समृद्ध समाज (1951–1964)
- कंज़र्वेटिव दबदबा: चर्चिल, ईडन, मैकमिलन और डगलस-होम ने 1951, 1955 और 1959 में जीत पाई। कारण: बढ़ता जीवन-स्तर, लेबर में फूट, और लोकप्रिय कल्याण नीतियाँ बनाए रखना ('बट्सकेलिज़्म': दोनों दल एक जैसे)।
- अर्थव्यवस्था: पूर्ण रोज़गार, राशनिंग ख़त्म (1954), पर 'रुको-चलो' चक्र और प्रतिद्वंद्वियों से धीमा विकास।
- समाज: उपभोक्ता सामान, टीवी, कारें, नए शहर; कैरिबियन और दक्षिण एशिया से प्रवास; किशोर और नई युवा संस्कृति।
- विदेश संबंध: स्वेज़ संकट (1956) ने ब्रिटेन को शर्मिंदा किया; उपनिवेशों की आज़ादी तेज़ हुई ('बदलाव की हवा', 1960); अमेरिका से 'विशेष संबंध'; फ़्रांस ने ब्रिटेन की EEC अर्ज़ी रोकी (1963)।
साठ का दशक और विल्सन की लेबर सरकार (1964–1970)
- विल्सन ने तकनीक की 'सफ़ेद गर्मी' में बने आधुनिक ब्रिटेन का वादा किया। आर्थिक मुश्किलों से पाउंड का अवमूल्यन (1967) हुआ और यूनियनों से टकराव ('इन प्लेस ऑफ़ स्ट्राइफ़', 1969)।
- उदार सुधार: मृत्युदंड ख़त्म (1965), गर्भपात क़ानूनी और समलैंगिकता अपराध नहीं (1967), आसान तलाक़ (1969), नस्ल संबंध क़ानून, और ओपन यूनिवर्सिटी।
- संस्कृति: पॉप संगीत, फ़ैशन, टीवी और छात्र आंदोलन; प्रवास पर बढ़ती बहस।
- अमेरिका: विल्सन ने शब्दों में अमेरिका का साथ दिया पर ब्रिटिश सेना को वियतनाम से बाहर रखा, और 'स्वेज़ के पूर्व' से सेना हटाई।
युद्धोत्तर सहमति का अंत (1970–1979)
- हीथ (1970–74): ब्रिटेन को EEC में ले गए (1 जनवरी 1973); खनिकों से टकराव; तेल संकट और तीन-दिन के हफ़्ते (1974) ने उन्हें गिराया।
- विल्सन और कैलाहन (1974–79): महँगाई लगभग 25% (1975); 1975 के जनमत संग्रह ने EEC सदस्यता पक्की की (67% हाँ); IMF कर्ज़ (1976) से खर्च में कटौती; 'असंतोष की सर्दी' (1978–79) की हड़तालें।
- समाज: उत्तरी आयरलैंड में 'ट्रबल्स' (हिंसा); महिलाओं के समान वेतन और लिंग भेदभाव क़ानून (1970, 1975); पंक संगीत और नस्ल पर तनाव।
- बहुत लोगों को लगा कि सहमति विफल हो गई, जिससे थैचर का रास्ता खुला।
थैचरवाद, मेजर और न्यू लेबर (1979–2007)
- थैचर (1979–90): महँगाई रोकने के लिए मुद्रावाद (मनीटरिज़्म), निजीकरण (BT, ब्रिटिश गैस), यूनियनों को कमज़ोर करने वाले क़ानून, सरकारी मकानों की बिक्री ('राइट टू बाय')। बेरोज़गारी 30 लाख पार; खनिक हड़ताल (1984–85) हारी; कुछ शहरों में दंगे।
- विदेश नीति: फ़ॉकलैंड युद्ध (1982), रीगन से क़रीबी, सोवियत संघ पर सख़्त रुख़, यूरोप पर शंका।
- पतन और विरासत: पोल टैक्स और यूरोप पर फूट से 1990 में इस्तीफ़ा। उनके बाज़ार के विचार नया सामान्य बन गए।
- लेबर का बदलाव: किनॉक ने कट्टर वामपंथियों को निकाला और अलोकप्रिय नीतियाँ छोड़ीं; ब्लेयर ने 1995 में क्लॉज़ IV बदलकर बाज़ार को माना।
- मेजर (1990–97): मास्ट्रिख्ट संधि, काला बुधवार (1992), खाड़ी युद्ध (1991), उत्तरी आयरलैंड में शांति के शुरुआती क़दम।
- न्यू लेबर (1997–2007): बैंक ऑफ़ इंग्लैंड की स्वतंत्रता, न्यूनतम वेतन, स्कॉटलैंड और वेल्स को सत्ता हस्तांतरण, गुड फ़्राइडे समझौता (1998), स्कूल और NHS पर ज़्यादा खर्च; कोसोवो दख़ल और इराक़ युद्ध (2003)।
- कंज़र्वेटिव 1997 के बाद लगातार तीन चुनाव हारे और बार-बार नेता बदले।
करके देखो: सहमति पर नज़र रखो
आख़िरी चरण में 1959, 1975, 1984 और 2000 के लिए तराज़ू का झुकाव और दोनों बार लिखो। कौन-सा साल संकट जैसा दिखता है? कौन-सा नया संतुलन? इन चार नोट्स से जवाब दो: "क्या 1979 एक मोड़ था?"
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- युद्धोत्तर सहमति: दोनों बड़े दल कल्याणकारी राज्य, NHS, मिश्रित अर्थव्यवस्था और पूर्ण रोज़गार को मानते हैं
- बट्सकेलिज़्म: बटलर (कंज़र्वेटिव) और गेट्सकेल (लेबर) की मिलती-जुलती आर्थिक नीतियाँ
- रुको-चलो (स्टॉप-गो): अर्थव्यवस्था को कभी तेज़ और कभी धीमा करने का चक्र
- अवमूल्यन: दूसरी मुद्राओं के मुक़ाबले पाउंड का मूल्य घटाना
- असंतोष की सर्दी: 1978–79 की सर्दियों में सरकारी कर्मचारियों की बड़ी हड़तालें
- थैचरवाद: खुला बाज़ार, निजीकरण, कमज़ोर यूनियनें, कम महँगाई, क़ानून-व्यवस्था पर मज़बूत राज्य
- न्यू लेबर: 1990 के दशक की लेबर, जिसने बाज़ार माना पर सार्वजनिक सेवाओं में निवेश किया
- सत्ता हस्तांतरण (डिवोल्यूशन): लंदन की संसद से कुछ अधिकार स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड को देना
हल किए गए उदाहरण
1. 1950 के दशक में कंज़र्वेटिव लगातार तीन चुनाव क्यों जीते?
1) जीवन-स्तर बढ़ा और राशनिंग ख़त्म हुई। 2) उन्होंने लोकप्रिय NHS और कल्याणकारी राज्य बनाए रखा, तो वोटरों को डर नहीं था। 3) लेबर वाम और दक्षिण गुटों में बँटी थी।
2. 1970 के दशक को युद्धोत्तर सहमति का अंत क्यों कहते हैं?
चरण 1: पुराने तरीके (खर्च, यूनियनों से सौदे) महँगाई और बेरोज़गारी को साथ-साथ नहीं रोक सके। चरण 2: हड़तालों ने हीथ (1974) और कैलाहन (1979) को गिराया। चरण 3: IMF कर्ज़ के बाद लेबर को भी खर्च घटाना पड़ा। नतीजा: लोग नया रास्ता चाहते थे, जो थैचर ने दिया।
3. न्यू लेबर ने थैचरवाद को कैसे जारी रखा और कैसे अलग रही? एक-एक बताओ।
जारी रखा: निजीकरण और ज़्यादातर यूनियन क़ानून रखे, और ब्याज दर का फ़ैसला बैंक ऑफ़ इंग्लैंड को दिया। अलग: न्यूनतम वेतन, सत्ता हस्तांतरण और NHS व स्कूलों पर कहीं ज़्यादा खर्च।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि 1950 के दशक में सिर्फ़ लेबर कल्याणकारी राज्य के पक्ष में थी। कंज़र्वेटिव ने भी उसे रखा; इसीलिए इसे सहमति कहते हैं।
- EEC में प्रवेश को 1975 बताना। ब्रिटेन 1973 में शामिल हुआ; 1975 में बने रहने पर जनमत संग्रह हुआ।
- यह कहना कि थैचर ने NHS ख़त्म किया। उन्होंने उसमें सुधार किए पर वह सरकारी पैसे से चलता रहा।
- यह मानना कि न्यू लेबर ने थैचर की नीतियाँ पलट दीं। उसने ज़्यादातर रखीं और नया सामाजिक खर्च जोड़ा।