दुश्चिंता विकार
दुश्चिंता यानी डर और चिंता, साथ में तेज़ धड़कन, पसीना और तनी मांसपेशियाँ। थोड़ी चिंता सामान्य है। यह विकार तब बनती है जब बहुत तेज़, लंबी और रोज़ के जीवन में बाधक हो।
- सामान्यीकृत दुश्चिंता विकार: कई बातों पर लंबी, अस्पष्ट चिंता, बेचैनी और ख़राब नींद।
- आतंक (पैनिक) विकार: अचानक तीव्र डर के दौरे, सीने में दर्द, साँस फूलना, मरने या नियंत्रण खोने का डर।
- दुर्भीति (फ़ोबिया): किसी चीज़ या स्थिति का तेज़, अतार्किक डर। विशिष्ट (कुत्ता, ऊँचाई), सामाजिक (परखे जाने का डर), और विवृति-भीति (ऐसी जगह का डर जहाँ से निकलना कठिन हो)।
- वियोग दुश्चिंता विकार: माता-पिता या प्रियजन से दूर होने पर अत्यधिक डर।
मनोग्रस्ति-बाध्यता और संबंधित विकार
मनोग्रस्ति यानी बार-बार लौटने वाले अनचाहे विचार ("मेरे हाथ गंदे हैं")। बाध्यता यानी चिंता घटाने के लिए बार-बार किया गया कार्य (धोना, जाँचना, गिनना)। राहत थोड़ी देर की होती है, इसलिए चक्र दोहराता है। संबंधित: संग्रह विकार (चीज़ें फेंक न पाना), बाल नोचना (ट्राइकोटिलोमेनिया), त्वचा नोचना।
आघात और दबावकारक संबंधी विकार
उत्तर-अभिघातज दबाव विकार (PTSD) दुर्घटना, बाढ़, हिंसा या युद्ध जैसी भयानक घटना के बाद हो सकता है। लक्षण: घटना की यादें बार-बार लौटना, बुरे सपने, याद दिलाने वाली चीज़ों से बचना, सुन्नपन, ज़रा-सी आवाज़ पर चौंकना। अन्य रूप: तीव्र दबाव विकार और समायोजन विकार।
कायिक लक्षण और संबंधित विकार
कायिक यानी शरीर से जुड़ा। यहाँ शरीर की शिकायतें होती हैं पर पूरा चिकित्सीय कारण नहीं मिलता।
- कायिक लक्षण विकार: दर्द या थकान जैसे लक्षणों को लेकर बहुत चिंता।
- रोग-दुश्चिंता विकार: सामान्य जाँच के बाद भी गंभीर रोग होने का लगातार डर।
- रूपांतरण विकार: शरीर का कोई कार्य बंद होना (अचानक लकवा, अंधापन) बिना शारीरिक कारण के, अक्सर दबाव के बाद।
विघटनशील विकार
विघटन यानी विचारों, स्मृति और "मैं" की भावना के बीच दरार।
- विघटनशील स्मृतिलोप: दबाव के बाद अपनी ज़रूरी बातें याद न आना। विघटनशील आत्मविस्मृति (फ़्यूग) में व्यक्ति घर से दूर चला जाता है, नई पहचान भी ले सकता है।
- विघटनशील पहचान विकार (पहले "बहु-व्यक्तित्व"): एक व्यक्ति में दो या अधिक अलग पहचानें, अक्सर बचपन के गंभीर शोषण से जुड़ी।
- वैयक्तिकता-लोप/व्युत्पत्ति-लोप: ख़ुद को या दुनिया को अवास्तविक महसूस करना।
अवसादी विकार
प्रमुख अवसादी विकार: कम से कम दो सप्ताह, लगभग रोज़, उदासी या रुचि ख़त्म होना; साथ में नींद, भूख और वज़न में बदलाव, थकान, धीमी सोच, अपराध-बोध या बेकार होने की भावना, मृत्यु के विचार। जोखिम कारक: जीन, आयु, लिंग (महिलाओं में अधिक), तनावपूर्ण घटनाएँ, सामाजिक सहारे की कमी। आत्महत्या गंभीर जोखिम है: मौत की बातें, चीज़ें बाँट देना, अलग-थलग होना चेतावनी संकेत हैं। तुरंत किसी भरोसेमंद बड़े को बताएँ।
द्विध्रुवी और संबंधित विकार
मूड दो ध्रुवों के बीच झूलता है। उन्माद: बहुत ऊँचा या चिड़चिड़ा मूड, कम नींद की ज़रूरत, तेज़ दौड़ते विचार, बड़ी योजनाएँ, जोखिम भरा ख़र्च। अवसाद: निचला ध्रुव। पहले इसे उन्माद-अवसाद विकार कहा जाता था। साइक्लोथाइमिक विकार हल्का पर लंबा झूला है।
मनोविदलन स्पेक्ट्रम और अन्य मनोविक्षिप्त विकार
मनोविदलन यानी सोच, प्रत्यक्षण और भावना में वास्तविकता से संपर्क टूटना। इसका अर्थ "बँटा व्यक्तित्व" नहीं है।
- सकारात्मक लक्षण (जुड़ना): भ्रमासक्ति (दृढ़ झूठे विश्वास: उत्पीड़न, महानता, संदर्भ, नियंत्रण के), विभ्रम (जो नहीं है वह देखना-सुनना; आवाज़ें सुनना सबसे आम), असंगठित चिंतन और बोली (विषय से भटकना, ढीले साहचर्य, नए गढ़े शब्द)।
- नकारात्मक लक्षण (घटना): भावहीनता, वाक्-अभाव (बहुत कम बोलना), इच्छाशक्ति-अभाव (काम शुरू करने की प्रेरणा नहीं), समाज से दूरी।
- मनोगत्यात्मक लक्षण: अजीब, जकड़ी या जमी हुई मुद्राएँ (कैटाटोनिया)।
तंत्रिका-विकासात्मक विकार
ये मस्तिष्क के विकास के साथ बचपन में ही शुरू होते हैं।
- ADHD (अवधान-न्यूनता/अतिक्रियाशीलता विकार): ध्यान न लगना, चीज़ें खोना और/या अति-सक्रियता व आवेग (बैठ न पाना, बीच में बोल पड़ना)।
- स्वलीनता (ऑटिज़्म) स्पेक्ट्रम विकार: सामाजिक संवाद और संबंधों में कठिनाई, दोहराव वाले व्यवहार या सीमित रुचियाँ।
- बौद्धिक अक्षमता: बुद्धि-लब्धि लगभग 70 से कम और रोज़मर्रा (अनुकूली) कौशलों में कठिनाई, 18 वर्ष से पहले।
- विशिष्ट अधिगम विकार: सामान्य बुद्धि के बावजूद पढ़ने (डिस्लेक्सिया), लिखने या गणित में कठिनाई।
विघटनकारी, आवेग-नियंत्रण और आचरण विकार
- विरोधात्मक अवज्ञा विकार (ODD): ग़ुस्सैल, बहस करने वाला, नियम न मानने वाला बच्चा जो दूसरों को दोष दे, पर आमतौर पर क्रूर नहीं।
- आचरण विकार: बार-बार दूसरों के अधिकार और बड़े नियम तोड़ना: धौंस, मारपीट, लोगों या जानवरों से क्रूरता, चोरी, तोड़-फोड़।
आहार और भोजन विकार
- क्षुधा-अभाव (एनोरेक्सिया नर्वोसा): बहुत दुबला होकर भी ख़ुद को मोटा समझना, बहुत कम खाना, वज़न बढ़ने का डर।
- क्षुधातिशय (बुलीमिया नर्वोसा): बहुत ज़्यादा खाना, फिर उल्टी, दस्तावर दवा या अति-व्यायाम से निकालना।
- अनियंत्रित भोजन विकार: बार-बार बहुत खाना बिना निकाले, नियंत्रण खोकर।
मादक द्रव्य संबंधी और व्यसनकारी विकार
शराब, तंबाकू, गाँजा, हेरोइन, कोकीन जैसे पदार्थों का हानिकारक उपयोग। मुख्य शब्द: दुरुपयोग (बार-बार हानिकारक उपयोग), निर्भरता (तलब और मजबूरी में उपयोग), सहनशीलता (उसी असर के लिए ज़्यादा मात्रा) और प्रत्याहार (छोड़ने पर तकलीफ़देह लक्षण)। शराब यकृत और मस्तिष्क को, हेरोइन साँस को, कोकीन हृदय को हानि पहुँचाते हैं। जुआ विकार भी व्यसनकारी विकार है।
करके देखें
3D खुले खेल में हर परिवार पर टैप करें। हर एक के लिए लिखें: मित्र में दिखने वाला एक लक्षण और एक दयालु कदम (सुनना, साथ रहना, भरोसेमंद बड़े को बताना, परामर्शदाता सुझाना)। याद रखें: आप ध्यान देते हैं, निदान नहीं करते। निदान केवल प्रशिक्षित विशेषज्ञ करते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मनोग्रस्ति = बार-बार आने वाला अनचाहा विचार; बाध्यता = चिंता घटाने के लिए दोहराया कार्य
- अवसाद: उदासी/रुचि-अभाव ≥ 2 सप्ताह
- द्विध्रुवी = उन्माद ⇄ अवसाद
- मनोविदलन: सकारात्मक (जुड़े) बनाम नकारात्मक (घटे) लक्षण
- मादक द्रव्य: सहनशीलता (ज़्यादा चाहिए) · प्रत्याहार (छोड़ने पर लक्षण)
हल किए गए उदाहरण
1. करण सोने से पहले 20 बार ताला जाँचता है और बिना जाँचे चैन नहीं आता। कौन-सा विकार परिवार?
मनोग्रस्ति-बाध्यता विकार: मनोग्रस्ति "दरवाज़ा खुला रह गया होगा", बाध्यता बार-बार जाँचना — थोड़ी राहत के लिए।
2. बस दुर्घटना के दो महीने बाद सना को बुरे सपने आते हैं, वह बस से बचती है और तेज़ आवाज़ पर उछल पड़ती है। कौन-सा विकार?
उत्तर-अभिघातज दबाव विकार (PTSD): आघात के बाद यादें/सपने, बचाव और अति-सतर्कता।
3. राहुल मानता है कि टीवी समाचार वाचक उसे गुप्त संदेश भेजते हैं और उसे अपने बारे में टिप्पणी करती आवाज़ें सुनाई देती हैं। लक्षण बताइए।
संदर्भ की भ्रमासक्ति (घटनाएँ उसी के बारे में हैं) और श्रवण विभ्रम। दोनों मनोविदलन के सकारात्मक लक्षण हैं।
4. दो सप्ताह से अनु बहुत कम सोती है, बहुत तेज़ बोलती है, पाँच कंपनियाँ खोलने की योजना बनाती है और सारी बचत ख़र्च कर देती है। पहले उसे हफ़्तों गहरी उदासी रही थी। कौन-सा विकार?
द्विध्रुवी विकार: अभी उन्माद की अवस्था, पहले अवसाद की अवस्था।
5. एक होशियार 9 वर्षीय बच्चा "b" को "d" पढ़ता है, धीरे पढ़ता है और ज़ोर से पढ़ने से कतराता है, पर गणित में अच्छा है। यह क्या हो सकता है?
पढ़ने में कठिनाई वाला विशिष्ट अधिगम विकार (डिस्लेक्सिया), एक तंत्रिका-विकासात्मक विकार। बुद्धि सामान्य है।
6. विक्रम को वही असर पाने के लिए ज़्यादा शराब चाहिए, और छोड़ने पर वह काँपता और पसीने से भीगता है। दो संकेत बताइए।
सहनशीलता (ज़्यादा चाहिए) और प्रत्याहार (छोड़ने पर काँपना, पसीना): शराब पर निर्भरता के संकेत।
आम गलतियाँ
- मनोविदलन को "बँटा व्यक्तित्व" कहना। वह विघटनशील पहचान विकार है।
- मनोग्रस्ति (विचार) और बाध्यता (कार्य) को मिला देना।
- हर उदास दिन को "अवसाद" कहना। अवसाद कम से कम दो सप्ताह रहता है और जीवन बिगाड़ता है।
- मानना कि ADHD या स्वलीनता ख़राब परवरिश से होते हैं। ये तंत्रिका-विकासात्मक हैं।