भूकंप में इमारत क्यों हिलती है
भूकंप ज़मीन को आगे-पीछे हिलाता है। इमारत की नींव ज़मीन के साथ हिलती है। ऊपर का हिस्सा जड़त्व के कारण वहीं रहना चाहता है (चीज़ें अपनी गति बदलने का विरोध करती हैं)। इसलिए इमारत बार-बार इधर-उधर मुड़ती है। इसे झूलना (sway) कहते हैं।
इमारत जितनी ऊँची, ऊपर उतना ज़्यादा हिलता है। नुक़सान ज़्यादा झूलने, जोड़ टूटने और नरम ज़मीन से होता है। कमज़ोर मंज़िल पहले टूट सकती है। भूकंप-डिज़ाइन का लक्ष्य सरल है: इमारत को नुक़सान हो भी जाए तो लोगों को चोट न लगे।
तरकीब 1: भूकंप-प्रतिरोध (मज़बूत बनो)
इस तरकीब (जापानी 耐震, ताइशिन) में इमारत को मज़बूत और कड़ा बनाया जाता है।
- शियर दीवारें और ब्रेस: दीवारें और तिरछी छड़ें जो ढाँचे को झुकने नहीं देतीं।
- बँधे हुए जोड़: बीम और कॉलम मज़बूती से जुड़े ताकि एक साथ काम करें।
- तन्य हिस्से: स्टील और ठीक से बने RC अचानक टूटे बिना मुड़ सकते हैं।
- संतुलन: सीधा, बराबर आकार बेहतर है। कोई नरम कमज़ोर मंज़िल न हो, जैसे खुली पार्किंग वाली मंज़िल।
इमारत झटका सहती है, इसलिए बहुत बड़े भूकंप में कुछ नुक़सान हो सकता है।
तरकीब 2: बेस आइसोलेशन, तरकीब 3: डैम्पर
बेस आइसोलेशन (免震, मेनशिन): इमारत परतदार रबर बेयरिंग पर टिकती है, यानी रबर और स्टील की परतें। रबर बगल की ओर नरम है, इसलिए ज़मीन इमारत के नीचे खिसक जाती है और ऊपर की इमारत लगभग स्थिर रहती है। अक्सर इमारत के चारों ओर थोड़ी ख़ाली जगह भी रखते हैं ताकि वह हिल सके।
कंपन-नियंत्रण (制震, सेइशिन): इमारत के अंदर लगे डैम्पर झूलने की ऊर्जा सोख लेते हैं, जैसे गाड़ी का शॉक-एब्ज़ॉर्बर। इनमें तेल, ख़ास रबर या मुड़ने वाली धातु होती है। झूलना जल्दी थम जाता है।
तुलना: आइसोलेशन सबसे अच्छा बचाता है पर सबसे महँगा है; डैम्पर सस्ते हैं और ऊँची इमारतों को हवा में भी मदद करते हैं; मज़बूत ढाँचा दोनों की नींव है।
घरों की भूकंप-रोधी मरम्मत
कई पुराने घर तब बने थे जब सख़्त नियम नहीं थे। उनमें भारी छत, पतली दीवारें और कमज़ोर जोड़ हो सकते हैं। उन्हें सुरक्षित बनाने को सिस्मिक रीइनफ़ोर्समेंट या रेट्रोफ़िटिंग (耐震補強) कहते हैं।
पहले विशेषज्ञ भूकंप-जाँच करता है (दीवारें, जोड़, नींव और ज़मीन देखता है)। फिर आम उपाय:
- दीवारों में ब्रेस या मज़बूत बोर्ड लगाना,
- धातु के कनेक्टर से ढाँचे को नींव से बाँधना,
- कमज़ोर जोड़ मज़बूत करना,
- भारी छत की जगह हल्की छत लगाना,
- चटकी या कमज़ोर नींव ठीक करना।
इससे घर भूकंप-रोधी बनते हैं (耐震化)। यह दोबारा बनाने से सस्ता है और जान बचाता है।
करके देखो
3D में: आख़िरी चरण में तीव्रता 80% पर ले जाओ। देखो चारों में कौन सबसे कम झूलती है। कौन लगभग नहीं हिलती?
घर पर: एक लंबी किताब मेज़ पर खड़ी करो और मेज़ को हल्का हिलाओ। अब किताब को ट्रे के नीचे रखे कंचों पर रखो: मेज़ हिलती है पर किताब ज़्यादा स्थिर रहती है। यही बेस आइसोलेशन है। अब दो ऊपर-नीचे रखी किताबों के बीच रबर बैंड लगाओ: वे कम झूलती हैं क्योंकि बैंड झटके को धीमा करता है, जैसे डैम्पर।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- जड़त्व: इमारत स्थिर रहना चाहती है, इसलिए झूलती है
- प्रतिरोध (ताइशिन): कड़ा ढाँचा + ब्रेस + तन्य जोड़
- आइसोलेशन (मेनशिन): इमारत के नीचे रबर बेयरिंग
- कंपन-नियंत्रण (सेइशिन): डैम्पर झूलने की ऊर्जा घटाते हैं
- रेट्रोफ़िट = जाँच, फिर ब्रेस, बंधन, हल्की छत, मज़बूत नींव
हल किए गए उदाहरण
1. भूकंप में ऊपरी मंज़िल निचली मंज़िल से ज़्यादा क्यों हिलती है?
निचली मंज़िल ज़मीन के साथ चलती है। ऊपरी मंज़िलें जड़त्व से पीछे रहती हैं और नींव से दूर हैं, इसलिए ज़्यादा झूलती हैं।
2. कौन-सी तरकीब झटके को इमारत तक पहुँचने ही नहीं देती: ब्रेस, रबर बेयरिंग या डैम्पर?
रबर बेयरिंग (बेस आइसोलेशन)। रबर बगल की ओर नरम है, इसलिए ज़मीन खिसकती है और इमारत लगभग स्थिर रहती है।
3. एक पुराने लकड़ी के घर की छत भारी मिट्टी के खपरैल की है और दीवारें पतली हैं। दो सुधार बताओ।
दीवारों में ब्रेस या बोर्ड लगाओ और भारी छत की जगह हल्की छत लगाओ। ढाँचे को नींव से बाँधना भी मदद करता है।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि कड़ी इमारत हमेशा सुरक्षित है। बहुत कड़ी इमारत में भी नुक़सान हो सकता है, आइसोलेशन या डैम्पर ज़्यादा काम कर सकते हैं।
- आइसोलेशन और डैम्पर को उलझाना। आइसोलेशन इमारत को ज़मीन से अलग करता है; डैम्पर अंदर झूलना सोखते हैं।
- यह मानना कि भूकंप सिर्फ़ हिलने से मारता है। गिरते हिस्से, कमज़ोर जोड़ और ढहना नुक़सान करते हैं।
- यह मानना कि पुराने घर तोड़ने ही पड़ेंगे। रेट्रोफ़िटिंग से कई घर बहुत सुरक्षित हो जाते हैं।