द्वितीयक वस्त्र उत्पादों के प्रकार
प्राथमिक वस्त्र उत्पाद रेशा, धागा या कपड़ा है। द्वितीयक उत्पाद कपड़े को काटकर, सिलकर या जोड़कर बनता है।
- पहनावा (परिधान): कमीज़, पतलून, वर्दी, खेल के कपड़े, साड़ी और किमोनो।
- घरेलू वस्त्र: परदे, चादर, तौलिये, क़ालीन, गद्दी के कवर।
- औद्योगिक और तकनीकी वस्त्र: कन्वेयर बेल्ट, छनना-कपड़ा, सीट बेल्ट, तंबू, बैग, पाल, पट्टी (बैंडेज)।
हर उपयोग को अलग गुण चाहिए: तौलिये को नरमी, सीट बेल्ट को मज़बूती, सभागार के परदों को आग से सुरक्षा।
परिधान निर्माण
- डिज़ाइन और नमूना। डिज़ाइनर रेखाचित्र बनाता है, नमूना सिला जाता है और ख़रीदार उसे मंज़ूर करता है।
- पैटर्न बनाना। हर नाप के लिए काग़ज़ के पैटर्न बनते हैं। ग्रेडिंग से पैटर्न दूसरी नापों के लिए बड़ा या छोटा किया जाता है।
- मार्कर और कटाई। पैटर्न के टुकड़े कपड़े पर इस तरह रखते हैं कि कपड़ा कम से कम बेकार जाए (मार्कर)। कई परतें बिछाकर साथ काटते हैं।
- सिलाई। कारीगर या मशीनें टुकड़ों को क्रम से जोड़ती हैं, हर एक अपना एक काम करता है (सिलाई लाइन)।
- फिनिशिंग। धागे काटना, प्रेस करना, जाँचना, तह करना, टैग लगाना और पैक करना।
गुणवत्ता कई चरणों पर जाँची जाती है, सिर्फ़ अंत में नहीं।
गुणवत्ता जाँच और नियंत्रण
गुणवत्ता जाँच किसी गुण को नापती है। गुणवत्ता नियंत्रण इन नतीजों से उत्पाद को नियमों के भीतर रखता है।
- मज़बूती: पट्टी को टूटने तक खींचकर भार नोट करना (तन्यता जाँच)।
- रंग की पक्काई: रगड़ना, धोना या धूप में रखना और देखना कि रंग उड़ता है या दूसरे कपड़े पर लगता है।
- सिकुड़न: धोने से पहले और बाद में नापना।
- अन्य: घिसाई, रोएँ बनना (पिलिंग), सिलाई की मज़बूती, कपड़े का नाप और वज़न।
नियंत्रण में हर खेप (बैच) से थोड़े नमूने जाँचते हैं। बहुत नमूने फेल हों तो खेप रोक ली जाती है और कारण ठीक किया जाता है। लेबल पर रेशे की जानकारी और धुलाई के चिह्न ख़रीदार को यह बताते हैं।
परंपरागत वस्त्र
कई क्षेत्र पुराने वस्त्र हुनर सँभाले हुए हैं। जापान के कुछ जाने-माने उदाहरण:
- कसुरी: बुनाई से पहले धागे बाँधकर रंगे जाते हैं, इसलिए कपड़े में हल्का धुँधला पैटर्न बनता है (भारत और इंडोनेशिया के इकत जैसा)।
- शिबोरी: रंगाई से पहले कपड़ा मोड़ा, बाँधा या टाँका जाता है, इसलिए बँधे भाग हल्के रहते हैं (टाई-डाई या बाँधनी जैसा)।
- नील की रंगाई (आई-ज़ोमे): एक पौधे का रंग जो कपड़े को गहरा नीला करता है।
- निशिजिन-ओरी: क्योटो में बुना भरे-पूरे पैटर्न वाला रेशम।
- यूज़ेन: रेशम पर रंग रोकने वाली लेई से बना हाथ से चित्रित डिज़ाइन।
ये हुनर धीमे हैं और कौशल माँगते हैं, इसलिए हर टुकड़े की क़द्र होती है। नए कारीगरों को सिखाकर और आधुनिक डिज़ाइनों से इन्हें ज़िंदा रखा जाता है।
खुद करके देखो
3D में भार वाले स्लाइडर से पट्टी खींचो और टूटने का बिंदु खोजो। फिर धारी, चौखाना या बिंदी चुनो। घर पर तीन कपड़ों का देखभाल-लेबल पढ़ो और रेशा व चिह्न लिखो। एक सूती कपड़े को रबर बैंड से मोड़कर बाँधो और हल्की चाय या खाने के रंग में डुबोकर शिबोरी जैसा पैटर्न बनाओ (किसी बड़े की मदद से)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- कपड़ा (प्राथमिक) → कटकर और सिलकर → उत्पाद (द्वितीयक)
- परिधान लाइन: डिज़ाइन → पैटर्न → कटाई → सिलाई → फिनिश
- पास यदि भार ≤ टूटने का भार; फेल यदि भार > टूटने का भार
- सिकुड़न % = (पुरानी लंबाई − नई लंबाई) ÷ पुरानी लंबाई × 100
हल किए गए उदाहरण
1. इन्हें दो समूहों में बाँटो, प्राथमिक या द्वितीयक: धागा, चादर, सूती कपड़े का थान, स्कूल की कमीज़।
प्राथमिक: धागा, सूती कपड़े का थान। द्वितीयक: चादर, स्कूल की कमीज़ (कपड़े को काटकर और सिलकर बनीं)।
2. 50 cm कपड़ा धोने के बाद 47 cm रह गया। सिकुड़न कितने प्रतिशत है?
सिकुड़न = (50 − 47) ÷ 50 × 100 = 3 ÷ 50 × 100 = 6 प्रतिशत।
3. सीट बेल्ट की पट्टी कम से कम 20 kN सहे। जाँच में 24, 22 और 19 kN मिले। कौन पास हुए?
24 और 22 पास हैं क्योंकि वे 20 या उससे ज़्यादा हैं। 19 फेल है क्योंकि वह 20 से कम है।
4. कटर 40 परतें बिछाता है और एक मार्कर में 3 कमीज़ों का पैटर्न है। एक साथ कितनी कमीज़ें कटती हैं?
हर परत से 3 कमीज़ × 40 परतें = 120 कमीज़ें।
आम गलतियाँ
- कपड़े को द्वितीयक उत्पाद कहना। कपड़ा प्राथमिक है; द्वितीयक उत्पाद उससे बनते हैं।
- गुणवत्ता नियंत्रण को सिर्फ़ अंतिम जाँच समझना। यह कई चरणों पर और नमूनों से होता है।
- जाँच और नियंत्रण को मिला देना। जाँच नापती है; नियंत्रण नतीजों से फ़ैसला लेता और सुधार करता है।
- कसुरी में बुनाई के बाद रंगाई मानना। कसुरी में धागे बुनाई से पहले रंगे जाते हैं।