National Year 13 Physical Education
अध्याय: 5
1. 3.2.1 Exercise physiology
Diet and nutrition · Training methods · Injury prevention and rehabilitation
- खेल पोषण: ऊर्जा, आहार और जल-संतुलन – खिलाड़ी को सही समय पर सही खाना और पानी चाहिए। वज़न स्थिर रखने के लिए ऊर्जा अंदर (खाना) और ऊर्जा बाहर (कसरत + शरीर का काम) बराबर होनी चाहिए। कार्बोहाइड्रेट मुख्य ईंधन है और ग्लाइकोजन बनकर जमा होता है; प्रोटीन मांसपेशी की मरम्मत करता है; वसा लंबी धीमी कसरत का ईंधन है; विटामिन, खनिज और रेशे शरीर चलाते हैं। पसीने से शरीर के वज़न का 2% पानी जाते ही प्रदर्शन गिरता है। अच्छे आहार के साथ ज़्यादातर सप्लीमेंट ज़रूरी नहीं, और प्रतिबंधित दवाएँ (डोपिंग) ख़तरनाक और नियम के ख़िलाफ़ हैं।
- खेल प्रशिक्षण: सिद्धांत और विधियाँ – खेल प्रशिक्षण योजना बनाकर किया गया व्यायाम है, जो शरीर को खेल के लिए फ़िट बनाता है। हर सत्र में वार्म-अप (धड़कन, शरीर का तापमान और लचीलापन धीरे-धीरे बढ़ाना), मुख्य अभ्यास और कूल-डाउन (धड़कन धीरे कम करना, लैक्टिक अम्ल जैसे अपशिष्ट हटाना) होते हैं। अच्छा प्रशिक्षण सिद्धांतों पर चलता है: विशिष्टता (अपने खेल के लिए अभ्यास), प्रगति और अधिभार (धीरे-धीरे ज़्यादा, ताकि शरीर ढल जाए), उलटाव (अभ्यास छोड़ा तो फ़िटनेस घटती है), ऊब से बचना (अभ्यास बदलते रहो), साथ में आराम। FITT मात्रा तय करता है: कितनी बार, कितना तेज़, कितनी देर, कौन-सा अभ्यास। तीव्रता हृदय गति से मापी जाती है: अधिकतम ≈ 220 − उम्र; 60–80% एरोबिक, 80–90% एनारोबिक। मुख्य विधियाँ: लगातार, अंतराल, फ़ार्टलेक, सर्किट, वज़न, प्लायोमेट्रिक और लचीलापन। साल को तैयारी, प्रतियोगिता और विश्राम चरणों में बाँटा जाता है (अवधिकरण)।
- खेल चोटें: कैसे लगती हैं, कैसे बचें, कैसे ठीक करें – खेल या व्यायाम से शरीर को हुआ नुकसान खेल चोट है। तीव्र (acute) चोट अचानक लगती है (टखना मुड़ना); दीर्घकालिक या अति-उपयोग चोट धीरे-धीरे बनती है (शिन स्प्लिंट)। कोमल ऊतक चोट मांसपेशी (खिंचाव), स्नायुबंधन (मोच) और त्वचा की होती है; कठोर ऊतक चोट हड्डी (अस्थिभंग) और जोड़ (विस्थापन) की। जोखिम अंदर से (फ़िटनेस, पुरानी चोट) और बाहर से (मौसम, उपकरण) आता है। वार्म-अप, सही तकनीक, सही सामान, नियम और समझदारी से बढ़ता अभ्यास ज़्यादातर चोटें रोकते हैं। मोच-खिंचाव पर RICE, फिर धीरे-धीरे पुनर्वास।
2. 3.2.2 Biomechanical movement
Biomechanical principles and levers · Linear, angular and projectile motion · Fluid mechanics
- खेलों में जैव यांत्रिकी (स्पोर्ट्स बायोमैकेनिक्स) – जैव यांत्रिकी यानी चलते-दौड़ते शरीर की भौतिकी। हर गति तीन तलों (सैजिटल, फ़्रंटल, ट्रांसवर्स) में और तीन अक्षों के चारों ओर होती है। हड्डियाँ, जोड़ और मांसपेशियाँ लीवर की तरह काम करती हैं: धुरी, बल और भार। शरीर के ज़्यादातर लीवर तीसरी श्रेणी के हैं: ताक़त कम, पर गति तेज़ और बड़ी। न्यूटन के तीन नियम बताते हैं कि दौड़ शुरू कैसे होती है और ज़मीन हमें आगे कैसे धकेलती है; घर्षण पकड़ देता है। संतुलन गुरुत्व केंद्र, आधार और गुरुत्व रेखा पर टिका है। घूमने में बलाघूर्ण (torque) घुमाव शुरू करता है, और हवा में कोणीय संवेग स्थिर रहता है, इसलिए बाँहें अंदर करने पर घुमाव तेज़ होता है। फेंकी गई गेंद या कूदता खिलाड़ी प्रक्षेप्य है: चाल, कोण और ऊँचाई दूरी तय करते हैं। हवा और पानी खिंचाव (drag) देते हैं; स्पिन से गेंद मुड़ती है (मैग्नस प्रभाव)।
3. 3.2.3 Sport psychology
Personality, attitudes, arousal and anxiety · Aggression and motivation · Social facilitation and group dynamics · Goal setting, attribution and self-efficacy · Leadership and stress management
- खेल मनोविज्ञान: खेल के पीछे का दिमाग़ – खेल मनोविज्ञान बताता है कि मन खेल पर कैसे असर डालता है। व्यक्तित्व से पता चलता है कि हमें कैसा खेल पसंद है। प्रेरणा ईंधन है: अंदर से (मज़ा) या बाहर से (इनाम)। उत्तेजना (arousal) यानी आप कितने "चालू" हैं: बहुत कम या बहुत ज़्यादा दोनों नुकसान करते हैं, बीच में सबसे अच्छा (उल्टा U)। चिंता को साँस, कल्पना और अच्छी आत्म-बातचीत से शांत करते हैं। SMART लक्ष्य साफ़ सीढ़ी देते हैं। आक्रामकता पर काबू और टीम में मिलकर मेहनत ज़रूरी है।
4. 3.2.4 Sport, society and technology
Concepts of physical activity and sport · Development of elite performers · Ethics, violence and drugs in sport · Sport and the law · Commercialisation and media · Technology in sport
- खेल और समाज – खेल समाजशास्त्र देखता है कि खेल और समाज एक-दूसरे को कैसे बदलते हैं। शारीरिक गतिविधि खुले खेल-कूद से शुरू होकर शारीरिक मनोरंजन और फिर खेल (स्पोर्ट) तक जाती है, जिसमें तय नियम, संगठन और गंभीर मुकाबला होता है। आधुनिक खेल ढीले-ढाले स्थानीय लोक खेलों से बने: औद्योगिक युग में लिखित नियम, क्लब और शासी निकाय आए, और लगभग 1950 के बाद टीवी, पैसे और यात्रा ने खेल को वैश्विक और पेशेवर बना दिया। आज खेल, मीडिया और प्रायोजक एक "सुनहरे त्रिकोण" में बँधे हैं। हर समूह बराबर नहीं खेलता: पैसा, समय, सुविधा, भेदभाव और रूढ़ियाँ बाधा बनती हैं, इसलिए सरकारें और क्लब महिलाओं, दिव्यांगों, बुज़ुर्गों और कम आय वाले परिवारों की बराबर पहुँच के लिए काम करते हैं। खेल का अँधेरा पक्ष भी है, यानी विचलन, जैसे डोपिंग, हिंसा और मैच फ़िक्सिंग, जिसे नियम, जाँच और क़ानून रोकते हैं। खेल सेहत, पहचान और एकता बना सकता है, पर बाँट भी सकता है।
- खेल विज्ञान और तकनीक – खेल विज्ञान माप, आँकड़ों और नए उपकरणों से खिलाड़ी को बेहतर बनाता है और खेल को निष्पक्ष रखता है। हम प्रदर्शन देखते हैं, मापते हैं (समय, चाल, हृदय गति), वीडियो और डेटा का विश्लेषण करते हैं, योजना बनाते हैं, और जाँचते हैं कि नई तकनीक निष्पक्ष है या नहीं। इससे कई नौकरियाँ बनती हैं: कोच, एनालिस्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, खेल वैज्ञानिक।
5. NEA
Practical performance/coaching and analysis
- शारीरिक शिक्षा: कौशल सीखो, परखो और सुधारो – शारीरिक शिक्षा (PE) अच्छी तरह चलना-फिरना, जीवनभर सक्रिय रहना और अपना प्रदर्शन समझना सिखाती है। हर खेल कौशल के तीन चरण हैं: तैयारी, क्रियान्वयन और अनुसरण। सुधार के लिए कौशल देखो, मॉडल से तुलना करो, ताकत और कमज़ोरी पहचानो, प्रतिक्रिया लो और अभ्यास की योजना बनाओ: योजना → अभ्यास → समीक्षा → प्रतिक्रिया। लोग स्वास्थ्य, फ़िटनेस, मज़े, दोस्ती, प्रतियोगिता और मन की शांति के लिए खेलते हैं। नए खेल, क्लब, सुरक्षा और उपकरण की देखभाल जीवनभर खेलने में मदद करते हैं।