन सा स्विच सबसे ज़्यादा काम करता है? फिर नमूनों का स्लाइडर 4 से 32 तक चलाओ और देखो कि संख्याएँ और बिट कैसे बदलते हैं।
घर पर: दो कार्डों पर "हाथ धोएँ" लिखो। एक सादा रखो और दूसरे में बड़े अक्षर, गहरा रंग और छोटा चित्र बनाओ। दोस्त को 3 मीटर दूर से दोनों दिखाओ। कौन सा पढ़ पाता है?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- फ़ाइल का आकार (बिट) = नमूनों की संख्या × प्रति नमूना बिट
- सैंपलिंग दर = प्रति सेकंड नमूने (हर्ट्ज़)
- चित्र का आकार (बिट) = पिक्सेल × प्रति पिक्सेल बिट
- ज़्यादा नमूने/पिक्सेल → बेहतर गुणवत्ता, बड़ी फ़ाइल
हल किए गए उदाहरण
1. आवाज़ को हर सेकंड 8,000 बार नापा जाता है और हर नमूने में 8 बिट हैं। 1 सेकंड के लिए कितने बिट रखे जाते हैं?
8,000 × 8 = 64,000 बिट (यानी 8,000 बाइट)।
2. उसी सैंपलिंग (8,000 नमूने/सेकंड, 8 बिट) से 10 सेकंड की क्लिप का आकार निकालो।
1 सेकंड = 64,000 बिट, इसलिए 10 सेकंड = 640,000 बिट = 80,000 बाइट।
3. एक श्वेत-श्याम चित्र 100 पिक्सेल चौड़ा और 50 पिक्सेल ऊँचा है, प्रति पिक्सेल 1 बिट। कितने बिट?
पिक्सेल = 100 × 50 = 5,000। बिट = 5,000 × 1 = 5,000।
4. प्रति सेकंड नमूने दुगने कर दें तो गुणवत्ता और फ़ाइल का आकार क्या होगा?
गुणवत्ता असली लहर के और पास आएगी और फ़ाइल का आकार दुगना हो जाएगा।
5. एक पोस्टर में सफ़ेद दीवार पर पतले स्लेटी अक्षर हैं। प्रस्तुति की तकनीक से तीन सुधार बताओ।
अक्षर बहुत बड़े करो (आकार), काले या गहरे लाल रंग में करो (अंतर), और मुख्य शब्द के पास एक सरल चिह्न लगाओ।
6. एक चित्र 200 × 100 पिक्सेल का है और प्रति पिक्सेल 8 बिट हैं। आकार बाइट में निकालो।
पिक्सेल = 20,000। बिट = 20,000 × 8 = 160,000। बाइट = 160,000 ÷ 8 = 20,000।
आम गलतियाँ
- डिजिटल आवाज़ को चिकनी लहर समझना। वह संख्याओं की सूची है, चिकनापन सिर्फ़ पास की नक़ल है।
- यह मानना कि ज़्यादा नमूनों से फ़ाइल छोटी होती है। ज़्यादा नमूने यानी बड़ी फ़ाइल।
- हल्की पृष्ठभूमि पर हल्का रंग यह सोचकर रखना कि कोमल लगेगा। संदेश पढ़ना मुश्किल हो जाता है।
- बहुत ज़्यादा हलचल और आवाज़ जोड़ना। ज़्यादा प्रभाव संदेश दिखाने के बजाय छुपा देते हैं।