स्मृति क्या है? कूटसंकेतन, भंडारण, पुनरुद्धार
स्मृति यानी सूचना को समय तक रखना और ज़रूरत पर इस्तेमाल करना।
- कूटसंकेतन: जो महसूस किया उसे दिमाग के रखने लायक रूप में बदलना और अर्थ देना।
- भंडारण: समय तक रखना।
- पुनरुद्धार: इस्तेमाल के लिए वापस लाना।
स्मृति तीनों में से किसी भी चरण पर चूक सकती है।
अवस्था मॉडल
एटकिंसन और शिफ़्रिन (1968) ने तीन भंडार बताए।
संवेदी स्मृति
- बहुत बड़ी क्षमता, एक सेकंड से कम (ध्वनि लगभग 2 सेकंड)।
- देखने के लिए प्रतिमा (iconic) और सुनने के लिए प्रतिध्वनि (echoic) स्मृति। अँधेरे में घुमाई फुलझड़ी रेखा जैसी दिखती है।
अल्पकालिक स्मृति
- जिस पर ध्यान गया, वह यहाँ आता है। लगभग 7 (± 2) मद, लगभग 18–20 सेकंड।
- ज़्यादातर ध्वनि से कूटसंकेतन। अनुरक्षण दोहराव से बनी रहती है।
- खंडीकरण (chunking): मदों को बड़े समूहों में बाँधकर ज़्यादा समाना।
दीर्घकालिक स्मृति
- असीम क्षमता, मिनटों से जीवन भर।
- ज़्यादातर अर्थ से कूटसंकेतन। विस्तृत दोहराव (पुराने ज्ञान से जोड़ना) सूचना को यहाँ पहुँचाता है।
कार्यकारी स्मृति
बैडले और हिच के अनुसार अल्पकालिक स्मृति एक कार्यकारी स्मृति है, सोचने की मेज़:
- स्वनिमिक लूप: आवाज़ें और शब्द थोड़ी देर रखता है।
- दृष्टि-स्थानिक स्केचपैड: चित्र और स्थान।
- केंद्रीय कार्यपालक: ध्यान चलाने वाला और दीर्घकालिक स्मृति से जोड़ने वाला।
प्रक्रमण के स्तर
क्रेक और लॉकहार्ट (1972): स्मृति इस पर निर्भर है कि हमने कितना गहरा प्रक्रमण किया।
- संरचनात्मक (उथला): शब्द कैसा दिखता है।
- स्वनिक (मध्यम): कैसा सुनाई देता है, तुक मिलती है या नहीं।
- अर्थगत (गहरा): इसका अर्थ क्या है और मेरे जीवन से कैसे जुड़ता है।
गहरा प्रक्रमण मज़बूत और लंबी स्मृति देता है। इसीलिए समझना रटने से बेहतर है।
दीर्घकालिक स्मृति के प्रकार
- घोषणात्मक स्मृति: तथ्य, नाम, तारीखें, घटनाएँ जो शब्दों में बता सकें।
- घटनात्मक: अपने अनुभव, समय-स्थान और भावनाओं के साथ। बहुत भावुक घटनाएँ फ़्लैशबल्ब स्मृति बनाती हैं।
- अर्थगत: सामान्य ज्ञान, शब्दों के अर्थ, संप्रत्यय।
- प्रक्रियामूलक स्मृति: काम कैसे करें, जैसे तैरना या टाइप करना। शब्दों में बताना कठिन।
दीर्घकालिक ज्ञान श्रेणियों, जाल और स्कीमा में व्यवस्थित रहता है। स्मृति रचनात्मक भी है: हम स्कीमा से यादें दोबारा गढ़ते हैं, इसलिए वे बदल सकती हैं (बार्टलेट)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- स्मृति = कूटसंकेतन → भंडारण → पुनरुद्धार
- संवेदी: बहुत बड़ी, < 1 से.
- अल्पकालिक: 7 ± 2 मद, ~20 से., दोहराव से
- दीर्घकालिक: असीम, वर्षों, अर्थ-आधारित
- स्तर: संरचनात्मक < स्वनिक < अर्थगत
- दीर्घकालिक प्रकार: घोषणात्मक (घटनात्मक, अर्थगत) और प्रक्रियामूलक
हल किए गए उदाहरण
1. बिजली चमकने के बाद पल भर उसकी रेखा "दिखती" रहती है। कौन सा भंडार?
संवेदी (प्रतिमा) स्मृति।
2. राहुल 10 अंकों का नंबर 987-654-3210 की तरह याद रखता है। इससे क्या फ़ायदा?
खंडीकरण: 10 अंक 3 खंड बन जाते हैं, जो 7 ± 2 की सीमा में आसानी से आते हैं।
3. समूह A देखता है कि शब्द बड़े अक्षरों में हैं या नहीं; समूह B हर शब्द का अर्थ सोचता है। बाद में किसे ज़्यादा याद रहेगा?
समूह B को, क्योंकि अर्थगत प्रक्रमण गहरा है।
4. वर्गीकृत कीजिए: (a) फीते बाँधना, (b) जापान की राजधानी, (c) आपका 10वाँ जन्मदिन।
(a) प्रक्रियामूलक, (b) अर्थगत, (c) घटनात्मक।
आम गलतियाँ
- अल्पकालिक स्मृति को पिछले कुछ दिनों की याद समझना। यह लगभग 20 सेकंड ही रहती है।
- स्मृति को सटीक रिकॉर्डिंग मानना। यादें दोबारा गढ़ी जाती हैं और बदल सकती हैं।
- घटनात्मक और अर्थगत को मिलाना: घटनात्मक में अपना समय-स्थान होता है।
- सिर्फ़ रटने को सबसे अच्छा मानना। अर्थ से जोड़ना (विस्तृत दोहराव) कहीं बेहतर है।