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वृत्तीय गति: आवर्तकाल, चाल और त्वरण

वृत्तीय गति में वस्तु एक वृत्त पर घूमती है। एक पूरा चक्कर लगाने में जो समय लगता है उसे आवर्तकाल T कहते हैं, और प्रति सेकंड चक्करों की संख्या आवृत्ति f = 1/T है। रेखीय चाल v = 2πr/T और कोणीय चाल ω = 2π/T होती है, इसलिए v = ωr। चाल स्थिर हो तब भी दिशा बदलती रहती है, इसलिए वेग बदलता है और केंद्र की ओर त्वरण a = v²/r होता है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. एक गेंद गोल-गोल घूम रही है। स्लेटी छल्ला उसका रास्ता है। बीच का काला बिंदु केंद्र है।
  2. हर चक्कर में बराबर समय लगता है। इस समय को आवर्तकाल T कहते हैं। यहाँ T = 6 सेकंड है। लाल निशान शुरुआत की रेखा है।
  3. नारंगी तीर वेग है। यह हमेशा वृत्त के किनारे की ओर, यानी गेंद जिधर जा रही है उधर रहता है। चाल वही रहती है, पर तीर घूमता रहता है।
  4. अब वृत्त बड़ा हो गया, पर T वही है। गेंद को उतने ही समय में लंबा रास्ता तय करना है, इसलिए वह तेज़ चलती है। v = 2πr / T।
  5. दिशा बदलती रहती है, इसलिए गेंद में त्वरण है। हरा तीर केंद्र की ओर है। इसे अभिकेंद्र त्वरण कहते हैं, a = v² / r।
  6. अपने आप करके देखिए: r और T के स्लाइडर चलाइए। चित्र के नीचे की पंक्ति में v, कोणीय चाल ω और a बदलते देखिए।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

चाल नहीं बदलती तो त्वरण क्यों कहते हैं?

क्योंकि वेग में चाल के साथ दिशा भी होती है। दिशा हर पल बदलती है, इसलिए वेग बदलता है, और वेग में बदलाव ही त्वरण है।

वेग किस ओर होता है?

स्पर्श रेखा की दिशा में, यानी गेंद उस पल जिधर जा रही है उधर। वह कभी केंद्र की ओर नहीं होता।

झूले का बाहरी घोड़ा तेज़ क्यों चलता है?

सब घोड़े एक चक्कर में बराबर समय लेते हैं, पर बाहर वाला बड़ा वृत्त तय करता है। उतने ही समय में ज़्यादा दूरी यानी ज़्यादा चाल।

T और f में क्या फ़र्क है?

T एक चक्कर का समय है। f एक सेकंड में चक्करों की संख्या है। दोनों उलटे हैं: f = 1/T।

T छोटा करने पर क्या होता है?

गेंद तेज़ घूमती है, इसलिए v, ω और a तीनों बढ़ते हैं। अपने आप करके देखिए: स्लाइडर चलाइए।

वृत्तीय गति क्या है?

जब कोई वस्तु वृत्त के रास्ते पर चलती है, तो उसकी गति वृत्तीय गति कहलाती है। सीधी रेखा में गति आसान है: दिशा एक ही रहती है। वृत्त में दिशा हर पल बदलती है।

अगर वस्तु बराबर समय में बराबर चाप तय करे, तो यह एकसमान वृत्तीय गति है। इसमें चाल (कितनी तेज़) स्थिर रहती है। पर वेग (चाल और दिशा) स्थिर नहीं रहता, क्योंकि दिशा बदलती रहती है।

रोज़ के उदाहरण: पंखे का पंख, साइकिल का पहिया, बड़ा झूला, पृथ्वी के चारों ओर चंद्रमा (लगभग वृत्त)।

आवर्तकाल, आवृत्ति और मात्रक

आवर्तकाल (T) एक पूरे चक्कर का समय है। मात्रक: सेकंड (s)।

आवृत्ति (f) एक सेकंड में चक्करों की संख्या है। मात्रक: हर्ट्ज़ (Hz), और 1 Hz = 1 चक्कर प्रति सेकंड।

दोनों जुड़े हैं: f = 1 / T। अगर एक चक्कर 0.5 s का है, तो f = 2 Hz।

मशीनों में अक्सर rpm (चक्कर प्रति मिनट) चलता है। rpm को Hz में बदलने के लिए 60 से भाग दीजिए। यानी 120 rpm = 2 Hz।

कोण रेडियन में: पूरा वृत्त 2π रेडियन (लगभग 6.28 rad) होता है। एक रेडियन वह कोण है जिसका चाप त्रिज्या के बराबर लंबा हो।

चाल, कोणीय चाल और v = ωr

एक आवर्तकाल में वस्तु पूरी परिधि 2πr तय करती है। इसलिए रेखीय चाल है

v = 2πr / T

कोणीय चाल ω बताती है कि कोण कितनी तेज़ी से बढ़ता है: ω = 2π / T = 2πf। मात्रक: रेडियन प्रति सेकंड (rad/s)।

दोनों को जोड़ें: v = ω × r। घूमते पहिये के हर हिस्से का ω बराबर होता है, पर केंद्र से दूर वाले हिस्सों का v ज़्यादा होता है।

वेग का तीर हमेशा स्पर्श रेखा (tangent) की दिशा में होता है, यानी वह रेखा जो गेंद की जगह पर वृत्त को बस छूती है।

केंद्र की ओर त्वरण

त्वरण का मतलब है वेग में बदलाव। वृत्तीय गति में चाल स्थिर है पर दिशा बदलती है, इसलिए वेग बदलता है। यानी त्वरण होता है।

यह केंद्र की ओर होता है और अभिकेंद्र त्वरण (centripetal acceleration) कहलाता है:

a = v² / r = ω² r

उसी चाल पर तंग मोड़ (छोटा r) में ज़्यादा त्वरण चाहिए। केंद्र की ओर धक्का या खिंचाव कोई तो देता है: डोरी, सड़क का घर्षण या गुरुत्वाकर्षण। उस बल की बात अगले पाठ में है।

करके देखिए: अपना वृत्त नापिए

एक छोटी नरम गेंद को लगभग 1 m लंबी डोरी से बाँधिए। डोरी का सिरा पकड़कर गेंद को हल्के से समतल वृत्त में घुमाइए (बाहर, लोगों से दूर करें)। दोस्त से कहिए कि 10 चक्कर गिने और फ़ोन से समय नापे। तब T = कुल समय ÷ 10 और v = 2πr / T। अब तेज़ घुमाइए और देखिए कि T छोटा और v बड़ा हो जाता है।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. एक गेंद 2 m त्रिज्या के वृत्त का एक चक्कर 4 s में लगाती है। उसकी चाल ज्ञात कीजिए।

v = 2πr / T = 2 × 3.14 × 2 / 4 = 3.14 m/s।

2. एक धीमे पंखे का पंख हर 12 s में एक चक्कर लगाता है। ω ज्ञात कीजिए।

ω = 2π / T = 6.28 / 12 = 0.52 rad/s।

3. एक ड्रम 120 rpm से घूमता है। f और T ज्ञात कीजिए।

f = 120 / 60 = 2 Hz। T = 1 / f = 0.5 s।

4. एक कार 5 m/s की चाल से मोड़ पर घूमती है। मोड़ की त्रिज्या 2.5 m है। त्वरण ज्ञात कीजिए।

a = v² / r = 25 / 2.5 = 10 m/s², मोड़ के केंद्र की ओर।

5. साइकिल के पहिये की त्रिज्या 0.35 m है। साइकिल 7 m/s से चल रही है। पहिये का ω और f ज्ञात कीजिए।

पहिये का किनारा साइकिल की चाल से चलता है, इसलिए v = 7 m/s। ω = v / r = 7 / 0.35 = 20 rad/s। f = ω / 2π = 20 / 6.28 = 3.2 Hz।

6. झूले के दो घोड़े एक चक्कर 8 s में लगाते हैं। एक r = 4 m पर है, दूसरा r = 2 m पर। चाल और त्वरण की तुलना कीजिए।

बाहरी घोड़ा: v = 2π × 4 / 8 = 3.14 m/s और a = v² / r = 9.86 / 4 = 2.47 m/s²। भीतरी घोड़ा: v = 2π × 2 / 8 = 1.57 m/s और a = 2.47 / 2 = 1.23 m/s²। T बराबर है, पर बाहर वाले की चाल और त्वरण दोनों दोगुने हैं।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. एकसमान वृत्तीय गति में कौन-सी राशि स्थिर रहती है?
2. रेखीय चाल और कोणीय चाल का संबंध है:
3. अभिकेंद्र त्वरण की दिशा होती है:
4. एक पहिये का आवर्तकाल 0.25 s है। उसकी आवृत्ति है:
5. त्रिज्या दोगुनी हो और आवर्तकाल वही रहे, तो चाल:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एकसमान वृत्तीय गति आसान शब्दों में क्या है?

यह वृत्त पर स्थिर चाल से चलना है। गेंद बराबर समय में बराबर चाप तय करती है, पर उसकी दिशा बदलती रहती है।

चाल स्थिर हो तो क्या त्वरण होता है?

हाँ। त्वरण वेग में बदलाव है और वेग में दिशा भी शामिल है। वृत्त में दिशा बदलती है, इसलिए केंद्र की ओर अभिकेंद्र त्वरण a = v²/r होता है।

रेखीय चाल और कोणीय चाल में क्या अंतर है?

रेखीय चाल v बताती है कि वस्तु हर सेकंड कितने मीटर चलती है। कोणीय चाल ω बताती है कि वह हर सेकंड कितने रेडियन घूमती है। दोनों का संबंध v = ωr है।

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