CBSE कक्षा 12 शारीरिक शिक्षा
अध्याय: 10
1. खेल आयोजनों का प्रबंधन
खेल आयोजन प्रबंधन
- खेल प्रबंधन: खेल का आयोजन – खेल प्रबंधन का मतलब है खेल की योजना बनाना, व्यवस्था करना, नेतृत्व करना और जाँचना, ताकि लोग सुरक्षित और मज़े से खेलें। प्रतियोगिता के लिए: साफ़ लक्ष्य तय करो और कौन, क्या, कब, कहाँ का जवाब दो; ढाँचा चुनो (नॉकआउट, राउंड-रॉबिन, लीग या मिला-जुला) और मैच व समय निकालो; भूमिकाएँ बाँटो और काम सूची या ऐप पर टिक करो; बजट और जोखिम योजना बनाओ; आयोजन करो; फिर मूल्यांकन और रिपोर्ट करो (योजना → करना → जाँच → सुधार)। खेल खुद भी कई स्तरों पर संगठित है: स्कूल और क्लब से ज़िला, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महासंघ तक, साथ में सरकार की खेल नीति और क्लब, व्यावसायिक जिम, स्कूल खेल व अनौपचारिक खेल जैसे रूप।
2. खेलों में बच्चे और महिलाएँ
खेलों में बच्चे और महिलाएँ
- पोस्चर (शारीरिक मुद्रा) और शारीरिक विकास – पोस्चर यानी खड़े होते, बैठते या चलते समय शरीर को रखने का तरीका। सही खड़े पोस्चर में कान, कंधा, कूल्हा, घुटना और टखना एक ही सीधी खड़ी रेखा (गुरुत्व रेखा) पर होते हैं। रीढ़ में तीन हल्के मोड़ होते हैं (गर्दन, ऊपरी पीठ, निचली पीठ) जो नरम S बनाते हैं और स्प्रिंग की तरह झटके सहते हैं। आम दोष हैं: गोल पीठ (कुब्जता/kyphosis), धँसी कमर (lordosis), सपाट पीठ, बगल का मोड़ (scoliosis) और आगे झुका सिर (टेक्स्ट नेक)। हल्के दोष स्ट्रेचिंग, मज़बूती, एरोबिक और हल्के प्रतिरोध वाले व्यायाम, अच्छी आदतों और विकास (लंबाई, भार, BMI) व शरीर के कार्यों (नाड़ी, साँस, रक्तचाप, रिकवरी) की नियमित जाँच से रोके और सुधारे जा सकते हैं।
3. जीवनशैली रोगों के निवारण हेतु योग
जीवनशैली रोगों के लिए योग
- योग: शरीर, साँस और मन का मेल – योग का अर्थ है जोड़ना: यह शरीर, साँस और मन को जोड़ता है। अष्टांग योग के 8 अंग हैं: यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि। आसन स्थिर और सुखद मुद्राएँ हैं; प्राणायाम साँस पर नियंत्रण (पूरक–कुंभक–रेचक) है; षट्कर्म छह शुद्धि क्रियाएँ हैं। नियमित योग से लचीलापन, ताक़त, संतुलन, एकाग्रता और मनोदशा सुधरती है, तनाव घटता है, और मोटापा, मधुमेह, दमा, उच्च रक्तचाप, कमर दर्द व गठिया जैसे जीवनशैली रोगों से बचाव और नियंत्रण में मदद मिलती है।
4. विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए शारीरिक शिक्षा और खेल
दिव्यांग खेल
- समावेशी खेल: सबको खेलने का मौका कैसे मिले – समावेशी खेल यानी हर कोई भाग ले सके — क्षमता, लिंग, शरीर, पृष्ठभूमि या पैसा कुछ भी हो। रुकावटें शारीरिक (सीढ़ियाँ, रैम्प नहीं), नियमों या सामान में, या लोगों की सोच में (मज़ाक, बाहर करना, हिंसा) हो सकती हैं। हम इन्हें पहुँच बनाकर, STEP मॉडल (जगह, काम, सामान, लोग) से खेल बदलकर, सबके लिए बराबर नियम बनाकर और बुरे व्यवहार के ख़िलाफ़ बोलकर हटाते हैं। पैरालंपिक और अनुकूलित खेल दिखाते हैं कि यह कितना आगे जा सकता है।
5. खेल और पोषण
खेल पोषण
- खेल पोषण: ऊर्जा, आहार और जल-संतुलन – खिलाड़ी को सही समय पर सही खाना और पानी चाहिए। वज़न स्थिर रखने के लिए ऊर्जा अंदर (खाना) और ऊर्जा बाहर (कसरत + शरीर का काम) बराबर होनी चाहिए। कार्बोहाइड्रेट मुख्य ईंधन है और ग्लाइकोजन बनकर जमा होता है; प्रोटीन मांसपेशी की मरम्मत करता है; वसा लंबी धीमी कसरत का ईंधन है; विटामिन, खनिज और रेशे शरीर चलाते हैं। पसीने से शरीर के वज़न का 2% पानी जाते ही प्रदर्शन गिरता है। अच्छे आहार के साथ ज़्यादातर सप्लीमेंट ज़रूरी नहीं, और प्रतिबंधित दवाएँ (डोपिंग) ख़तरनाक और नियम के ख़िलाफ़ हैं।
6. खेलों में परीक्षण और मापन
पुष्टि परीक्षण
- फिटनेस टेस्ट (Fitness Testing): फिटनेस के हर भाग को कैसे मापें – फिटनेस टेस्ट फिटनेस के एक घटक को मापकर एक संख्या देता है। हर घटक का अपना टेस्ट है: दम के लिए बीप टेस्ट, शक्ति के लिए हैंड ग्रिप, लचीलेपन के लिए सिट एंड रीच, गति के लिए 30 मी दौड़, फुर्ती के लिए इलिनॉय दौड़, विस्फोटक शक्ति के लिए कूद, संतुलन के लिए स्टॉर्क स्टैंड, प्रतिक्रिया के लिए रूलर ड्रॉप और शरीर संरचना के लिए BMI। अच्छा टेस्ट वैध और विश्वसनीय होता है। नतीजों की तुलना मानकों और अपने पिछले स्कोर से की जाती है।
7. खेलों में शरीर क्रिया और चोटें
व्यायाम शरीर क्रिया
- व्यायाम शरीर क्रिया विज्ञान – व्यायाम शरीर क्रिया विज्ञान यह पढ़ता है कि व्यायाम के दौरान और बाद में शरीर कैसे काम करता है। व्यायाम में माँसपेशियों को ज़्यादा ATP और ऑक्सीजन चाहिए, इसलिए धड़कन, स्ट्रोक आयतन, साँस की दर और गहराई बढ़ती है। ATP तीन ऊर्जा तंत्र दोबारा बनाते हैं: ATP-PC (लगभग 10 s), अवायवीय ग्लाइकोलिसिस (लगभग 2 min तक, लैक्टेट बनता है) और वायवीय (लंबे प्रयास, ऑक्सीजन से)। हृदय निकास = धड़कन दर × स्ट्रोक आयतन। नियमित ट्रेनिंग से हृदय, फेफड़े, माँसपेशियाँ और हड्डियाँ मज़बूत होती हैं; उम्र इन्हें धीरे-धीरे घटाती है, पर व्यायाम यह गिरावट धीमी करता है।
8. जैव यांत्रिकी और खेल
खेलों में जैव यांत्रिकी
- खेलों में जैव यांत्रिकी (स्पोर्ट्स बायोमैकेनिक्स) – जैव यांत्रिकी यानी चलते-दौड़ते शरीर की भौतिकी। हर गति तीन तलों (सैजिटल, फ़्रंटल, ट्रांसवर्स) में और तीन अक्षों के चारों ओर होती है। हड्डियाँ, जोड़ और मांसपेशियाँ लीवर की तरह काम करती हैं: धुरी, बल और भार। शरीर के ज़्यादातर लीवर तीसरी श्रेणी के हैं: ताक़त कम, पर गति तेज़ और बड़ी। न्यूटन के तीन नियम बताते हैं कि दौड़ शुरू कैसे होती है और ज़मीन हमें आगे कैसे धकेलती है; घर्षण पकड़ देता है। संतुलन गुरुत्व केंद्र, आधार और गुरुत्व रेखा पर टिका है। घूमने में बलाघूर्ण (torque) घुमाव शुरू करता है, और हवा में कोणीय संवेग स्थिर रहता है, इसलिए बाँहें अंदर करने पर घुमाव तेज़ होता है। फेंकी गई गेंद या कूदता खिलाड़ी प्रक्षेप्य है: चाल, कोण और ऊँचाई दूरी तय करते हैं। हवा और पानी खिंचाव (drag) देते हैं; स्पिन से गेंद मुड़ती है (मैग्नस प्रभाव)।
9. मनोविज्ञान और खेल
खेल मनोविज्ञान
- खेल मनोविज्ञान: खेल के पीछे का दिमाग़ – खेल मनोविज्ञान बताता है कि मन खेल पर कैसे असर डालता है। व्यक्तित्व से पता चलता है कि हमें कैसा खेल पसंद है। प्रेरणा ईंधन है: अंदर से (मज़ा) या बाहर से (इनाम)। उत्तेजना (arousal) यानी आप कितने "चालू" हैं: बहुत कम या बहुत ज़्यादा दोनों नुकसान करते हैं, बीच में सबसे अच्छा (उल्टा U)। चिंता को साँस, कल्पना और अच्छी आत्म-बातचीत से शांत करते हैं। SMART लक्ष्य साफ़ सीढ़ी देते हैं। आक्रामकता पर काबू और टीम में मिलकर मेहनत ज़रूरी है।
10. खेलों में प्रशिक्षण
खेल प्रशिक्षण विधियाँ
- खेल प्रशिक्षण: सिद्धांत और विधियाँ – खेल प्रशिक्षण योजना बनाकर किया गया व्यायाम है, जो शरीर को खेल के लिए फ़िट बनाता है। हर सत्र में वार्म-अप (धड़कन, शरीर का तापमान और लचीलापन धीरे-धीरे बढ़ाना), मुख्य अभ्यास और कूल-डाउन (धड़कन धीरे कम करना, लैक्टिक अम्ल जैसे अपशिष्ट हटाना) होते हैं। अच्छा प्रशिक्षण सिद्धांतों पर चलता है: विशिष्टता (अपने खेल के लिए अभ्यास), प्रगति और अधिभार (धीरे-धीरे ज़्यादा, ताकि शरीर ढल जाए), उलटाव (अभ्यास छोड़ा तो फ़िटनेस घटती है), ऊब से बचना (अभ्यास बदलते रहो), साथ में आराम। FITT मात्रा तय करता है: कितनी बार, कितना तेज़, कितनी देर, कौन-सा अभ्यास। तीव्रता हृदय गति से मापी जाती है: अधिकतम ≈ 220 − उम्र; 60–80% एरोबिक, 80–90% एनारोबिक। मुख्य विधियाँ: लगातार, अंतराल, फ़ार्टलेक, सर्किट, वज़न, प्लायोमेट्रिक और लचीलापन। साल को तैयारी, प्रतियोगिता और विश्राम चरणों में बाँटा जाता है (अवधिकरण)।