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बहुभुज और उसके कोणों का योग

बहुभुज सीधी भुजाओं से बनी बंद आकृति है। विकर्ण वह रेखा है जो दो ऐसे कोनों को जोड़ती है जो पास-पास नहीं हैं। n भुजाओं वाले बहुभुज में एक कोने से बने विकर्ण उसे (n − 2) त्रिभुजों में बाँट देते हैं। हर त्रिभुज के कोणों का योग 180° होता है, इसलिए उत्तल बहुभुज के कोणों का योग (n − 2) × 180° होता है। सम बहुभुज का हर कोण (n − 2) × 180° ÷ n होता है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. यह पंचभुज है। इसमें 5 सीधी भुजाएँ और 5 कोने हैं, और आकृति बंद है।
  2. विकर्ण वह रेखा है जो दो ऐसे कोनों को जोड़ती है जो पास-पास नहीं हैं। एक कोने से हम 2 विकर्ण खींचते हैं।
  3. 2 विकर्णों ने पंचभुज को 3 त्रिभुजों में काट दिया। हमेशा (भुजाएँ − 2) त्रिभुज बनते हैं।
  4. हर त्रिभुज के कोणों का योग 180° है। इसलिए पंचभुज में 3 × 180° = 540°।
  5. धँसे हुए बहुभुज पर भी यही नियम चलता है। इस षट्भुज में 4 त्रिभुज बने: 4 × 180° = 720°।
  6. अब आपकी बारी। स्लाइडर से भुजाएँ बदलिए और देखिए त्रिभुज और योग कैसे बदलते हैं।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

भुजा और विकर्ण में क्या अंतर है?

भुजा सीमा का हिस्सा है और पास-पास वाले कोनों को जोड़ती है। विकर्ण अंदर से गुज़रता है और उन कोनों को जोड़ता है जो पास-पास नहीं हैं।

पंचभुज में 5 नहीं, सिर्फ़ 3 त्रिभुज क्यों बने?

पाँच कोनों में से दो कोने शुरुआती कोने के पड़ोसी हैं, उन तक विकर्ण नहीं जाता। 2 विकर्ण 3 त्रिभुज बनाते हैं।

हर त्रिभुज से 180° क्यों जुड़ता है?

हर त्रिभुज के कोणों का योग 180° होता है। त्रिभुज बहुभुज के अंदर पास-पास बैठते हैं तो उनके कोने बहुभुज के कोनों को ठीक-ठीक भर देते हैं।

क्या धँसे हुए बहुभुज पर भी यही नियम चलता है?

हाँ। धँसे कोने से त्रिभुज बनाइए। षट्भुज में फिर भी 4 त्रिभुज और 720° मिलते हैं।

एक भुजा और जोड़ने पर क्या होता है?

एक त्रिभुज और बन जाता है, इसलिए कोण-योग 180° बढ़ जाता है।

बहुभुज क्या है? भुजा, कोने और विकर्ण

बहुभुज सीधी भुजाओं वाली बंद आकृति है। त्रिभुज में 3 भुजाएँ, चतुर्भुज में 4, पंचभुज में 5, षट्भुज में 6, सप्तभुज में 7 और अष्टभुज में 8 भुजाएँ होती हैं। भुजाओं की संख्या हमेशा कोनों (शीर्षों) की संख्या के बराबर होती है।

विकर्ण वह रेखा है जो दो ऐसे कोनों को जोड़ती है जो एक-दूसरे के पास नहीं हैं। भुजा विकर्ण नहीं होती। n भुजाओं वाले बहुभुज के एक कोने से (n − 3) विकर्ण खींचे जा सकते हैं, क्योंकि कोने को खुद से या अपने दो पड़ोसी कोनों से नहीं जोड़ सकते।

पूरे बहुभुज के कुल विकर्ण n × (n − 3) ÷ 2 होते हैं। 2 से भाग इसलिए देते हैं कि हर विकर्ण दोनों सिरों से गिना जाता है।

उत्तल और अवतल बहुभुज

उत्तल बहुभुज में अंदर का हर कोण 180° से छोटा होता है। अंदर के कोई भी दो बिंदु चुनिए, उन्हें जोड़ने वाली सीधी रेखा अंदर ही रहती है। उसके चारों ओर रबर बैंड बाँधो तो वह हर भुजा को छूता है।

अवतल (non-convex) बहुभुज में कम से कम एक अंदर का कोण 180° से बड़ा होता है। वह ऐसा दिखता है जैसे उसमें गड्ढा या धँसाव हो, जैसे तीर की नोक। ऐसे बहुभुज के कुछ विकर्ण आकृति के बाहर निकल जाते हैं।

नीचे वाला कोण-योग नियम उत्तल बहुभुज का है। धँसे हुए बहुभुज को धँसे कोने से सावधानी से त्रिभुजों में बाँटें तो उस पर भी यही चलता है।

उत्तल बहुभुज के कोणों का योग

एक कोना चुनिए और उससे सारे विकर्ण खींचिए। बहुभुज (n − 2) त्रिभुजों में बँट जाता है। इन त्रिभुजों के कोने मिलकर बहुभुज के कोनों को ठीक-ठीक भर देते हैं। हर त्रिभुज के कोणों का योग 180° है। इसलिए:

कोणों का योग = (n − 2) × 180°

जाँच: त्रिभुज (n = 3) में 180°। चतुर्भुज (n = 4) में 360°। पंचभुज में 540°। षट्भुज में 720°। हर नई भुजा एक और त्रिभुज जोड़ती है, यानी 180° और।

सम बहुभुज का एक कोण

सम बहुभुज में सारी भुजाएँ और सारे कोण बराबर होते हैं। इसलिए एक कोण = (n − 2) × 180° ÷ n। सम षट्भुज में 720° ÷ 6 = 120°। सम अष्टभुज में 1080° ÷ 8 = 135°।

हर कोने का बाहरी कोण = 180° − अंदर का कोण। किसी भी उत्तल बहुभुज के बाहरी कोणों का योग हमेशा 360° होता है, इसलिए सम बहुभुज का हर बाहरी कोण 360° ÷ n होता है।

करके देखिए

काग़ज़ पर पंचभुज बनाइए। एक कोना चुनकर उसके 2 विकर्ण खींचिए और 3 त्रिभुजों में रंग भरिए। अब हर त्रिभुज के तीनों कोने काटकर एक-दूसरे के पास रखिए। क्या हर बार सीधी रेखा (180°) बनती है? यही षट्भुज के साथ कीजिए और 4 त्रिभुज गिनिए।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. षट्भुज के एक कोने से कितने विकर्ण खींचे जा सकते हैं और वे कितने त्रिभुज बनाते हैं?

n = 6। एक कोने से विकर्ण = 6 − 3 = 3। त्रिभुज = 6 − 2 = 4।

2. सप्तभुज (7 भुजाएँ) के अंतः कोणों का योग ज्ञात कीजिए।

योग = (7 − 2) × 180° = 5 × 180° = 900°।

3. सम अष्टभुज का एक कोण ज्ञात कीजिए।

योग = (8 − 2) × 180° = 1080°। एक कोण = 1080° ÷ 8 = 135°।

4. एक पंचभुज के चार कोण 100°, 110°, 120° और 90° हैं। पाँचवाँ कोण ज्ञात कीजिए।

पंचभुज का योग 540° है। चार कोणों का योग 100 + 110 + 120 + 90 = 420°। पाँचवाँ कोण = 540° − 420° = 120°।

5. किसी बहुभुज के कोणों का योग 1440° है। उसमें कितनी भुजाएँ हैं?

(n − 2) × 180° = 1440°, तो n − 2 = 8 और n = 10। यह दशभुज है।

6. एक सम बहुभुज का हर कोण 150° है। n ज्ञात कीजिए और पूरे बहुभुज के कुल विकर्ण भी निकालिए।

बाहरी कोण = 180° − 150° = 30°। n = 360° ÷ 30° = 12। कुल विकर्ण = 12 × 9 ÷ 2 = 54।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. 9 भुजाओं वाले बहुभुज के कोणों का योग है:
2. दशभुज के एक कोने से बने विकर्ण कितने त्रिभुज बनाते हैं?
3. उत्तल बहुभुज में अंदर का हर कोण होता है:
4. सम पंचभुज का एक कोण है:
5. किसी भी उत्तल बहुभुज के बाहरी कोणों का योग है:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बहुभुज के अंतः कोणों के योग का सूत्र क्या है?

(n − 2) × 180°, जहाँ n भुजाओं की संख्या है।

n में से 2 क्यों घटाते हैं?

एक कोने से बने विकर्ण बहुभुज को n − 2 त्रिभुजों में बाँटते हैं, और हर त्रिभुज के कोणों का योग 180° होता है।

क्या यह सूत्र अवतल बहुभुज पर भी चलता है?

हाँ। साधारण अवतल बहुभुज के अंतः कोणों का योग भी (n − 2) × 180° होता है। बस एक कोण 180° से बड़ा होता है।

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