घर की योजना
घर तीन इलाकों में बनता है:
- साझा (सार्वजनिक) इलाका: प्रवेश, बैठक, भोजन-कक्ष। मेहमान यहाँ आ सकते हैं।
- निजी इलाका: शयनकक्ष और पढ़ाई का कमरा। शांत और प्रवेश से दूर।
- सेवा इलाका: रसोई, स्नानघर, भंडार। रसोई और स्नानघर पास-पास रखो ताकि पानी और निकासी की पाइपें छोटी रहें।
साथ में सोचो: धूप और ताज़ी हवा (आमने-सामने की दीवारों पर खिड़कियाँ, ताकि हवा आर-पार जाए), रसोई से भोजन-कक्ष तक छोटा रास्ता, भंडार की जगह, और बच्चों व बुज़ुर्गों की ज़रूरतें (फिसलनी सीढ़ी नहीं, शयनकक्ष के पास स्नानघर)। आकार लोगों की गिनती और आकार और नाप की योजना पाठ से तय करो।
दफ़्तर की योजना
दफ़्तर वह जगह है जहाँ बहुत लोग मिलकर अच्छे से काम करें। ध्यान देने की बातें:
- कार्य-स्थान: लगभग 1.4 m चौड़ी मेज़, कंप्यूटर के लिए काफ़ी गहराई, और हर व्यक्ति के लिए रास्तों समेत लगभग 5 से 8 m² फ़र्श।
- रास्ते: कतारों के बीच लगभग 1.2 m, ताकि दो लोग निकल सकें; मुख्य रास्ता और चौड़ा।
- बैठक-कक्ष अलग, ताकि बातचीत से दूसरों को रुकावट न हो, और ध्यान के लिए शांत इलाका।
- सेवाएँ: स्वागत, शौचालय, पैंट्री, भंडार, प्रिंटर पास में पर कर्मचारियों के बीच नहीं।
- स्क्रीन पर चमक के बिना अच्छी रोशनी, ताज़ी हवा और हर मेज़ पर बिजली के प्वाइंट।
खुला लेआउट लचीला होता है; अलग कमरे निजता देते हैं। कई दफ़्तर दोनों मिलाते हैं।
सार्वजनिक भवनों की योजना
पुस्तकालय, स्टेशन, स्कूल, अस्पताल और सभागार जैसे सार्वजनिक भवन एक साथ बहुत अलग-अलग लोग इस्तेमाल करते हैं: बच्चे, बुज़ुर्ग और दिव्यांग भी। इसलिए ये नियम चलते हैं:
- चौड़ा, खुला प्रवेश और ऐसे संकेत जिन्हें कोई भी समझे।
- बाधा-रहित पहुँच: सीढ़ी के साथ रैम्प। हल्की ढलान लगभग 1:12 होती है, यानी 0.3 m ऊँचाई के लिए 3.6 m लंबाई। हैंडरेल और न फिसलने वाला फ़र्श।
- चौड़े गलियारे और हॉल, ताकि भीड़ न अटके।
- आपातकालीन निकास: कम से कम दो, अलग-अलग जगह, हमेशा खुले और बिना रुकावट, साफ़ संकेत के साथ।
- सेवा-स्थान (काउंटर, शौचालय) आसानी से मिलें, इंतज़ार के लिए बैठने की जगह।
जगहों के बीच क्या बदलता है
हर जगह में वही बातें आती हैं, बस महत्व अलग होता है:
- निजता: घर में सबसे ज़्यादा, दफ़्तर में बीच की, सार्वजनिक हॉल में सबसे कम।
- भीड़ की क्षमता: सार्वजनिक भवन में सबसे ज़्यादा, दफ़्तर में बीच की, घर में सबसे कम।
- आवाजाही: घर में छोटी और निजी, दफ़्तर में कतारों में व्यवस्थित, सार्वजनिक भवन में चौड़ी और संकेत वाली।
- सुरक्षा के नियम जितने ज़्यादा लोग, उतने कड़े।
हमेशा शुरू करो: कौन इस्तेमाल करेगा, कितने लोग और क्या करेंगे।
करके देखो: तीन जगहों का नक्शा
हर नक्शा चौकोर कागज़ पर बनाओ (1 खाना = 1 m)। (1) चार लोगों के परिवार का छोटा घर: साझा, निजी और सेवा इलाके तीन रंगों में दिखाओ। (2) 8 लोगों का छोटा दफ़्तर: 1.4 m की मेज़ें, 1.2 m का रास्ता, एक बैठक-कक्ष। (3) पुस्तकालय का हॉल: चौड़ा प्रवेश, रैम्प, काउंटर और अलग-अलग दीवारों पर दो निकास। बचने का रास्ता हरे रंग से दिखाओ। फिर ऊपर के 3D से अपना नक्शा मिलाओ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- घर के इलाके = साझा + निजी + सेवा
- दफ़्तर का क्षेत्रफल ≈ लोग × 5 से 8 m² (रास्ते समेत)
- कतार की लंबाई = मेज़ों की संख्या × मेज़ की चौड़ाई
- रैम्प 1:12 → लंबाई = 12 × ऊँचाई
- सार्वजनिक भवन: कम से कम 2 निकास
हल किए गए उदाहरण
1. दफ़्तर की एक कतार में 1.4 m की 5 मेज़ें हैं। कतार कितनी लंबी है?
5 × 1.4 = 7 m।
2. 20 लोगों के दफ़्तर में हर एक को 6 m² मिलते हैं। कुल फ़र्श का क्षेत्रफल?
20 × 6 = 120 m²।
3. सीढ़ी 0.3 m ऊँची है। 1:12 का रैम्प कितना लंबा चाहिए?
लंबाई = 12 × 0.3 = 3.6 m।
4. घर में रसोई और स्नानघर पास-पास क्यों रखते हैं?
दोनों को पानी और निकासी चाहिए, इसलिए पाइपें छोटी और सस्ती होती हैं और एक ही दीवार में दोनों की पाइप आती है।
5. पुस्तकालय के हॉल में अलग-अलग जगह दो निकास क्यों चाहिए?
आग से एक निकास बंद हो जाए तो लोग दूसरे से निकल सकते हैं। दूर-दूर दो निकास से भीड़ जल्दी भी निकलती है।
आम गलतियाँ
- शयनकक्ष मुख्य प्रवेश या शोर वाली रसोई के पास रखना।
- दफ़्तर के रास्ते इतने तंग कि लोग निकल न सकें।
- सार्वजनिक भवन में सिर्फ सीढ़ी, रैम्प नहीं।
- फर्नीचर रखकर या ताला लगाकर निकास रोकना।