खाड़ी में तनाव: क्षेत्रीय अस्थिरता
- तेल: खाड़ी में दुनिया के तेल का बड़ा हिस्सा है, इसलिए अमेरिका, यूरोप और एशिया उसे स्थिर देखना चाहते हैं।
- ईरानी क्रांति (1979): शाह को हटाकर इस्लामी गणराज्य बना, जिससे पड़ोसी और पश्चिमी देश चिंतित हुए।
- ईरान–इराक युद्ध (1980–88): सद्दाम हुसैन ने ईरान पर हमला किया; आठ साल की लड़ाई में लाखों लोग मारे गए। अमेरिका और खाड़ी देशों समेत कई देशों ने इराक की मदद की।
- इराक का क़र्ज़: इराक पर अरबों का क़र्ज़ था, ज़्यादातर कुवैत और सऊदी अरब का। उसने कुवैत पर ज़्यादा तेल निकालकर क़ीमत गिराने और साझा रुमैला तेल क्षेत्र से तेल लेने का आरोप लगाया, और दावा किया कि कुवैत ऐतिहासिक रूप से इराक का हिस्सा था।
खाड़ी युद्ध, 1990–91
- 2 अगस्त 1990: इराकी सेना ने लगभग दो दिन में कुवैत पर क़ब्ज़ा कर लिया।
- दुनिया की प्रतिक्रिया: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने हमले की निंदा की, इराक पर प्रतिबंध लगाए और बाद में 15 जनवरी 1991 तक हटने की समय-सीमा दी।
- गठबंधन: राष्ट्रपति जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश के अमेरिका के नेतृत्व में लगभग 35 देश, जिनमें ब्रिटेन, फ़्रांस, सऊदी अरब और मिस्र थे, ने सऊदी अरब में सेना भेजी (ऑपरेशन डेज़र्ट शील्ड)।
- ऑपरेशन डेज़र्ट स्टॉर्म: 17 जनवरी 1991 से हवाई हमले; 24 फ़रवरी से ज़मीनी हमले ने लगभग 100 घंटों में कुवैत मुक्त कराया। पीछे हटती इराकी सेना ने कुवैत के तेल कुओं में आग लगा दी।
- परिणाम: कुवैत मुक्त हुआ पर सद्दाम सत्ता में रहा। शिया और कुर्द विद्रोह कुचल दिए गए। संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध और हथियार-निरीक्षण जारी रहे; उत्तर और दक्षिण में नो-फ़्लाई ज़ोन बने। अमेरिकी सैनिक सऊदी अरब में रुके रहे।
अल-क़ायदा के विरुद्ध युद्ध
अल-क़ायदा
अल-क़ायदा ("आधार") लगभग 1988 में ओसामा बिन लादेन और उन लड़ाकों ने बनाया जिन्होंने अफ़ग़ानिस्तान पर सोवियत क़ब्ज़े का विरोध किया था। वह सऊदी अरब में अमेरिकी सैनिकों, इज़राइल को अमेरिकी समर्थन और मुस्लिम देशों में पश्चिमी प्रभाव का विरोधी था और आतंकी हमले करता था: केन्या और तंज़ानिया में अमेरिकी दूतावास (1998), युद्धपोत USS कोल (2000), और 11 सितंबर 2001 को अमेरिका में चार अपहृत विमान, जिनमें लगभग 3,000 लोग मारे गए।
बुश का आतंक के विरुद्ध युद्ध
राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश ने आतंकी गुटों और उनकी मदद करने वाले देशों के विरुद्ध वैश्विक "आतंक के विरुद्ध युद्ध" घोषित किया। इसमें सैन्य कार्रवाई, नए सुरक्षा क़ानून, पैसे पर रोक और संदिग्धों को बंदी बनाना (जैसे ग्वांतानामो बे) शामिल था, जिसके कुछ हिस्सों की मानवाधिकार तोड़ने के लिए व्यापक आलोचना हुई।
अफ़ग़ानिस्तान, 2001–2009
- पृष्ठभूमि: सोवियत वापसी (1989) और गृहयुद्ध के बाद तालिबान ने 1996 में काबुल पर क़ब्ज़ा किया और बहुत सख़्त क़ानूनों के साथ देश के ज़्यादातर हिस्से पर शासन किया; उन्होंने अल-क़ायदा को प्रशिक्षण शिविर चलाने दिए।
- अक्टूबर 2001: तालिबान ने बिन लादेन को सौंपने से इनकार किया। अमेरिका, ब्रिटेन और साथियों ने हवाई हमले शुरू किए (ऑपरेशन एंड्यूरिंग फ़्रीडम) और अफ़ग़ान नॉर्दर्न अलायंस के साथ दिसंबर तक तालिबान को हटा दिया।
- नई सरकार: हामिद करज़ई ने अंतरिम सरकार चलाई और 2004 में राष्ट्रपति चुने गए। नाटो की ISAF सेना ने सुरक्षा और पुनर्निर्माण में मदद की।
- समस्याएँ: बिन लादेन बच निकला (वह 2011 में, इस काल के बाद, मिला और मारा गया)। तालिबान फिर संगठित हुए और लगभग 2005 से सड़क किनारे बम और हमलों वाला विद्रोह बढ़ा; अफ़ीम का व्यापार बढ़ा; नागरिकों की मौतों से ग़ुस्सा बढ़ा। 2009 में राष्ट्रपति ओबामा ने और सैनिक भेजे।
इराक युद्ध, 2003
सद्दाम हुसैन का शासन
सद्दाम ने 1979 से बाथ पार्टी, गुप्त पुलिस और डर के ज़रिए तानाशाह के रूप में इराक चलाया। विरोधियों को जेल या मौत मिलती थी। कुर्दों पर अनफ़ाल अभियान चला, जिसमें हलब्जा पर रासायनिक हमला (1988) भी था; 1991 के शिया विद्रोह कुचल दिए गए।
हमले के बताए गए कारण
- दावा कि इराक के पास सामूहिक विनाश के हथियार (WMD) हैं और वह उन्हें संयुक्त राष्ट्र निरीक्षकों से छिपा रहा है।
- आतंकवाद से संबंध के दावे (बाद में कमज़ोर साबित)।
- एक क्रूर तानाशाह को हटाना और लोकतंत्र लाना; आलोचकों ने तेल और अमेरिकी रणनीति की ओर भी इशारा किया।
हमला
संयुक्त राष्ट्र के नए प्रस्ताव के बिना, और दुनिया भर में बड़े विरोध के बावजूद, अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन (टोनी ब्लेयर के ब्रिटेन समेत) ने 20 मार्च 2003 को हमला किया। 9 अप्रैल को बग़दाद गिरा। दिसंबर 2003 में सद्दाम पकड़ा गया और 2006 में उसे फाँसी हुई। WMD के भंडार नहीं मिले।
युद्ध का इराकी लोगों पर असर
- मौतें और घायल: 2009 तक नागरिकों की मौत के अनुमान लाखों में हैं।
- विस्थापन: लगभग 40 लाख इराकी घर छोड़कर देश के भीतर या पड़ोसी देशों में गए।
- व्यवस्था का टूटना: हमले के बाद लूटपाट; सेना और बाथ अधिकारियों को हटा दिया गया, जिससे बहुत लोग नाराज़ और बेरोज़गार हुए।
- विद्रोह और सांप्रदायिक हिंसा: सुन्नी और शिया गुटों के बीच हिंसा 2006–07 में चरम पर; इराक में अल-क़ायदा बढ़ा।
- सेवाएँ: बिजली, पानी और अस्पताल क्षतिग्रस्त; रोज़ की ज़िंदगी कठिन।
- कुछ बदलाव: 2005 में चुनाव और नया संविधान; कुर्दों को ज़्यादा स्वशासन। 2007 की अमेरिकी सैनिक "सर्ज" से हिंसा घटी; 2008–09 में अमेरिकी सेना की वापसी की योजना तय हुई।
करके देखें: अपनी समय-रेखा बनाइए
काग़ज़ की पट्टी पर 1979 से 2009 तक एक रेखा खींचिए। 3D स्लाइडर की हर घटना निशान लगाइए। कारणों को एक रंग और परिणामों को दूसरे रंग में रंगिए, और हर कारण से उसके परिणाम तक तीर बनाइए। फिर बताइए: आपके हिसाब से सबसे बड़ा मोड़ कौन-सी घटना थी, और क्यों?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- 1979: ईरानी क्रांति; इराक में सद्दाम सत्ता में
- 1980–88: ईरान–इराक युद्ध
- 2 अगस्त 1990: इराक का कुवैत पर हमला; जनवरी–फ़रवरी 1991: डेज़र्ट स्टॉर्म
- 11 सितंबर 2001: 9/11 हमले; अक्टूबर 2001: अफ़ग़ानिस्तान युद्ध
- 20 मार्च 2003: इराक पर हमला; दिसंबर 2003: सद्दाम पकड़ा गया; 2006: फाँसी
- 2007: अमेरिकी सर्ज; 2009: इराक से वापसी की योजना, अफ़ग़ानिस्तान में और सैनिक
हल किए गए उदाहरण
1. 1990 में इराक के कुवैत पर हमले के दो कारण बताइए।
1) क़र्ज़: ईरान–इराक युद्ध के बाद इराक पर कुवैत का अरबों का क़र्ज़ था और वह उसे माफ़ कराना चाहता था। 2) तेल: इराक ने कहा कि कुवैत बहुत ज़्यादा तेल निकालकर क़ीमतें गिरा रहा है और साझा रुमैला क्षेत्र से तेल ले रहा है। इराक ने यह भी दावा किया कि कुवैत ऐतिहासिक रूप से उसका हिस्सा था।
2. खाड़ी युद्ध के अंत (1991) और इराक पर हमले (2003) के बीच कितने साल बीते? इस बीच इराक का क्या हुआ?
2003 − 1991 = 12 साल। इराक पर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध और हथियार-निरीक्षण रहे, उत्तर और दक्षिण में नो-फ़्लाई ज़ोन रहे, और सद्दाम सत्ता में बना रहा।
3. समझाइए कि 2001 में अमेरिका ने पहले अफ़ग़ानिस्तान पर हमला क्यों किया, इराक पर नहीं।
9/11 हमले अल-क़ायदा ने किए थे, जिसके नेता और शिविर तालिबान की पनाह में अफ़ग़ानिस्तान में थे। तालिबान ने बिन लादेन को सौंपने से मना किया, इसलिए अफ़ग़ानिस्तान सीधा निशाना था। इराक पर बाद में (2003) अलग बताए गए कारणों से हमला हुआ: WMD के दावे और सद्दाम के शासन की प्रकृति।
आम गलतियाँ
- दोनों इराक युद्धों को मिला देना। 1991 के खाड़ी युद्ध ने कुवैत मुक्त कराया और सद्दाम को सत्ता में छोड़ा; 2003 के इराक युद्ध ने सद्दाम को हटाया।
- यह कहना कि 9/11 इराक ने किया। यह अफ़ग़ानिस्तान स्थित अल-क़ायदा ने किया; सद्दाम से मज़बूत संबंध नहीं मिला।
- तालिबान और अल-क़ायदा को एक समझना। तालिबान अफ़ग़ानिस्तान के शासक थे; अल-क़ायदा आतंकी नेटवर्क था जिसे उन्होंने पनाह दी।
- यह लिखना कि 2003 में इराक में WMD मिले। बड़े भंडार नहीं मिले।