मध्यकाल में सत्ता को चुनौती
राजा पर अंकुश: मैग्ना कार्टा, 1215
राजा जॉन ने फ़्रांस में ज़मीनें खोईं और भारी कर लगाए। विद्रोही सामंतों (barons) ने उसे मैग्ना कार्टा मानने पर मजबूर किया: राजा क़ानून माने, बड़े लोगों की सलाह के बिना भारी कर न ले, और किसी स्वतंत्र व्यक्ति को क़ानूनी फ़ैसले के बिना जेल न हो। जॉन ने इसे जल्दी तोड़ दिया, पर बाद के राजाओं ने इसे दोबारा जारी किया और यह शासकों पर सीमा का प्रतीक बन गया।
संसद की शुरुआत
राजा कर तय करने के लिए बड़ी परिषदें बुलाते थे। 1265 में साइमन डी मॉन्टफ़ोर्ट ने नाइटों और पहली बार कस्बों के प्रतिनिधियों को बुलाया। 1300 के दशक तक कॉमन्स (नाइट और कस्बे के लोग) लॉर्ड्स से अलग बैठने लगे, और कर के लिए राजा को संसद की मंज़ूरी चाहिए होती थी।
मध्यकालीन विद्रोह: किसान विद्रोह, 1381
ब्लैक डेथ (प्लेग) के बाद मज़दूर कम थे और ज़्यादा मज़दूरी चाहते थे, पर क़ानून मज़दूरी दबाए रखते थे। तीसरे मुंड कर (poll tax — हर व्यक्ति पर बराबर कर) ने आग लगा दी। विद्रोही लंदन पहुँचे; युवा राजा रिचर्ड द्वितीय ने उनसे मिलकर दासता (serfdom) से आज़ादी का वादा किया, फिर वादा तोड़ा और नेताओं को फाँसी दी। फिर भी मुंड कर बंद हुआ और अगली सदी में दासता धीरे-धीरे ख़त्म हुई।
शाही सत्ता को चुनौती, 1500–1700
जन विद्रोह
पिलग्रिमेज ऑफ़ ग्रेस (1536) हेनरी अष्टम के समय मठों के बंद होने और धार्मिक बदलावों के ख़िलाफ़ उत्तर का बड़ा विद्रोह था। हेनरी ने बातचीत का वादा किया, फिर नेताओं को फाँसी दी।
ईश्वरीय अधिकार बनाम संसद
चार्ल्स प्रथम राजाओं के ईश्वरीय अधिकार (Divine Right) में विश्वास करता था — कि शक्ति ईश्वर ने दी है और वह सिर्फ़ ईश्वर को जवाबदेह है। उसने 11 साल बिना संसद के राज किया और 'शिप मनी' जैसे कर लगाए। संसद से युद्ध हुआ (1642–1651)। चार्ल्स पर मुक़दमा चला और 1649 में उसे फाँसी दी गई; कुछ समय कोई राजा नहीं रहा।
संसद राजा से ऊपर
गौरवपूर्ण क्रांति (1688) में जेम्स द्वितीय की जगह विलियम और मैरी आए, जिन्होंने अधिकार विधेयक (1689) माना: संसद की सहमति के बिना कर या सेना नहीं, नियमित संसद और स्वतंत्र चुनाव।
प्रतिनिधित्व का अधिकार
अमेरिकी उपनिवेशों ने कहा 'प्रतिनिधित्व नहीं तो कर नहीं' और आज़ादी जीती (1776–1783)। इससे ब्रिटेन में भी बहस बढ़ी कि फ़ैसलों में किसकी आवाज़ हो।
सुधार और सुधारक: वोट और मज़दूर
विरोध और बदलाव
1819 में मैनचेस्टर के सेंट पीटर्स फ़ील्ड में शांतिपूर्ण सुधार सभा पर घुड़सवार सैनिकों ने हमला किया — पीटरलू नरसंहार। सुधार का दबाव बढ़ा।
मताधिकार का विस्तार
- 1832 महान सुधार अधिनियम: नए औद्योगिक शहरों को सांसद मिले; लगभग 5 में से 1 वयस्क पुरुष वोट दे सका।
- चार्टिस्ट (1838–1848): सभी पुरुषों को वोट, गुप्त मतदान और सांसदों को वेतन के लिए विशाल याचिकाएँ। तब ठुकराई गईं, पर ज़्यादातर माँगें बाद में मानी गईं।
- 1867: बहुत-से कुशल शहरी मज़दूर; 1872 गुप्त मतदान; 1884: बहुत-से ग्रामीण मज़दूर।
- 1918: 21 से ऊपर सभी पुरुष और 30 से ऊपर महिलाएँ (संपत्ति की शर्त के साथ)। 1928: 21 पर बराबर वोट। 1969: वोट की उम्र 18।
मज़दूर आंदोलन
टॉलपडल शहीद (1834) — यूनियन बनाने वाले खेत मज़दूर — ऑस्ट्रेलिया भेज दिए गए; जनता के विरोध से वे रिहा हुए। बाद में अकुशल मज़दूरों की यूनियनें (1889 लंदन डॉक हड़ताल), लेबर पार्टी (1900), आम हड़ताल (1926) और खनिक हड़ताल (1984–85) आईं।
20वीं सदी में समानता और अधिकार
महिलाओं के अधिकार
सफ़्रेजिस्ट (मिलिसेंट फ़ॉसेट के नेतृत्व में) शांतिपूर्ण अभियान चलाती थीं; सफ़्रेजेट (एमेलिन पैंकहर्स्ट के नेतृत्व में, 1903 से) सीधी कार्रवाई करती थीं। 1914–18 के युद्ध में महिलाओं के काम ने वोट जीतने में मदद की। बाद में: समान वेतन अधिनियम (1970) और लिंग भेदभाव अधिनियम (1975)।
मज़दूरों के अधिकार
यूनियनों ने कम घंटे, सुरक्षित कार्यस्थल और बाद में न्यूनतम मज़दूरी (1998) जीती।
अल्पसंख्यकों के अधिकार
कैरिबियन और दक्षिण एशिया से आए लोगों को नौकरी और मकान में 'रंगभेद' (colour bar) झेलना पड़ा। ब्रिस्टल बस बहिष्कार (1963) ने बस कंपनी को अश्वेत और एशियाई कर्मचारी रखने पर मजबूर किया। नस्ल संबंध अधिनियमों (1965, 1968) ने सार्वजनिक जगहों, मकान और नौकरी में भेदभाव को ग़ैरक़ानूनी बनाया। विकलांग और LGBT लोगों के अधिकारों के लिए भी अभियान सफल हुए।
बदलाव क्यों हुआ? मुख्य कारक
पूरी कहानी में ये कारक ढूँढो:
- पैसा और कर: शासकों को कर चाहिए था, तो कर देने वाले आवाज़ चाहते थे।
- विचार: धर्म, ईश्वरीय अधिकार, 'प्रतिनिधित्व नहीं तो कर नहीं', समानता।
- व्यक्ति: डी मॉन्टफ़ोर्ट, वॉट टायलर, पैंकहर्स्ट, पॉल स्टीफ़ेंसन (ब्रिस्टल)।
- संगठन और विरोध: याचिकाएँ, जुलूस, यूनियनें, बहिष्कार।
- युद्ध और आर्थिक बदलाव: युद्ध का काम, औद्योगिक शहर, ब्लैक डेथ।
- सरकार की प्रतिक्रिया: पहले दमन, अक्सर बाद में सुधार।
करके देखो: समयरेखा बनाओ
80 cm लंबी काग़ज़ की पट्टी लो; 10 cm = 100 साल, 1200 से 2000 तक। 3D स्लाइडर की 16 घटनाएँ लगाओ। हर एक को प्रकार से रंगो: राजा पर अंकुश, विद्रोह, वोट, मज़दूर, समानता। किस सदी में सबसे ज़्यादा घटनाएँ हैं? कौन-सी शांतिपूर्ण थीं, कौन-सी हिंसक?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मैग्ना कार्टा (1215): राजा की शक्ति सीमित करने वाला अधिकार-पत्र
- संसद: लॉर्ड्स और कॉमन्स, जो क़ानून बनाते और कर मंज़ूर करते हैं
- ईश्वरीय अधिकार: यह विश्वास कि राजा की शक्ति ईश्वर से आती है
- मताधिकार (franchise): वोट देने का अधिकार
- सुधार अधिनियम: 1832, 1867, 1884, 1918, 1928, 1969
- मज़दूर संघ (यूनियन): बेहतर वेतन और हालात के लिए मिलकर काम करने वाले मज़दूरों का समूह
- सफ़्रेजिस्ट (शांतिपूर्ण) बनाम सफ़्रेजेट (सीधी कार्रवाई)
हल किए गए उदाहरण
1. समझाओ कि 1381 में किसान विद्रोह क्यों हुआ।
1) ब्लैक डेथ के बाद मज़दूर कम थे और ज़्यादा मज़दूरी चाहते थे, पर क़ानून मज़दूरी कम रखता था। 2) बहुत-से किसान अब भी दास (serf) थे और आज़ादी चाहते थे। 3) तीसरा मुंड कर अमीर-ग़रीब से बराबर लिया गया — यही आख़िरी चिंगारी थी।
2. अधिकार विधेयक (1689) ने राजा की शक्ति कैसे बदली?
अब राजा संसद की सहमति के बिना कर नहीं लगा सकता था और शांति के समय सेना नहीं रख सकता था; संसद को नियमित मिलना और चुनाव स्वतंत्र होने थे। पैसे और क़ानून पर असली ताक़त संसद के पास आ गई।
3. चार्टिस्टों और सफ़्रेजेटों के तरीकों की तुलना करो।
दोनों ने बड़ी सभाएँ और याचिकाएँ कीं। चार्टिस्ट मुख्यतः शांतिपूर्ण याचिकाओं पर टिके रहे (एक छोटा हिंसक गुट भी था)। सफ़्रेजेटों ने सीधी कार्रवाई जोड़ी: खिड़कियाँ तोड़ना, रेलिंग से ख़ुद को बाँधना, भूख हड़ताल। दोनों को सरकारी दमन झेलना पड़ा, और दोनों की ज़्यादातर माँगें बाद में मानी गईं।
4. ब्रिस्टल बस बहिष्कार क्यों महत्वपूर्ण था?
यह शांतिपूर्ण अभियान 1963 में जल्दी सफल हुआ: बस कंपनी ने रंगभेद ख़त्म किया। इससे पूरे देश का ध्यान गया और 1965 के पहले नस्ल संबंध अधिनियम का रास्ता खुला।
आम गलतियाँ
- यह मानना कि 1215 में मैग्ना कार्टा ने सबको अधिकार दिए। यह मुख्यतः सामंतों और स्वतंत्र लोगों के लिए था; दास बाहर थे।
- कहना कि 1832 के सुधार अधिनियम से सभी पुरुषों को वोट मिला। सिर्फ़ लगभग 5 में 1 पुरुष को मिला।
- सफ़्रेजिस्ट (शांतिपूर्ण) और सफ़्रेजेट (सीधी कार्रवाई) को मिला देना।
- सोचना कि हर विरोध तुरंत सफल हुआ। कई पहले असफल रहे (किसान विद्रोह, चार्टिस्ट), पर उन्होंने बाद के बदलाव की ज़मीन बनाई।