सामाजिक व्यवहार की व्याख्या
सामाजिक मनोविज्ञान पढ़ता है कि दूसरे लोगों की वास्तविक या कल्पित उपस्थिति हमारी सोच, भावना और व्यवहार पर कैसे असर डालती है। उदाहरण: आसान काम दूसरों के देखते हुए तेज़ होता है (सामाजिक सुकरीकरण), और हम ज़रूरतमंद अजनबी की मदद करते हैं (समाजोपयोगी व्यवहार)।
सामाजिक संज्ञान
सामाजिक संज्ञान यानी लोगों के बारे में जानकारी इकट्ठी करना, सँजोना और उपयोग करना।
- स्कीमा: लोगों, घटनाओं या भूमिकाओं के बारे में व्यवस्थित विचारों का मन-फ़ोल्डर। आदिप्ररूप किसी समूह का सबसे अच्छा उदाहरण है; रूढ़धारणा पूरे समूह के बारे में स्कीमा है।
- छवि निर्माण: कुछ गुणों से व्यक्ति की तस्वीर बनाना। प्रथम प्रभाव: पहली जानकारी सबसे अहम। आसन्नता प्रभाव: आख़िरी जानकारी सबसे अहम। परिवेश (हेलो) प्रभाव: एक अच्छा गुण देखकर व्यक्ति को हर तरह अच्छा मानना। गर्म/ठंडे गुण पूरी छवि बदल देते हैं।
- गुणारोपण: व्यवहार का कारण बताना। आंतरिक (व्यक्ति: मेहनत, योग्यता) या बाह्य (स्थिति: भाग्य, कठिन काम)। मूल गुणारोपण त्रुटि: व्यक्ति के गुणों को ज़रूरत से ज़्यादा दोष देना। कर्ता-प्रेक्षक प्रभाव: अपनी असफलता पर स्थिति को, दूसरों की पर उनके गुणों को दोष।
अभिवृत्ति क्या है? ABC घटक
अभिवृत्ति किसी विषय (अभिवृत्ति-विषय) के बारे में विचारों का समूह है, जिसके साथ भावना और कार्य करने की प्रवृत्ति जुड़ी होती है।
- A — भावात्मक: भावना (पसंद/नापसंद)।
- B — व्यवहारात्मक: किसी ख़ास तरह कार्य करने की प्रवृत्ति।
- C — संज्ञानात्मक: विचार या विश्वास।
अभिवृत्ति विश्वास (केवल संज्ञानात्मक भाग) और मूल्य (क्या "होना चाहिए", जैसे ईमानदारी) से अलग है।
अभिवृत्ति की विशेषताएँ
- कर्षण: धनात्मक या ऋणात्मक।
- चरम सीमा: कितनी तीव्र धनात्मक या ऋणात्मक।
- सरलता या जटिलता (बहुविधता): एक अभिवृत्ति, या एक बड़ी अभिवृत्ति में कई (जैसे स्वास्थ्य में आहार, व्यायाम, नींद)।
- केंद्रिकता: अभिवृत्ति-तंत्र में कितनी केंद्रीय। केंद्रीय अभिवृत्ति कठिनाई से बदलती है और कई दूसरी पर असर डालती है।
अभिवृत्ति का निर्माण
- साहचर्य से सीखना: दयालु शिक्षिका से उसका विषय पसंद आना (प्राचीन अनुबंधन)।
- पुरस्कार और दंड: व्यायाम पर तारीफ़ → फ़िटनेस के प्रति सकारात्मक अभिवृत्ति।
- प्रतिरूपण: माता-पिता, शिक्षक या सितारों की नक़ल।
- समूह या सांस्कृतिक मानक: समूह के अलिखित नियम हमारी पसंद गढ़ते हैं।
- सूचना से संपर्क: किताबें, मीडिया और इंटरनेट तथ्य और विचार देते हैं।
अन्य कारक: परिवार और विद्यालय का वातावरण, संदर्भ समूह, व्यक्तिगत अनुभव और मीडिया।
अभिवृत्ति परिवर्तन
संतुलन सिद्धांत (फ्रिट्ज़ हाइडर)
एक त्रिभुज सोचें: P (व्यक्ति), O (दूसरा व्यक्ति), X (विषय)। हर कड़ी + या − है। ऋण चिह्नों की संख्या विषम (1 या 3) हो तो त्रिभुज असंतुलित है और कोई अभिवृत्ति बदलती है।
संज्ञानात्मक असंवादिता (लियोन फेस्टिंगर)
टकराते दो विचार ("धूम्रपान हानिकारक है" और "मैं धूम्रपान करता हूँ") बेचैनी (असंवादिता) देते हैं। हम एक विचार या कार्य बदलकर फिर संगति पाते हैं।
द्वि-चरण संकल्पना (एस. एम. मोहसिन)
चरण 1: लक्ष्य स्रोत से पहचान जोड़ता है और उसे पसंद करता है। चरण 2: स्रोत अपनी अभिवृत्ति में बदलाव दिखाता है; लक्ष्य भी बदलता है।
परिवर्तन को प्रभावित करने वाले कारक
- मौजूदा अभिवृत्ति: चरम, केंद्रीय, सरल अभिवृत्तियाँ कम बदलती हैं।
- स्रोत: विश्वसनीय (विशेषज्ञ) और आकर्षक स्रोत ज़्यादा मनाते हैं।
- संदेश: पर्याप्त तथ्य, तर्क बनाम भावना की अपील, कौन-सी ज़रूरत छूता है, कैसे पहुँचाया गया (आमने-सामने असरदार)।
- लक्ष्य: मनाए जाने की प्रवृत्ति, तीव्र पूर्वाग्रह, आत्म-सम्मान और बुद्धि।
परिवर्तन संगत (उसी दिशा में, और तेज़) या असंगत (उलटी दिशा में) हो सकता है। असंगत परिवर्तन कठिन है।
अभिवृत्ति और व्यवहार का संबंध
अभिवृत्ति व्यवहार की बेहतर भविष्यवाणी तब करती है जब: अभिवृत्ति तीव्र और केंद्रीय हो; व्यक्ति उसके प्रति सजग हो; बाहरी दबाव (जैसे समूह मानक) कम हो; व्यवहार को दूसरे न देख रहे हों; और व्यक्ति को विषय का सीधा अनुभव हो। 1930 के दशक के एक प्रसिद्ध अध्ययन (रिचर्ड लापियर) में होटल मालिकों ने लिखा कि वे एक चीनी दंपती को मना कर देंगे, जबकि असल में उन्होंने उन्हें ठहराया था — अभिवृत्ति और व्यवहार मेल नहीं खाए। कभी-कभी व्यवहार भी अभिवृत्ति बनाता है (बेम का आत्म-प्रत्यक्षण विचार)।
करके देखें
खुले खेल में P–O "+", P–X "+", O–X "−" रखें। अनुमान लगाएँ: संतुलित या नहीं? जाँचें। अब केवल एक चिह्न बदलकर इसे संतुलित करने के दो अलग तरीक़े खोजें। घर पर अपनी एक अभिवृत्ति ABC रूप में लिखें, और उस व्यक्ति का नाम जिसने उसे बनाने में मदद की (पाँच में से कौन-सा तरीक़ा?)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- अभिवृत्ति = A (भावात्मक) + B (व्यवहारात्मक) + C (संज्ञानात्मक)
- विशेषताएँ: कर्षण · चरम सीमा · सरलता/जटिलता · केंद्रिकता
- P-O-X: विषम संख्या में "−" = असंतुलित (हाइडर)
- असंवादिता: टकराते विचार → बेचैनी → एक बदलो (फेस्टिंगर)
- द्वि-चरण: स्रोत से पहचान → उसके बदलाव का अनुसरण (मोहसिन)
हल किए गए उदाहरण
1. इसे ABC में बाँटें: "मैं मानता हूँ कि व्यायाम मुझे स्वस्थ रखता है, मुझे इसमें मज़ा आता है, और मैं रोज़ सुबह दौड़ता हूँ।"
C (संज्ञानात्मक) = व्यायाम स्वस्थ रखता है; A (भावात्मक) = मज़ा आता है; B (व्यवहारात्मक) = रोज़ सुबह दौड़ना।
2. रवि (P) अमन (O) को पसंद करता है (+)। रवि बालिका शिक्षा (X) का समर्थक है (+)। अमन इसका विरोधी है (−)। क्या यह संतुलित है? क्या हो सकता है?
चिह्न: +, +, − → एक ऋण (विषम) → असंतुलित। रवि अमन को नापसंद करने लगे, अपना विचार बदले, या (सबसे अच्छा) अमन को बालिका शिक्षा के पक्ष में मना ले।
3. सीमा मानती है कि जंक फ़ूड हानिकारक है पर रोज़ खाती है। वह क्या महसूस करती है और इसे कैसे घटा सकती है?
संज्ञानात्मक असंवादिता। वह जंक फ़ूड छोड़ सकती है, या ख़ुद से कह सकती है "थोड़ा ठीक है" ताकि बेचैनी घटे।
4. करण कहता है कि उसका मित्र आलसी होने से फ़ेल हुआ, पर अपनी असफलता कठिन पेपर के कारण बताता है। प्रभाव का नाम बताइए।
कर्ता-प्रेक्षक प्रभाव: दूसरों के लिए आंतरिक कारण, अपने लिए बाह्य कारण।
आम गलतियाँ
- अभिवृत्ति को केवल विश्वास समझना। इसमें भावना और कार्य के भाग भी हैं।
- जहाँ भी ऋण चिह्न हो, त्रिभुज को असंतुलित मान लेना। गिनें: विषम ऋण = असंतुलित।
- हाइडर (संतुलन) और फेस्टिंगर (असंवादिता) को मिला देना।
- मानना कि अभिवृत्ति हमेशा व्यवहार बताती है। यह केवल कुछ स्थितियों में होता है।