अधिगम का स्वरूप
अधिगम यानी अभ्यास या अनुभव से व्यवहार या ज्ञान में अपेक्षाकृत स्थायी बदलाव।
- इसमें अनुभव ज़रूरी है; परिपक्वता, थकान, बीमारी या दवा से आया बदलाव अधिगम नहीं।
- इसका अनुमान निष्पादन से लगाया जाता है; यह सीधे नहीं दिखता।
- यह एक प्रक्रिया है जो चरणों में होती है और नई स्थितियों में स्थानांतरित हो सकती है।
मुख्य रूप: प्राचीन अनुबंधन, क्रियाप्रसूत अनुबंधन, प्रेक्षणात्मक, संज्ञानात्मक, वाचिक, संप्रत्यय और कौशल अधिगम।
प्राचीन अनुबंधन
इवान पावलव ने कुत्तों पर प्रयोग किया।
- US (अननुबंधित उद्दीपक): भोजन। UR (अननुबंधित अनुक्रिया): भोजन पर लार।
- CS (अनुबंधित उद्दीपक): घंटी, जो पहले तटस्थ थी।
- कई बार घंटी + भोजन के बाद सिर्फ़ घंटी से लार: CR (अनुबंधित अनुक्रिया)।
प्राचीन अनुबंधन के निर्धारक
- CS और US का समय-संबंध: विलंबित (CS पहले शुरू, US आने तक चले) सबसे अच्छा; सहकालिक, अवशेष (US से पहले CS ख़त्म) और पश्चगामी (US पहले) कम या बहुत कम असरदार।
- US का प्रकार: सुखद (भोजन, पानी) या विमुखी (झटका, तेज़ आवाज़)। विमुखी जल्दी सीखे जाते हैं।
- CS की तीव्रता: तेज़, साफ़ संकेत जल्दी सीखे जाते हैं।
क्रियाप्रसूत अनुबंधन
बी.एफ. स्किनर ने लीवर वाले डिब्बे का उपयोग किया। भूखा चूहा घूमते हुए संयोग से लीवर दबाता है और दाना गिरता है; फिर वह बार-बार दबाता है। क्रियाप्रसूत ऐसा ऐच्छिक व्यवहार है जो परिवेश पर असर डाले।
क्रियाप्रसूत अनुबंधन के निर्धारक
- पुनर्बलक का प्रकार: धनात्मक (सुखद चीज़ जोड़ना, जैसे शाबाशी) या ऋणात्मक (अप्रिय चीज़ हटाना, जैसे अलार्म बंद)। दोनों व्यवहार बढ़ाते हैं। प्राथमिक पुनर्बलक शरीर की ज़रूरतें पूरी करते हैं; गौण (पैसा, अंक) सीखे हुए होते हैं।
- पुनर्बलन की संख्या/मात्रा
- अनुसूची: सतत (हर बार) से जल्दी सीखना; आंशिक (कभी-कभी) से सीखा व्यवहार देर तक टिकता है।
- विलंब: इनाम जितना जल्दी, सीखना उतना अच्छा।
दंड बुरा परिणाम है जो व्यवहार घटाता है; यह ऋणात्मक पुनर्बलन नहीं है। परिहार और पलायन अधिगम भी अप्रिय घटनाओं से होते हैं।
मुख्य अधिगम प्रक्रियाएँ
- पुनर्बलन: जो अनुक्रिया को मज़बूत करे।
- अर्जन: जोड़ियों या इनाम से अनुक्रिया बनना।
- विलोपन: पुनर्बलन रुकने पर अनुक्रिया घटना।
- स्वतः पुनर्प्राप्ति: आराम के बाद विलुप्त अनुक्रिया का थोड़ा लौटना।
- सामान्यीकरण: मिलते-जुलते उद्दीपकों पर भी वही अनुक्रिया (एक कुत्ते से डरा बच्चा सब कुत्तों से डरे)।
- विभेदन: सिर्फ़ सही उद्दीपक पर अनुक्रिया।
- आकार देना (shaping) और शृंखलन: छोटे कदमों को इनाम देकर जटिल व्यवहार बनाना।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- अधिगम: अभ्यास/अनुभव से टिकाऊ बदलाव
- प्राचीन: CS + US (जोड़ी) → बाद में सिर्फ़ CS → CR
- क्रियाप्रसूत: व्यवहार → परिणाम → व्यवहार घटे या बढ़े
- धनात्मक पुनर्बलन: सुखद जोड़ो → व्यवहार ↑
- ऋणात्मक पुनर्बलन: अप्रिय हटाओ → व्यवहार ↑
- दंड: अप्रिय परिणाम → व्यवहार ↓
- आंशिक पुनर्बलन → धीमा विलोपन
हल किए गए उदाहरण
1. अमन का फ़ोन हर बार बजने पर दोस्त का मज़ेदार संदेश आता है। अब सिर्फ़ बज़ से वह खुश होता है। US, CS, CR बताइए।
US = मज़ेदार संदेश, CS = बज़, CR = सिर्फ़ बज़ पर खुशी।
2. ड्राइवर बीप बंद करने के लिए सीट बेल्ट लगाता है। कौन सी प्रक्रिया?
ऋणात्मक पुनर्बलन: अप्रिय आवाज़ हटने से सीट बेल्ट लगाना बढ़ता है।
3. एक भौंकते कुत्ते से डरी बच्ची अब सब कुत्तों से डरती है। बाद में अच्छे अनुभवों से सिर्फ़ उसी कुत्ते से डरती है। दोनों प्रक्रियाएँ?
पहले सामान्यीकरण, फिर विभेदन।
4. लोग कम जीतने पर भी लॉटरी क्यों खेलते रहते हैं?
जीत आंशिक (परिवर्ती) अनुसूची पर मिलती है, जिससे व्यवहार का विलोपन बहुत कठिन होता है।
आम गलतियाँ
- ऋणात्मक पुनर्बलन को दंड समझना। ऋणात्मक पुनर्बलन बुरी चीज़ हटाकर व्यवहार बढ़ाता है।
- परिपक्वता को अधिगम कहना। लंबाई बढ़ना या बच्चे का खुद चलना शुरू करना अधिगम नहीं।
- मानना कि विलोपन से अधिगम मिट जाता है। स्वतः पुनर्प्राप्ति दिखाती है कि वह सिर्फ़ दबा था।
- प्राचीन और क्रियाप्रसूत को मिलाना: प्राचीन में उद्दीपक पहले; क्रियाप्रसूत में परिणाम काम के बाद।