लक्षण और वर्गीकरण
स्किज़ोफ़्रेनिया ऐसी मानसिक बीमारी है जिसमें व्यक्ति का वास्तविकता से कुछ संपर्क टूट जाता है। यह आमतौर पर किशोरावस्था के अंत से तीस की उम्र के शुरू तक शुरू होती है। यह 'दोहरा व्यक्तित्व' नहीं है, और ज़्यादातर रोगी हिंसक नहीं होते।
सकारात्मक लक्षण अतिरिक्त अनुभव हैं:
- मतिभ्रम (hallucinations): जो नहीं है उसे देखना, सुनना, सूँघना या महसूस करना। आवाज़ें सुनना सबसे आम है।
- भ्रम (delusions): पक्के झूठे विश्वास जो सबूत से नहीं बदलते, जैसे कोई पीछा कर रहा है (उत्पीड़न) या मैं बहुत महान हूँ (महानता)।
नकारात्मक लक्षण सामान्य क्षमताओं की कमी हैं:
- वाणी-अभाव (speech poverty): कम बोलना, बातों में कम सामग्री।
- इच्छा-अभाव (avolition): नहाने या काम जैसे रोज़ के काम शुरू या पूरे करने की प्रेरणा कम।
डॉक्टर मैनुअल इस्तेमाल करते हैं: DSM (सकारात्मक लक्षण ज़रूरी) और ICD (दो नकारात्मक लक्षणों से भी निदान)।
निदान की समस्याएँ
- विश्वसनीयता (reliability): क्या अलग-अलग डॉक्टर एक ही निदान देते हैं? कभी-कभी सहमति केवल मध्यम होती है, और DSM व ICD असहमत हो सकते हैं।
- वैधता (validity): क्या निदान सच में एक ही बीमारी को नापता है? एक ही नाम वाले लोगों के लक्षण बहुत अलग हो सकते हैं।
- सह-रुग्णता (co-morbidity): कई लोगों को अवसाद, चिंता या नशे की समस्या भी होती है। इससे साफ़ नहीं होता कि यह एक ही बीमारी है।
- लक्षण-मेल (symptom overlap): मतिभ्रम जैसे लक्षण बाइपोलर विकार में भी होते हैं।
- लिंग पूर्वाग्रह: पुरुषों का निदान ज़्यादा होता है। स्त्रियाँ छूट सकती हैं क्योंकि वे अक्सर रिश्ते और सामाजिक कौशल बेहतर बनाए रखती हैं।
- सांस्कृतिक पूर्वाग्रह: कुछ संस्कृतियों में आत्माओं या पूर्वजों की आवाज़ सुनना स्वीकार्य है। ब्रिटेन में अफ़्रीकी-कैरेबियाई मूल के लोगों का निदान बहुत ज़्यादा होता है, जो पूर्वाग्रह हो सकता है।
जैविक और मनोवैज्ञानिक व्याख्याएँ
जीन: परिवार और जुड़वाँ अध्ययन दिखाते हैं कि क़रीबी रिश्तेदार के साथ ख़तरा बढ़ता है: आम लोगों में लगभग 1%, हमशक्ल जुड़वाँ में लगभग 48%। कई जीन थोड़ा-थोड़ा ख़तरा जोड़ते हैं (बहुजीनी)। चूँकि हमशक्ल जुड़वाँ दोनों को हमेशा नहीं होता, माहौल भी मायने रखता है।
डोपामिन परिकल्पना: अनुभव और बोलने से जुड़े रास्तों में ज़्यादा डोपामिन सक्रियता से सकारात्मक लक्षण हो सकते हैं। दिमाग़ के आगे वाले भाग में कम डोपामिन से नकारात्मक लक्षण। प्रमाण: डोपामिन बढ़ाने वाली दवाएँ (जैसे एम्फ़ेटामिन) ऐसे लक्षण ला सकती हैं; घटाने वाली दवाएँ कम करती हैं। ग्लूटामेट जैसे दूसरे रसायन भी शामिल लगते हैं।
तंत्रिका संबंध (neural correlates): दिमाग़ के स्कैन अंतर दिखाते हैं, जैसे इनाम-तंत्र में कम सक्रियता इच्छा-अभाव से जुड़ी, और भीतर की बोली के दौरान सुनने वाले हिस्सों में कम सक्रियता आवाज़ों से जुड़ी। पर ये सहसंबंध हैं, सिद्ध कारण नहीं।
पारिवारिक गड़बड़ी: पुराना 'दोहरा बंधन' विचार (बच्चे को उल्टे संदेश) कम समर्थित है। व्यक्त भावना (expressed emotion) (रिश्तेदारों की आलोचना, दुश्मनी, ज़्यादा दख़ल) बीमारी के लौटने का अच्छी तरह सिद्ध कारण है।
संज्ञानात्मक व्याख्याएँ: ग़लत सोच। मेटा-निरूपण की समस्या: व्यक्ति अपने विचारों को अपना नहीं पहचान पाता, तो भीतर की बोली आवाज़ जैसी लगती है। केंद्रीय नियंत्रण की समस्या: असंबंधित विचार रोक नहीं पाता, तो बात इधर-उधर कूदती है।
इलाज और अंतःक्रियावादी तरीक़ा
दवा-चिकित्सा: पारंपरिक मनोविकार-रोधी दवाएँ (जैसे क्लोरप्रोमाज़ीन) डोपामिन रिसेप्टर रोकती हैं। नई (atypical) दवाएँ (जैसे क्लोज़ापीन) डोपामिन, सेरोटोनिन और ग्लूटामेट पर असर करती हैं। ये नकारात्मक लक्षणों में ज़्यादा मदद कर सकती हैं और हरकत वाले दुष्प्रभाव कम, पर कुछ के लिए ख़ून की जाँच ज़रूरी है। दवाएँ लक्षण घटाती हैं, जड़ से ठीक नहीं करतीं, और दुष्प्रभाव से लोग दवा छोड़ सकते हैं।
CBT (संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा): व्यक्ति अपने विश्वासों को पहचानना और परखना, और आवाज़ों से निपटना सीखता है ('क्या कोई और कारण हो सकता है?')। यह आमतौर पर दवा के साथ, बेचैनी घटाती है।
परिवार-चिकित्सा: रिश्तेदारों के साथ सत्र, जिनमें व्यक्त भावना घटाना, बातचीत सुधारना और बीमारी की जानकारी देना शामिल है। इससे बीमारी कम लौटती है।
टोकन व्यवस्था: अस्पतालों में। लोग तय व्यवहारों (जैसे कपड़े पहनना, सफ़ाई) पर टोकन कमाते हैं, जिन्हें इनाम से बदलते हैं। यह नकारात्मक लक्षण घटा सकती है, पर नैतिक सवाल उठते हैं और अस्पताल के बाहर असर टिकता नहीं।
प्रवणता-तनाव (diathesis-stress) मॉडल कहता है बीमारी तब दिखती है जब कमज़ोरी (प्रवणता, जैसे जीन, बचपन का आघात) तनाव (जैसे पारिवारिक कलह, भाँग का सेवन, बड़े बदलाव) से मिलती है। जितनी ज़्यादा कमज़ोरी, उतना कम तनाव काफ़ी। इसलिए दवा और मनोवैज्ञानिक इलाज मिलाना ठीक है।
अगर आप या आपका कोई परिचित ऐसे अनुभवों से परेशान है, तो डॉक्टर या किसी भरोसेमंद बड़े से बात करें। मदद असर करती है।
करके देखिए
चरण 5 में चारों बटन आज़माइए। देखिए कि केवल ज़्यादा जीन-जोखिम या केवल ज़्यादा तनाव से बाल्टी शायद न छलके, पर दोनों साथ हों तो छलक सकती है। फिर सोचिए: परिवार 'तनाव' वाला हिस्सा घटाने के लिए क्या कर सकता है? (शांत बातचीत, कम आलोचना, नियमित दिनचर्या।)
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुख्य शब्द: सकारात्मक लक्षण = सामान्य अनुभव में जोड़ (मतिभ्रम, भ्रम)
- मुख्य शब्द: नकारात्मक लक्षण = सामान्य कार्य में कमी (वाणी-अभाव, इच्छा-अभाव)
- मुख्य शब्द: विश्वसनीयता = निदान की एकरूपता; वैधता = निदान की सटीकता
- मुख्य शब्द: सह-रुग्णता = दो या ज़्यादा बीमारियाँ साथ; लक्षण-मेल = साझे लक्षण
- मुख्य शब्द: डोपामिन परिकल्पना = ज़्यादा डोपामिन (सकारात्मक लक्षण), कम डोपामिन (नकारात्मक लक्षण)
- मुख्य शब्द: व्यक्त भावना = परिवार में आलोचना, दुश्मनी, ज़्यादा दख़ल
- मुख्य शब्द: मेटा-निरूपण = अपने विचारों और कामों को अपना पहचानना
- मॉडल: प्रवणता (कमज़ोरी) + तनाव (ट्रिगर) → बीमारी
हल किए गए उदाहरण
1. टॉम को कोई न होने पर भी अपने कामों पर टिप्पणी करती आवाज़ सुनाई देती है, और वह मुश्किल से बिस्तर से उठता या नहाता है। हर लक्षण का नाम बताइए।
आवाज़ सुनना = मतिभ्रम (सकारात्मक)। बुनियादी देखभाल शुरू न करना = इच्छा-अभाव (नकारात्मक)।
2. 200 हमशक्ल जुड़वाँ, जिनके जुड़वाँ भाई/बहन को स्किज़ोफ़्रेनिया है, उनमें 48% दर से लगभग कितनों को होगा?
0.48 × 200 = 96।
3. मनोविकार-रोधी दवाओं का असर डोपामिन परिकल्पना को सिद्ध क्यों नहीं करता?
इलाज का असर कारण नहीं बताता (इलाज-कारण भ्रांति)। साथ ही कुछ लोगों पर डोपामिन रोकने वाली दवाएँ काम नहीं करतीं, तो ग्लूटामेट जैसे दूसरे रसायन भी शामिल हो सकते हैं।
आम गलतियाँ
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