National Year 10 Psychology
अध्याय: 4
1. 3.1.1 Memory
3.1.1 Processes and types of memory · 3.1.1 Structures of memory · 3.1.1 Memory as an active process
- मानव स्मृति: हम सूचना कैसे रखते हैं – स्मृति सूचना को समय तक रखती है। इसके तीन चरण हैं: कूटसंकेतन, भंडारण और पुनरुद्धार। अवस्था मॉडल कहता है कि सूचना संवेदी स्मृति (बहुत बड़ी, लगभग एक सेकंड) से अल्पकालिक स्मृति (लगभग 7 मद, लगभग 20 सेकंड) में और दोहराव से दीर्घकालिक स्मृति (असीम, वर्षों) में जाती है। अल्पकालिक स्मृति कार्यकारी स्मृति की तरह काम करती है। प्रक्रमण स्तर उपागम कहता है कि गहरा, अर्थ वाला प्रक्रमण लंबी स्मृति देता है। दीर्घकालिक स्मृति में घोषणात्मक (घटनात्मक और अर्थगत) और प्रक्रियामूलक स्मृति होती है।
- पुनर्निर्माणात्मक स्मृति – हम यादें वीडियो की तरह नहीं रखते। हम टुकड़े रखते हैं और हर बार याद करते समय स्मृति को फिर से बनाते हैं। बनाते समय हमारे स्कीमा (चीज़ें आम तौर पर कैसी होती हैं, इसके बने-बनाए विचार) खाली जगह भरते हैं और अनोखी बातें बदल देते हैं। इसलिए यादें छोटी, जानी-पहचानी और कभी-कभी झूठी हो जाती हैं। मिलती-जुलती यादों का टकराव (व्यतिकरण) और संदर्भ संकेतों की कमी से भी भूलते हैं।
2. 3.1.2 Perception
3.1.2 Sensation and perception · 3.1.2 Visual cues and constancies · 3.1.2 Theories of perception · 3.1.2 Visual illusions · 3.1.2 Factors affecting perception
- प्रत्यक्षण: दिमाग कैसे अर्थ बनाता है – प्रत्यक्षण यानी इंद्रियों से आई सूचना को अर्थ देना। हम नीचे से ऊपर (अंश से पूर्ण) और ऊपर से नीचे (विचार से विवरण) दोनों तरह काम करते हैं। देखने वाले की ज़रूरतें, अपेक्षाएँ और मनोदशा इसे बदलती हैं। गेस्टाल्ट नियम (आकृति-पृष्ठभूमि, निकटता, समानता, पूर्णता, निरंतरता) अंशों को जोड़ते हैं। एकनेत्री और द्विनेत्री संकेत गहराई बताते हैं। स्थैर्य आकार, माप और चमक को स्थिर रखता है। भ्रम वह प्रत्यक्षण है जो सच से मेल न खाए, और संस्कृति इस पर असर डालती है।
3. 3.1.3 Development
3.1.3 Early brain development · 3.1.3 Piaget's stage theory · 3.1.3 Effects of learning on development
- बाल विकास: चरण, माइलस्टोन और देखभाल – वृद्धि (growth) का मतलब है बच्चे का बड़ा होना। विकास (development) का मतलब है बच्चे में नई क्षमताएँ आना: शरीर, सोच, भाषा और भावनाओं में। विकास एक क्रम में, चरणों में होता है: शैशव, टॉडलर, प्रारंभिक बचपन, मध्य बचपन और किशोरावस्था। अच्छा पोषण, खेल, प्यार और सुरक्षा हर क्षेत्र को बढ़ने में मदद करते हैं।
- संज्ञानात्मक विकास – संज्ञानात्मक विकास यानी जन्म से बड़े होने तक सोच कैसे बढ़ती है। ज़्याँ पियाजे के अनुसार बच्चे आत्मसात्करण और समायोजन से स्कीमा (ज्ञान के डिब्बे) बनाते हैं और चार अवस्थाओं से एक तय क्रम में गुज़रते हैं: संवेदी-गामक, पूर्व-संक्रियात्मक, मूर्त संक्रियात्मक और औपचारिक संक्रियात्मक। संरक्षण और आत्मकेंद्रिता परीक्षण यह बदलाव दिखाते हैं। सीखना भी विकास को आकार देता है: कैरल ड्वेक के अनुसार 'योग्यता बढ़ सकती है' यह विश्वास, मेहनत की प्रशंसा और आत्म-प्रभावकारिता सीखने में मदद करते हैं। 'सीखने की शैलियाँ' लोकप्रिय हैं पर इनका प्रमाण कमज़ोर है।
4. 3.1.4 Research methods
3.1.4 Hypotheses and variables · 3.1.4 Sampling · 3.1.4 Designing research · 3.1.4 Research procedures and ethics · 3.1.4.1 Data handling
- मनोविज्ञान में शोध विधियाँ – मनोवैज्ञानिक अपने विचारों को शोध से जाँचते हैं। परिकल्पना जाँचने योग्य अनुमान है; शून्य परिकल्पना कहती है कोई असर नहीं। प्रयोग में स्वतंत्र चर (IV) बदला जाता है और आश्रित चर (DV) मापा जाता है, बाहरी चर नियंत्रित रहते हैं। लोग यादृच्छिक, अवसर, व्यवस्थित या स्तरीकृत प्रतिदर्श से चुने जाते हैं। रूपरेखा: स्वतंत्र समूह, बार-बार माप या मिलान युग्म। प्रयोग प्रयोगशाला, क्षेत्र या प्राकृतिक हो सकते हैं; दूसरी विधियाँ हैं साक्षात्कार, प्रश्नावली, व्यक्ति अध्ययन, प्रेक्षण और सहसंबंध। अच्छा शोध मानकीकृत, प्रति-संतुलित, विश्वसनीय, वैध और नैतिक होता है।
- शोध में आँकड़ों का प्रबंधन – शोधकर्ता आँकड़े शब्दों (गुणात्मक) या संख्याओं (मात्रात्मक) में इकट्ठा करते हैं — खुद (प्राथमिक) या पहले से बने रिकॉर्ड से (द्वितीयक)। संख्याओं को औसत (माध्य, माध्यिका, बहुलक) और फैलाव (परिसर) से समझाया जाता है, तालिका, छड़ आलेख या प्रकीर्ण आरेख में दिखाया जाता है, और इंसानों के कई माप घंटी जैसे सामान्य बंटन में आते हैं।