सूचना की तीन विशेषताएँ
सूचना वह अर्थ है जो हमें शब्दों, संख्याओं, चित्रों या आवाज़ों जैसे संकेतों से मिलता है। यह हाथ में पकड़ी जा सकने वाली चीज़ों से अलग व्यवहार करती है।
- अवशिष्ट: सूचना बाँटने के बाद भी आपके पास रहती है। सेब दे दिया तो चला गया, पर दोस्त को बताई ख़बर आपके पास रहती है।
- नक़ल योग्य: उसकी नक़ल जल्दी और कम ख़र्च में बन जाती है, और नक़ल असल जितनी ही अच्छी होती है।
- फैलने वाली: सूचना बहुत लोगों तक बहुत तेज़ पहुँच सकती है, ख़ासकर इंटरनेट से।
दो और बातें काम की हैं: सूचना लंबे समय तक सँभाली जा सकती है, और कोई उसे बदल या मिटा भी सकता है, इसलिए वह ग़लत भी हो सकती है।
ये विशेषताएँ क्यों मायने रखती हैं
अच्छी ख़बरें और पाठ मिनटों में लाखों लोगों तक पहुँच सकते हैं। बुरी ख़बर, अफ़वाहें, ग़लत तथ्य और निजी फ़ोटो भी इसी तरह फैलते हैं और उन्हें वापस बुलाना बहुत मुश्किल है। जब बहुत लोग नक़ल कर लेते हैं तो हर नक़ल इकट्ठा नहीं हो सकती। इसलिए: पोस्ट करने से पहले सोचो, आगे भेजने से पहले जाँचो, और किसी की निजी जानकारी बाँटने से पहले पूछो।
मीडिया और उसकी विशेषताएँ
माध्यम (बहुवचन: मीडिया) वह वाहक है जो सूचना को भेजने वाले से पाने वाले तक ले जाता है। उदाहरण: काग़ज़, आवाज़ और रेडियो, टीवी, किताबें, पोस्टर, वेबसाइट, फ़ोन।
हर माध्यम की अपनी ताक़त है:
- छपा काग़ज़: लंबे समय टिकता है, बिजली नहीं चाहिए, पर धीरे फैलता है।
- आवाज़ और रेडियो: तेज़ है और न पढ़ पाने वालों के लिए भी चलता है, पर रिकॉर्ड न करें तो ग़ायब हो जाता है।
- स्क्रीन और इंटरनेट: तेज़ है, पाठ, चित्र, आवाज़ और वीडियो साथ ला सकता है, पूरी दुनिया तक पहुँच सकता है, पर बिजली और नेटवर्क चाहिए।
माध्यम पाठक, संदेश और स्थिति के हिसाब से चुनो। माध्यम संदेश को भी आकार देता है: उसी ख़बर की छोटी पोस्ट और लंबा लेख अलग लगते हैं।
समस्या समाधान की प्रक्रिया
समस्या वह दूरी है जो हमारे पास की स्थिति और चाही हुई स्थिति के बीच होती है। पाँच चरण अपनाओ और ज़रूरत हो तो फिर घूम आओ।
- समस्या समझो। एक वाक्य में कहो: क्या चाहिए?
- जानकारी जुटाओ। भरोसेमंद स्रोतों से तथ्य खोजो और जाँचो।
- विकल्प सोचो। एक से ज़्यादा रास्ते लिखो। फ़ायदे-नुक़सान की तुलना करो।
- चुनो और करो। सबसे अच्छा विकल्प चुनकर करो, या पहले छोटा परीक्षण करो।
- जाँचो और सुधारो। क्या चला? नहीं चला तो पिछले चरण पर लौटो।
कंप्यूटर तथ्य रखने, छाँटने और चार्ट में दिखाने में मदद करता है। पर समस्या क्या है और नतीजा ठीक लगता है या नहीं, यह इंसान तय करता है।
करके देखो
दोस्तों से कहो कि एक छोटा वाक्य एक व्यक्ति को बताए, वह अगले को, इस तरह चार लोग। आख़िरी वाक्य की पहले से तुलना करो। क्या बदला? फैलते समय सूचना ऐसे ही बदलती है। फिर किसी असली समस्या पर पाँच सीढ़ियाँ आज़माओ, जैसे "हमारे बुलेटिन बोर्ड को कोई नहीं देखता"।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- अवशिष्ट: बाँटने के बाद भी देने वाले के पास सूचना रहती है
- नक़ल योग्य: नक़ल ≈ असल, ख़र्च ≈ बहुत कम
- फैलने वाली: 1 → 3 → 9 → 27 (हर व्यक्ति 3 और को बताए)
- समस्या समाधान चक्र: समझो → जुटाओ → विकल्प सोचो → चुनो और करो → जाँचो और सुधारो
हल किए गए उदाहरण
1. दोस्त के साथ बाँटते समय गाने की फ़ाइल आम से अलग क्यों है?
आम दे दिया तो आपके पास नहीं रहा। गाने की फ़ाइल भेजी तो आपके पास भी रही और दोस्त को नक़ल मिल गई। सूचना अवशिष्ट और नक़ल योग्य है, आम नहीं।
2. एक अफ़वाह 1 व्यक्ति से शुरू होती है। हर व्यक्ति 3 नए लोगों को बताता है। 4 चक्कर के बाद पहले व्यक्ति को गिनकर कुल कितने लोग जानते हैं?
चक्कर 0: 1। चक्कर 1: 3। चक्कर 2: 9। चक्कर 3: 27। चक्कर 4: 81। कुल = 1 + 3 + 9 + 27 + 81 = 121 लोग।
3. आज रात गाँव वालों को बाढ़ की चेतावनी देने के लिए छपा पर्चा, लाउडस्पीकर या लंबा वेब पेज, कौन-सा सबसे अच्छा है? क्यों?
लाउडस्पीकर (आवाज़)। यह तेज़ है, न पढ़ पाने वालों तक भी पहुँचता है और फ़ोन नहीं चाहिए। पर्चा धीमा है और वेब पेज के लिए नेटवर्क और पढ़ने का समय चाहिए।
4. एक स्कूल प्लास्टिक की बोतलें घटाना चाहता है। समस्या समाधान के हर चरण के लिए एक काम बताइए।
समझो: कूड़ेदान में बहुत बोतलें हैं। जुटाओ: एक हफ़्ते बोतलें गिनो। विकल्प: रीफ़िल केंद्र, स्टील की बोतल, जमा राशि। चुनो: रीफ़िल केंद्र, एक कक्षा में आज़माओ। जाँचो: फिर गिनो और सुधारो।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि सूचना बाँटने पर चली जाती है। वह अवशिष्ट है, आपके पास रहती है।
- मानना कि नक़ल असल से कमज़ोर होती है। डिजिटल नक़ल बिल्कुल वैसी ही होती है।
- फैलाना आसान है, इसलिए सच जाँचे बिना संदेश आगे भेज देना।
- समस्या समझे और तथ्य जुटाए बिना सीधे हल पर कूद जाना।