साथी चुनना: विकास और आकर्षण
लैंगिक चयन (sexual selection) का मतलब है कि जो गुण साथी पाने में मदद करते हैं, वे आगे की पीढ़ी में जाते हैं। इसके दो प्रकार हैं।
- अंतः-लैंगिक चयन (intra-sexual): एक ही लिंग के सदस्य (अक्सर पुरुष) आपस में होड़ करते हैं। क़द या रुतबा जीतता है।
- अंतर-लैंगिक चयन (inter-sexual): एक लिंग (अक्सर स्त्री) सोच-समझकर चुनता है। स्त्रियाँ हर बच्चे पर ज़्यादा लगाती हैं (गर्भ, दूध पिलाना), इसलिए ग़लत चुनाव महँगा पड़ता है। वे संसाधन और देखभाल करने वाले साथी पसंद कर सकती हैं।
37 संस्कृतियों के 10,000 से ज़्यादा लोगों के सर्वे में पुरुषों ने उम्र और रूप को, और स्त्रियों ने संसाधनों को ज़्यादा महत्व दिया। मूल्यांकन: यह कई नतीजों से मेल खाता है, पर संस्कृति, स्त्री-शिक्षा और समलैंगिक रिश्तों को केवल जीन से समझाना कठिन है।
आत्म-प्रकटीकरण (self-disclosure) यानी किसी को अपनी निजी बातें बताना। यह पहले चौड़ाई (ज़्यादा विषय) और फिर गहराई (ज़्यादा निजी बातें) में बढ़ता है। यह धीरे और दोनों तरफ़ से (पारस्परिक) होना चाहिए।
शारीरिक आकर्षण भी मायने रखता है। संतुलित (symmetrical) चेहरे अक्सर सुंदर माने जाते हैं। हेलो प्रभाव: सुंदर लोगों को दयालु या होशियार भी मान लिया जाता है। मिलान परिकल्पना (matching hypothesis): हम अपने जितने आकर्षक साथी चुनते हैं, ताकि ठुकराए जाने का डर कम हो।
फ़िल्टर सिद्धांत कहता है हम तीन चरणों में छाँटते हैं: (1) सामाजिक जनसांख्यिकी: जगह, वर्ग, शिक्षा, धर्म; (2) विचारों की समानता: शुरू में साझे मूल्य ज़रूरी; (3) ज़रूरतों की पूरकता: लंबे रिश्तों में एक-दूसरे से मेल खाती ज़रूरतें।
लोग साथ क्यों रहते हैं: विनिमय, समता और निवेश
सामाजिक विनिमय सिद्धांत रिश्ते को लेन-देन जैसा देखता है। लाभ (प्यार, मज़ा, सहारा) − लागत (समय, तनाव) = मुनाफ़ा। हम तुलना स्तर (CL) भी देखते हैं: हमें क्या मिलना चाहिए, जो पुराने रिश्तों और मीडिया से बनता है; और विकल्पों का तुलना स्तर (CLalt): क्या कोई और बेहतर होगा? इसके चरण हैं: नमूना लेना, मोलभाव, प्रतिबद्धता, संस्थाकरण।
समता सिद्धांत (equity theory) कहता है असली बात न्याय है, मुनाफ़ा नहीं। जो ज़्यादा देता और कम पाता है, उसे ग़ुस्सा आता है। जिसे ज़्यादा मिलता है, उसे अपराध-बोध होता है। साथी न्याय लौटाने की कोशिश करते हैं, या चीज़ों को देखने का नज़रिया बदलते हैं।
रसबल्ट का निवेश मॉडल: प्रतिबद्धता तीन बातों पर टिकी है: संतोष (लाभ लागत से ज़्यादा), विकल्पों की गुणवत्ता (अच्छे विकल्प कम = प्रतिबद्धता ज़्यादा) और निवेश का आकार (समय, पैसा, साझे दोस्त, बच्चे, भविष्य की योजनाएँ)। मज़बूत प्रतिबद्धता से रिश्ता सँभालने वाले व्यवहार आते हैं, जैसे माफ़ करना, त्याग करना, लुभाने वाले विकल्पों को अनदेखा करना। इससे समझ आता है कि कुछ लोग दुखी, यहाँ तक कि हिंसक रिश्तों में भी क्यों रुकते हैं।
मूल्यांकन: इन सिद्धांतों को ठीक-ठीक जाँचना कठिन है (लाभ को कैसे नापें?), और कई अध्ययन सहसंबंधी हैं: वे जुड़ाव दिखाते हैं, कारण नहीं।
रिश्ते कैसे टूटते हैं: डक का चरण मॉडल
डक के अनुसार रिश्ता चरणों में टूटता है। हर चरण एक दहलीज़ (एक विचार) से शुरू होता है:
- अंतः-मानसिक चरण ('अब और सहा नहीं जाता'): एक साथी अकेले में अपने दुख के बारे में सोचता है।
- द्वि-पक्षीय चरण ('छोड़ना ठीक होगा'): दोनों बात करते हैं। बात बन भी सकती है, या नहीं।
- सामाजिक चरण ('मैं सच में कह रहा हूँ'): दोस्तों-परिवार को बताया जाता है। लोग पक्ष लेते हैं; अलगाव सबके सामने आ जाता है।
- कब्र-सजाने का चरण ('अब यह तय है'): हर व्यक्ति टूटने की ऐसी कहानी बनाता है जिससे वह अच्छा दिखे और आगे बढ़ सके।
बाद में पुनर्जीवन चरण जोड़ा गया: लोग सीखते हैं और नए रिश्तों के लिए तैयार होते हैं। मूल्यांकन: यह परामर्शदाताओं के काम का है (द्वि-पक्षीय चरण में बातचीत सुधारना), पर यह बताता है कि क्या होता है, यह नहीं कि क्यों होता है।
आभासी और परासामाजिक रिश्ते
आभासी रिश्ते (virtual relationships) ऑनलाइन बनते या चलते हैं (मैसेज, सोशल मीडिया)। दो विचार हैं: घटे संकेत सिद्धांत (चेहरे और आवाज़ के संकेत कम होने से लोग कम सावधान, कभी-कभी रूखे होते हैं) और अति-व्यक्तिगत मॉडल (लोग सोचकर बताते हैं, इसलिए ज़्यादा और जल्दी खुलते हैं)। ऑनलाइन गेटिंग (रोक) कम है: रूप या हकलाना जैसी बातें, जो पहली मुलाक़ात रोक सकती थीं, छिपी रहती हैं।
परासामाजिक रिश्ते (parasocial relationships) ऐसे एकतरफ़ा बंधन हैं जिनमें सामने वाला आपको जानता ही नहीं, जैसे फ़िल्मी सितारा, गायक या इन्फ़्लुएंसर। सेलिब्रिटी एटीट्यूड स्केल तीन स्तर बताता है: मनोरंजन-सामाजिक (उनके बारे में बातें), तीव्र-व्यक्तिगत (गहरी निजी भावनाएँ) और सीमा-रोगात्मक (बेक़ाबू कल्पनाएँ या व्यवहार)। ये असुरक्षित लगाव से जुड़े हो सकते हैं (अवशोषण-लत मॉडल: लोग पहचान और संतोष ढूँढते हैं, जो लत बन सकता है)।
करके देखिए
3D के चरण 3 में देखिए कि हर हिस्सा जुड़ने पर प्रतिबद्धता की पट्टी कैसे बढ़ती है। फिर घर पर: अपनी किसी प्यारी दोस्ती के बारे में सोचिए (प्रेम-संबंध नहीं)। 1 से 10 तक अंक दीजिए: संतोष, आपके विकल्प कितने अच्छे हैं, और आपने कितना निवेश किया है। कौन-सी बात दोस्ती को सबसे मज़बूत रखती है?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुख्य शब्द: लैंगिक चयन = साथी पाने में मददगार गुण आगे जाते हैं (अंतः-लैंगिक: होड़; अंतर-लैंगिक: चुनाव)
- मुख्य शब्द: आत्म-प्रकटीकरण = निजी बातें बताना, पहले चौड़ाई फिर गहराई, दोनों तरफ़ से
- मुख्य शब्द: मिलान परिकल्पना = अपने जितने आकर्षक साथी को चुनना
- मुख्य शब्द: फ़िल्टर सिद्धांत = सामाजिक जनसांख्यिकी → विचारों की समानता → ज़रूरतों की पूरकता
- सूत्र-विचार: मुनाफ़ा = लाभ − लागत; CL और CLalt से तुलना
- सूत्र-विचार: प्रतिबद्धता = संतोष + (कम) विकल्प + निवेश
- मुख्य शब्द: डक के चरण = अंतः-मानसिक → द्वि-पक्षीय → सामाजिक → कब्र-सजाना (→ पुनर्जीवन)
- मुख्य शब्द: परासामाजिक रिश्ता = किसी सितारे या मीडिया हस्ती से एकतरफ़ा बंधन
हल किए गए उदाहरण
1. रिया को लगता है उसका साथी उससे कहीं ज़्यादा देखभाल करता है, और उसे अपराध-बोध होता है। कौन-सा सिद्धांत इसे सबसे अच्छा समझाता है?
समता सिद्धांत: रिया को ज़्यादा मिल रहा है, इसलिए अपराध-बोध है। असंतोष का कारण अन्याय है, कम मुनाफ़ा नहीं।
2. सैम के लाभ 7 और लागत 4 हैं। उसका तुलना स्तर 2 है। क्या वह संतुष्ट होगा?
मुनाफ़ा = 7 − 4 = 3। यह तुलना स्तर 2 से ऊपर है, इसलिए विनिमय सिद्धांत के अनुसार वह संतुष्ट होगा।
3. अर्जुन दुखी है पर साथी के साथ रहता है। उनका साझा फ़्लैट, एक कुत्ता और कई साझे दोस्त हैं। निवेश मॉडल से समझाइए।
प्रतिबद्धता संतोष के साथ निवेश पर भी टिकी है। बड़ा निवेश (घर, पालतू, दोस्त) और शायद कम विकल्प प्रतिबद्धता ऊँची रखते हैं, भले संतोष कम हो।
आम गलतियाँ
- [object Object]
- [object Object]
- [object Object]
- [object Object]