आक्रामकता क्या है?
आक्रामकता वह व्यवहार है जिसका इरादा किसी दूसरे को नुक़सान पहुँचाना हो, जबकि वह व्यक्ति बचना चाहता हो। ग़लती से लगी चोट आक्रामकता नहीं है, क्योंकि उसमें इरादा नहीं है।
- शत्रुतापूर्ण (hostile) आक्रामकता: गर्म ग़ुस्सा, किसी अपमान या ख़तरे का जवाब।
- साधनात्मक (instrumental) आक्रामकता: ठंडी, योजना बनाकर, कुछ पाने के लिए, जैसे पैसा या रुतबा।
- यह शारीरिक (मारना) या मौखिक और संबंधपरक (गाली, अफ़वाह, किसी को अलग कर देना) हो सकती है।
तंत्रिका, हॉर्मोन और आनुवंशिक कारक
तंत्रिका (दिमाग़) कारक
लिम्बिक तंत्र, ख़ासकर अमिग्डाला, ख़तरे पर बहुत तेज़ प्रतिक्रिया देता है। प्रीफ्रंटल / ऑर्बिटोफ्रंटल कॉर्टेक्स आवेग को रोकता है। कुछ हिंसक लोगों के दिमाग़ के स्कैन में अमिग्डाला बहुत सक्रिय और प्रीफ्रंटल कम सक्रिय मिला। सेरोटोनिन शांत करने वाला रसायन है; इसकी कमी से आत्म-नियंत्रण कमज़ोर होता है।
हॉर्मोन कारक
टेस्टोस्टेरोन दबदबे और आक्रामकता से जुड़ा है, पर इंसानों में यह संबंध जानवरों से कमज़ोर है। दोहरा-हॉर्मोन विचार कहता है कि टेस्टोस्टेरोन तब ज़्यादा असर करता है जब तनाव हॉर्मोन कॉर्टिसोल कम हो।
आनुवंशिक कारक
जुड़वाँ अध्ययन एक जैसे (MZ) और अलग (DZ) जुड़वाँ की तुलना करते हैं; MZ जुड़वाँ आक्रामकता में ज़्यादा मिलते-जुलते हैं, यानी जीन का हिस्सा है। गोद लेने के अध्ययन जीन और परवरिश को अलग करते हैं। MAOA जीन एक एंज़ाइम बनाता है जो सेरोटोनिन तोड़ता है; इसका कम-सक्रिय रूप MAOA-L आक्रामकता से जुड़ा है, ख़ासकर बचपन के शोषण के साथ। इसे जीन-पर्यावरण अंतःक्रिया (डायथेसिस-स्ट्रेस) कहते हैं।
सीमाएँ: सहसंबंध कारण नहीं है; कई शोध जानवरों या सिर्फ़ पुरुषों पर हैं; जैविक व्याख्या स्वतंत्र इच्छा और सामाजिक माहौल को नज़रअंदाज़ करती है।
इथोलॉजिकल और विकासवादी व्याख्या
इथोलॉजी (जानवरों का व्यवहार)
इथोलॉजिस्ट जानवरों को उनके प्राकृतिक घर में देखते हैं। उनके अनुसार आक्रामकता अनुकूली है: इलाक़ा और भोजन बचाती है। कई जीव रस्मी संकेत (दिखावा, गुर्राना) इस्तेमाल करते हैं, जिससे लड़ाई में मौत कम होती है। दिमाग़ का जन्मजात मुक्ति तंत्र एक संकेत उद्दीपन (जैसे लाल पेट) से चालू होता है और तय क्रिया पैटर्न शुरू होता है: हर बार एक ही क्रम, अंत तक।
विकासवादी मनोविज्ञान
जो व्यवहार हमारे पूर्वजों को बचने और संतान पैदा करने में मदद करते थे, वे आगे बढ़े। साथी को बनाए रखना: पुरुष जलन और निगरानी से यह पक्का करना चाहते थे कि बच्चा उन्हीं का है। आक्रामकता से समूह में रुतबा भी मिल सकता है।
सीमाएँ: अलग-अलग संस्कृतियों में आक्रामकता बहुत अलग है, इसलिए यह सिर्फ़ सहज प्रवृत्ति नहीं हो सकती; अतीत को देख नहीं सकते, इसलिए जाँचना कठिन है।
सामाजिक मनोवैज्ञानिक व्याख्या
कुंठा-आक्रामकता परिकल्पना
जब लक्ष्य रुकता है तो कुंठा होती है, जो आक्रामक प्रेरणा बनाती है। इसे बाहर निकालने को रेचन (catharsis) कहते हैं, पर शोध बताते हैं कि भड़ास निकालने से अक्सर ग़ुस्सा बढ़ता है। बाद के रूप में आक्रामक संकेत जोड़े गए: पास में हथियार जैसा संकेत हो तो ग़ुस्सा आसानी से आक्रामकता बनता है (हथियार प्रभाव)।
सामाजिक अधिगम सिद्धांत
बच्चे मॉडल को देखकर आक्रामकता सीखते हैं। अगर मॉडल को इनाम मिले (प्रतिनिधिक पुनर्बलन), तो बच्चा नक़ल ज़्यादा करता है। चार चरण: ध्यान, धारण, पुनरुत्पादन, प्रेरणा। आत्म-प्रभावकारिता यानी यह भरोसा कि मैं यह कर सकता हूँ।
व्यक्तित्व-लोप (deindividuation)
भीड़ में, वर्दी में या ऑनलाइन गुमनाम रहकर लोग कम ज़िम्मेदार और कम आत्म-जागरूक महसूस करते हैं, इसलिए सामान्य नियम ढीले पड़ते हैं। ऑनलाइन ट्रोलिंग इसका आज का उदाहरण है।
संस्थागत आक्रामकता: जेल
संस्थागत आक्रामकता किसी संस्था, जैसे जेल, अस्पताल या स्कूल, के अंदर होती है और उस जगह से प्रभावित होती है।
- स्वभावगत (आयात) मॉडल: क़ैदी अपने गुण, मूल्य और गिरोह के रिश्ते साथ लाते हैं। आक्रामकता कहीं भी होती।
- परिस्थितिजन्य (वंचन) मॉडल: जेल के कष्ट (आज़ादी, सामान, सुरक्षा, निजता, रिश्तों की कमी) तनाव और आक्रामकता पैदा करते हैं। भीड़, गर्मी और कमज़ोर नियंत्रण इसे बढ़ाते हैं।
आज ज़्यादातर शोधकर्ता दोनों को जोड़ते हैं: व्यक्ति और जगह मिलकर असर करते हैं।
मीडिया का प्रभाव: फ़िल्में, टीवी और कंप्यूटर गेम
शोध के तरीक़ों में प्रयोगशाला प्रयोग, सहसंबंध अध्ययन और मेटा-विश्लेषण (कई अध्ययनों को जोड़ना) आते हैं। नतीजे हिंसक मीडिया और आक्रामक विचारों-व्यवहार के बीच छोटा संबंध दिखाते हैं, पर इस पर बहस है।
- असंवेदीकरण: बहुत हिंसा देखने से वह सामान्य लगने लगती है; शरीर कम प्रतिक्रिया देता है।
- संकोच-मुक्ति (disinhibition): मीडिया हिंसा को ठीक दिखाता है, तो सामान्य रोक ढीली पड़ती है।
- संज्ञानात्मक प्राइमिंग: हिंसक दृश्य मन में आक्रामक विचार तैयार रखते हैं।
सीमाएँ: प्रयोगशाला में आक्रामकता मापने के तरीक़े (जैसे शोर का झटका) बनावटी हैं; आक्रामक लोग ख़ुद हिंसक गेम चुन सकते हैं (कारण की दिशा); परिवार और दोस्त जैसे कारक ज़्यादा मायने रखते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
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हल किए गए उदाहरण
1. वर्गीकरण करो: (a) एक बॉक्सर नियमों के अंदर जीतने के लिए मारता है; (b) अपमान करने वाले को कोई घूँसा मारता है; (c) एक छात्र सहपाठी के बारे में बुरी अफ़वाह फैलाता है।
(a) यह आम अर्थ में शत्रुतापूर्ण आक्रामकता नहीं: खेल के तय नियमों के अंदर है, लक्ष्य जीतना है (साधनात्मक)। (b) शत्रुतापूर्ण आक्रामकता: उकसाने के बाद गर्म ग़ुस्सा। (c) संबंधपरक (मौखिक) आक्रामकता: दोस्ती और इज़्ज़त को चोट पहुँचाना।
2. एक अध्ययन में MAOA-L जीन वाले और बचपन में शोषित पुरुष, सिर्फ़ एक कारण वालों से बहुत ज़्यादा हिंसक मिले। यह किस विचार का समर्थन है?
चरण 1: अकेले जीन का असर छोटा। चरण 2: अकेले शोषण का असर छोटा। चरण 3: दोनों साथ हों तो असर बड़ा। यह जीन-पर्यावरण अंतःक्रिया (डायथेसिस-स्ट्रेस) है: जीन बंदूक भरता है, माहौल ट्रिगर दबाता है।
3. एक दंगे में आम लोग दुकानों के शीशे तोड़ते हैं। एक सामाजिक व्याख्या दो।
व्यक्तित्व-लोप: रात में बड़ी, शोर भरी भीड़ में हर व्यक्ति गुमनाम और कम ज़िम्मेदार महसूस करता है। आत्म-जागरूकता घटती है, अपने नियम जाँचे नहीं जाते। समूह का नियम ('सब कर रहे हैं') हावी होता है और लोग वह करते हैं जो अकेले कभी न करते।
4. एक जेल ने क़ैदियों को अलग कोठरी, पढ़ाई और मुलाक़ातें दीं, तो हिंसा घटी। यह किस मॉडल का समर्थन है और दूसरा मॉडल अब भी क्यों मायने रखता है?
यह वंचन मॉडल का समर्थन है: जेल के कष्ट घटे तो आक्रामकता घटी। पर कुछ क़ैदी अपने साथ लाए गुणों और गिरोह के रिश्तों के कारण फिर भी हिंसक हो सकते हैं (आयात), इसलिए पूरी योजना दोनों पर काम करती है।
आम गलतियाँ
- हर नुक़सान को आक्रामकता कहना। नुक़सान का इरादा न हो (दुर्घटना) तो वह आक्रामकता नहीं।
- कहना कि 'आक्रामकता वाला जीन हिंसा कराता है'। MAOA-L सिर्फ़ जोखिम बढ़ाता है, ज़्यादातर कठोर अनुभवों के साथ।
- सोचना कि भड़ास निकालना (रेचन) अच्छा है। तकिये को मारना या चिल्लाना अक्सर ग़ुस्से को बनाए रखता है।
- दावा करना कि हिंसक गेम निश्चित रूप से हिंसा कराते हैं। शोध छोटा और विवादित संबंध दिखाते हैं; सहसंबंध कारण नहीं।