Italy Secondaria di secondo grado – classe 1ª Human sciences (pedagogy, psychology, anthropology, sociology)
अध्याय: 2
1. Pedagogy: antiquity to Middle Ages
Education in ancient and medieval societies
- शिक्षा का इतिहास: प्राचीन विद्यालयों से 19वीं सदी तक – शिक्षा घर और कार्यशाला से शुरू हुई। लिखने वाले समाजों (मिस्र, इज़राइल, यूनान, रोम) ने स्कूल और शिक्षक बनाए। शुरुआती मध्य युग में मठों ने ज्ञान को जीवित रखा और सामंतों ने शूरवीर तैयार किए। लगभग 1100 से कस्बों, शिल्प-संघों और विश्वविद्यालयों ने ज्ञान फैलाया; लगभग 1400 से मानववादियों, छापेखाने और सुधारकों ने कॉलेज और आम लोगों के स्कूल खोले। प्रबोधन ने शिक्षा के अधिकार की बात की और बचपन को खोजा; 1800 के दशक में राज्यों ने स्कूल-व्यवस्था बनाई, और पेस्टालोज़ी, फ्रोबेल और दुर्खाइम जैसे विचारकों ने आधुनिक शिक्षण को आकार दिया।
2. Psychology
Psychology as a science · Educational relationship and learning · Study method
- मनोविज्ञान की प्रकृति: मन और व्यवहार का विज्ञान – मनोविज्ञान वह विज्ञान है जो मानसिक प्रक्रियाओं (सोचना, याद करना), अनुभवों (अंदर की भावनाएँ) और व्यवहार (हम क्या करते हैं) का अध्ययन करता है। मानसिक प्रक्रियाएँ दिखती नहीं, इसलिए उन्हें व्यवहार से समझा जाता है। व्यवहार प्रकट (बाहर से दिखे) या अप्रकट (अंदर छिपा, जैसे तेज़ धड़कन) हो सकता है। मनोविज्ञान अपनी विधियों और सिद्धांतों वाला एक विषय है। प्रयोग करने और मस्तिष्क-शरीर पढ़ने के कारण यह प्राकृतिक विज्ञान है, और परिवार, समूह व संस्कृति में लोगों को पढ़ने के कारण सामाजिक विज्ञान भी। मन और मस्तिष्क जुड़े हैं, पर एक नहीं। "मनोवैज्ञानिक मन पढ़ लेते हैं" जैसी कई लोकप्रिय धारणाएँ सही नहीं हैं।
- अनुबंधन से अधिगम – अधिगम अभ्यास या अनुभव से व्यवहार में अपेक्षाकृत स्थायी बदलाव है। प्राचीन अनुबंधन (पावलव) में एक तटस्थ उद्दीपक, स्वाभाविक अनुक्रिया लाने वाले उद्दीपक के साथ बार-बार आने पर, अकेले ही वह अनुक्रिया लाने लगता है। क्रियाप्रसूत अनुबंधन (स्किनर) में व्यवहार अपने परिणामों से बनता है: पुनर्बलन उसे बढ़ाता है, दंड घटाता है। समय-संबंध, उद्दीपक की तीव्रता और प्रकार, पुनर्बलन की मात्रा, देरी और अनुसूची सीखने को तय करते हैं। मुख्य प्रक्रियाएँ: अर्जन, विलोपन, स्वतः पुनर्प्राप्ति, सामान्यीकरण, विभेदन।
- मेटाकॉग्निशन: अपनी सोच के बारे में सोचना – मेटाकॉग्निशन (अधिसंज्ञान) का मतलब है यह जानना कि आप कैसे सोचते और सीखते हैं, और उसे सही दिशा देना। इसके दो हिस्से हैं: जानना (अपने बारे में, काम के बारे में, तरीकों के बारे में) और नियंत्रण (योजना, निगरानी, मूल्यांकन)। योजना में लक्ष्य, तरीका और समय तय कीजिए। काम करते हुए समझ जाँचिए और उलझने पर सुधार-तरीका अपनाइए। अंत में जो सोचा और जो हुआ, उसकी तुलना कीजिए। यही आदत पढ़ने, बोलने, सुनने, प्रस्तुति और वाद-विवाद में भी काम आती है।