Romania Clasa a X-a Psychology
अध्याय: 3
1. Mental processes and personality development
The psyche · Sensory processes · Higher cognitive processes · Regulating processes
- मन का दर्शन: मन और शरीर कैसे जुड़े हैं? – मन का दर्शन पूछता है कि मन क्या है और शरीर से कैसे जुड़ा है। द्वैतवाद (देकार्त) कहता है मन और शरीर दो अलग चीज़ें हैं, पर तब सवाल उठता है कि वे एक-दूसरे पर असर कैसे डालते हैं। भौतिकवाद कहता है मन दिमाग़ की गतिविधि है। चेतना हमारा भीतरी अनुभव है, एक टॉर्च जैसी। अचेतन (फ्रायड) में इच्छाएँ, यादें और आदतें हैं जिनका हमें पता नहीं होता। साथ के सवाल: समय के साथ मैं वही कैसे रहता हूँ, भावनाएँ क्या हैं, और क्या मशीन सोच सकती है।
- प्रत्यक्षण: दिमाग कैसे अर्थ बनाता है – प्रत्यक्षण यानी इंद्रियों से आई सूचना को अर्थ देना। हम नीचे से ऊपर (अंश से पूर्ण) और ऊपर से नीचे (विचार से विवरण) दोनों तरह काम करते हैं। देखने वाले की ज़रूरतें, अपेक्षाएँ और मनोदशा इसे बदलती हैं। गेस्टाल्ट नियम (आकृति-पृष्ठभूमि, निकटता, समानता, पूर्णता, निरंतरता) अंशों को जोड़ते हैं। एकनेत्री और द्विनेत्री संकेत गहराई बताते हैं। स्थैर्य आकार, माप और चमक को स्थिर रखता है। भ्रम वह प्रत्यक्षण है जो सच से मेल न खाए, और संस्कृति इस पर असर डालती है।
- चिंतन, समस्या समाधान और तर्कना – चिंतन का मतलब है किसी लक्ष्य तक पहुँचने के लिए मन में जानकारी पर काम करना। इसके आधार हैं मानसिक प्रतिमा और संप्रत्यय। चिंतन से हम समस्याएँ सुलझाते हैं (चरणों में, मानसिक विन्यास और प्रकार्यात्मक स्थिरता से बचकर), तर्क करते हैं (निगमनात्मक: नियम से उदाहरण; आगमनात्मक: उदाहरणों से नियम) और निर्णय लेते हैं।
- अभिप्रेरणा, अभिप्रेरक और मैस्लो का आवश्यकता पदानुक्रम – अभिप्रेरणा वह बल है जो व्यवहार को शुरू करता है, दिशा देता है और लक्ष्य तक बनाए रखता है। यह चक्र में चलती है: आवश्यकता → अंतर्नोद → क्रिया → लक्ष्य → राहत। अभिप्रेरक जैविक (भूख, प्यास, नींद, यौन; समस्थिति से संतुलित) या मनोसामाजिक (संबंधन, शक्ति, उपलब्धि, जिज्ञासा) होते हैं। मैस्लो ने आवश्यकताओं को शारीरिक से आत्मसिद्धि तक पिरामिड में रखा।
2. Structure and development of personality
Personality traits · Personality in depth (differentiated)
- व्यक्तित्व: उपागम और मूल्यांकन – व्यक्तित्व अलग-अलग परिस्थितियों में सोचने, महसूस करने और करने का व्यक्ति का स्थिर, खास ढंग है। प्रकार उपागम लोगों को समूहों में बाँटते हैं (टाइप A और B, अंतर्मुखी और बहिर्मुखी)। शीलगुण उपागम कई आयामों पर वर्णन करते हैं (ऑलपोर्ट, कैटेल, आइज़ेंक, पाँच-कारक)। फ्रायड का मनोगतिक उपागम अचेतन, इड, अहं, पराहम् और रक्षा युक्तियों को देखता है; नव-फ्रायडवादी (युंग, हॉर्नी, एडलर, फ्रॉम, एरिक्सन) सामाजिक और लक्ष्य वाली शक्तियों पर ज़ोर देते हैं। व्यवहारवादी उपागम कहता है व्यक्तित्व सीखा जाता है। सांस्कृतिक उपागम इसे पारिस्थितिकी और जीवन-शैली से जोड़ता है। मानवतावादी (रोजर्स, मैस्लो) विकास और आत्मसिद्धि पर ज़ोर देते हैं। मूल्यांकन आत्म-प्रतिवेदन, प्रक्षेपी तकनीक और व्यवहारात्मक विधियों से होता है।
- बुद्धि: सिद्धांत, बुद्धि-लब्धि और संवेगात्मक बुद्धि – बुद्धि दुनिया को समझने, साफ़ सोचने और चुनौती में साधनों का ठीक उपयोग करने की योग्यता है। मनोमितिक सिद्धांत इसे कारकों में बाँटते हैं: स्पीयरमैन के g और s, थर्स्टन की सात प्राथमिक योग्यताएँ, गिलफ़र्ड की अनेक योग्यताएँ। गार्डनर आठ अलग बुद्धियाँ बताते हैं। स्टर्नबर्ग के त्रिचापीय सिद्धांत में घटकीय, आनुभविक और सांदर्भिक भाग हैं। PASS मॉडल बुद्धि को योजना, अवधान-भ्रांति और सहकालिक-आनुक्रमिक प्रक्रमण मानता है। बुद्धि-लब्धि = मानसिक आयु ÷ कालानुक्रमिक आयु × 100; ज़्यादातर लोग 90-110 पर। संस्कृति तय करती है कि क्या बुद्धिमानी है। संवेगात्मक बुद्धि भावनाओं को जानने और सँभालने का कौशल है।
3. Psychosocial behaviour
Self and others
- सामाजिक मनोविज्ञान: दूसरे लोग हमें कैसे बदलते हैं – सामाजिक मनोविज्ञान यह पढ़ता है कि दूसरे लोग हमारी सोच, भावना और व्यवहार को कैसे बदलते हैं। व्यवहार व्यक्ति और परिस्थिति दोनों पर निर्भर है। समूह में हम अक्सर बहुमत के अनुरूप चलते हैं या अधिकारी का आदेश मानते हैं। रूढ़धारणा (विचार), पूर्वाग्रह (भावना) और भेदभाव (कार्य) समूहों को नुकसान पहुँचाते हैं। जब बहुत लोग देखते हैं, हर किसी को मदद की ज़िम्मेदारी कम लगती है। होड़ से संघर्ष, और साझा लक्ष्य से सहयोग बनता है।