विक्टोरियाई सुधार और चुनौती, लगभग 1851–1886
1851 की महान प्रदर्शनी ने ब्रिटेन को "दुनिया का कारख़ाना" दिखाया। राजनीति में दो दल थे: लिबरल (ग्लैडस्टोन) और कंज़र्वेटिव (डिज़रायली)। लगभग 5 में से 1 पुरुष ही वोट दे सकता था।
- दूसरा सुधार क़ानून (1867): शहरों के बहुत से कुशल मज़दूरों को वोट।
- गुप्त मतदान क़ानून (1872): अब ज़मींदार या मालिक वोटर को डरा नहीं सकते थे।
- तीसरा सुधार क़ानून (1884): गाँवों के पुरुषों तक वोट, लगभग 60% वयस्क पुरुष।
- शिक्षा क़ानून (1870): हर बच्चे के लिए प्राथमिक स्कूल।
आयरलैंड का सवाल भी था: होम रूल (आयरलैंड अपना शासन ख़ुद चलाए) की माँग पर 1886 में लिबरल दल टूट गया।
पुरानी व्यवस्था को चुनौती, 1886–1914
कई तरफ़ से चुनौती आई:
- मज़दूर: अकुशल मज़दूरों के "नए संघ" (1889 की बंदरगाह हड़ताल) और लेबर पार्टी (1900 में बनी, 1906 में 29 सांसद)।
- महिलाएँ: शांतिपूर्ण सफ़्रेजिस्ट (NUWSS) और उग्र सफ़्रेजेट (WSPU, 1903 से) वोट माँगती थीं।
- ग़रीबी के सर्वे: लंदन में बूथ और यॉर्क में राउनट्री ने दिखाया कि लगभग एक-चौथाई से एक-तिहाई लोग ग़रीब थे।
लिबरल सरकार (1906–14) ने कल्याण सुधार किए: मुफ़्त स्कूल भोजन (1906), वृद्धावस्था पेंशन (1908), रोज़गार दफ़्तर (1909), बीमारी और कुछ बेरोज़गारी के लिए राष्ट्रीय बीमा (1911)। "जनता का बजट" (1909) अमीरों पर कर लगाता था; हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स ने रोका, तो संसद क़ानून 1911 ने लॉर्ड्स की शक्ति घटा दी। 1914 तक हड़तालें, सफ़्रेजेट आंदोलन और आयरिश होम रूल का संकट भी था।
महायुद्ध और दोनों युद्धों के बीच, 1914–1939
पूर्ण युद्ध (1914–18) में पूरा देश जीत के लिए लगा। सरकार ने रेल, खदानें और खाना अपने हाथ में लिया, 1916 से अनिवार्य भर्ती शुरू की। महिलाओं ने गोला-बारूद के कारख़ानों में काम किया। लगभग 7.5 लाख ब्रिटिश सैनिक मारे गए।
नतीजे: 1918 के क़ानून से 21 साल से ऊपर के सब पुरुषों और 30 से ऊपर की महिलाओं को वोट; 1928 में 21 साल पर बराबर वोट। लेबर ने लिबरल की जगह ली और 1924 में पहली (अल्पमत) सरकार बनाई। 1922 में आयरलैंड का बड़ा हिस्सा स्वशासित हुआ।
1920 का दशक अस्थिर था: पुराने उद्योग (कोयला, कपास, जहाज़) गिरे और आम हड़ताल (1926) नौ दिन चली। 1929 की विश्व मंदी के बाद बेरोज़गारी 30 लाख पार (1932)। उत्तर इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स सबसे ज़्यादा पीड़ित (जैरो मार्च, 1936), जबकि दक्षिण-पूर्व में कार और बिजली के सामान जैसे नए उद्योग बढ़े। 1931 की राष्ट्रीय सरकार ने ख़र्च घटाया।
युद्ध, कल्याण और समृद्धि, 1939–1964
दूसरा विश्व युद्ध "जनता का युद्ध" था: बच्चों को शहरों से हटाना, बमबारी, राशन और पूरा रोज़गार। बेवरिज रिपोर्ट (1942) ने पाँच "दानव" बताए: अभाव, रोग, अज्ञान, गंदगी और बेकारी।
1945 में एटली की लेबर सरकार ने कल्याणकारी राज्य बनाया: राष्ट्रीय बीमा (1946), NHS (1948), सरकारी मकान, और कोयला, रेल, स्टील का राष्ट्रीयकरण।
1951 से कंज़र्वेटिव सरकार रही। जीवन-स्तर बढ़ा: कारें, टीवी, वॉशिंग मशीन। 1957 में मैकमिलन ने कहा कि ज़्यादातर लोगों के पास "पहले कभी इतना अच्छा नहीं था"। फिर भी धीमी वृद्धि, स्वेज़ संकट (1956) और साम्राज्य का अंत (भारत 1947, घाना 1957) हुआ। 1948 से कैरिबियन और दक्षिण एशिया से आए लोगों ने ब्रिटेन को फिर बनाने में मदद की, पर भेदभाव भी झेला।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सुधार क़ानून: 1832 → 1867 → 1884 → 1918 → 1928 (21 साल पर बराबर वोट)
- लिबरल सुधार 1906–1911: स्कूल भोजन, पेंशन, रोज़गार दफ़्तर, राष्ट्रीय बीमा
- पूर्ण युद्ध = पूरा समाज और अर्थव्यवस्था युद्ध में
- बेवरिज के पाँच दानव: अभाव, रोग, अज्ञान, गंदगी, बेकारी
- NHS 1948 = इलाज के समय कोई शुल्क नहीं
हल किए गए उदाहरण
1. 1906–1914 के लिबरल सुधारों का एक कारण और एक परिणाम बताओ।
कारण: बूथ और राउनट्री के सर्वे ने दिखाया कि ग़रीबी अक्सर ग़रीब की ग़लती नहीं थी (बुढ़ापा, बीमारी, कम मज़दूरी); लेबर को वोट जाने का डर भी था। परिणाम: सरकार ने कल्याण की ज़िम्मेदारी लेना शुरू किया (पेंशन 1908, बीमा 1911), जो कल्याणकारी राज्य की पहली सीढ़ी थी।
2. प्रथम विश्व युद्ध ने 1918 में महिलाओं को वोट दिलाने में कैसे मदद की?
क़दम 1: महिलाओं ने ज़रूरी युद्ध-काम किया, जिससे "वे योगदान नहीं देतीं" वाला तर्क कमज़ोर हुआ। क़दम 2: वोट के नियम वैसे भी बदलने थे, क्योंकि घर से दूर रहने वाले कई सैनिकों का वोट छिन गया था। क़दम 3: 1918 में एक क़ानून से 21+ पुरुष और 30+ महिलाओं को वोट मिला। युद्ध से पहले का आंदोलन भी ज़रूरी था।
3. "1930 का दशक भूखा दशक था।" यह कितना सही है?
पुराने औद्योगिक इलाक़ों के लिए सही: कुछ शहरों में बेरोज़गारी 60% से ऊपर, भूख-मार्च हुए। दक्षिण और मिडलैंड्स के लिए कम सही: नए उद्योग बढ़े, क़ीमतें गिरीं, और नौकरी वालों की असली आमदनी, घर और कारें बढ़ीं। यानी इलाक़े और काम के हिसाब से "दो ब्रिटेन"।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि 1918 में सब महिलाओं को वोट मिला (सिर्फ़ 30+ वालों को, शर्तों के साथ; बराबरी 1928 में)।
- यह मानना कि कल्याणकारी राज्य 1945 में ही शुरू हुआ; 1906–11 के लिबरल सुधार पहली शुरुआत थे।
- सफ़्रेजिस्ट (शांत) और सफ़्रेजेट (उग्र) को एक समझना।
- 1930 के दशक को हर जगह एक जैसा बुरा मानना; दक्षिण-पूर्व बढ़ रहा था।