उद्दीपक क्या है?
उद्दीपक (stimulus) शरीर के बाहर या अंदर का कोई भी बदलाव है जिसे इंद्रिय पकड़ सके। रोशनी, आवाज़, गर्मी, गंध, दर्द, सब उद्दीपक हैं।
उद्दीपक से पहला संपर्क संवेदन (sensation) कहलाता है। यह कच्चा होता है: "कुछ चमकीला", "कुछ तेज़"। उसका मतलब बाद में बनता है (प्रत्यक्षण)।
संवेदी प्रकार (sense modalities)
हर तरह की इंद्रिय को संवेदी प्रकार कहते हैं। हर एक सिर्फ़ अपना उद्दीपक पकड़ती है।
- दृष्टि (आँख): प्रकाश
- श्रवण (कान): ध्वनि
- घ्राण (नाक): हवा के रसायन
- स्वाद (जीभ): भोजन के रसायन
- त्वचा: दबाव, गर्मी, ठंड, दर्द
- गतिसंवेदी (kinaesthetic): शरीर के अंग कहाँ हैं
- प्रघाण (vestibular, भीतरी कान): संतुलन
इंद्रियों की सीमाएँ
- निरपेक्ष देहली: उद्दीपक की सबसे कम मात्रा जो आधे मौकों पर महसूस हो।
- भेद देहली: दो उद्दीपकों में सबसे छोटा अंतर जो पकड़ में आए। अँधेरे कमरे में एक मोमबत्ती बढ़ाना दिखता है, रोशन हॉल में नहीं।
- परास (range): हम प्रकाश का छोटा हिस्सा ही देखते हैं और लगभग 20 से 20,000 कंपन प्रति सेकंड तक ही सुनते हैं। कुत्ते और चमगादड़ ऊँची आवाज़ें सुनते हैं।
- अनुकूलन: लगातार रहने वाला उद्दीपक धीरे-धीरे महसूस होना बंद हो जाता है।
अवधान और चयनात्मक अवधान
अवधान यानी कुछ उद्दीपकों को चुनकर उन पर ध्यान देना। इसके तीन गुण: चयन, सतर्कता और एकाग्रता।
चयनात्मक अवधान
- बाहरी कारक: आकार, तीव्रता, चमक, गति, नयापन, विरोधाभास।
- आंतरिक कारक: ज़रूरतें (भूखे को खाने की गंध जल्दी आती है), रुचि, प्रेरणा, अपेक्षा।
शोर में अपना नाम सुन लेना कॉकटेल पार्टी प्रभाव कहलाता है। कुछ सिद्धांत कहते हैं छँटाई जल्दी होती है (फ़िल्टर), कुछ कहते हैं अर्थ समझने के बाद।
विभक्त अवधान
दो काम एक साथ तभी ठीक होते हैं जब एक काम बहुत अभ्यस्त हो, जैसे चलते हुए बात करना।
निरंतर (संधृत) अवधान
निरंतर अवधान या सतर्कता (vigilance) यानी लंबे समय तक एक काम पर ध्यान टिकाना, जैसे हवाई यातायात नियंत्रक।
- लगभग 20–35 मिनट बाद यह घटने लगता है।
- संकेत साफ़, तेज़ और बार-बार आएँ तो ध्यान बेहतर टिकता है।
- थकान, ऊब और एक जैसा काम इसे जल्दी गिराते हैं।
ADHD (अवधान-न्यूनता अतिक्रियाशीलता विकार) में बच्चे को ध्यान टिकाना और शांत बैठना बहुत कठिन लगता है। उसे डाँट नहीं, विशेषज्ञ की मदद चाहिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- उद्दीपक: बदलाव जिसे इंद्रियाँ पकड़ सकें
- संवेदन: उद्दीपक से पहला कच्चा संपर्क
- निरपेक्ष देहली: सबसे कम उद्दीपक जो महसूस हो
- भेद देहली: सबसे छोटा अंतर जो पकड़ में आए
- चयनात्मक अवधान: बहुत में से कुछ चुनना
- निरंतर अवधान (सतर्कता): देर तक ध्यान टिकाना
हल किए गए उदाहरण
1. रिया पंखा चलाकर पढ़ती है। दस मिनट बाद उसे पंखे की आवाज़ सुनाई नहीं देती। क्यों?
संवेदी अनुकूलन। लगातार एक जैसा उद्दीपक धीरे-धीरे महसूस होना बंद हो जाता है।
2. एक दुकान बाहर बड़ा, चमकता, हिलता बोर्ड लगाती है। वह अवधान के कौन से कारक इस्तेमाल कर रही है?
बाहरी कारक: आकार, चमक, गति और बदलाव। ये बिना कोशिश के ध्यान खींचते हैं।
3. रडार ऑपरेटर पहले 15 मिनट में 95% संकेत पकड़ता है, एक घंटे बाद 70%। यह क्या है और कैसे कम करें?
यह निरंतर अवधान का घटना है। छोटे ब्रेक, तेज़ और साफ़ संकेत, और ड्यूटी बदलते रहना इसे कम करते हैं।
4. भूख लगी हो तभी बाज़ार में खाने की खुशबू ध्यान में आती है। कौन सा कारक है?
आंतरिक कारक: ज़रूरत (भूख) खाने से जुड़े उद्दीपकों को उभार देती है।
आम गलतियाँ
- संवेदन और प्रत्यक्षण को एक समझना। संवेदन कच्चा संकेत है, प्रत्यक्षण उसमें अर्थ जोड़ता है।
- यह मानना कि हम आसपास का सब कुछ महसूस करते हैं। बहुत से उद्दीपक देहली से नीचे या परास से बाहर होते हैं।
- मल्टीटास्किंग को आसान समझना। विभक्त अवधान तभी चलता है जब एक काम अपने-आप होता हो।
- यह कहना कि ध्यान सिर्फ़ बाहरी चीज़ों से तय होता है। ज़रूरत, रुचि और अपेक्षा भी इसे चलाते हैं।