परमाणु की बनावट: इलेक्ट्रॉन कहाँ रहते हैं
परमाणु के बीच में छोटा-सा नाभिक (nucleus) होता है, जिस पर धनावेश होता है। उसके चारों ओर बहुत हल्के, ऋणावेशित कण घूमते हैं, जिन्हें इलेक्ट्रॉन कहते हैं। नाभिक के पास के इलेक्ट्रॉन मज़बूती से बँधे होते हैं। बाहरी इलेक्ट्रॉन कमज़ोरी से बँधे होते हैं, और वही तय करते हैं कि पदार्थ बिजली के साथ कैसा व्यवहार करेगा।
3D दृश्य में हर परमाणु एक बड़ी गेंद है और उसका इलेक्ट्रॉन उसके चारों ओर घूमता छोटा नीला बिंदु है।
आवेश वाहक: धारा कौन ले जाता है?
विद्युत धारा आवेश का बहाव है। जो चीज़ बहती है उसे आवेश वाहक (charge carrier) कहते हैं। धातुओं में आवेश वाहक मुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं। मुक्त इलेक्ट्रॉन वह बाहरी इलेक्ट्रॉन है जो किसी एक परमाणु से बँधा नहीं है। वह पूरी धातु में घूमता है, पर धक्का न हो तो हर दिशा में जाता है, इसलिए धारा नहीं बनती। बैटरी धक्का देती है, इलेक्ट्रॉन एक ही दिशा में बहते हैं: यही बहाव धारा है।
(नमक के पानी में वाहक आवेशित परमाणु यानी आयन होते हैं, और अर्धचालक में दूसरे तरह का वाहक भी होता है जिसे होल कहते हैं। यहाँ हम केवल इलेक्ट्रॉन की बात करते हैं।)
चालक
चालक धारा को आसानी से जाने देता है, क्योंकि उसमें बहुत सारे मुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं। उदाहरण: तांबा, एल्युमिनियम, चाँदी, लोहा और ग्रेफ़ाइट। धातुएं अच्छी चालक होती हैं। चाँदी सबसे अच्छी है, पर तांबा सस्ता है, इसलिए तार तांबे के बनते हैं।
विद्युतरोधी (कुचालक)
विद्युतरोधी अपने सारे इलेक्ट्रॉन कसकर पकड़े रखता है। मुक्त आवेश वाहक लगभग होते ही नहीं, इसलिए धारा लगभग नहीं बहती। उदाहरण: रबड़, प्लास्टिक, काँच, सूखी लकड़ी, सूखा कपड़ा, हवा। ये हमारी रक्षा करते हैं: तार पर प्लास्टिक की परत, पेचकस का रबड़ वाला हत्था, बिजली मिस्त्री के रबड़ के दस्ताने। बहुत तेज़ धक्का (जैसे आसमानी बिजली) कुछ पल के लिए हवा को भी चालक बना देता है।
अर्धचालक
अर्धचालक दोनों के बीच में होता है। उदाहरण: सिलिकॉन और जर्मेनियम। बहुत ठंडा हो तो वह लगभग विद्युतरोधी की तरह चलता है। गर्म करने पर या उस पर रोशनी पड़ने पर ज़्यादा इलेक्ट्रॉन छूटते हैं और वह बेहतर चालन करता है। यह धातु से उल्टा है: धातु गर्म होने पर थोड़ा कम चालन करती है, अर्धचालक ज़्यादा।
बनाने वाले उसमें किसी दूसरे तत्व की बहुत थोड़ी मात्रा मिलाते हैं (इसे अपमिश्रण, doping कहते हैं) ताकि वाहकों की संख्या तय हो सके। इसी से डायोड, ट्रांज़िस्टर और कंप्यूटर चिप बनती हैं। आगे पढ़ें: p-n संधि डायोड का पाठ।
करके देखो: अपने पदार्थ परखो
- एक सेल, एक छोटा बल्ब और तार के दो खुले सिरे लेकर परिपथ बनाओ (बीच में खाली जगह रखो)।
- दोनों सिरों को सिक्के, चाबी, पेंसिल की लेड, रबड़, प्लास्टिक के चम्मच और सूखी लकड़ी से बारी-बारी छुआओ।
- हर बार छूने से पहले अनुमान लगाओ: बल्ब जलेगा या नहीं? फिर जाँचो।
- चीज़ों को दो समूहों में बाँटो। सावधानी: केवल छोटा सेल लो, दीवार के सॉकेट से कभी नहीं।
3D दृश्य में सिलिकॉन को अलग-अलग गर्मी पर भी चलाकर देखो कि बल्ब की चमक कैसे बदलती है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- चालक: बहुत मुक्त इलेक्ट्रॉन, कम प्रतिरोध (तांबा, चाँदी, एल्युमिनियम)
- विद्युतरोधी: लगभग कोई मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं, बहुत अधिक प्रतिरोध (रबड़, काँच, प्लास्टिक)
- अर्धचालक: कम मुक्त इलेक्ट्रॉन, गर्म करने या अपमिश्रण से प्रतिरोध घटता है (सिलिकॉन, जर्मेनियम)
- धारा = आवेश वाहकों का बहाव (धातुओं में इलेक्ट्रॉन)
- धातु: ताप बढ़ने पर प्रतिरोध बढ़ता है; अर्धचालक: ताप बढ़ने पर प्रतिरोध घटता है
हल किए गए उदाहरण
1. एक पदार्थ को बैटरी और बल्ब के साथ जोड़ने पर बल्ब नहीं जलता। वह चालक है, विद्युतरोधी है या कह नहीं सकते?
वह विद्युतरोधी हो सकता है, पर कम ताप पर खराब अर्धचालक भी हो सकता है। तेज़ बैटरी पर भी बल्ब बिल्कुल बंद रहे तो हम उसे विद्युतरोधी कहते हैं।
2. चालक, विद्युतरोधी और अर्धचालक में बाँटो: तांबा, काँच, सिलिकॉन, सूखी लकड़ी, एल्युमिनियम, जर्मेनियम।
चालक: तांबा, एल्युमिनियम। विद्युतरोधी: काँच, सूखी लकड़ी। अर्धचालक: सिलिकॉन, जर्मेनियम।
3. तांबे के तार पर प्लास्टिक क्यों चढ़ाते हैं?
तांबा चालक है, इसलिए धारा उसमें बहती है। प्लास्टिक विद्युतरोधी है, इसलिए धारा हमारे हाथ या दूसरे तारों तक नहीं जा पाती। इससे हम सुरक्षित रहते हैं और शॉर्ट सर्किट नहीं होता।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि विद्युतरोधी में इलेक्ट्रॉन होते ही नहीं। होते हैं, पर सब कसकर बँधे होते हैं।
- यह सोचना कि तार में इलेक्ट्रॉन बैटरी से बल्ब तक पलक झपकते पहुँच जाते हैं। इलेक्ट्रॉन धीरे बहते हैं; धक्का तेज़ी से पहुँचता है।
- यह सोचना कि गर्म करने से हमेशा चालन बढ़ता है। अर्धचालक में बढ़ता है, पर धातु में थोड़ा घटता है।
- पानी को विद्युतरोधी कहना। शुद्ध पानी बहुत कम चालन करता है, पर नल के पानी में नमक घुले होते हैं और वह चालन करता है, इसलिए बिजली के साथ खतरनाक है।