गति के तल और अक्ष
किसी भी गति को समझाने के लिए हम तीन काल्पनिक चपटी चादरें मानते हैं, जिन्हें तल (plane) कहते हैं। हर तल का एक अक्ष (axis) होता है, यानी वह रेखा जिसके चारों ओर अंग घूमता है। अक्ष हमेशा अपने तल से समकोण पर होता है।
- सैजिटल तल (बाएँ-दाएँ बाँटता है), फ़्रंटल (अनुप्रस्थ) अक्ष: मोड़ना और सीधा करना। उदाहरण: दौड़ना, किक, आगे की कलाबाज़ी, बाइसेप कर्ल।
- फ़्रंटल तल (आगे-पीछे बाँटता है), सैजिटल अक्ष: अंग को शरीर से दूर ले जाना या पास लाना। उदाहरण: जंपिंग जैक, कार्टव्हील।
- ट्रांसवर्स तल (ऊपर-नीचे बाँटता है), लंबवत (longitudinal) अक्ष: घूमना। उदाहरण: डिस्कस थ्रो, गोल्फ़ स्विंग, कूद में पूरा चक्कर।
तरकीब: जोड़ में एक छड़ी घुसी सोचो। जोड़ छड़ी (अक्ष) पर घूमता है और चादर (तल) के अंदर चलता है।
शरीर में लीवर
लीवर एक कड़ी छड़ है जो धुरी पर घूमती है। शरीर में हड्डी छड़ है, जोड़ धुरी है, मांसपेशी बल (effort) देती है और शरीर का वज़न या कोई चीज़ भार (load) है।
- पहली श्रेणी (धुरी बीच में): सिर हिलाना (हाँ में)। ट्राइसेप्स से कोहनी सीधी करना भी।
- दूसरी श्रेणी (भार बीच में): पंजों के बल उठना; पंजे का अगला हिस्सा धुरी, शरीर का वज़न बीच में, पिंडली की मांसपेशी एड़ी पर खींचती है।
- तीसरी श्रेणी (बल बीच में): बाइसेप कर्ल, घुटने से किक। शरीर के ज़्यादातर लीवर ऐसे ही हैं।
यांत्रिक लाभ
यांत्रिक लाभ = बल-भुजा ÷ भार-भुजा। दूसरी श्रेणी में यह 1 से ज़्यादा है: कम बल से भारी चीज़ उठती है। तीसरी श्रेणी में 1 से कम है: बल ज़्यादा लगता है, पर भार तेज़ और दूर तक चलता है, जो फेंकने और मारने के लिए बढ़िया है। बल्ला या रैकेट भार-भुजा और लंबी कर देता है।
न्यूटन के नियम, घर्षण और संतुलन
- पहला नियम (जड़त्व): कोई बल न लगे तो चीज़ रुकी रहती है या उसी चाल से सीधी चलती रहती है। पेनल्टी स्पॉट पर रखी गेंद किक तक वहीं रहती है।
- दूसरा नियम: F = m × a। ज़्यादा बल, ज़्यादा त्वरण; भारी शरीर को ज़्यादा बल चाहिए। साथ ही आवेग = बल × समय = संवेग में बदलाव। उतरते समय घुटने मोड़ने से समय बढ़ता है और बल घटता है।
- तीसरा नियम: हर क्रिया की बराबर और उलटी प्रतिक्रिया। धावक ब्लॉक को पीछे धकेलता है, ज़मीन की प्रतिक्रिया बल उसे आगे धकेलता है।
घर्षण
घर्षण फिसलने का विरोध करने वाला बल है। स्पाइक, स्टड और रबर के तले घर्षण बढ़ाकर पकड़ देते हैं। स्केट्स और स्की घर्षण घटाते हैं।
गुरुत्व केंद्र, संतुलन और साम्यावस्था
गुरुत्व केंद्र वह बिंदु है जहाँ पूरे शरीर का वज़न लगता हुआ लगता है। शरीर स्थिर तब है जब गुरुत्व रेखा (केंद्र से सीधी नीचे की रेखा) आधार के अंदर गिरे। ज़्यादा स्थिरता = नीचा केंद्र, चौड़ा आधार, रेखा आधार के बीच में, ज़्यादा द्रव्यमान। स्थैतिक साम्यावस्था: रुके हुए संतुलन में (हैंडस्टैंड)। गतिक साम्यावस्था: एक जैसी चाल से चलते हुए संतुलन (समान चाल से साइकिल चलाना)।
रेखीय और कोणीय गति
रेखीय गति: पूरा शरीर एक ही दिशा में बराबर दूरी चलता है (धावक)। ज़रूरी बातें: दूरी, विस्थापन, चाल = दूरी ÷ समय, वेग, त्वरण और संवेग = द्रव्यमान × वेग।
कोणीय गति: अक्ष के चारों ओर घूमना (बार पर जिम्नास्ट)। इसके लिए बलाघूर्ण (torque) चाहिए: बलाघूर्ण = बल × लंबवत दूरी।
- जड़त्व आघूर्ण (I): घुमाव बदलना कितना मुश्किल है। द्रव्यमान अक्ष से दूर = बड़ा I। सिकुड़ने से I छोटा होता है।
- कोणीय वेग (ω): कितनी तेज़ी से घूम रहा है।
- कोणीय संवेग L = I × ω। हवा में बाहरी बलाघूर्ण नहीं होता, इसलिए L स्थिर रहता है: सिकुड़ो → तेज़ घुमाव; फैलो → धीमा।
सामान्य गति में दोनों मिलती हैं: साइकिल आगे बढ़ती है और पहिए घूमते हैं।
प्रक्षेप्य गति
प्रक्षेप्य वह चीज़ या शरीर है जो हवा में सिर्फ़ गुरुत्व (और हवा के खिंचाव) के असर में चलता है: गोला, लंबी कूद का खिलाड़ी, फ़ुटबॉल। बिना हवा के रास्ता एक वक्र होता है जिसे परवलय कहते हैं।
- छोड़ने की चाल: सबसे बड़ा कारक। चाल दोगुनी, तो (बिना हवा) दूरी लगभग चार गुना।
- छोड़ने का कोण: ज़मीन से छोड़ें तो 45° सबसे अच्छा। ऊँचाई से छोड़ें (गोला लगभग 2 m से) तो थोड़ा कम, करीब 40°। लंबी कूद में 20°–25°, क्योंकि खड़े कोण पर चाल बचती नहीं।
- छोड़ने की ऊँचाई: ज़्यादा ऊँचाई, ज़्यादा उड़ान-समय, ज़्यादा दूरी।
बिना हवा के (ज़मीन से ज़मीन): उड़ान समय t = 2u sinθ ÷ g, परास R = u² sin2θ ÷ g, अधिकतम ऊँचाई H = u² sin²θ ÷ 2g, g = 9.81 m/s²।
तरल यांत्रिकी: खिंचाव, उत्थान और स्पिन
हवा और पानी तरल (fluid) हैं। इनमें चलने पर खिंचाव (drag) लगता है जो गति के उलटा धकेलता है। खिंचाव बढ़ता है चाल से (लगभग चाल के वर्ग से), सामने के क्षेत्रफल से, आकार और सतह से। साइकिल सवार झुकते हैं, तैराक शरीर सीधा रखते हैं, हेलमेट नुकीले बनते हैं।
उत्थान और बरनौली
जहाँ हवा तेज़ बहती है वहाँ दाब कम होता है (बरनौली का सिद्धांत)। दाब के अंतर से उत्थान (lift) बनता है। सही कोण पर फेंका डिस्कस या भाला इसी से दूर जाता है।
स्पिन: मैग्नस प्रभाव
घूमती गेंद अपने साथ हवा घुमाती है। एक तरफ़ हवा तेज़ होती है, वहाँ दाब कम होता है और गेंद उसी तरफ़ मुड़ती है। टॉपस्पिन से टेनिस गेंद जल्दी गिरती है, बैकस्पिन से गोल्फ़ गेंद देर तक तैरती है, साइडस्पिन से फ़्री किक दीवार के पार मुड़ती है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
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हल किए गए उदाहरण
1. तल और अक्ष बताओ: (क) आगे की कलाबाज़ी, (ख) कार्टव्हील, (ग) ऊँची कूद में पूरा चक्कर।
(क) सैजिटल तल, फ़्रंटल अक्ष। (ख) फ़्रंटल तल, सैजिटल अक्ष। (ग) ट्रांसवर्स तल, लंबवत अक्ष।
2. बाइसेप कर्ल में मांसपेशी कोहनी से 4 cm पर और डंबल 32 cm पर है। यांत्रिक लाभ निकालो और मतलब बताओ।
MA = 4 ÷ 32 = 0.125। यह 1 से कम है, इसलिए मांसपेशी को डंबल के वज़न से 8 गुना ज़्यादा खींचना पड़ता है, पर हाथ 8 गुना ज़्यादा दूर और तेज़ चलता है।
3. 60 kg की धाविका 480 N के कुल बल से आगे बढ़ती है। उसका त्वरण क्या है?
a = F ÷ m = 480 ÷ 60 = 8 m/s²।
4. 0.45 kg की फ़ुटबॉल रुकी हुई से 20 m/s पर पहुँचती है। पैर 0.01 s तक छूता है। संवेग में बदलाव और औसत बल निकालो।
Δp = 0.45 × 20 = 9 kg m/s। F = Δp ÷ t = 9 ÷ 0.01 = 900 N।
5. गोताखोर I = 12 kg m² और 2 rad/s से घूमती है। सिकुड़कर I = 4 kg m² करती है। नया घुमाव?
L = 12 × 2 = 24 स्थिर रहता है। नया ω = 24 ÷ 4 = 6 rad/s, यानी तीन गुना तेज़।
6. गेंद ज़मीन से 15 m/s पर 45° पर किक की गई। हवा छोड़कर परास और उड़ान समय निकालो (g = 9.81 m/s²)।
R = 225 × sin90° ÷ 9.81 ≈ 22.9 m। t = 2 × 15 × 0.707 ÷ 9.81 ≈ 2.16 s।
7. गोला फेंकने वाला 45° की जगह लगभग 38°–42° क्यों रखता है?
गोला करीब 2 m ऊँचाई से छूटता है और नीचे गिरता है, इसलिए थोड़ा चपटा कोण उस अतिरिक्त समय का फ़ायदा उठाता है। साथ ही कम कोण पर खिलाड़ी ज़्यादा तेज़ धक्का दे पाता है, और चाल सबसे ज़रूरी है।
आम गलतियाँ
- तल और अक्ष को मिला देना। अक्ष तल से समकोण पर होता है: सैजिटल तल का अक्ष फ़्रंटल अक्ष है।
- लीवर की श्रेणी सिरे वाली चीज़ से बताना। श्रेणी बीच वाली चीज़ से बताओ: धुरी = पहली, भार = दूसरी, बल = तीसरी।
- हमेशा 45° को सबसे अच्छा कोण मानना। यह सिर्फ़ ज़मीन से और बिना हवा के सही है।
- सोचना कि सिकुड़ने पर कोणीय संवेग बढ़ता है। संवेग स्थिर रहता है; I घटने से सिर्फ़ ω बढ़ता है।