अभिप्रेरणा क्या है? अभिप्रेरणा चक्र
यह शब्द लैटिन movere यानी "चलाना" से आया है। अभिप्रेरणा वह है जो व्यवहार शुरू करती है, उसे दिशा देती है और लक्ष्य मिलने तक बनाए रखती है। इसे देखा नहीं जा सकता; व्यवहार से अनुमान लगाया जाता है।
अभिप्रेरणा चक्र
- आवश्यकता: किसी चीज़ की कमी (पानी)।
- अंतर्नोद: भीतर का तनाव जो धकेलता है (प्यास, बेचैनी)।
- क्रिया: लक्ष्य की ओर व्यवहार (पानी ढूँढना)।
- लक्ष्य: जो आवश्यकता पूरी करे (पानी पीना)।
- राहत: अंतर्नोद घटता है, जब तक आवश्यकता फिर न लौटे।
अभिप्रेरक किसी व्यवहार का विशेष कारण है। अभिप्रेरक जैविक और मनोसामाजिक होते हैं।
जैविक अभिप्रेरक
जैविक अभिप्रेरक शरीर की आवश्यकताओं से आते हैं और सभी मनुष्यों व जानवरों में होते हैं। ये समस्थिति (homeostasis) पर चलते हैं: शरीर की भीतरी अवस्था (तापमान, पानी, शर्करा) स्थिर रखने की कोशिश।
- भूख: पेट के संकुचन, रक्त में कम ग्लूकोज़ और हार्मोन संकेत भेजते हैं; मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस में खाना शुरू और बंद करने के केंद्र हैं। भोजन की शक्ल, गंध और संस्कृति भी भूख पर असर डालते हैं।
- प्यास: कोशिकाओं में पानी घटने पर मुँह-गला सूखता है और हाइपोथैलेमस पानी पीने को प्रेरित करता है।
- नींद, यौन, दर्द से बचना और गर्म रहना भी जैविक अभिप्रेरक हैं।
मनोसामाजिक अभिप्रेरक
मनोसामाजिक अभिप्रेरक परिवार, स्कूल और समाज के साथ मेलजोल से सीखे जाते हैं। ये हर व्यक्ति में अलग होते हैं।
- संबंधन की आवश्यकता: दूसरों के साथ रहने, दोस्त बनाने, अपनापन पाने की चाह। डर या अनिश्चितता में बढ़ती है।
- शक्ति की आवश्यकता: दूसरों पर असर डालने, नियंत्रण या नेतृत्व की चाह।
- उपलब्धि की आवश्यकता: उत्कृष्टता के मानक तक पहुँचने की चाह; ऐसे लोग कठिन पर संभव काम चुनते हैं।
- जिज्ञासा और अन्वेषण: नई चीज़ें खोजने और समझने की चाह, बिना किसी इनाम के भी।
मैस्लो का आवश्यकता पदानुक्रम
अब्राहम मैस्लो ने मानवीय आवश्यकताओं को पिरामिड में रखा। आमतौर पर निचली आवश्यकताएँ काफ़ी हद तक पूरी हों, तभी ऊपर वाली व्यवहार चलाती हैं।
- शारीरिक: भोजन, पानी, नींद, हवा।
- सुरक्षा: घर, स्वास्थ्य, सुरक्षा, भय से मुक्ति।
- प्रेम और संबद्धता: परिवार, दोस्ती, स्वीकृति।
- सम्मान: आत्म-सम्मान और दूसरों से आदर, पहचान।
- आत्मसिद्धि: जो कुछ बन सकते हैं वह बनना; सृजन, विकास।
नीचे की चार अभाव आवश्यकताएँ हैं; आत्मसिद्धि विकास आवश्यकता है। सीमाएँ: क्रम कठोर नहीं (ग़रीब कलाकार भूखा रहकर भी चित्र बनाता है), और इसे वैज्ञानिक रूप से परखना कठिन है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- अभिप्रेरणा = व्यवहार शुरू करने, दिशा देने और बनाए रखने वाला बल
- चक्र: आवश्यकता → अंतर्नोद → क्रिया → लक्ष्य → राहत
- जैविक अभिप्रेरक: भूख, प्यास, नींद, यौन (समस्थिति)
- मनोसामाजिक अभिप्रेरक: संबंधन, शक्ति, उपलब्धि, जिज्ञासा
- मैस्लो (नीचे → ऊपर): शारीरिक → सुरक्षा → प्रेम/संबद्धता → सम्मान → आत्मसिद्धि
- अभाव आवश्यकताएँ = नीचे की चार; विकास आवश्यकता = आत्मसिद्धि
हल किए गए उदाहरण
1. चक्र के भाग बताओ: रोहन ने सुबह से कुछ नहीं खाया, कमज़ोरी और चिड़चिड़ापन लगता है, कैंटीन जाकर समोसा खाता है, फिर ठीक महसूस करता है।
आवश्यकता: भोजन। अंतर्नोद: कमज़ोरी और चिड़चिड़ापन। क्रिया: कैंटीन जाना। लक्ष्य: समोसा खाना। राहत: ठीक महसूस करना।
2. अभिप्रेरक बताओ: (क) प्रिया नए लोगों से मिलने हर क्लब में जुड़ती है; (ख) अमन 1500 रेटिंग के लिए रोज़ शतरंज खेलता है; (ग) रवि फ़ैसले लेने के लिए स्कूल कप्तान बनना चाहता है।
(क) संबंधन; (ख) उपलब्धि; (ग) शक्ति।
3. बुख़ार में व्यक्ति मन न होने पर भी ज़्यादा पानी क्यों पीता है?
समस्थिति: पसीने से पानी घटता है, कोशिकाएँ सिकुड़ती हैं, और हाइपोथैलेमस संतुलन लौटाने के लिए प्यास जगाता है।
4. मैस्लो के पिरामिड में रखो: (क) दरवाज़े पर ताला लगवाना, (ख) पुरस्कार जीतना, (ग) आनंद के लिए उपन्यास लिखना, (घ) दोस्तों के समूह में जुड़ना।
(क) सुरक्षा, (ख) सम्मान, (ग) आत्मसिद्धि, (घ) प्रेम और संबद्धता।
5. बाढ़ पीड़ित व्यक्ति चित्रकला प्रतियोगिता का निमंत्रण अनदेखा करता है। मैस्लो से समझाओ।
उसकी शारीरिक और सुरक्षा आवश्यकताएँ (भोजन, आश्रय) अधूरी हैं। ये निचली आवश्यकताएँ हावी हैं, इसलिए सम्मान या आत्मसिद्धि (प्रतियोगिता) अभी प्रेरित नहीं करतीं।
आम गलतियाँ
- आवश्यकता और अंतर्नोद को मिलाना: आवश्यकता कमी है, अंतर्नोद उससे बना धक्का।
- उपलब्धि को जैविक अभिप्रेरक कहना: यह सीखी जाती है, इसलिए मनोसामाजिक।
- पिरामिड में सम्मान को प्रेम और संबद्धता से नीचे रखना।
- यह कहना कि मैस्लो का क्रम सबके लिए पक्का है: यह सामान्य प्रवृत्ति है, अपवाद होते हैं।