प्राकृतिक आवृत्ति और मुक्त कंपन
झूले को पीछे खींचकर छोड़िए। वह अपने आप झूलता है, हर सेकंड में तय बार। यह संख्या उसकी प्राकृतिक आवृत्ति (natural frequency) है। यह वस्तु पर निर्भर है (पेंडुलम में उसकी लंबाई, स्प्रिंग में द्रव्यमान और कठोरता), इस पर नहीं कि आपने कितनी ज़ोर से धक्का दिया।
एक बार धक्का देने के बाद जब वस्तु अपने आप कंपन करती है, तो यह मुक्त कंपन (free vibration) है। घर्षण और हवा धीरे-धीरे ऊर्जा ले लेते हैं, इसलिए झूले छोटे होते जाते हैं। इसे अवमंदन (damping) कहते हैं।
नया शब्द: आवृत्ति यानी एक सेकंड में कितने झूले। इसका मात्रक हर्ट्ज़ (Hz) है।
प्रणोदित कंपन
अब वस्तु को बाहर से बार-बार धक्का देते रहिए। धक्का देने वाला चालक (driver) है। वस्तु उसे अनदेखा नहीं कर सकती। थोड़ी देर बाद वह अपनी नहीं, चालक की आवृत्ति पर कंपन करती है। इसे प्रणोदित कंपन (forced vibration) कहते हैं।
अगर चालक की आवृत्ति प्राकृतिक आवृत्ति से बहुत दूर है, तो झूला छोटा रहता है। मेज़ पर रखा स्वरित्र द्विभुज मेज़ को अपनी आवृत्ति पर कंपन कराता है।
अनुनाद
अनुनाद (resonance) तब होता है जब चालक की आवृत्ति वस्तु की प्राकृतिक आवृत्ति के बराबर (या बहुत पास) हो। हर धक्का ठीक सही समय पर आता है और झूले में ऊर्जा जोड़ता है। तब आयाम सबसे बड़ा हो जाता है।
इतना बड़ा क्यों? हर धक्का गति की मदद करता है, उसका विरोध नहीं करता। छोटे धक्के जुड़ते जाते हैं, जैसे झूले को ठीक समय पर धक्का देना।
आयाम और चालक की आवृत्ति के ग्राफ़ में प्राकृतिक आवृत्ति पर तीखी चोटी बनती है। अवमंदन कम हो तो चोटी ऊँची और पतली, ज़्यादा हो तो नीची और चौड़ी। अवमंदन शून्य हो तो आयाम बिना रुके बढ़ता; असली जीवन में घर्षण इसे रोक देता है।
अनुनाद कहाँ काम का, कहाँ हानिकारक
उपयोगी: रेडियो या टीवी का ट्यूनर एक विद्युत परिपथ है जो एक स्टेशन की आवृत्ति से अनुनाद करता है। वाद्य यंत्रों का खोखला हिस्सा अनुनाद से आवाज़ तेज़ करता है। MRI मशीन चुंबकीय क्षेत्र में परमाणुओं के अनुनाद का उपयोग करती है।
हानिकारक: पुल पर लोग प्राकृतिक आवृत्ति की लय में चलें तो वह खतरनाक रूप से हिल सकता है, इसलिए सैनिक लय तोड़कर चलते हैं। वॉशिंग मशीन का ड्रम फ्रेम की आवृत्ति पर घूमे तो ज़ोर से काँपती है। ऊँचे सुर से काँच का गिलास टूट सकता है। इंजीनियर अवमंदन जोड़कर या प्राकृतिक आवृत्ति बदलकर इसे रोकते हैं।
करके देखिए: बोतल और झूले से अनुनाद
करिए: खाली बोतल के मुँह पर हल्के से फूँकिए। एक सुर सुनाई देगा: अंदर की हवा अनुनाद करती है। थोड़ा पानी डालकर फिर फूँकिए। सुर ऊँचा हो जाता है क्योंकि वायु स्तंभ छोटा हो गया। अगली बार झूले पर अलग-अलग लय में धक्का देकर देखिए कि कौन-सी सबसे ज़्यादा ऊँचा ले जाती है।
पहले अनुमान, फिर जाँच: 3D में सोचिए कि 2.03 Hz पर कौन-सा पेंडुलम बड़ा झूलेगा। फिर स्लाइडर से जाँचिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- आवृत्ति f = प्रति सेकंड झूलों की संख्या (मात्रक हर्ट्ज़, Hz); आवर्त काल T = 1/f
- पेंडुलम की प्राकृतिक आवृत्ति f0 = (1/2π)√(g/L): L छोटा तो f0 बड़ी
- स्प्रिंग की प्राकृतिक आवृत्ति f0 = (1/2π)√(k/m)
- अनुनाद तब जब चालक की आवृत्ति f = प्राकृतिक आवृत्ति f0
- मुख्य शब्द: मुक्त कंपन, प्रणोदित कंपन, चालक, अवमंदन, आयाम
हल किए गए उदाहरण
1. एक पेंडुलम 10 s में 20 झूले लेता है। उसकी प्राकृतिक आवृत्ति और आवर्त काल निकालिए।
f = 20 / 10 = 2 Hz। T = 1/f = 0.5 s।
2. एक पुल की प्राकृतिक आवृत्ति 1.8 Hz है। सैनिक 1 सेकंड में 2 कदम चलते हैं। क्या अनुनाद होगा? उन्हें क्या करना चाहिए?
उनकी लय 2 Hz है, जो 1.8 Hz के पास है, इसलिए बड़ा हिलना संभव है। उन्हें लय तोड़कर चलना चाहिए, ताकि बार-बार का धक्का जुड़े नहीं।
3. एक झूले की प्राकृतिक आवृत्ति 0.4 Hz है। सबसे बड़े झूले के लिए कितनी बार धक्का दें?
उसी आवृत्ति पर: 0.4 बार प्रति सेकंड, यानी हर T = 1/0.4 = 2.5 s में एक बार।
4. दो पेंडुलमों की लंबाई 1 m और 4 m है। किसकी प्राकृतिक आवृत्ति अधिक है? अनुपात क्या है?
f0 ∝ 1/√L। 1 m वाले की आवृत्ति अधिक है। अनुपात f(1 m) : f(4 m) = 1/1 : 1/2 = 2 : 1।
5. एक स्प्रिंग-द्रव्यमान निकाय की f0 = 3 Hz है। द्रव्यमान 4 गुना कर दिया। नई आवृत्ति?
f0 ∝ 1/√m। द्रव्यमान 4 गुना होने पर आवृत्ति आधी: 1.5 Hz।
6. एक वॉशिंग मशीन का ड्रम 10 Hz पर घूमकर बहुत हिलता है। फ्रेम की प्राकृतिक आवृत्ति भी 10 Hz है। हिलना कम करने के दो तरीके बताइए।
ड्रम की गति 10 Hz से दूर करें, या फ्रेम की प्राकृतिक आवृत्ति बदलें (मज़बूत या भारी बनाकर)। रबर के पैर जैसा अवमंदन भी चोटी घटाता है।
आम गलतियाँ
- अनुनाद का मतलब सबसे तेज़ आवाज़ या सबसे तेज़ कंपन समझना। असल में चालक की आवृत्ति = प्राकृतिक आवृत्ति और आयाम बड़ा।
- प्रणोदित कंपन को प्राकृतिक आवृत्ति पर मानना। वह चालक की आवृत्ति पर होता है।
- मानना कि अनुनाद के लिए ज़ोर का धक्का चाहिए। सही लय में छोटे धक्के काफ़ी हैं।
- अवमंदन भूल जाना। घर्षण न हो तो आयाम हमेशा बढ़ता; असली वस्तुओं में कुछ अवमंदन होता ही है।