केवल उपचार काफ़ी क्यों नहीं
उपचार के दो लक्ष्य हैं: लक्षण घटाना और जीवन की गुणवत्ता सुधारना। हल्की समस्याओं में लक्षण घटना अक्सर काफ़ी है। पर मनोविदलन जैसे गंभीर रोग में व्यक्ति रुचि, प्रेरणा, सामाजिक और काम के कौशल खो सकता है। नकारात्मक लक्षण (कम प्रेरणा, भावहीनता) आम हैं। इसलिए विभ्रम रुकने पर भी व्यक्ति अपने बल पर शायद न जी सके।
पुनर्वास यानी व्यक्ति को जितना संभव हो उतना उत्पादक (काम करने योग्य) और आत्मनिर्भर बनाना।
पुनर्वास के भाग
व्यावसायिक चिकित्सा
व्यक्ति रोज़ सरल, उपयोगी काम करता है, जैसे मोमबत्ती, काग़ज़ के थैले, बुनाई या बागवानी। इससे कार्य-अनुशासन बनता है: समय पर उठना, ध्यान लगाना, काम पूरा करना।
सामाजिक कौशल प्रशिक्षण
भूमिका-अभिनय, नक़ल और प्रतिक्रिया से व्यक्ति अभिवादन, मदद माँगना, बाँटना, ग़ुस्सा सँभालना और दूसरों के साथ समस्या सुलझाना सीखता है।
संज्ञानात्मक पुनर्प्रशिक्षण
योजनाबद्ध अभ्यास (स्मृति-खेल, पहेलियाँ, कदम-दर-कदम योजना) से मूल सोच-कौशल सुधरते हैं: ध्यान, स्मृति और कार्यकारी कार्य (योजना और निर्णय)।
व्यावसायिक प्रशिक्षण
बेहतर होने पर व्यक्ति किसी काम का कौशल सीखता है और नौकरी पाने व टिकाने में मदद पाता है।
परिवार, समुदाय और अधिकार
- पारिवारिक मनोशिक्षा: परिवार को रोग, दोबारा बिगड़ने के संकेत और बिना दोष दिए सहारा देना सिखाना।
- समुदाय-आधारित पुनर्वास: अस्पताल में लंबे समय रखने की जगह डे-केयर केंद्र, अर्ध-मार्ग गृह, स्वयं-सहायता समूह और सामुदायिक स्वास्थ्यकर्मी (विसंस्थानीकरण)।
- कलंक से लड़ाई: कलंक यानी शर्म और नकारात्मक ठप्पे। यह नौकरी, दोस्ती और विवाह का रास्ता रोकता है। सम्मानजनक शब्द, जागरूकता और ठीक हुए लोगों से मिलना इसे घटाते हैं।
- अधिकार: भारत का मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 मानसिक रोग वाले लोगों को देखभाल, गरिमा और समुदाय में रहने का अधिकार देता है।
- दोबारा बिगड़ने से बचाव: नियमित जाँच, सलाह के अनुसार दवा और स्वस्थ दिनचर्या।
करके देखें
3D खुले खेल में एक-एक सहायता बंद करें और स्वतंत्र जीवन का % लिखें। कौन-सी सहायता बंद करने पर कलंक की दीवार लौट आती है? फिर बीमारी से उबर रहे परिवार के किसी सदस्य के लिए एक सप्ताह की "व्यावसायिक चिकित्सा" समय-सारणी बनाएँ: रोज़ एक छोटा काम, रोज़ उसी समय।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- उपचार → कम लक्षण; पुनर्वास → उत्पादक + आत्मनिर्भर जीवन
- पुनर्वास = व्यावसायिक चिकित्सा + सामाजिक कौशल प्रशिक्षण + संज्ञानात्मक पुनर्प्रशिक्षण + व्यावसायिक प्रशिक्षण
- चारों ओर सहारा: पारिवारिक मनोशिक्षा, सामुदायिक देखभाल, कलंक-विरोध, अधिकार (मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017)
हल किए गए उदाहरण
1. नेहा के मनोविदलन के लक्षण नियंत्रण में हैं, पर वह दोपहर तक सोती है और दिन भर कुछ नहीं करती। पुनर्वास का कौन-सा भाग पहले शुरू हो और क्यों?
व्यावसायिक चिकित्सा: तय समय पर रोज़ के छोटे काम दिनचर्या और कार्य-अनुशासन बनाते हैं, जो आगे के प्रशिक्षण की नींव है।
2. इमरान आँख नहीं मिलाता, दुकानदार से सामान नहीं माँग पाता और मना करने पर ग़ुस्सा हो जाता है। कौन-सी विधि मदद करेगी?
सामाजिक कौशल प्रशिक्षण: ख़रीदारी और मना किए जाने का भूमिका-अभिनय, प्रतिक्रिया और अभ्यास के साथ।
3. 3D में हर सहायता 10% से शुरू होकर स्वतंत्र जीवन में 16% जोड़ती है। 3 सहायताओं पर स्तर क्या होगा? पाँचों पर?
10% + 3 × 16% = 58%। पाँचों पर: 10% + 5 × 16% = 90%।
4. कलंक पुनर्वास में बाधा क्यों है?
क्योंकि मानसिक रोग वाले लोगों को नौकरी से मना किया जा सकता है, पड़ोसी दूरी बनाते हैं और वे मदद माँगने में शर्माते हैं, तो सीखे कौशल असली जीवन में काम नहीं आते।
आम गलतियाँ
- मानना कि लक्षण जाते ही व्यक्ति पूरी तरह ठीक है। जीवन-कौशल फिर से बनाने पड़ सकते हैं।
- व्यावसायिक चिकित्सा (रोज़ की कार्य-दिनचर्या) और व्यावसायिक प्रशिक्षण (नौकरी के कौशल) को मिला देना।
- मानना कि मानसिक रोग वाले लोग काम नहीं कर सकते। प्रशिक्षण और सहारे से बहुत से अच्छा काम करते हैं।
- पुनर्वास को केवल अस्पताल का काम समझना। परिवार और समुदाय केंद्र में हैं।