हर माध्यम में धारा कौन ले जाता है?
धारा यानी चलता हुआ आवेश। क्या चल रहा है, यह माध्यम पर निर्भर है।
- धातु: मुक्त (चालन) इलेक्ट्रॉन चलते हैं। परमाणु अपनी जगह रहते हैं।
- विद्युत-अपघट्य (पानी में नमक या अम्ल, पिघले लवण): धन और ऋण आयन उलटी दिशाओं में चलते हैं।
- गैस: आम तौर पर कुचालक। आयनित होने पर इलेक्ट्रॉन और धन आयन धारा ले जाते हैं।
- प्लाज़्मा (बहुत गर्म आयनित गैस, जैसे सूर्य, बिजली, नियॉन बोर्ड): मुक्त इलेक्ट्रॉन और आयनों से भरा, इसलिए बहुत अच्छा चालक।
- अर्धचालक (सिलिकॉन, जर्मेनियम): धारा इलेक्ट्रॉन और कोटर (होल, यानी इलेक्ट्रॉन की कमी जो धन आवेश जैसी चलती है) से बहती है। कम ताप पर वाहक कम, गर्म करने या अपमिश्रण से ज़्यादा।
3D में पहले चार दिखते हैं। अर्धचालक के लिए पाठ p-n संधि डायोड देखिए।
धातु: प्रतिरोध और ताप
धातु में इलेक्ट्रॉन सीधे नहीं दौड़ते। वे बहुत तेज़ी से बेतरतीब घूमते हैं, और वोल्टता लगने पर एक दिशा में धीमा अपवाह (ड्रिफ़्ट) जुड़ जाता है। वे काँपते परमाणुओं से बार-बार टकराते हैं।
धातु गर्म करें तो परमाणु ज़्यादा काँपते हैं, टक्करें बढ़ती हैं। ताप के साथ प्रतिरोधकता बढ़ती है:
R = R₀(1 + αΔT), जहाँ α ताप-गुणांक है (तांबे के लिए लगभग 0.004 प्रति °C)।
विद्युत-अपघट्य और अर्धचालक में उलटा होता है: गर्म करने से ज़्यादा आयन या वाहक मुक्त होते हैं, इसलिए प्रतिरोध घटता है। मैंगनिन और कॉन्स्टैन्टन जैसे मिश्रधातुओं का α बहुत छोटा है, इसलिए मानक प्रतिरोधों में वही लगते हैं।
अतिचालकता
कुछ पदार्थ एक क्रांतिक ताप से नीचे ठंडे होने पर सारा विद्युत प्रतिरोध खो देते हैं। पारा लगभग 4 K (−269 °C) पर ऐसा करता है। कुछ सिरेमिक पदार्थ इससे बहुत ऊँचे ताप, लगभग 100 K और ऊपर, पर।
अतिचालक छल्ले में धारा बिना बैटरी के सालों तक बह सकती है। उपयोग: बहुत शक्तिशाली विद्युत-चुंबक (MRI मशीन, कण त्वरक), मैग्लेव ट्रेन, बिना हानि वाले तार। तेज़ चुंबकीय क्षेत्र या बहुत बड़ी धारा अतिचालकता नष्ट कर सकती है।
विद्युत-अपघट्य और विद्युत अपघटन के नियम
विद्युत-अपघट्य में धारा जाने पर आयन इलेक्ट्रोडों तक पहुँचते हैं और पदार्थ जमा होता या निकलता है। इसे विद्युत अपघटन कहते हैं। इससे विद्युत-लेपन, तांबे का शोधन और एल्युमिनियम बनता है।
फैराडे का पहला नियम: निकला द्रव्यमान गुज़रे आवेश के समानुपाती है: m = Z q = Z I t। Z पदार्थ का विद्युत-रासायनिक तुल्यांक है (kg प्रति कूलॉम)।
फैराडे का दूसरा नियम: समान आवेश के लिए निकले द्रव्यमान पदार्थों के रासायनिक तुल्यांकों M/n के समानुपाती होते हैं। इसलिए Z = M / (n F), जहाँ फैराडे स्थिरांक F ≈ 96 500 C प्रति मोल।
जलीय विद्युत-अपघट्य ओम के नियम का केवल लगभग पालन करते हैं। वोल्टता को इलेक्ट्रोडों की एक छोटी विपरीत वोल्टता से भी जीतना पड़ता है।
गैसें: विसर्जन और प्लाज़्मा
सामान्य दाब पर हवा कुचालक है क्योंकि उसमें मुक्त आवेश लगभग नहीं होते। ब्रह्मांडीय किरणों और रेडियोधर्मिता से कुछ आयन होते हैं, इसलिए वोल्टता लगाने पर बहुत छोटी धारा बहती है।
वोल्टता बढ़ाइए तो मुक्त इलेक्ट्रॉन तेज़ होकर परमाणुओं से टकराते हैं और और इलेक्ट्रॉन बाहर निकालते हैं। यह शृंखला अभिक्रिया हिमस्खलन (एवलांच) है। इससे चिंगारी (ऊँचा दाब, जैसे बिजली) या स्थिर दीप्ति विसर्जन (कम दाब, जैसे नियॉन बोर्ड या ट्यूबलाइट) बनता है। गैस प्लाज़्मा बन जाती है। जिस वोल्टता पर यह शुरू होता है वह भंजन वोल्टता है। दाब घटाने से यह आसान होता है, एक सीमा तक।
निर्वात: तापायनिक उत्सर्जन
पूर्ण निर्वात में आवेश वाहक नहीं होते, इसलिए धारा नहीं बहती। पर गर्म धातु अपनी सतह से इलेक्ट्रॉन छोड़ देती है। यह तापायनिक उत्सर्जन है। कैथोड जितना गर्म, उतने ज़्यादा इलेक्ट्रॉन।
निर्वात डायोड में गर्म कैथोड (−) इलेक्ट्रॉन प्लेट (+) तक भेजता है। धारा सिर्फ़ एक ओर बहती है, इसलिए यह दिष्टकारी का काम करता है। कम वोल्टता पर वोल्टता बढ़ाने से धारा बढ़ती है। ज़्यादा वोल्टता पर निकले सारे इलेक्ट्रॉन पकड़ लिए जाते हैं और धारा संतृप्त हो जाती है, तब सिर्फ़ और गर्म करने से बढ़ती है। पुराने टीवी, एक्स-रे ट्यूब और इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी यही प्रभाव इस्तेमाल करते हैं।
करके देखिए: नमकीन पानी और बल्ब
बल्ब और बैटरी को एक परिपथ में जोड़िए, दो नंगे तार के सिरे गिलास में डुबोइए। साफ़ आसुत जल में बल्ब नहीं जलता। एक चम्मच नमक घोलिए: बल्ब जल उठता है। नमक आयन देता है जो धारा ले जाते हैं। तार के सिरों पर छोटे बुलबुले देखिए। 3D में द्रव चुनिए और वोल्टता स्लाइडर घुमाइए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- R = R₀(1 + αΔT) (धातु: α धनात्मक)
- ρ = ρ₀(1 + αΔT)
- फैराडे 1: m = Z q = Z I t
- फैराडे 2: Z = M / (n F), F ≈ 96 500 C/mol
- आवेश: q = I t
- 1 मोल इलेक्ट्रॉन से जमा द्रव्यमान = M / n
हल किए गए उदाहरण
1. तांबे के तार का प्रतिरोध 20 °C पर 50 Ω है। α = 0.004 प्रति °C लें। 120 °C पर प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।
ΔT = 100 °C। R = 50 × (1 + 0.004 × 100) = 50 × 1.4 = 70 Ω।
2. बल्ब के तंतु का प्रतिरोध ठंडा होने पर 40 Ω और दमकते समय 480 Ω है। वह 240 V पर है। चालू करते समय और गर्म होने पर धारा ज्ञात कीजिए।
ठंडा: I = 240 / 40 = 6 A। गर्म: I = 240 / 480 = 0.5 A। चालू करते समय का झटका ही कारण है कि बल्ब अक्सर तभी फ़्यूज़ होते हैं।
3. विद्युत-अपघट्य से 1.5 A धारा 20 मिनट बहती है। कितना आवेश गुज़रा?
t = 20 × 60 = 1200 s। q = I t = 1.5 × 1200 = 1800 C।
4. तांबे के लेपन घोल में 2 A धारा 30 मिनट चलती है। तांबे का Z = 3.3 × 10⁻⁷ kg/C है। जमा द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।
q = 2 × 1800 = 3600 C। m = Z q = 3.3 × 10⁻⁷ × 3600 = 1.19 × 10⁻³ kg ≈ 1.19 g।
5. 0.66 g तांबा जमा करने के लिए 0.5 A धारा कितनी देर बहे? (Z = 3.3 × 10⁻⁴ g/C)
q = m / Z = 0.66 / 3.3 × 10⁻⁴ = 2000 C। t = q / I = 2000 / 0.5 = 4000 s (लगभग 67 मिनट)।
6. 0.54 g चाँदी जमा करने में कितना आवेश लगेगा? (M = 108 g/mol, n = 1, F = 96 500 C/mol)
एक मोल इलेक्ट्रॉन (96 500 C) 108 g जमा करता है। इसलिए q = 0.54 / 108 × 96 500 = 482.5 C।
7. समान आवेश तांबे के घोल (M = 63.5, n = 2) और चाँदी के घोल (M = 108, n = 1) से गुज़रता है। द्रव्यमानों की तुलना कीजिए।
रासायनिक तुल्यांक: तांबा 63.5 / 2 = 31.75, चाँदी 108 / 1 = 108। फैराडे के दूसरे नियम से m(चाँदी) : m(तांबा) = 108 : 31.75 ≈ 3.4 : 1।
आम गलतियाँ
- हर माध्यम में इलेक्ट्रॉन को ही वाहक कहना। विद्युत-अपघट्य में आयन, गैस में आयन और इलेक्ट्रॉन, अर्धचालक में इलेक्ट्रॉन और कोटर।
- सोचना कि इलेक्ट्रॉन तार में तेज़ दौड़ते हैं। उनकी अपवाह चाल बहुत कम (लगभग एक मिलीमीटर प्रति सेकंड) है; संकेत तेज़ फैलता है, इलेक्ट्रॉन नहीं।
- हर पदार्थ के लिए कहना कि गर्म करने पर प्रतिरोध बढ़ता है। धातु में बढ़ता है, पर विद्युत-अपघट्य और अर्धचालक में घटता है।
- m = Z I t में मिनट सीधे रख देना। समय पहले सेकंड में बदलिए।