जेम्स प्रथम: नया राजा, पुरानी समस्याएँ (1603–1625)
राजनीतिक वर्ग (political nation) वह छोटा समूह था जिसकी राजनीति में आवाज़ थी: राजा, सामंत, बिशप, जेंट्री (ज़मींदार) और अमीर व्यापारी। ज़्यादातर लोगों को वोट नहीं था। ताक़त ज़मीन के मालिकाने पर टिकी थी।
जेम्स प्रथम राजा के दैवी अधिकार में विश्वास रखते थे: राजा ईश्वर चुनता है और राजा सिर्फ़ ईश्वर को जवाब देता है। वे इंग्लैंड-स्कॉटलैंड का पूरा विलय चाहते थे, पर संसद ने मना किया; दोनों का राजा भर एक था।
पैसे की परेशानी
दाम बढ़ चुके थे, इसलिए ताज की पुरानी आमदनी कम पड़ती थी। जेम्स ने बकिंघम जैसे चहेतों पर ख़ूब ख़र्च भी किया। ग्रेट कॉन्ट्रैक्ट (1610: पुराने शाही हक़ छोड़ने के बदले सालाना रकम) जैसे उपाय नाकाम रहे। ताज ने उपाधियाँ बेचीं और इम्पोज़िशन (अतिरिक्त सीमा-शुल्क) लगाए, जिससे संसद नाराज़ हुई।
धर्म
कैथोलिक छोटे और डरावने अल्पसंख्यक माने जाते थे; बारूद षड्यंत्र (1605) से डर और बढ़ा। प्यूरिटन सादा चर्च चाहते थे। जेम्स ने हैम्पटन कोर्ट सम्मेलन (1604) किया और नई अंग्रेज़ी बाइबल (1611) का समर्थन किया, चर्च को व्यापक प्रोटेस्टेंट रखा।
चार्ल्स प्रथम, व्यक्तिगत शासन और युद्ध की राह (1625–1642)
चार्ल्स प्रथम ने कैथोलिक फ़्रांसीसी राजकुमारी से शादी की और आर्चबिशप लॉड का साथ दिया, जो चर्च में ज़्यादा रस्में चाहते थे। प्यूरिटनों को लगा कि यह कैथोलिक धर्म की ओर लौटना है।
संसद ने अधिकार याचिका (Petition of Right) (1628) मनवाई: संसद के बिना टैक्स नहीं, बिना कारण जेल नहीं। 1629 में चार्ल्स ने संसद भंग की और 11 साल अकेले राज किया (व्यक्तिगत शासन)। उन्होंने शिप मनी जैसे पुराने हक़ों से पैसा जुटाया — नौसेना का टैक्स, जो अब अंदरूनी इलाक़ों पर भी लगा।
1637 में चार्ल्स ने स्कॉटलैंड पर नई प्रार्थना पुस्तक थोपी, तो स्कॉट विद्रोह कर बैठे। युद्ध के पैसे के लिए उन्होंने संसद बुलाई (1640)। लॉन्ग पार्लियामेंट ने उनके मंत्री हटाए, शिप मनी ख़त्म की और राजा को सीमित करने वाले क़ानून बनाए। आयरलैंड के विद्रोह (1641) से सवाल उठा: सेना पर किसका नियंत्रण हो? 1642 में चार्ल्स ने पाँच सांसदों को गिरफ़्तार करने की नाकाम कोशिश की, और दोनों पक्ष युद्ध की तैयारी में लग गए।
गृहयुद्ध और राजा का मृत्युदंड (1642–1649)
पहले गृहयुद्ध (1642–46) ने परिवारों और शहरों को बाँट दिया। राजभक्त (Royalists/Cavaliers) उत्तर, पश्चिम और वेल्स में मज़बूत थे; संसद समर्थक (Roundheads) के पास लंदन, दक्षिण-पूर्व और नौसेना थी। संसद ने स्कॉटों से गठबंधन किया (1643) और योग्यता से तरक़्क़ी वाली न्यू मॉडल आर्मी (1645) बनाई, जो नेज़बी (1645) में जीती।
युद्ध से भूख, टैक्स, घरों में सैनिक और नए विचार आए। लेवलर्स ज़्यादा पुरुषों को वोट चाहते थे; डिगर्स जैसे समूह साझा ज़मीन चाहते थे।
युद्ध के बाद संसद और सेना वेतन, धर्म और राजा के भविष्य पर झगड़े। चार्ल्स ने स्कॉटों से गुप्त सौदा किया, जिससे दूसरा गृहयुद्ध (1648) हुआ। सेना ने संसद से विरोधी सांसद निकाले (प्राइड्स पर्ज), बची रंप संसद। चार्ल्स पर जनता से द्रोह का मुक़दमा चला और जनवरी 1649 में मृत्युदंड हुआ: राजहत्या (regicide)।
गणराज्य और प्रोटेक्टोरेट (1649–1660)
राजतंत्र और हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स ख़त्म किए गए। कॉमनवेल्थ रंप संसद से चला। क्रॉमवेल ने आयरलैंड और स्कॉटलैंड में विरोध कुचला और वॉरसेस्टर (1651) में चार्ल्स द्वितीय की सेना हराई।
प्रयोग हुए: क्रॉमवेल ने रंप भंग की (1653), मनोनीत सभा (बेयरबोन्स पार्लियामेंट) आज़माई, फिर लिखित संविधान इंस्ट्रूमेंट ऑफ़ गवर्नमेंट (1653) से लॉर्ड प्रोटेक्टर बने। मेजर-जनरलों का शासन (1655–57) देश को सेना के अफ़सरों के हवाले करता था, जो अलोकप्रिय था।
क्रॉमवेल के लक्ष्य: 'ईश्वरीय सुधार' (नैतिक प्रोटेस्टेंट राष्ट्र), कई प्रोटेस्टेंट समूहों को अंतरात्मा की आज़ादी, और स्थिर सरकार। 1657 में उन्होंने ताज ठुकराया। 1658 में उनकी मृत्यु के बाद कोई इस व्यवस्था को संभाल नहीं सका।
पुनर्स्थापन: चार्ल्स द्वितीय और जेम्स द्वितीय (1660–1688)
1660 में संसद ने चार्ल्स द्वितीय को वापस बुलाया: पुनर्स्थापन (Restoration)। राजा को ताज मिला, पर व्यक्तिगत शासन नहीं लौटा: ज़्यादातर टैक्स पर संसद का नियंत्रण रहा। क्लेरेंडन कोड नाम के क़ानूनों ने चर्च ऑफ़ इंग्लैंड से बाहर के प्रोटेस्टेंटों (डिसेंटर्स) को दंडित किया।
राजा के भाई जेम्स कैथोलिक थे, इसलिए कैथोलिक असर का डर लौटा। बहिष्कार संकट (1679–81) में जेम्स को गद्दी से रोकने की कोशिश हुई। बहिष्कार के समर्थक व्हिग (कंट्री), विरोधी टोरी (कोर्ट) कहलाए — दलगत राजनीति की शुरुआत।
जेम्स द्वितीय (1685) ने सेना और पदों पर कैथोलिक रखे और क़ानूनों को निलंबित करने की ताक़त इस्तेमाल की। 1688 में उनका बेटा हुआ, तो कैथोलिक वंश पक्का लगने लगा।
गौरवपूर्ण क्रांति और संवैधानिक राजतंत्र (1688–1702)
बड़े सामंतों ने डच राजकुमार ऑरेंज के विलियम को बुलाया, जो जेम्स की प्रोटेस्टेंट बेटी मैरी के पति थे। विलियम 1688 में उतरे; जेम्स भाग गए। संसद ने ताज विलियम और मैरी को साथ में दिया।
अधिकार विधेयक (Bill of Rights) (1689): संसद के बिना टैक्स या शांतिकाल में स्थायी सेना नहीं; स्वतंत्र चुनाव; संसद में बोलने की आज़ादी; नियमित संसद; कैथोलिक राजा नहीं। सहिष्णुता अधिनियम (1689) ने ज़्यादातर प्रोटेस्टेंट डिसेंटर्स को पूजा की आज़ादी दी (कैथोलिकों को नहीं)।
फ़्रांस से लंबे युद्धों के लिए हर साल पैसा चाहिए था, इसलिए संसद अब हर साल बैठने लगी। बैंक ऑफ़ इंग्लैंड (1694) और राष्ट्रीय क़र्ज़ ने युद्ध का ख़र्च उठाया। उत्तराधिकार अधिनियम (1701) ने प्रोटेस्टेंट उत्तराधिकार तय किया। निर्वासित स्टुअर्टों के समर्थक (जैकोबाइट) बाद में 1715 और 1745 में उठे, और संघ अधिनियम (1707) से इंग्लैंड-स्कॉटलैंड एक राज्य बने। 1702 तक ब्रिटेन संवैधानिक राजतंत्र था: राजा राज करता, पर ख़ज़ाने की चाबी संसद के पास।
खुद करो
वर्ष की स्लाइडर 1603 से 1702 तक चलाओ। किन तीन मौक़ों पर तराज़ू सबसे ज़्यादा हिलता है? हर एक के पीछे की घटना बताओ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- राजा का दैवी अधिकार: विश्वास कि राजा ईश्वर चुनता है और राजा सिर्फ़ ईश्वर को जवाबदेह है।
- व्यक्तिगत शासन (1629–40): चार्ल्स प्रथम का बिना संसद शासन।
- राजहत्या (1649): राजा का वध; चार्ल्स प्रथम पर मुक़दमा और मृत्युदंड।
- अंतराल काल / Interregnum (1649–60): बिना राजा के वर्ष (कॉमनवेल्थ, फिर प्रोटेक्टोरेट)।
- पुनर्स्थापन (1660): चार्ल्स द्वितीय के साथ राजतंत्र की वापसी।
- गौरवपूर्ण क्रांति (1688–89) और अधिकार विधेयक: संसद ने ताज को सीमित किया; संवैधानिक राजतंत्र।
हल किए गए उदाहरण
1. गृहयुद्ध के तीन दीर्घकालीन कारण बताओ।
पैसा: ताज की आमदनी कम थी और पैसा जुटाने के तरीक़ों (इम्पोज़िशन, शिप मनी) से संसद नाराज़ थी। धर्म: लॉड के बदलावों से प्यूरिटनों को कैथोलिक धर्म की वापसी का डर लगा। सत्ता: राजा का दैवी अधिकार संसद के अधिकारों (अधिकार याचिका) से टकराया।
2. चार्ल्स प्रथम ने 1640 में संसद क्यों बुलाई?
प्रार्थना पुस्तक के विरोध में स्कॉटों ने विद्रोह कर उत्तरी इंग्लैंड पर हमला किया। सेना के लिए टैक्स चाहिए थे, और इतना पैसा सिर्फ़ संसद दे सकती थी।
3. क्रम में लगाओ: प्राइड्स पर्ज, नेज़बी, व्यक्तिगत शासन शुरू, राजहत्या, अधिकार याचिका।
अधिकार याचिका (1628) → व्यक्तिगत शासन (1629) → नेज़बी (1645) → प्राइड्स पर्ज (1648) → राजहत्या (1649)।
4. क्रॉमवेल की मृत्यु के बाद गणराज्य क्यों नहीं टिका?
वह क्रॉमवेल और सेना पर टिका था। बेटे रिचर्ड को समर्थन नहीं मिला, सेना और संसद झगड़ीं, और बहुत लोग राजा वाली स्थिरता चाहते थे। इसलिए 1660 में संसद ने चार्ल्स द्वितीय को बुलाया।
5. अधिकार विधेयक ने राजतंत्र को कैसे बदला?
राजा अब संसद के बिना टैक्स नहीं ले सकता था, शांतिकाल में सेना नहीं रख सकता था, क़ानून निलंबित नहीं कर सकता था, स्वतंत्र चुनाव और नियमित संसद ज़रूरी थी, और राजा कैथोलिक नहीं हो सकता था।
6. 1688 को 'गौरवपूर्ण' क्यों कहा गया?
समर्थकों के अनुसार इंग्लैंड में कम ख़ून-ख़राबे से शासक बदला और प्रोटेस्टेंट धर्म व संसद बचे। आलोचक बताते हैं कि इससे आयरलैंड और स्कॉटलैंड में युद्ध हुए।
आम गलतियाँ
- गृहयुद्ध को सिर्फ़ अमीर बनाम ग़रीब कहना। दोनों तरफ़ सामंत, जेंट्री और आम लोग थे।
- क्रॉमवेल को राजा समझना। उन्होंने ताज ठुकराया और लॉर्ड प्रोटेक्टर बनकर राज किया।
- सोचना कि पुनर्स्थापन से निरंकुश राजतंत्र लौटा। ज़्यादातर टैक्स पर संसद का नियंत्रण रहा।
- अधिकार याचिका (1628) और अधिकार विधेयक (1689) को मिलाना।