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धातु, द्रव, गैस और निर्वात में विद्युत धारा

धारा का मतलब है आवेश का बहना, पर हर माध्यम में बहने वाले आवेश अलग होते हैं। धातु में मुक्त इलेक्ट्रॉन, विद्युत-अपघट्य में धन और ऋण आयन। गैस तभी चालक बनती है जब वह आयनित हो (चिंगारी या दीप्ति विसर्जन)। निर्वात में तभी धारा बहती है जब गर्म कैथोड से इलेक्ट्रॉन निकलें (तापायनिक उत्सर्जन)। गर्म करने पर धातु का प्रतिरोध बढ़ता है, विद्युत-अपघट्य और अर्धचालक का घटता है, और अतिचालक काफ़ी ठंडा होने पर शून्य प्रतिरोध वाला हो जाता है। फैराडे के नियम: विद्युत अपघटन में निकला द्रव्यमान m = Z I t।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. यह एक धातु है। स्लेटी गोले स्थिर परमाणु हैं। नीले बिंदु मुक्त इलेक्ट्रॉन हैं। पहले वे बस इधर-उधर घूमते हैं। अब वोल्टता लगाएँ: वे + पट्टी की ओर खिसकने लगते हैं।
  2. धातु को गर्म कीजिए। परमाणु ज़्यादा काँपते हैं, इलेक्ट्रॉन ज़्यादा टकराते हैं और धारा घट जाती है। गर्म धातु का प्रतिरोध ज़्यादा होता है।
  3. अब नमक वाला द्रव। लाल धन आयन ऋण पट्टी की ओर जाते हैं। नीले ऋण आयन धन पट्टी की ओर। दोनों तरह के आयन धारा ले जाते हैं।
  4. गैस में मुक्त आवेश नहीं होते, इसलिए कुछ नहीं बहता। वोल्टता लगभग 6 से ऊपर करें तो परमाणु आयन और इलेक्ट्रॉन में टूट जाते हैं। चिंगारी कूदती है और धारा तेज़ी से बढ़ती है।
  5. निर्वात में धारा ले जाने वाला कुछ नहीं है। कैथोड गर्म कीजिए: गर्म धातु से इलेक्ट्रॉन निकलते हैं और उड़कर धन पट्टी तक पहुँचते हैं।
  6. फ़्री-प्ले: कोई भी माध्यम चुनिए, वोल्टता और हीटर घुमाइए और धारा का पाठ्यांक देखिए। किस माध्यम को चालू होने के लिए पहले ट्रिगर चाहिए?

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

इलेक्ट्रॉन इतना धीरे बहते हैं तो बल्ब तुरंत कैसे जलता है?

विद्युत क्षेत्र तार में लगभग प्रकाश की चाल से फैलता है और सभी मुक्त इलेक्ट्रॉनों को एक साथ धक्का देता है, जैसे पाइप में पहले से भरा पानी।

गर्म धातु का प्रतिरोध ज़्यादा क्यों होता है?

गर्म परमाणु ज़्यादा काँपकर बहते इलेक्ट्रॉनों को बार-बार रोकते हैं। चरण 2 में स्लेटी परमाणुओं का काँपना देखिए।

द्रव में दोनों तरह के आयन क्यों चाहिए?

धन आयन एक ओर और ऋण आयन दूसरी ओर चलते हैं। दोनों की गति आवेश का बहना है और दोनों धारा में जुड़ते हैं।

चिंगारी से पहले हवा चालक क्यों नहीं होती?

हवा में मुक्त आवेश लगभग नहीं होते। तेज़ क्षेत्र ही इलेक्ट्रॉनों को इतनी चाल देता है कि वे और इलेक्ट्रॉन निकालें, तब हिमस्खलन शुरू होता है।

निर्वात ट्यूब में कैथोड को गर्म क्यों करना पड़ता है?

ठंडी धातु अपने इलेक्ट्रॉन पकड़े रखती है। गर्मी से कुछ इलेक्ट्रॉनों को निकलने लायक ऊर्जा मिलती है।

क्या निर्वात डायोड में ज़्यादा वोल्टता हमेशा ज़्यादा धारा देती है?

हमेशा नहीं। जब निकले सारे इलेक्ट्रॉन पकड़ लिए जाते हैं तो धारा संतृप्त हो जाती है। तब सिर्फ़ और गर्म करने से बढ़ती है।

हर माध्यम में धारा कौन ले जाता है?

धारा यानी चलता हुआ आवेश। क्या चल रहा है, यह माध्यम पर निर्भर है।

3D में पहले चार दिखते हैं। अर्धचालक के लिए पाठ p-n संधि डायोड देखिए।

धातु: प्रतिरोध और ताप

धातु में इलेक्ट्रॉन सीधे नहीं दौड़ते। वे बहुत तेज़ी से बेतरतीब घूमते हैं, और वोल्टता लगने पर एक दिशा में धीमा अपवाह (ड्रिफ़्ट) जुड़ जाता है। वे काँपते परमाणुओं से बार-बार टकराते हैं।

धातु गर्म करें तो परमाणु ज़्यादा काँपते हैं, टक्करें बढ़ती हैं। ताप के साथ प्रतिरोधकता बढ़ती है:

R = R₀(1 + αΔT), जहाँ α ताप-गुणांक है (तांबे के लिए लगभग 0.004 प्रति °C)।

विद्युत-अपघट्य और अर्धचालक में उलटा होता है: गर्म करने से ज़्यादा आयन या वाहक मुक्त होते हैं, इसलिए प्रतिरोध घटता है। मैंगनिन और कॉन्स्टैन्टन जैसे मिश्रधातुओं का α बहुत छोटा है, इसलिए मानक प्रतिरोधों में वही लगते हैं।

अतिचालकता

कुछ पदार्थ एक क्रांतिक ताप से नीचे ठंडे होने पर सारा विद्युत प्रतिरोध खो देते हैं। पारा लगभग 4 K (−269 °C) पर ऐसा करता है। कुछ सिरेमिक पदार्थ इससे बहुत ऊँचे ताप, लगभग 100 K और ऊपर, पर।

अतिचालक छल्ले में धारा बिना बैटरी के सालों तक बह सकती है। उपयोग: बहुत शक्तिशाली विद्युत-चुंबक (MRI मशीन, कण त्वरक), मैग्लेव ट्रेन, बिना हानि वाले तार। तेज़ चुंबकीय क्षेत्र या बहुत बड़ी धारा अतिचालकता नष्ट कर सकती है।

विद्युत-अपघट्य और विद्युत अपघटन के नियम

विद्युत-अपघट्य में धारा जाने पर आयन इलेक्ट्रोडों तक पहुँचते हैं और पदार्थ जमा होता या निकलता है। इसे विद्युत अपघटन कहते हैं। इससे विद्युत-लेपन, तांबे का शोधन और एल्युमिनियम बनता है।

फैराडे का पहला नियम: निकला द्रव्यमान गुज़रे आवेश के समानुपाती है: m = Z q = Z I t। Z पदार्थ का विद्युत-रासायनिक तुल्यांक है (kg प्रति कूलॉम)।

फैराडे का दूसरा नियम: समान आवेश के लिए निकले द्रव्यमान पदार्थों के रासायनिक तुल्यांकों M/n के समानुपाती होते हैं। इसलिए Z = M / (n F), जहाँ फैराडे स्थिरांक F ≈ 96 500 C प्रति मोल।

जलीय विद्युत-अपघट्य ओम के नियम का केवल लगभग पालन करते हैं। वोल्टता को इलेक्ट्रोडों की एक छोटी विपरीत वोल्टता से भी जीतना पड़ता है।

गैसें: विसर्जन और प्लाज़्मा

सामान्य दाब पर हवा कुचालक है क्योंकि उसमें मुक्त आवेश लगभग नहीं होते। ब्रह्मांडीय किरणों और रेडियोधर्मिता से कुछ आयन होते हैं, इसलिए वोल्टता लगाने पर बहुत छोटी धारा बहती है।

वोल्टता बढ़ाइए तो मुक्त इलेक्ट्रॉन तेज़ होकर परमाणुओं से टकराते हैं और और इलेक्ट्रॉन बाहर निकालते हैं। यह शृंखला अभिक्रिया हिमस्खलन (एवलांच) है। इससे चिंगारी (ऊँचा दाब, जैसे बिजली) या स्थिर दीप्ति विसर्जन (कम दाब, जैसे नियॉन बोर्ड या ट्यूबलाइट) बनता है। गैस प्लाज़्मा बन जाती है। जिस वोल्टता पर यह शुरू होता है वह भंजन वोल्टता है। दाब घटाने से यह आसान होता है, एक सीमा तक।

निर्वात: तापायनिक उत्सर्जन

पूर्ण निर्वात में आवेश वाहक नहीं होते, इसलिए धारा नहीं बहती। पर गर्म धातु अपनी सतह से इलेक्ट्रॉन छोड़ देती है। यह तापायनिक उत्सर्जन है। कैथोड जितना गर्म, उतने ज़्यादा इलेक्ट्रॉन।

निर्वात डायोड में गर्म कैथोड (−) इलेक्ट्रॉन प्लेट (+) तक भेजता है। धारा सिर्फ़ एक ओर बहती है, इसलिए यह दिष्टकारी का काम करता है। कम वोल्टता पर वोल्टता बढ़ाने से धारा बढ़ती है। ज़्यादा वोल्टता पर निकले सारे इलेक्ट्रॉन पकड़ लिए जाते हैं और धारा संतृप्त हो जाती है, तब सिर्फ़ और गर्म करने से बढ़ती है। पुराने टीवी, एक्स-रे ट्यूब और इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी यही प्रभाव इस्तेमाल करते हैं।

करके देखिए: नमकीन पानी और बल्ब

बल्ब और बैटरी को एक परिपथ में जोड़िए, दो नंगे तार के सिरे गिलास में डुबोइए। साफ़ आसुत जल में बल्ब नहीं जलता। एक चम्मच नमक घोलिए: बल्ब जल उठता है। नमक आयन देता है जो धारा ले जाते हैं। तार के सिरों पर छोटे बुलबुले देखिए। 3D में द्रव चुनिए और वोल्टता स्लाइडर घुमाइए।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. तांबे के तार का प्रतिरोध 20 °C पर 50 Ω है। α = 0.004 प्रति °C लें। 120 °C पर प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।

ΔT = 100 °C। R = 50 × (1 + 0.004 × 100) = 50 × 1.4 = 70 Ω।

2. बल्ब के तंतु का प्रतिरोध ठंडा होने पर 40 Ω और दमकते समय 480 Ω है। वह 240 V पर है। चालू करते समय और गर्म होने पर धारा ज्ञात कीजिए।

ठंडा: I = 240 / 40 = 6 A। गर्म: I = 240 / 480 = 0.5 A। चालू करते समय का झटका ही कारण है कि बल्ब अक्सर तभी फ़्यूज़ होते हैं।

3. विद्युत-अपघट्य से 1.5 A धारा 20 मिनट बहती है। कितना आवेश गुज़रा?

t = 20 × 60 = 1200 s। q = I t = 1.5 × 1200 = 1800 C।

4. तांबे के लेपन घोल में 2 A धारा 30 मिनट चलती है। तांबे का Z = 3.3 × 10⁻⁷ kg/C है। जमा द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।

q = 2 × 1800 = 3600 C। m = Z q = 3.3 × 10⁻⁷ × 3600 = 1.19 × 10⁻³ kg ≈ 1.19 g।

5. 0.66 g तांबा जमा करने के लिए 0.5 A धारा कितनी देर बहे? (Z = 3.3 × 10⁻⁴ g/C)

q = m / Z = 0.66 / 3.3 × 10⁻⁴ = 2000 C। t = q / I = 2000 / 0.5 = 4000 s (लगभग 67 मिनट)।

6. 0.54 g चाँदी जमा करने में कितना आवेश लगेगा? (M = 108 g/mol, n = 1, F = 96 500 C/mol)

एक मोल इलेक्ट्रॉन (96 500 C) 108 g जमा करता है। इसलिए q = 0.54 / 108 × 96 500 = 482.5 C।

7. समान आवेश तांबे के घोल (M = 63.5, n = 2) और चाँदी के घोल (M = 108, n = 1) से गुज़रता है। द्रव्यमानों की तुलना कीजिए।

रासायनिक तुल्यांक: तांबा 63.5 / 2 = 31.75, चाँदी 108 / 1 = 108। फैराडे के दूसरे नियम से m(चाँदी) : m(तांबा) = 108 : 31.75 ≈ 3.4 : 1।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. धातु में धारा कौन-से कण ले जाते हैं?
2. विद्युत-अपघट्य में धारा ले जाते हैं:
3. गर्म करने पर धातु का प्रतिरोध:
4. तापायनिक उत्सर्जन है:
5. फैराडे के पहले नियम में निकला द्रव्यमान समानुपाती है:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

द्रव चालक क्यों है पर आसुत जल नहीं?

चालन के लिए मुक्त आयन चाहिए। आसुत जल में लगभग नहीं होते। नमक या अम्ल घोलने पर आयन बनते हैं, तब वह चालक बन जाता है।

गर्म धातु ख़राब चालक क्यों, पर गर्म नमकीन पानी बेहतर क्यों?

गर्म धातु में परमाणु ज़्यादा काँपकर इलेक्ट्रॉनों को रोकते हैं। नमकीन पानी में गर्मी से ज़्यादा आयन मुक्त होते हैं और द्रव पतला होता है, इसलिए आयन आसानी से चलते हैं।

अतिचालकता का क्या उपयोग है?

MRI मशीन और कण त्वरक के शक्तिशाली चुंबक, मैग्लेव ट्रेन और बिना हानि वाले बिजली के तार। पदार्थ को क्रांतिक ताप से नीचे रखना पड़ता है।

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