रेशा, धागा और कपड़ा
रेशा (तंतु) पतला, बाल जैसा धागा है। यह वस्त्र की सबसे छोटी इकाई है। कताई में रेशों को ऐंठकर धागा (सूत) बनाया जाता है। ऐंठन से रेशे एक-दूसरे को पकड़ते हैं, इसलिए धागा मज़बूत होता है। फिर धागों से कपड़ा बनता है।
सूती और ऊन जैसे छोटे रेशे स्टेपल कहलाते हैं। रेशम और ज़्यादातर संश्लेषित जैसे बहुत लंबे रेशे फ़िलामेंट कहलाते हैं।
प्राकृतिक और मानव-निर्मित रेशे
प्राकृतिक रेशे
- पादप (सेलुलोज़): सूत (कपास के डोडे से), लिनन (अलसी के तने से), जूट (पटसन), नारियल रेशा (जटा)। पानी सोखते हैं, पहनने में ठंडे।
- जांतव (प्रोटीन): ऊन (भेड़, बकरी, ऊँट के बाल), रेशम (रेशम कीट का कोकून)। ऊन गर्म है क्योंकि हवा फँसाती है; रेशम चिकना और चमकीला।
मानव-निर्मित रेशे
- पुनर्जनित: प्राकृतिक सेलुलोज़ (लकड़ी की लुगदी) को घोलकर फिर से बनाया — रेयॉन (विस्कोस), ऐसीटेट।
- संश्लेषित: पूरी तरह रसायनों से, ज़्यादातर पेट्रोलियम से — पॉलिएस्टर, नायलॉन, ऐक्रेलिक, स्पैन्डेक्स।
संश्लेषित रेशे मज़बूत, हल्के, जल्दी सूखने वाले और कम सिलवट वाले हैं, पर पसीना कम सोखते और आग के पास पिघलते हैं। प्राकृतिक रेशे आरामदेह हैं, पर सिकुड़ और सिलवट पड़ सकती है। मिश्रित (ब्लेंड) रेशे जैसे पॉलीकॉट (पॉलिएस्टर + सूत) दोनों के गुण मिलाते हैं।
कपड़ा बनाना: बुनाई, निटिंग और अबुने वस्त्र
- बुनाई (weaving): करघे पर धागों के दो समूह समकोण पर आर-पार होते हैं। ताना लंबाई में, बाना चौड़ाई में। प्रकार: सादी (एक ऊपर, एक नीचे — मलमल, पॉपलिन), टवील (तिरछी रेखाएँ — डेनिम), साटन (लंबे तैरते धागे, चमकीला)। बुना कपड़ा मज़बूत और आकार में रहता है।
- निटिंग (बुनना): एक धागा आपस में फँसे फंदों की पंक्तियाँ बनाता है, हाथ से या मशीन से। खिंचता और आरामदेह: टी-शर्ट, स्वेटर, मोज़े।
- अबुने (non-woven): धागा बनाए बिना रेशे सीधे गर्मी, गोंद, दबाव या नमी से जुड़ते हैं — नमदा, मास्क, थैले।
- अन्य: गुँथाई (ब्रेडिंग), लेस, गाँठ लगाना (मैक्रेमे, जाल)।
परिसज्जा (फ़िनिश)
परिसज्जा वह उपचार है जो कपड़े का रूप, स्पर्श या काम बदलता है।
- रूप: विरंजन (सफ़ेद करना), रंगाई (रेशे के भीतर तक रंग, जैसे बाँधनी), छपाई (सिर्फ़ सतह पर रंग, जैसे ठप्पा या स्क्रीन छपाई), मर्सीकरण (सूती को चमक और मज़बूती)।
- स्पर्श: मुलायम बनाना, कलफ़ (माँड़) से कड़ा करना, ब्रश करके रोएँदार बनाना।
- उपयोग: जलरोधी, सिलवट-रोधी, सिकुड़न-रोधी, अग्नि-मंदक, कीट-रोधी।
कपड़ों की धुलाई: देखभाल और रखरखाव
पहले केयर लेबल पढ़ें: उसमें धुलाई का तापमान, ब्लीच, सुखाने और इस्त्री के चिह्न होते हैं।
सफ़ाई के साधन
- साबुन: तेल और क्षार से बना; मृदु जल में अच्छा, कठोर जल में झाग कम और मैल बनता है।
- डिटर्जेंट: संश्लेषित; कठोर और ठंडे पानी में भी काम करता है।
- सहायक: ब्लीच (दाग़/सफ़ेदी), नील और ऑप्टिकल ब्राइटनर, माँड़, फ़ैब्रिक सॉफ़्टनर।
धुलाई के तरीक़े
- घर्षण (रगड़ना, ब्रश): सूती जैसे मज़बूत कपड़े।
- मसलना और दबाना: ऊन, रेशम, नाज़ुक कपड़े।
- चूषण (ऊपर-नीचे दबाना) और मशीन धुलाई।
रेशे के अनुसार
- सूती/लिनन: गर्म पानी (40–60 °C), कोई भी डिटर्जेंट, निचोड़ सकते हैं; हल्का नम रहते तेज़ इस्त्री।
- ऊन: गुनगुना पानी (≤ 30 °C), हल्का साबुन, रगड़ना-निचोड़ना नहीं (नमदा बनकर सिकुड़ती है); छाँव में समतल सुखाएँ।
- रेशम: गुनगुना पानी, हल्का साबुन, जल्दी धुलाई, छाँव में सुखाएँ, हल्की गर्म इस्त्री।
- संश्लेषित: हल्का गर्म पानी (≤ 40 °C), टपककर सुखाएँ, कम गर्म इस्त्री।
दाग़ ताज़ा ही हटाएँ: ख़ून के लिए ठंडा पानी, तेल के लिए पहले टैल्क फिर डिटर्जेंट, जंग के लिए नींबू और नमक।
कपड़े संभालकर रखना
- सिर्फ़ साफ़ और पूरी तरह सूखे कपड़े रखें। मैल और पसीना कीड़ों को बुलाते हैं; नमी से फफूँद लगती है।
- अलमारी सूखी और हवादार रखें; रखने से पहले धूप दिखाएँ।
- ऊन और रेशम को कीड़ों (मॉथ, सिल्वरफ़िश) से बचाने के लिए कागज़ में लिपटी नेफ़्थलीन गोलियाँ, नीम की पत्तियाँ या लौंग रखें।
- कमीज़ और ड्रेस टाँगें; बुने (निटेड) कपड़े तह करें ताकि खिंचें नहीं; साड़ी लपेटकर रखें या तह की रेखा बदलें ताकि मोड़ पर न फटे।
- मौसमी कपड़ों को कुछ महीनों में धूप-हवा दिखाएँ।
घर पर करके देखें
पुराने सूती कपड़े से एक धागा निकालकर उसकी ऐंठन खोलिए: छोटे-छोटे रेशे दिखेंगे। फिर आवर्धक लेंस से टी-शर्ट देखिए: फंदे (निटिंग)। रूमाल देखिए: ताना-बाना (बुनाई)। अंत में तीन कपड़ों के केयर लेबल पढ़कर उन्हें गर्म-धुलाई और हल्की-धुलाई के ढेरों में बाँटिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- रेशा → (कताई) → धागा → (बुनाई / निटिंग / बंधन) → कपड़ा → (परिसज्जा) → पोशाक
- प्राकृतिक: पादप (सूत, लिनन, जूट) | जांतव (ऊन, रेशम)
- मानव-निर्मित: पुनर्जनित (रेयॉन) | संश्लेषित (पॉलिएस्टर, नायलॉन, ऐक्रेलिक)
- बुनाई: ताना (लंबाई में) × बाना (चौड़ाई में); सादी, टवील, साटन
- धुलाई: सूती गर्म + घर्षण; ऊन/रेशम गुनगुना + दबाना; संश्लेषित हल्का गर्म + टपककर सुखाना
- भंडारण: साफ़ + पूरा सूखा + कीड़ों से बचाव
हल किए गए उदाहरण
1. गर्म पानी में रगड़कर धोने से ऊनी स्वेटर क्यों सिकुड़ जाता है?
ऊन के रेशों पर छोटे शल्क होते हैं। गर्मी, साबुन और रगड़ से शल्क आपस में फँस जाते हैं (नमदा बनना), इसलिए स्वेटर सिकुड़कर कड़ा हो जाता है। गुनगुने पानी में हल्के हाथ से दबाकर धोएँ।
2. क्रिकेट खिलाड़ी की टी-शर्ट के लिए कौन-सी कपड़ा-रचना ठीक है और क्यों?
निटेड कपड़ा, क्योंकि फंदे शरीर की गति के साथ खिंचते हैं और हवा आने देते हैं। पॉलिएस्टर-सूती निट जल्दी सूखता भी है।
3. सफ़ेद सूती कमीज़ पर खाने का तेल लग गया। दाग़ कैसे हटाएँ?
तुरंत अतिरिक्त तेल पोंछें, टैल्क या चॉक छिड़ककर तेल सोखने दें, फिर डिटर्जेंट से रगड़कर गर्म पानी में धोएँ (सूती सह लेता है)।
4. वर्गीकृत कीजिए: जूट, नायलॉन, रेशम, रेयॉन।
जूट: प्राकृतिक पादप। रेशम: प्राकृतिक जांतव। रेयॉन: मानव-निर्मित, पुनर्जनित। नायलॉन: मानव-निर्मित, संश्लेषित।
आम गलतियाँ
- रेयॉन को लकड़ी से बनने के कारण प्राकृतिक मानना। यह मानव-निर्मित (पुनर्जनित) है।
- ताना और बाना उलट देना। ताना लंबाई में, बाना चौड़ाई में।
- ऊनी कपड़े रगड़ना या निचोड़ना। वे सिकुड़कर नमदा बन जाते हैं।
- हल्के नम कपड़े अलमारी में रख देना। अँधेरे में फफूँद और बदबू होती है।