इतिहास क्यों देखें?
मानसिक रोग भी बाक़ी रोगों जैसा ही एक रोग है। पर सदियों तक लोग इसे समझते नहीं थे, डरते थे। इतिहास देखने से पता चलता है कि आज नर्स सम्मान, सहमति और समुदाय में देखभाल क्यों अपनाती है। यह भी दिखता है कि नए विचारों ने पुराने डर को कैसे धीरे-धीरे बदला।
मनोरोग चिकित्सा का इतिहास
1. डर और छिपाना (पुराना समय)
कई समाज मानते थे कि रोग आत्माओं, श्राप या कमज़ोर स्वभाव से होता है। यूनान के हिप्पोक्रेटीज़ जैसे कुछ पुराने चिकित्सक कहते थे कि कारण शरीर और मस्तिष्क में है। फिर भी बहुतों के लिए जवाब था: व्यक्ति को छिपा दो या बंद कर दो। असली इलाज बहुत कम था।
2. दयालु देखभाल (1700 के अंत से)
फ़्रांस के फ़िलिप पिनेल और इंग्लैंड के विलियम ट्यूक जैसे सुधारकों ने नरम, सम्मान भरी देखभाल माँगी, जिसे नैतिक उपचार (मोरल ट्रीटमेंट) कहते हैं: शांत जगह, नियमित दिन, उपयोगी काम और प्यार भरे शब्द।
3. दवाएँ और समुदाय (1950 के बाद)
1950 के दशक में गंभीर लक्षणों की पहली दवाएँ (जैसे क्लोरप्रोमाज़ीन) मिलीं। रोगी शांत होने लगे और जल्दी अस्पताल से घर जा सके। लगभग 1960 से कई देशों ने बड़े अस्पताल घटाए और समुदाय में देखभाल बनाई। इसे विसंस्थानीकरण (डीइंस्टिट्यूशनलाइज़ेशन) कहते हैं।
मानसिक विकार वाले लोगों के अधिकारों की पैरवी
पैरवी (एडवोकेसी) का मतलब है किसी के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाना, या उसे अपनी बात खुद रखने में मदद करना।
- रोगी बोले। 1908 में अमेरिका के पूर्व रोगी क्लिफ़र्ड बीयर्स ने अपने बुरे अनुभव पर किताब लिखी और मानसिक स्वच्छता आंदोलन शुरू किया।
- परिवार और समूह। परिवारों और स्वयं-सहायता समूहों ने बेहतर सेवाएँ माँगीं और कलंक के ख़िलाफ़ काम किया।
- अंतरराष्ट्रीय नियम। संयुक्त राष्ट्र ने 1991 में मानसिक रोगियों की रक्षा के सिद्धांत और 2006 में दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों का समझौता अपनाया।
मुख्य अधिकार: सम्मान, गोपनीयता, सूचित सहमति (समझने के बाद व्यक्ति राज़ी हो), शिकायत का हक़ और समुदाय में रहने का हक़।
नर्स की भूमिका: सरल भाषा में समझाना, गोपनीयता रखना, सहमति लेना और दुर्व्यवहार की रिपोर्ट करना।
मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण व्यवस्था का इतिहास
कानूनों से पता चलता है कि सोच कैसे बदली। शुरुआती कानून ज़्यादातर जनता की सुरक्षा के लिए लोगों को बंद रखने के बारे में थे। नए कानून देखभाल, अधिकार और कल्याण के बारे में हैं।
उदाहरण: जापान
- 1900: मानसिक रोगियों की निगरानी का कानून (घर में बंद रखना)।
- 1950: मानसिक स्वच्छता कानून, अस्पताल की देखभाल मुख्य बनी।
- 1987: मानसिक स्वास्थ्य कानून, अस्पतालों में दुर्व्यवहार के मामले सामने आने के बाद। इसमें स्वैच्छिक भर्ती और रोगी-अधिकार आए।
- 1995: मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण कानून, समाज में लौटने के लिए कल्याण सहायता जुड़ी।
- 2000 के बाद: दिव्यांग-सहायता कानूनों से समुदाय में जीने की सेवाएँ मिलीं।
उदाहरण: भारत
- 1912: भारतीय पागलपन अधिनियम (ज़्यादातर बंद रखना)।
- 1987: मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम (देखभाल पर ज़ोर)।
- 2017: मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम (देखभाल, गरिमा और समुदाय में जीने का हक़)।
हर देश में दिशा एक ही है: बंद रखने से देखभाल, अधिकार और कल्याण की ओर।
करके देखें
कॉपी पर चार डिब्बों की टाइमलाइन बनाइए: डर, दया, हक़, कानून। हर डिब्बे के नीचे एक बदलाव लिखिए कि मानसिक रोग वाले व्यक्ति के साथ व्यवहार कैसे बदला। फिर किसी बुज़ुर्ग से पूछिए कि पहले आपके इलाक़े में लोग मानसिक रोग के बारे में कैसे बात करते थे, और आज से तुलना कीजिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- डर और छिपाना → दयालु देखभाल → अधिकार और आवाज़ → देखभाल और कल्याण के कानून
- विसंस्थानीकरण = बड़े अस्पतालों से समुदाय में देखभाल
- सूचित सहमति = व्यक्ति समझे, फिर राज़ी हो
हल किए गए उदाहरण
1. 1950 के दशक की दवाओं से देखभाल कैसे बदली?
दवाओं से गंभीर लक्षण घटे, रोगी शांत हुए, जल्दी अस्पताल से घर जा सके और समुदाय में रह सके। इससे बड़े अस्पतालों से हटने में मदद मिली।
2. नर्स कोई इलाज देने से पहले रोगी से पूछती है और सरल भाषा में समझाती है। वह कौन-सा अधिकार निभा रही है?
सूचित सहमति का अधिकार और सम्मान।
3. 1950 का कानून और 1995 का कानून भावना में कैसे अलग हैं (जापान का उदाहरण)?
1950 का कानून अस्पताल की देखभाल पर था। 1995 के कानून में कल्याण सहायता जुड़ी, ताकि लोग समाज में लौट सकें।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि मानसिक रोग हमेशा आत्माओं या कमज़ोर स्वभाव से होता है। यह मस्तिष्क और मन का रोग है।
- यह सोचना कि लंबी देखभाल के लिए बड़े अस्पताल सबसे अच्छे हैं। आज देखभाल ज़्यादातर समुदाय में होती है।
- पैरवी (अधिकारों के लिए आवाज़) और उपचार (दवा या थेरेपी) को मिला देना।
- यह सोचना कि कानून सिर्फ़ जनता की रक्षा करते हैं। आधुनिक कानून रोगी की भी रक्षा करते हैं।