परिमेय और अपरिमेय संख्याएँ
परिमेय संख्या को p/q लिख सकते हैं, जहाँ p, q पूर्णांक हैं और q ≠ 0, जैसे 3/4, −5, 0.25. इसका दशमलव या तो खत्म होता है या दोहराता है (1/3 = 0.333…)।
अपरिमेय संख्या को p/q नहीं लिख सकते। इसका दशमलव बिना दोहराए चलता रहता है: √2, √3, √5, π. परिमेय और अपरिमेय मिलकर वास्तविक संख्याएँ बनाते हैं।
मुख्य तथ्य (जिसका हम उपयोग करेंगे)
मान लो p अभाज्य है। यदि p, a² को विभाजित करता है, तो p, a को भी विभाजित करता है। कारण: आधारभूत प्रमेय से a² के अभाज्य वही हैं जो a के, बस दो-दो बार। तो जो अभाज्य a² में है, वह a में पहले से था।
√2 अपरिमेय है: उपपत्ति
यह विरोधाभास द्वारा उपपत्ति है: उल्टा मानकर दिखाते हैं कि कुछ असंभव हो जाता है।
- मानो √2 परिमेय है: √2 = a/b, जहाँ a, b सह-अभाज्य पूर्णांक हैं, b ≠ 0.
- वर्ग करो: a² = 2b². अतः 2, a² को बाँटता है, इसलिए 2, a को बाँटता है।
- a = 2c लिखो। 4c² = 2b², यानी b² = 2c². अतः 2, b को भी बाँटता है।
- अब 2 दोनों a और b को बाँटता है, पर वे सह-अभाज्य थे। विरोधाभास।
- इसलिए हमारी मान्यता गलत थी: √2 अपरिमेय है।
√3 और √5 अपरिमेय हैं: उपपत्ति
वही चरण, 2 की जगह 3 (या 5)। मानो √3 = a/b (सह-अभाज्य)। तब a² = 3b², तो 3, a को बाँटता है। a = 3c रखो: 9c² = 3b², यानी b² = 3c², तो 3, b को भी बाँटता है। विरोधाभास। √5 के लिए हर जगह 5 रखो।
यह इसलिए चलता है क्योंकि 2, 3, 5 अभाज्य हैं। √4 = 2 पर यह उपपत्ति नहीं चलती, जो सही है।
3 + 2√5 जैसी संख्याएँ अपरिमेय हैं
मानो 3 + 2√5 = r, एक परिमेय संख्या। तब √5 = (r − 3)/2. दाईं ओर परिमेय है। तो √5 परिमेय होता, जो गलत है। अतः 3 + 2√5 अपरिमेय है।
नियम: परिमेय + अपरिमेय = अपरिमेय; शून्येतर परिमेय × अपरिमेय = अपरिमेय. पर अपरिमेय + अपरिमेय परिमेय हो सकता है: √2 + (−√2) = 0.
करके देखो: प्रयोग
1 cm × 1 cm का वर्ग बनाओ और उसका विकर्ण ध्यान से नापो (लगभग 1.41 cm)। अब 3D के खेल वाले चरण में ऐसे p और q ढूँढो कि p² = 2q². अपने सबसे पास वाले जवाब लिखो (जैसे 7/5, 17/12)। पास आते हैं, बराबर कभी नहीं। यही उपपत्ति आँखों से दिखती है।
बोर्ड परीक्षा के लिए
लगभग हर साल 3 अंक का प्रश्न: √2, √3 या √5 को अपरिमेय सिद्ध करो, या 5 − 2√3, 1/√2 जैसी संख्या। हर पंक्ति लिखो: सह-अभाज्य a, b की मान्यता, वर्ग करना, "अभाज्य a² को बाँटे तो a को बाँटे" वाला चरण, और साफ विरोधाभास वाला वाक्य।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- परिमेय: p/q, p, q पूर्णांक, q ≠ 0
- अभाज्य p | a² ⇒ p | a
- √2 = a/b ⇒ a² = 2b² ⇒ a = 2c ⇒ b² = 2c² ⇒ विरोधाभास
- परिमेय + अपरिमेय = अपरिमेय
- शून्येतर परिमेय × अपरिमेय = अपरिमेय
हल किए गए उदाहरण
1. 0.101001000100001… परिमेय है या अपरिमेय?
शून्यों की गिनती बढ़ती जाती है, कोई तय खंड दोहराता नहीं, और दशमलव खत्म भी नहीं होता। अतः अपरिमेय।
2. सिद्ध करो कि √5 अपरिमेय है।
मानो √5 = a/b, a, b सह-अभाज्य। a² = 5b² ⇒ 5 | a. a = 5c रखो: 25c² = 5b² ⇒ b² = 5c² ⇒ 5 | b. दोनों में 5 साझा, विरोधाभास। अतः √5 अपरिमेय है।
3. सिद्ध करो कि 3 + 2√5 अपरिमेय है।
मानो 3 + 2√5 = r (परिमेय)। तब √5 = (r − 3)/2 परिमेय हुआ। पर √5 अपरिमेय है। विरोधाभास, अतः 3 + 2√5 अपरिमेय है।
4. सिद्ध करो कि 1/√2 अपरिमेय है।
मानो 1/√2 = r (परिमेय, r ≠ 0)। तब √2 = 1/r परिमेय हुआ। विरोधाभास। अतः 1/√2 अपरिमेय है।
5. सिद्ध करो कि 7√3 अपरिमेय है।
मानो 7√3 = r. तब √3 = r/7 परिमेय हुआ, जो गलत है। अतः 7√3 अपरिमेय है।
6. सिद्ध करो कि √2 + √3 अपरिमेय है।
मानो √2 + √3 = r. तब √3 = r − √2. वर्ग करो: 3 = r² − 2r√2 + 2, तो √2 = (r² − 1)/(2r) परिमेय हुआ। विरोधाभास। अतः √2 + √3 अपरिमेय है।
आम गलतियाँ
- a और b को सह-अभाज्य कहना भूल जाना। इसके बिना विरोधाभास बनता ही नहीं।
- "2, a² को बाँटता है" से सीधे अंत पर कूदना, बिना लिखे कि "इसलिए 2, a को बाँटता है"।
- हर वर्गमूल को अपरिमेय मानना: √9 = 3 और √16 = 4 परिमेय हैं।
- मानना कि अपरिमेय + अपरिमेय हमेशा अपरिमेय: √2 + (−√2) = 0 परिमेय है।