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आत्म: संप्रत्यय, सम्मान और संस्कृति

आत्म हमारे अपने बारे में सारे अनुभवों, विचारों और भावनाओं का जोड़ है। इसमें व्यक्तिगत पहचान (जो मुझे अनोखा बनाए) और सामाजिक पहचान (जिन समूहों का मैं हिस्सा हूँ) है। आत्म जानने वाला (कर्ता) भी है और जाना जाने वाला (कर्म) भी। आत्म-संप्रत्यय यानी हम खुद को कैसे देखते हैं; आत्म-सम्मान यानी पढ़ाई, दोस्त, शरीर और परिवार में हम खुद को कितना मूल्य देते हैं। आत्म-सक्षमता सफल हो सकने का विश्वास है; आत्म-नियमन अपने व्यवहार को सँभालना है, जिसमें आत्म-प्रेक्षण, आत्म-अनुदेश और आत्म-प्रबलन मदद करते हैं। भारतीय संस्कृति में आत्म की सीमा लचीली है जिसमें परिवार और समुदाय आते हैं; पाश्चात्य संस्कृति में व्यक्ति के चारों ओर पक्की सीमा है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. यह मीरा है। उसका नाम, पसंद और गुण उसकी व्यक्तिगत पहचान हैं। उसके चारों ओर के समूह, जैसे परिवार, स्कूल और राज्य, उसकी सामाजिक पहचान हैं।
  2. मीरा अपने बारे में सोच सकती है। वह जानने वाली भी है और जानी जाने वाली भी। उसके आत्म के तीन घेरे हैं: व्यक्तिगत, संबंधात्मक और सामाजिक।
  3. आत्म-संप्रत्यय यानी मीरा खुद को कैसे देखती है। आत्म-सम्मान यानी पढ़ाई, दोस्त, शरीर और परिवार में वह खुद को कितना मूल्य देती है।
  4. आत्म-सक्षमता यानी विश्वास कि "मैं कर सकती हूँ"। आत्म-नियंत्रण यानी बड़े इनाम के लिए अभी रुकना, जैसे दो मिठाई पाने के लिए एक बचाना।
  5. संस्कृति आत्म को आकार देती है। एक आत्म के चारों ओर पक्की दीवार है। दूसरे की सीमा नरम और खुली है जिसमें परिवार भी आता है।
  6. अब आपकी बारी: मीरा के आत्म-सम्मान के चार क्षेत्रों के स्लाइडर हिलाइए। उसका कुल आत्म-सम्मान बदलता देखिए।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

मेरा धर्म व्यक्तिगत पहचान है या सामाजिक?

सामाजिक पहचान, क्योंकि यह आपको एक समूह से जोड़ता है।

आत्म 'मैं' और 'मुझे' दोनों कैसे?

सोचते समय आप जानने वाले (मैं) हैं। अपने बारे में सोचते समय आप जाने जाने वाले (मुझे) हैं।

क्या खेल में आत्म-सम्मान ऊँचा और पढ़ाई में कम हो सकता है?

हाँ। आत्म-सम्मान क्षेत्र-दर-क्षेत्र आँका जाता है, फिर ये मिलकर कुल भावना बनाते हैं।

क्या आत्म-सक्षमता और आत्मविश्वास एक हैं?

मिलते-जुलते हैं, पर आत्म-सक्षमता किसी खास काम के बारे में विश्वास है: "मैं यह सवाल हल कर सकता हूँ।"

क्या भारतीय आत्म पाश्चात्य से बेहतर है?

कोई बेहतर नहीं। संस्कृति सिर्फ़ यह बदलती है कि आत्म की सीमा कितनी पक्की है।

आत्म-सम्मान कैसे बढ़ाऊँ?

हर क्षेत्र में कौशल बढ़ाइए और छोटी जीत देखिए; हर क्षेत्र कुल अंक बढ़ाता है।

आत्म की संकल्पना

आत्म (self) यानी व्यक्ति के अपने बारे में सारे सचेत अनुभवों, विचारों और भावनाओं का जोड़।

आत्म कर्ता और कर्म के रूप में

आत्म जानने वाला (कर्ता: "मैं सोचता हूँ") भी है और जाना जाने वाला (कर्म: "मैं अपने बारे में सोचता हूँ") भी।

आत्म के प्रकार

बच्चा माता-पिता, दोस्तों और शिक्षकों से मिलते-जुलते हुए अपना आत्म बनाता है।

आत्म के संज्ञानात्मक पक्ष: आत्म-संप्रत्यय और आत्म-सम्मान

आत्म-संप्रत्यय यानी हम खुद को कैसे देखते हैं: अपनी योग्यता और गुणों के बारे में हमारे विचार। यह सकारात्मक या नकारात्मक हो सकता है।

आत्म-सम्मान यानी हम खुद को कितना मूल्य देते हैं। इसे क्षेत्रों में आँकते हैं: शैक्षिक (पढ़ाई), सामाजिक (दोस्त), शारीरिक (रूप, खेल) और पारिवारिक। लगभग 6-7 साल के बच्चे इन क्षेत्रों में खुद को आँकने लगते हैं; बाद में ये मिलकर सामान्य आत्म-सम्मान बनाते हैं।

व्यवहारात्मक पक्ष: आत्म-सक्षमता और आत्म-नियमन

आत्म-सक्षमता (self-efficacy) (अल्बर्ट बंडूरा) यानी व्यक्ति का विश्वास कि वह काम में सफल हो सकता है। ऊँची आत्म-सक्षमता से हम ज़्यादा कोशिश करते हैं और हार नहीं मानते। यह छोटी सफलताओं और अच्छे आदर्शों से बढ़ती है।

आत्म-नियमन यानी अपने व्यवहार को व्यवस्थित करने और देखने की योग्यता। आत्म-नियंत्रण यानी बड़े लक्ष्य के लिए अभी का सुख टालना (परितोषण विलंब)।

आत्म-नियंत्रण की तकनीकें

संस्कृति और आत्म

संस्कृति तय करती है कि आत्म कहाँ खत्म होता है और दूसरे कहाँ शुरू।

इसलिए भारत में कई लोग परिवार के साथ मिलकर निर्णय लेते हैं; कई पाश्चात्य समाजों में लोग ज़्यादा खुद निर्णय लेते हैं। कोई बेहतर नहीं; ये जीने के अलग ढंग हैं।

घर पर करके देखें

"मैं ... हूँ" से शुरू होने वाले 10 वाक्य लिखिए। हर वाक्य पर व (व्यक्तिगत: गुण या पसंद) या स (सामाजिक: समूह या भूमिका) लिखिए। गिनिए। कई भारतीय विद्यार्थी स वाले वाक्य ज़्यादा लिखते हैं।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. ज़ोया कहती है, "मैं ईमानदार हूँ और मुझे चित्रकारी पसंद है।" यह व्यक्तिगत पहचान है या सामाजिक?

व्यक्तिगत पहचान। ईमानदारी और चित्रकारी की पसंद उसके अपने अनोखे गुण हैं, समूह नहीं।

2. करण एक बार फेल होकर कहता है, "अभ्यास करूँ तो सीख लूँगा।" कौन सा विचार?

ऊँची आत्म-सक्षमता: काम में सफल होने की अपनी योग्यता पर विश्वास।

3. निधि फ़ोन दूसरे कमरे में रखती है, खुद से कहती है "पहले एक टॉपिक", और पूरा करके गेम खेलती है। तकनीकें बताइए।

आत्म-प्रेक्षण/योजना, आत्म-अनुदेश ("पहले एक टॉपिक") और आत्म-प्रबलन (गेम इनाम के रूप में)।

4. रमेश विदेश की नौकरी छोड़कर माता-पिता की देखभाल करता है क्योंकि उसे लगता है वे उसी का हिस्सा हैं। आत्म की कौन सी सांस्कृतिक दृष्टि?

भारतीय (सामूहिक) दृष्टि, जिसमें आत्म की सीमा लचीली है और परिवार उसमें आता है।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. जो गुण आपको समूहों से जोड़ें, वे बनाते हैं:
2. हम खुद को जितना मूल्य देते हैं:
3. आत्म-सक्षमता की बात किसने की?
4. बड़े लक्ष्य के लिए अभी का सुख टालना दिखाता है:
5. भारतीय दृष्टि में आत्म की सीमा:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनोविज्ञान में आत्म क्या है?

व्यक्ति के अपने बारे में सारे सचेत अनुभवों, विचारों और भावनाओं का जोड़।

आत्म-संप्रत्यय और आत्म-सम्मान में क्या अंतर है?

आत्म-संप्रत्यय यानी खुद को कैसे देखते हैं; आत्म-सम्मान यानी खुद को कितना मूल्य देते हैं।

आत्म-नियंत्रण की तकनीकें कौन सी हैं?

अपने व्यवहार का प्रेक्षण, आत्म-अनुदेश और आत्म-प्रबलन।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

कनाडा (ओंटारियो)Grade 12E. Social-Emotional Development and Personality
रोमानियाClasa a IX-aSelf-knowledge and socio-emotional development
रोमानियाClasa a X-aSelf-knowledge and personal development
रोमानियाClasa a XI-aSelf-knowledge and personal development
रोमानियाClasa a XII-aSelf-knowledge and personal development
सीबीएसई (भारत)कक्षा 12आत्म एवं व्यक्तित्व
दक्षिण कोरिया고등학교 3학년Knowing myself

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