CBSE कक्षा 10 गृह विज्ञान (064)
अध्याय: 6
1. मानव वृद्धि और विकास – II
मानव वृद्धि और विकास – II
जल्द आ रहा है
2. संसाधनों का प्रबंधन
संसाधनों का प्रबंधन
- संसाधन प्रबंधन: जो है उसका सबसे अच्छा उपयोग – संसाधन वह है जिससे लक्ष्य पूरा हो। मानवीय संसाधन व्यक्ति में होते हैं (समय, ऊर्जा, ज्ञान, कौशल, दृष्टिकोण); अमानवीय संसाधन चीज़ें हैं (धन, सामग्री, जगह, औज़ार)। संसाधन व्यक्तिगत या साझा, प्राकृतिक या सामुदायिक हो सकते हैं। ये सीमित, उपयोगी और एक-दूसरे के बदले काम आने वाले हैं, इसलिए इनका प्रबंधन ज़रूरी है। प्रबंधन प्रक्रिया: योजना, संगठन, क्रियान्वयन, नियंत्रण, मूल्यांकन। परिवार सबसे ज़्यादा समय, धन और ऊर्जा का प्रबंधन समय योजना, बजट और कार्य सरलीकरण से करते हैं।
3. भोजन और व्यक्तिगत स्वच्छता
भोजन और व्यक्तिगत स्वच्छता
- पोषण (Nutrition) – पोषण वह तरीक़ा है जिससे हम भोजन के पदार्थ पाते और इस्तेमाल करते हैं। शरीर को छह तरह के पोषक तत्व चाहिए: कार्बोहाइड्रेट और वसा (मुख्य रूप से ऊर्जा), प्रोटीन (वृद्धि और मरम्मत), विटामिन और खनिज (थोड़ी मात्रा, शरीर को सही चलाने के लिए), और पानी; साथ में पाचन के लिए रेशा। कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन लगभग 17 kJ प्रति ग्राम, वसा लगभग 37 kJ प्रति ग्राम देते हैं। संतुलित आहार सब पोषक तत्व सही मात्रा में देता है, और अंदर आई ऊर्जा लगभग ख़र्च ऊर्जा के बराबर होनी चाहिए।
4. आहार आयोजन
आहार आयोजन
- पोषण (Nutrition) – पोषण वह तरीक़ा है जिससे हम भोजन के पदार्थ पाते और इस्तेमाल करते हैं। शरीर को छह तरह के पोषक तत्व चाहिए: कार्बोहाइड्रेट और वसा (मुख्य रूप से ऊर्जा), प्रोटीन (वृद्धि और मरम्मत), विटामिन और खनिज (थोड़ी मात्रा, शरीर को सही चलाने के लिए), और पानी; साथ में पाचन के लिए रेशा। कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन लगभग 17 kJ प्रति ग्राम, वसा लगभग 37 kJ प्रति ग्राम देते हैं। संतुलित आहार सब पोषक तत्व सही मात्रा में देता है, और अंदर आई ऊर्जा लगभग ख़र्च ऊर्जा के बराबर होनी चाहिए।
5. खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता शिक्षा
खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता शिक्षा
- उपभोक्ता अधिकार – उपभोक्ता वह है जो इस्तेमाल के लिए वस्तुएँ और सेवाएँ ख़रीदता है। विक्रेता कम तौल, मिलावट, ज़्यादा दाम या झूठे विज्ञापन से उपभोक्ता को ठग सकते हैं। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम छह अधिकार देता है: सुरक्षा, सूचना, चुनाव, सुनवाई, निवारण और उपभोक्ता शिक्षा। गुणवत्ता चिह्न और तीन स्तर के उपभोक्ता आयोग न्याय दिलाने में मदद करते हैं।
6. वस्त्रों की देखभाल
वस्त्रों की देखभाल
- वस्त्र: रेशे से कपड़ा, और उसकी देखभाल – वस्त्र रेशों से बनते हैं। प्राकृतिक रेशे पौधों (सूत, लिनन, जूट) या जंतुओं (ऊन, रेशम) से मिलते हैं; मानव-निर्मित रेशे पुनर्जनित (रेयॉन) या संश्लेषित (पॉलिएस्टर, नायलॉन, ऐक्रेलिक) होते हैं। रेशों की कताई से धागा, और धागे से बुनाई (ताना-बाना), निटिंग (फंदे) या अबुने तरीक़ों (नमदा, बंधन) से कपड़ा बनता है। विरंजन, रंगाई, छपाई और जलरोधी जैसी परिसज्जा रूप और उपयोग सुधारती है। हर रेशे की धुलाई अलग (पानी का तापमान, साबुन, हाथ का तरीक़ा) होती है और कपड़े साफ़, पूरे सूखे और कीड़ों-फफूँद से बचाकर रखने चाहिए।