Romania Clasa a X-a Counselling and Guidance
अध्याय: 5
1. Self-knowledge and personal development
Personal qualities and resources
- आत्म: संप्रत्यय, सम्मान और संस्कृति – आत्म हमारे अपने बारे में सारे अनुभवों, विचारों और भावनाओं का जोड़ है। इसमें व्यक्तिगत पहचान (जो मुझे अनोखा बनाए) और सामाजिक पहचान (जिन समूहों का मैं हिस्सा हूँ) है। आत्म जानने वाला (कर्ता) भी है और जाना जाने वाला (कर्म) भी। आत्म-संप्रत्यय यानी हम खुद को कैसे देखते हैं; आत्म-सम्मान यानी पढ़ाई, दोस्त, शरीर और परिवार में हम खुद को कितना मूल्य देते हैं। आत्म-सक्षमता सफल हो सकने का विश्वास है; आत्म-नियमन अपने व्यवहार को सँभालना है, जिसमें आत्म-प्रेक्षण, आत्म-अनुदेश और आत्म-प्रबलन मदद करते हैं। भारतीय संस्कृति में आत्म की सीमा लचीली है जिसमें परिवार और समुदाय आते हैं; पाश्चात्य संस्कृति में व्यक्ति के चारों ओर पक्की सीमा है।
2. Communication and social skills
Family communication and emotions
- संचार कौशल: अपनी बात साफ़ और प्यार से कैसे पहुँचाएँ – संचार यानी लोगों के बीच अर्थ बाँटना। प्रेषक (भेजने वाला) विचार को संदेश में बदलता है, उसे माध्यम से भेजता है, और प्राप्तकर्ता उसे समझकर प्रतिपुष्टि (फ़ीडबैक) देता है। शोर, कठिन शब्द, तेज़ भावनाएँ और सांस्कृतिक अंतर जैसी बाधाएँ संदेश को रोक या मोड़ सकती हैं। हम अर्थ शब्दों से (शाब्दिक), चेहरे, आँखों, हाव-भाव, मुद्रा और आवाज़ के लहजे से (अशाब्दिक), और चित्रों से (दृश्य) भेजते हैं। सक्रिय श्रवण — ध्यान, धैर्य, सवाल और अपने शब्दों में दोहराना — साबित करता है कि संदेश पहुँचा। अच्छा वक्ता संदर्भ के हिसाब से बदलता है: औपचारिक या अनौपचारिक, बोलकर या लिखकर, और विनम्र अनुरोध, सलीके से मना करना, सच्ची माफ़ी और दृढ़ (न दब्बू, न आक्रामक) भाषा अपनाता है।
3. Managing information and learning
Information and learning
- अनुबंधन से अधिगम – अधिगम अभ्यास या अनुभव से व्यवहार में अपेक्षाकृत स्थायी बदलाव है। प्राचीन अनुबंधन (पावलव) में एक तटस्थ उद्दीपक, स्वाभाविक अनुक्रिया लाने वाले उद्दीपक के साथ बार-बार आने पर, अकेले ही वह अनुक्रिया लाने लगता है। क्रियाप्रसूत अनुबंधन (स्किनर) में व्यवहार अपने परिणामों से बनता है: पुनर्बलन उसे बढ़ाता है, दंड घटाता है। समय-संबंध, उद्दीपक की तीव्रता और प्रकार, पुनर्बलन की मात्रा, देरी और अनुसूची सीखने को तय करते हैं। मुख्य प्रक्रियाएँ: अर्जन, विलोपन, स्वतः पुनर्प्राप्ति, सामान्यीकरण, विभेदन।
4. Career planning
Career plan after compulsory school
- करियर प्लानिंग: ख़ुद को जानने से पहली नौकरी तक – करियर प्लानिंग के पाँच कदम हैं। 1) ख़ुद को जानो: रुचियाँ, कौशल और मूल्य। 2) करियर परिवार खोजो और जानो कि काम क्या है, कौन-सी पढ़ाई चाहिए, वेतन और माँग कितनी है। 3) SMART लक्ष्य और प्लान B के साथ रास्ता बनाओ। 4) CV, आवेदन पत्र, डिजिटल पोर्टफ़ोलियो और इंटरव्यू अभ्यास से नौकरी खोजो। 5) स्कूल से काम की ओर बढ़ो और सीखते रहो, क्योंकि ज़िंदगी भर करियर बदलता है।
5. Quality of life
Lifestyle and risks
- जीवनशैली रोग: रोज़ की आदतें सेहत कैसे बनाती या बिगाड़ती हैं – जीवनशैली रोग लंबे समय तक चलने वाली बीमारियाँ हैं जो हमारे जीने के तरीके से जुड़ी हैं: क्या खाते हैं, कितना चलते-फिरते हैं, कैसे सोते हैं, और तंबाकू या शराब लेते हैं या नहीं। मुख्य उदाहरण: दिल की बीमारी, लकवा (स्ट्रोक), हाई ब्लड प्रेशर, टाइप 2 मधुमेह, मोटापा और कई कैंसर। ये सालों में धीरे-धीरे बनते हैं, इसलिए कम उम्र से अच्छी आदतें और नियमित जाँच ज़्यादातर को रोक देती हैं। बीमारी के बाद इलाज और अच्छी आदतें ठीक होने में मदद करती हैं।