निरीक्षण और जाँच
डॉक्टर और नर्स पहले पता लगाते हैं कि क्या हो रहा है। जाँच और परीक्षण में शामिल हैं: विचारों, मूड और रोज़ के जीवन के बारे में बातचीत; मानसिक स्थिति परीक्षण (रूप-रंग, बोलचाल, मूड, सोच, ऐसी आवाज़ें सुनना या चीज़ें देखना जो हैं नहीं, और अंतर्दृष्टि यानी व्यक्ति बीमारी को कितना समझता है); शरीर की जाँच; ख़ून की जाँच; और कभी-कभी दिमाग़ के स्कैन व मनोवैज्ञानिक परीक्षण।
नर्सिंग: हर जाँच आसान शब्दों में समझाना, अनुमति लेना, डर कम करना, निजता रखना, व्यवहार, नींद, भोजन और मूड देखना, और जो देखा-सुना वही लिखना, अंदाज़े नहीं।
इलाज
इलाज में आमतौर पर कई हिस्से साथ चलते हैं: दवाएँ (जैसे एंटीसाइकोटिक, अवसादरोधी, मूड-स्टेबलाइज़र और चिंता कम करने वाली दवाएँ), बातचीत वाली चिकित्सा (जैसे संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा), गतिविधि और व्यावसायिक चिकित्सा, समूह कार्य, और कुछ गंभीर मामलों में डॉक्टर द्वारा बेहोशी में दिया जाने वाला इलाज जिसे ECT कहते हैं। शारीरिक देखभाल और परिवार के साथ काम भी चलता है।
नर्सिंग: दवा समय पर देना और देखना कि निगली गई, दुष्प्रभाव देखना (नींद, अकड़न, वज़न बढ़ना, मुँह सूखना), व्यक्ति को दवा का महत्व समझाना, डॉक्टर के बिना अचानक दवा न रोकना, चिकित्सा सत्रों में सहारा देना और छोटी रोज़ की गतिविधियों को बढ़ावा देना।
तीव्र चरण
तीव्र चरण में लक्षण सबसे तेज़ होते हैं, जैसे बहुत डर, झूठे विश्वास, बहुत ऊँचा या बहुत नीचा मूड, या भ्रम। व्यक्ति सो, खा या अपनी देखभाल नहीं कर पाता और ख़ुद को या दूसरों को नुकसान का ख़तरा हो सकता है।
नर्सिंग लक्ष्य: सबको सुरक्षित रखना (नज़दीकी निगरानी, ख़तरनाक चीज़ें हटाना, ख़ुद को नुकसान के विचारों के बारे में पूछना), उत्तेजना घटाना (शांत, सरल कमरा, कम लोग), आराम, भोजन और पानी पक्का करना, शांत तनाव-निवारण (de-escalation) अपनाना (धीमी आवाज़, छोटे वाक्य, खुली मुद्रा, निजी दूरी, झूठे विश्वास से बहस नहीं), कम से कम रोक-टोक रखना और सहमति व अधिकारों के क़ानून का पालन करना। दवाएँ अक्सर अब शुरू होती हैं।
दीर्घकालिक चरण
दीर्घकालिक चरण में बीमारी ज़्यादा स्थिर होती है पर सालों चल सकती है, कुछ लक्षण या कम ऊर्जा बनी रह सकती है। लक्ष्य सुरक्षा से हटकर पुनर्वास और अच्छे से जीना हो जाता है।
नर्सिंग लक्ष्य: पुनर्वास (रोज़ के काम के कौशल, दिनचर्या, पैसे सँभालना, सामाजिक कौशल, काम या पढ़ाई), दवा लेते रहने और दुष्प्रभाव सँभालने में मदद, सेहतमंद आदतें (नींद, भोजन, व्यायाम, नशा नहीं), परिवार को शिक्षा और सहारा, समुदाय सेवाओं से जुड़ाव, और दोबारा बीमारी की रोकथाम: व्यक्ति और परिवार को शुरुआती चेतावनी के संकेत (कम नींद, अलग-थलग रहना, अजीब विचार) और क्या करना है सिखाना। पसंद का सम्मान और उम्मीद बनाना।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- चार खंड: जाँच, इलाज, तीव्र चरण, दीर्घकालिक चरण
- तीव्र का लक्ष्य: सुरक्षा, शांति, आराम, भोजन
- दीर्घकालिक का लक्ष्य: कौशल, दवा की आदत, परिवार का सहारा, दोबारा बीमारी की रोकथाम
- तनाव-निवारण: धीमी आवाज़, छोटे शब्द, दूरी, झूठे विश्वास से बहस नहीं
हल किए गए उदाहरण
1. एक व्यक्ति बहुत बेचैन है और मानता है कि कोई उसका पीछा कर रहा है। यह कौन-सा चरण हो सकता है और नर्स पहले क्या करे?
तीव्र चरण। उसे और दूसरों को सुरक्षित रखें, शांत जगह ले जाएँ, धीरे और शांति से बोलें, उसके विश्वास से बहस न करें, पास रहें पर दूरी दें, और डॉक्टर को बुलाएँ।
2. मूड-स्टेबलाइज़र दवा लेने वाली महिला कहती है कि हाथ काँपते हैं और वह ठीक महसूस करती है, इसलिए दवा बंद करना चाहती है। नर्स क्या करे?
सुने, समझाए कि दवा उसे स्वस्थ रखती है, बताए कि अचानक बंद करने से बीमारी लौट सकती है, काँपने की बात डॉक्टर को बताए ताकि योजना बदल सके, और डॉक्टर के निर्णय तक दवा लेते रहने को कहे।
3. दीर्घकालिक चरण में एक युवक दो रातों से सिर्फ़ 3 घंटे सोता है और परिवार से बचता है। क्या करना चाहिए?
ये दोबारा बीमारी के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। नर्स या परिवार इन्हें नोट करे, शांति से बात करे, देखभाल टीम को जल्दी बताए और पहले बनी रोकथाम योजना अपनाए।
आम गलतियाँ
- झूठे विश्वास पर बहस करना। शांत रहें और भावनाओं व सुरक्षा पर ध्यान दें।
- ठीक महसूस होने पर मनोरोग की दवा बंद कर देना। बीमारी लौट सकती है।
- तीव्र चरण में व्यक्ति को शोर और भीड़ वाली जगह में छोड़ना।
- परिवार को भूल जाना। दीर्घकालिक चरण में उनकी शिक्षा और सहारा सबसे ज़रूरी हैं।