📘 CodingMarble Learn

खगोल विज्ञान की विधियाँ: दूर के तारों का अध्ययन कैसे होता है

तारों को छुआ नहीं जा सकता, इसलिए खगोलविद उन तरंगों को पढ़ते हैं जो पृथ्वी तक आती हैं: प्रकाश, रेडियो, अवरक्त, पराबैंगनी, एक्स-किरणें और गामा किरणें। ऑप्टिकल टेलिस्कोप बड़े दर्पण या लेंस से प्रकाश इकट्ठा करता है। रेडियो टेलिस्कोप डिश से काम करता है और बादलों में तथा दिन में भी चलता है। हवा एक्स-किरणों, पराबैंगनी और ज़्यादातर अवरक्त को रोकती है, इसलिए उन्हें अंतरिक्ष टेलिस्कोप से देखा जाता है। चौड़ा दर्पण ज़्यादा प्रकाश लेता है, इसलिए धुँधली चीज़ें दिखती हैं।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. तारा बहुत दूर है। हम वहाँ जा नहीं सकते। हमें बस उसका प्रकाश और दूसरी तरंगें मिलती हैं।
  2. ऑप्टिकल टेलिस्कोप में एक दर्पण होता है जो प्रकाश इकट्ठा करता है। चौड़ा दर्पण ज़्यादा प्रकाश इकट्ठा करता है।
  3. बादल प्रकाश रोक देते हैं। रेडियो तरंगें बादलों से निकल जाती हैं, इसलिए रेडियो डिश फिर भी काम करती है।
  4. हवा एक्स-किरणों को रोक देती है। अंतरिक्ष का टेलिस्कोप इन्हें देख सकता है, इसलिए टेलिस्कोप ऊपर भेजे जाते हैं।
  5. अब आप कोशिश करें। बादल और तरंगें चालू-बंद करें। देखें किसे संकेत मिलता है।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

तारे से हमें वास्तव में क्या मिलता है?

सिर्फ़ प्रकाश और दूसरी तरंगें। इन्हें पढ़कर हम तारे का तापमान, आकार और दूरी जानते हैं।

बड़ा दर्पण बेहतर क्यों है?

बड़ा दर्पण ज़्यादा प्रकाश पकड़ता है, जैसे बड़ी बाल्टी ज़्यादा बारिश। दर्पण का स्लाइडर चलाएँ और प्रकाश का प्रतिशत बढ़ता देखें।

रेडियो टेलिस्कोप बादलों में क्यों चलते हैं?

रेडियो तरंगें बहुत लंबी होती हैं और पानी की बूँदों से निकल जाती हैं। बादल चालू करें: पीला प्रकाश रुक जाता है पर लाल रेडियो बिंदु डिश तक पहुँचते हैं।

ज़मीन से एक्स-किरणें क्यों नहीं दिखतीं?

हवा उन्हें ऊँचाई पर ही सोख लेती है। 3D में बैंगनी बिंदु नीली परत के ऊपर ही रुक जाते हैं।

सब काम अंतरिक्ष टेलिस्कोप से क्यों नहीं करते?

वे बहुत महँगे, छोटे और मरम्मत में कठिन होते हैं। ज़मीन के टेलिस्कोप बड़े और सस्ते होते हैं और प्रकाश व रेडियो के लिए ठीक रहते हैं।

खगोल विज्ञान में तरंगों का उपयोग क्यों

तारे इतने दूर हैं कि वहाँ जाना संभव नहीं। इसलिए खगोलविद उनसे आने वाली तरंगों को पढ़ते हैं। प्रकाश भी एक तरंग है। और भी हैं: रेडियो तरंगें, अवरक्त (इन्फ्रारेड), पराबैंगनी (अल्ट्रावायलेट), एक्स-किरणें और गामा किरणें। इन सबको मिलाकर विद्युत-चुंबकीय स्पेक्ट्रम कहते हैं। हर तरंग अलग कहानी बताती है। रेडियो तरंगें ठंडी गैस दिखाती हैं, एक्स-किरणें बहुत गर्म गैस।

ऑप्टिकल टेलिस्कोप

ऑप्टिकल टेलिस्कोप लेंस (अपवर्तक) या मुड़े हुए दर्पण (परावर्तक) से प्रकाश इकट्ठा करता है। बड़े टेलिस्कोप दर्पण का उपयोग करते हैं, क्योंकि बड़ा दर्पण बड़े लेंस से हल्का और सँभालने में आसान होता है। इसके दो काम हैं: प्रकाश इकट्ठा करना (चौड़ा दर्पण धुँधले तारे दिखाता है) और आवर्धन (नेत्रिका चित्र को बड़ा करती है)। इकट्ठा प्रकाश क्षेत्रफल के समानुपाती है, यानी दर्पण की चौड़ाई के वर्ग के। दोगुना चौड़ा दर्पण चार गुना प्रकाश लेता है। ऑप्टिकल टेलिस्कोप रात में, साफ़ आसमान में चलते हैं और ऊँचे सूखे पहाड़ों पर सबसे अच्छे रहते हैं।

रेडियो टेलिस्कोप

रेडियो टेलिस्कोप एक बड़ी धातु की डिश है, जो अंतरिक्ष से आई रेडियो तरंगें इकट्ठा करके रिसीवर पर केंद्रित करती है। रेडियो तरंगें लंबी होती हैं, इसलिए डिश बहुत बड़ी चाहिए। ये बादलों, धूल और दिन के आसमान से निकल जाती हैं, इसलिए रेडियो टेलिस्कोप दिन में और खराब मौसम में भी चलते हैं। कई डिशों को जोड़कर ऐरे बनाया जाता है, जो एक विशाल डिश जैसा काम करता है और बारीक ब्योरा दिखाता है। रेडियो खगोल विज्ञान से पल्सर और शुरुआती ब्रह्मांड की धीमी चमक मिली।

अंतरिक्ष आधारित खगोल विज्ञान

पृथ्वी की हवा दृश्य प्रकाश और रेडियो तरंगों को निकलने देती है, पर एक्स-किरणें, पराबैंगनी, गामा किरणें और बहुत-सी अवरक्त किरणें रोक लेती है। हवा तारों को टिमटिमाती भी है, जिससे चित्र धुँधले होते हैं। इन तरंगों को देखने के लिए टेलिस्कोप उपग्रहों पर, हवा के ऊपर लगाए जाते हैं। अंतरिक्ष टेलिस्कोप दिन-रात, बिना बादल के साफ़ चित्र देता है। कीमत यह है कि इसे बनाना और छोड़ना महँगा है और मरम्मत कठिन। आज खगोलविद ज़मीन और अंतरिक्ष दोनों के आँकड़े मिलाकर किसी पिंड को कई तरंगों में देखते हैं।

करके देखें (Try it)

3D में: पहले अनुमान लगाएँ, फिर जाँचें। बादल चालू करें। किस टेलिस्कोप का संकेत जाता है? अब एक्स-किरणें चालू करें। किसे मिलती हैं? घर पर: साफ़ रात में आसमान देखें, फिर बादलों वाली रात में। हर बार कितने तारे गिन सकते हैं, लिखें। फिर कागज़ की छोटी नली से देखें: कम तारे दिखते हैं पर चमकदार।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. टेलिस्कोप A का दर्पण 2 m चौड़ा है और B का 6 m। B कितने गुना ज़्यादा प्रकाश इकट्ठा करता है?

प्रकाश ∝ व्यास²। (6/2)² = 3² = 9। B 9 गुना ज़्यादा प्रकाश इकट्ठा करता है।

2. रात बादलों वाली है। दूर की आकाशगंगा कौन देख सकता है: ऑप्टिकल या रेडियो टेलिस्कोप?

रेडियो टेलिस्कोप। बादल दृश्य प्रकाश रोकते हैं, पर रेडियो तरंगें उनसे निकल जाती हैं।

3. एक्स-किरण टेलिस्कोप को कक्षा में क्यों भेजा जाता है?

पृथ्वी की हवा एक्स-किरणें सोख लेती है, इसलिए ज़मीन तक नहीं पहुँचतीं। हवा के ऊपर वे आसानी से आती हैं।

4. बड़े ऑप्टिकल टेलिस्कोप ऊँचे पहाड़ों पर क्यों बनाते हैं?

वहाँ ऊपर हवा कम होती है, इसलिए धुँधलापन और बादल कम होते हैं और हवा सूखी होती है। चित्र साफ़ आते हैं।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. ऑप्टिकल टेलिस्कोप मुख्य रूप से क्या करता है?
2. कौन-सी तरंगें बादलों से आसानी से निकल जाती हैं?
3. एक्स-किरण टेलिस्कोप अंतरिक्ष में क्यों होते हैं?
4. दर्पण 3 गुना चौड़ा किया गया। इकट्ठा प्रकाश कितना गुना होगा?
5. तारे टिमटिमाते क्यों हैं?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खगोल विज्ञान की मुख्य विधियाँ कौन-सी हैं?

ऑप्टिकल टेलिस्कोप से प्रकाश देखना, रेडियो टेलिस्कोप से रेडियो तरंगें देखना, और अंतरिक्ष के टेलिस्कोप से एक्स-किरणें व पराबैंगनी जैसी तरंगें देखना।

रेडियो टेलिस्कोप की ज़रूरत क्यों है?

कई पिंड रेडियो तरंगें छोड़ते हैं जो हमें दिखती नहीं। रेडियो तरंगें बादलों और धूल से भी निकल जाती हैं, इसलिए आसमान का ज़्यादा हिस्सा दिखता है।

टेलिस्कोप को अंतरिक्ष में क्यों भेजते हैं?

हवा कई तरंगें रोकती है और आसमान को धुँधला करती है। अंतरिक्ष में हवा नहीं है, इसलिए चित्र साफ़ होते हैं और सारी तरंगें पहुँचती हैं।

पहले यह पढ़ें

आगे पढ़ें

इससे जुड़े पाठ

सभी भौतिक विज्ञान पाठ