दो तख़्ते, दो दृश्य (द्वितल पद्धति)
एक चित्र ठोस की गहराई छिपा देता है। इसलिए हम समकोण पर मिलते दो सपाट तख़्ते लेते हैं। फ़र्श क्षैतिज तल (HP) है। दीवार ऊर्ध्वाधर तल (VP) है। ये XY रेखा पर मिलते हैं। इस व्यवस्था को द्वितल पद्धति (dihedral system) कहते हैं।
- सामने से देखने पर VP पर सामने का दृश्य बनता है। यह ऊँचाई और चौड़ाई दिखाता है।
- ऊपर से देखने पर HP पर ऊपर का दृश्य बनता है। यह चौड़ाई और गहराई दिखाता है।
- प्रक्षेपक कोने से निकली पतली रेखा है जो तख़्ते से समकोण पर मिलती है।
फ़र्श को मोड़ना (तल का घुमाव, rabatment)
कागज़ सपाट होता है, इसलिए समकोण वाले दो तख़्तों पर चित्र नहीं बन सकता। हम फ़र्श को XY रेखा के चारों ओर नीचे मोड़ते हैं जब तक वह दीवार वाले तल में न आ जाए। एक तल को घुमाकर दूसरे तल में लाने को rabatment कहते हैं।
मोड़ने के बाद ऊपर का दृश्य सामने के दृश्य के नीचे आता है। एक कोना दोनों दृश्यों में दिखता है और उसके दोनों बिंदु एक खड़ी रेखा पर होते हैं। यही ड्राइंग का मुख्य नियम है: किसी बिंदु के सामने और ऊपर के दृश्य एक खड़ी रेखा से जुड़ते हैं।
सही लंबाई और सही आकार
रेखा की सही लंबाई उसी तख़्ते पर दिखती है जिसके वह समांतर है। तख़्ते से तिरछी हो तो दृश्य छोटा दिखता है (लघुकृत)। L लंबाई की अक्ष, जो HP से θ कोण बनाती है और VP के समांतर है:
- सामने के दृश्य की लंबाई = L (सही)
- ऊपर के दृश्य की लंबाई = L cos θ (छोटी)
इसी तरह सपाट आकृति का सही आकार भी उसी तख़्ते पर दिखता है जिसके वह समांतर है। रेखा के ऊपर के दृश्य की लंबाई d और सिरों की ऊँचाई का अंतर h हो तो सही लंबाई √(d² + h²) होती है।
घुमाव और तल बदलना
ठोस को झुकी हुई स्थिति में देखने के दो तरीके हैं। दोनों से एक ही चित्र मिलता है।
- ठोस घुमाइए: तख़्ते स्थिर रखें और ठोस को हिलाएँ। पहले सरल स्थिति में बनाइए। फिर एक दृश्य को दिए कोण से झुकाकर दोबारा बनाइए (आकार वही, स्थिति नई)। उससे दूसरा दृश्य प्रक्षेपित कीजिए। पहले झुकाइए, फिर खड़ी रेखा के चारों ओर घुमाइए, ताकि दूसरा घुमाव पहला कोण न बदले।
- तल बदलिए: ठोस स्थिर रखें और जिस भाग का सही आकार देखना है उसके समांतर नया तख़्ता (सहायक तल) रखिए। नए प्रक्षेपकों से उस पर प्रक्षेपित कीजिए।
ठोस कभी नहीं बदलता। केवल दृश्य बदलते हैं।
प्रिज़्म, पिरामिड और परिच्छेद
प्रिज़्म के दो बराबर सपाट सिरे आयतों से जुड़े होते हैं। पिरामिड का एक सपाट आधार होता है और ढलान वाले त्रिभुज शीर्ष पर मिलते हैं। आधार को HP पर और अक्ष को खड़ी रखकर शुरू कीजिए। तब ऊपर का दृश्य आधार का सही आकार दिखाता है: वर्ग प्रिज़्म से वर्ग मिलता है। वर्ग पिरामिड से दो विकर्णों वाला वर्ग मिलता है; ये चार ढलान वाले किनारे हैं जो ऊपर से दिखते हैं।
- जो किनारे देखने वाली ओर से नहीं दिखते उन्हें टूटी रेखा (छिपी रेखा) से बनाते हैं।
- सपाट चाकू से कटने पर कटा फलक परिच्छेद कहलाता है। इसका सही आकार चाकू के समांतर तल पर मिलता है। देखिए पाठ ठोसों के परिच्छेद।
बेलन, शंकु और सम बहुफलक
अक्ष खड़ी हो तो बेलन का ऊपर का दृश्य वृत्त और सामने का दृश्य आयत होता है। शंकु का ऊपर का दृश्य बीच में बिंदु (शीर्ष) वाला वृत्त और सामने का दृश्य त्रिभुज होता है। इन्हें झुकाएँ तो वृत्त दीर्घवृत्त बन जाते हैं, जिन्हें दो सीधी रेखाएँ छूती हैं।
सम बहुफलक (घन, चतुष्फलक, अष्टफलक आदि) बराबर सम फलकों से बनते हैं। पहले एक फलक या एक किनारा बनाइए, बाक़ी कोनों की ऊँचाई निकालिए, फिर प्रक्षेपित कीजिए। घन की विकर्ण रेखा खड़ी हो तो ऊपर का दृश्य सम षट्भुज होता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सही लंबाई L; HP से कोण θ और VP के समांतर: सामने का दृश्य = L, ऊपर का दृश्य = L cos θ
- ऊपर के दृश्य d और सिरों की ऊँचाई के अंतर h से सही लंबाई: L = √(d² + h²)
- सामने का दृश्य: VP पर, ऊँचाई और चौड़ाई। ऊपर का दृश्य: HP पर, चौड़ाई और गहराई
- फ़र्श को XY पर मोड़ने पर ऊपर का दृश्य सामने के दृश्य के नीचे, खड़ी रेखाओं से जुड़ा
हल किए गए उदाहरण
1. 8 cm लंबी अक्ष VP के समांतर है और HP से 30° बनाती है। सामने और ऊपर के दृश्य की लंबाई निकालिए।
यह VP के समांतर है, इसलिए सामने का दृश्य सही है: 8 cm। ऊपर का दृश्य = 8 × cos 30° = 8 × 0.866 = 6.93 cm।
2. एक वर्ग प्रिज़्म की अक्ष खड़ी है। उसका ऊपर और सामने का दृश्य कैसा होगा?
ऊपर का दृश्य वर्ग है, यानी आधार का सही आकार। सामने का दृश्य आयत है, जिसकी चौड़ाई वर्ग की भुजा और ऊँचाई अक्ष की लंबाई के बराबर है।
3. एक रेखा के ऊपर के दृश्य की लंबाई 6 cm है। उसके सिरे HP से 2 cm और 10 cm ऊँचाई पर हैं। सही लंबाई निकालिए।
ऊँचाई का अंतर h = 10 − 2 = 8 cm। L = √(6² + 8²) = √100 = 10 cm।
4. एक शंकु की अक्ष खड़ी है, आधार का व्यास 4 cm और ऊँचाई 5 cm है। उसके दोनों दृश्य बताइए।
ऊपर का दृश्य: 4 cm व्यास का वृत्त, बीच में बिंदु (शीर्ष)। सामने का दृश्य: समद्विबाहु त्रिभुज, आधार 4 cm और ऊँचाई 5 cm।
5. 10 cm लंबी अक्ष VP के समांतर है और ऊपर का दृश्य 6 cm है। HP से बना कोण निकालिए।
ऊपर का दृश्य = L cos θ, इसलिए cos θ = 6 / 10 = 0.6। θ = cos⁻¹ 0.6 ≈ 53.1°।
6. वर्ग पिरामिड (आधार 4 cm, आधार HP पर) को ऐसे झुकाया कि आधार का एक किनारा HP पर टिका है और आधार HP से 30° पर है। बनाने के चरण क्रम से बताइए।
1) आधार को HP पर सपाट रखकर ऊपर और सामने के दृश्य बनाइए। 2) सामने के दृश्य को टिके किनारे के चारों ओर 30° झुकाकर दोबारा बनाइए, आकार वही। 3) इस सामने के दृश्य से ऊपर की ओर और पहले ऊपर के दृश्य से आड़ी रेखाएँ खींचकर नया ऊपर का दृश्य पाइए। 4) कोने जोड़िए; छिपे किनारे टूटी रेखा से बनाइए।
आम गलतियाँ
- ऊपर का दृश्य सामने के दृश्य के ऊपर बनाना। फ़र्श मोड़ने के बाद ऊपर का दृश्य नीचे आता है।
- सोचना कि झुकाने से ठोस का आकार बदल जाता है। केवल दृश्य बदलते हैं, ठोस वही रहता है।
- तिरछी रेखा वाले दृश्य से लंबाई पढ़ लेना। वह असली लंबाई से छोटी होती है।
- सारे किनारे पूरी रेखा से बना देना। ठोस के पीछे छिपे किनारे टूटी रेखा से बनते हैं।